
यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1936 पदों पर बंपर भर्ती शुरू
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर के 1936 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार विज्ञापन संख्या 04/2026 के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी शैक्षणिक और अकादमिक करियर को नई उड़ान देने के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर साबित होने जा रहा है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर के 1936 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार विज्ञापन संख्या 04/2026 के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी शैक्षणिक और अकादमिक करियर को नई उड़ान देने के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर साबित होने जा रहा है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की तरफ से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन विंडो 08 सितंबर 2026 को खोल दी गई है। उम्मीदवार बिना किसी देरी के 07 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना रजिस्ट्रेशन और फॉर्म सबमिट कर सकते हैं। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है, क्योंकि सर्वर की अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए समय पर आवेदन करना हमेशा बुद्धिमानी होती है।
रिक्तियों का दायरा और विज्ञापन विवरण
इस बड़े पैमाने के भर्ती अभियान के जरिए कुल 1936 पदों को भरा जाना है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इसे विज्ञापन संख्या 04/2026 के रूप में अधिसूचित किया है। राज्य के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर के इन प्रतिष्ठित पदों पर चयन के लिए आयोग द्वारा एक पारदर्शी और निष्पक्ष मूल्यांकन प्रक्रिया संचालित की जाएगी, जिससे केवल सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को ही आगे बढ़ने का मौका मिले।
योग्यता, सिलेबस और अन्य निर्देश
ऑनलाइन आवेदन करने से पहले सभी उम्मीदवारों के लिए यह आवश्यक है कि वे आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूचना पुस्तिका का गहराई से अध्ययन करें। इस ब्रोशर में परीक्षा के संपूर्ण सिलेबस, पात्रता के सख्त मानदंडों, आयु सीमा की गणना, आवेदन शुल्क, तथा प्राथमिक एवं जूनियर स्तर से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों को स्पष्ट रूप से समझाया गया है। हर एक बारीकी को समझना चयन की राह को आसान बनाता है।
ऑनलाइन आवेदन के लिए जरूरी कदम
उम्मीदवारों को अंतिम तिथि से पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपनी शैक्षणिक योग्यताओं से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेजों को तैयार रखना होगा। पोर्टल पर स्कैन किए गए फोटोग्राफ, हस्ताक्षर और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के पश्चात ही पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी। पूर्ण रूप से भरे गए आवेदन पत्र का एक प्रिंटआउट अपने पास सुरक्षित अवश्य रख लें।

समय रैना को रोस्ट कर छाईं एक्ट्रेस सुरभि वंजारा
कॉमेडियन समय रैना के लोकप्रिय शो 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट 2' में अभिनेत्री सुरभि वंजारा ने बतौर प्रतिभागी हिस्सा लिया。 उन्होंने शो के होस्ट समय रैना को खुलकर रोस्ट किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है。
कॉमेडियन समय रैना के लोकप्रिय शो 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट 2' में अभिनेत्री सुरभि वंजारा ने बतौर प्रतिभागी हिस्सा लिया。 उन्होंने शो के होस्ट समय रैना को खुलकर रोस्ट किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है。
'इंडियाज़ गॉट लेटेंट 2' में धमाकेदार एंट्री
कॉमेडी और अनूठे कॉन्सेप्ट के लिए पहचाने जाने वाले समय रैना के बहुचर्चित शो 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट 2' ने एक बार फिर इंटरनेट पर हलचल मचा दी है。 इस शो के मंच पर हाल ही में कुछ ऐसा हुआ जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया。 जानी-मानी अभिनेत्री सुरभि वंजारा इस बार शो में एक प्रतियोगी के रूप में शामिल होने पहुंची थीं。 मंच पर कदम रखते ही उन्होंने शो के होस्ट और लोकप्रिय कॉमेडियन समय रैना को जिस अंदाज में रोस्ट किया, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो गया。 दर्शकों के बीच उनके इस साहसिक और मनोरंजक अंदाज की खूब चर्चा हो रही है。
बॉलीवुड से लेकर छोटे परदे तक का सफर
सुरभि वंजारा किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं。 उन्होंने अपने लंबे अभिनय करियर में बड़े परदे से लेकर छोटे परदे तक अपनी एक खास पहचान बनाई है。 बॉलीवुड की बात करें तो सुरभि ने चर्चित थ्रिलर फिल्म 'मर्डर' में काम किया था。 फिल्मों के अलावा उन्होंने भारतीय टेलीविज़न के इतिहास के कुछ सबसे बड़े और लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा है。 उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें हमेशा एक अलग श्रेणी का कलाकार बनाया है。
सस्पेंस और थ्रिल से भरपूर धारावाहिकों का हिस्सा
सुरभि वंजारा के टीवी करियर पर नजर डालें तो उन्होंने देश के सबसे रोमांचक शोज में काम किया है。 वह लोकप्रिय क्राइम इन्वेस्टिगेशन शो 'सीआईडी' का हिस्सा रह चुकी हैं。 इसके अलावा, उन्होंने क्लासिक हॉरर शो 'आहत' और सुपरनैचुरल थ्रिलर शो 'श्श्श्...कोई है' जैसे धारावाहिकों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं。 इन शोज में उनके द्वारा निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों को अच्छी तरह याद हैं。
'जस्सी जैसी कोई नहीं' से मिला विशेष स्थान
टेलीविज़न के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुए कल्ट शो 'जस्सी जैसी कोई नहीं' में भी सुरभि वंजारा ने अहम भूमिका निभाई थी。 इस सीरियल ने घर-घर में अपनी पैठ बनाई थी और इसमें सुरभि के काम को बेहद सराहा गया था。 अब 'इंडियाज़ गॉट लेटेंट 2' में एक प्रतियोगी बनकर आने और होस्ट समय रैना को करारा रोस्ट करने के बाद सुरभि एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में आ गई हैं。 इस वाकये के बाद उनके पुराने धारावाहिक और फिल्में भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं。

रीवा के अस्पताल पर कांग्रेस विधायक का विवादित बयान
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में संजय गांधी अस्पताल को लेकर कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अस्पताल में सुंदर महिलाओं के शवों के साथ पोस्टमार्टम के दौरान अमानवीय कृत्य किए जाते हैं और वहां पैसे वसूले जाते हैं।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में संजय गांधी अस्पताल को लेकर कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अस्पताल में सुंदर महिलाओं के शवों के साथ पोस्टमार्टम के दौरान अमानवीय कृत्य किए जाते हैं और वहां पैसे वसूले जाते हैं।
रीवा के अस्पताल पर गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल इन दिनों एक बड़े और बेहद संवेदनशील विवाद के केंद्र में आ गया है। यहां कांग्रेस पार्टी के विधायक अभय मिश्रा ने अस्पताल की आंतरिक व्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल स्टाफ की कार्यशैली पर ऐसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य विभाग में भारी हलचल मचा दी है। विधायक के इस तीखे बयान के सामने आने के बाद से ही चिकित्सा जगत और राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है।
शवों के साथ अमानवीय कृत्य का दावा
अपने विवादित संबोधन के दौरान विधायक अभय मिश्रा ने बेहद आपत्तिजनक और गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि संजय गांधी अस्पताल में यदि किसी सुंदर महिला की मौत हो जाती है, और पोस्टमार्टम के वक्त उसके परिवार का कोई भी सदस्य वहां मौजूद नहीं होता है, तो उस स्थिति में डेडबॉडी के साथ रेप जैसी अमानवीय घटनाएं होती हैं। उनके इस बयान ने न केवल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि आम जनता के मन में भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
पोस्टमार्टम प्रक्रिया के नाम पर अवैध वसूली
अपनी बात को और आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस विधायक ने यह भी बड़ा दावा किया कि अस्पताल के भीतर पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान शव के पास खड़े रहने या कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के एवज में भी परिजनों से अवैध रूप से पैसे वसूले जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि बिना रिश्वत दिए यहां किसी भी प्रकार की सुगमता की उम्मीद नहीं की जा सकती है, जिससे गरीब और लाचार परिवार बुरी तरह पिस रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में मचा भारी बवाल
इस तरह के सनसनीखेज और गंभीर आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। विपक्षी दलों के नेता इस बयान को आधार बनाकर कांग्रेस पार्टी और विधायक पर जोरदार हमला बोल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधन की साख भी गंभीर खतरे में पड़ गई है। इस संवेदनशील प्रकरण के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करता है।

सत्य निकेतन पीजी हादसा: हाईकोर्ट ने एमसीडी और डीयू को घेरा
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की दर्दनाक घटना में 7 लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र, दिल्ली सरकार, एमसीडी और डीयू को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि इस त्रासदी के लिए केवल मालिक ही नहीं, बल्कि प्रशासन भी जिम्मेदार है।
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की दर्दनाक घटना में 7 लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र, दिल्ली सरकार, एमसीडी और डीयू को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि इस त्रासदी के लिए केवल मालिक ही नहीं, बल्कि प्रशासन भी जिम्मेदार है।
राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुआ पीजी बिल्डिंग का भयानक हादसा अब एक बड़े प्रशासनिक और न्यायिक फेरबदल का केंद्र बन गया है। इस भीषण हादसे में सात मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जिसके बाद से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और अवैध निर्माण को लेकर तीखे सवाल खड़े हो रहे थे। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कह दिया है कि इस तरह की त्रासदियों के लिए सिर्फ और सिर्फ इमारत का मालिक ही दोषी नहीं है, बल्कि इसके लिए संबंधित सरकारी विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन भी पूरी तरह जिम्मेदार हैं।
प्रशासनिक लापरवाही और नोटिस की बौछार
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस गंभीर मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, नगर निगम यानी एमसीडी और दिल्ली विश्वविद्यालय को आधिकारिक तौर पर नोटिस जारी कर दिया है। अदालत का स्पष्ट मानना है कि इन संस्थाओं की लापरवाही और लचर निगरानी के कारण ही इतना बड़ा हादसा हुआ और निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सत्य निकेतन क्षेत्र छात्रों का एक प्रमुख गढ़ माना जाता है, जहाँ हज़ारों छात्र पीजी और किराए के कमरों में रहते हैं। ऐसे में बिना मानकों के चल रहे इन पीजी आवासों पर शिकंजा कसना बेहद जरूरी हो गया था।
सुरक्षा और नियमों की अनदेखी पर कड़ा प्रहार
अदालत ने केवल नोटिस जारी करने तक ही सीमित कदम नहीं उठाया है, बल्कि भविष्य के लिए एक कड़ा संदेश भी दिया है। हाईकोर्ट ने सत्य निकेतन और इसके आसपास के संपूर्ण क्षेत्र में संचालित हो रही सभी पीजी इमारतों के व्यापक ऑडिट का कड़ा आदेश जारी कर दिया है। इस विशेष ऑडिट के माध्यम से यह जांच की जाएगी कि कौन सी इमारतें अग्नि सुरक्षा और निर्माण कानूनों का पालन कर रही हैं और किनमें नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण किया गया है। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से लापरवाह अधिकारियों और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले पीजी संचालकों में भारी हड़कंप मच गया है।

सत्य निकेतन हादसा: एमसीडी का एक्शन, जर्जर पीजी पर चला हंटर
दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे के बाद नगर निगम ने शिकंजा कस दिया है। जर्जर इमारतों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई में सीलिंग और ध्वस्तीकरण जारी है। छात्रों में खौफ का माहौल है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर कड़ा संज्ञान लिया है।
दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे के बाद नगर निगम ने शिकंजा कस दिया है। जर्जर इमारतों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई में सीलिंग और ध्वस्तीकरण जारी है। छात्रों में खौफ का माहौल है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर कड़ा संज्ञान लिया है।
सत्य निकेतन का खौफनाक सच और पीजी संस्कृति
राजधानी दिल्ली के व्यस्त शैक्षणिक और कोचिंग हब माने जाने वाले सत्य निकेतन इलाके में एक छात्र की दर्दनाक मौत के बाद कोहराम मचा हुआ है। यह हादसा महज एक इमारत का ढहना नहीं है, बल्कि उस अनियंत्रित और अवैध पीजी संस्कृति की पोल खोल रहा है, जिसमें हजारों छात्र अपनी पढ़ाई के सपने लेकर आते हैं और जान हथेली पर रखकर जीने को मजबूर होते हैं। संकरी गलियां, घनी आबादी, और नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई बहुमंजिला इमारतें इस क्षेत्र की पहचान बन चुकी हैं, जहां आग लगने या इमारत गिरने पर बचाव दल का पहुंचना भी नामुमकिन सा लगता है।
नगर निगम का ताबड़तोड़ एक्शन और सर्वे
इस जानलेवा हादसे के बाद नींद से जागे नगर निगम यानी एमसीडी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। इलाके में चलाए गए व्यापक सर्वे के दौरान कुल 51 इमारतें ऐसी पाई गईं जो बेहद जर्जर और खतरनाक स्थिति में थीं। इनमें से 27 जर्जर इमारतों को गिराने की प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले 7 अन्य परिसरों को पूरी तरह सील कर दिया गया है, जबकि 35 भवन मालिकों को सख्त चेतावनी देते हुए नोटिस जारी किए गए हैं।
छात्रों और अभिभावकों में फैला गहरा खौफ
इस वीभत्स घटना के बाद से दिल्ली में रहने वाले छात्रों और उनके दूरदराज बैठे अभिभावकों की रातों की नींद उड़ चुकी है। डर के मारे छात्र धड़ाधड़ अपने पीजी खाली कर रहे हैं और सुरक्षित इलाकों की तरफ पलायन करने को मजबूर हैं। माता-पिता अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए उन्हें महानगर भेजते हैं, लेकिन यहां के लालची मकान मालिकों और लापरवाह व्यवस्था के कारण हर पल एक अनिश्चितता का साया बना रहता है। इस पलायन ने दिल्ली के छात्र आवास बाजार की सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संज्ञान और भविष्य की चुनौती
छात्र आवासों की सुरक्षा और सुरक्षा मानकों के घोर उल्लंघन को देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद गंभीरता से लिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले पर संज्ञान लिए जाने के बाद से स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ गई है। सत्य निकेतन और अन्य छात्र बहुल इलाकों में नियमों का पालन कराने के लिए अब बड़े प्रशासनिक सुधारों की मांग उठ रही है। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस सबक को कितनी गंभीरता से लेता है ताकि किसी अन्य छात्र की जिंदगी खतरे में न पड़े।

पीएमओ का फर्जी अधिकारी: मुंबई में हथियारों के साथ गिरफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे से ठीक पहले बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में सनसनी फैल गई। एक 24 वर्षीय युवक ने फर्जी पीएमओ अधिकारी बनकर सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की। पुलिस ने उसे और एक अन्य आरोपी को हिरासत में ले लिया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे से ठीक पहले बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में सनसनी फैल गई। एक 24 वर्षीय युवक ने फर्जी पीएमओ अधिकारी बनकर सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की। पुलिस ने उसे और एक अन्य आरोपी को हिरासत में ले लिया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है।
सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वपूर्ण मुंबई दौरे से ठीक पहले महाराष्ट्र की वित्तीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर अचानक गंभीर सवाल खड़े हो गए। बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित अत्याधुनिक और पॉश जियो वर्ल्ड प्लाजा में एक शातिर युवक ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का एक उच्चाधिकारी बताकर अंदर घुसने की दुस्साहसिक कोशिश की। उसके हाथ में एक फर्जी पहचान पत्र और हथियार होने की बात सामने आते ही वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के होश उड़ गए। इस हाई-प्रोफाइल घटना ने पलभर में देश की तमाम प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह हाई अलर्ट पर ला दिया, क्योंकि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान ऐसी चूक किसी बड़े खतरे को न्योता दे सकती है।
कोर्ट ने बढ़ाई पुलिस हिरासत
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई की और 24 वर्षीय आरोपी रोहन पारेख को धर दबोचा। गहन पूछताछ और शुरुआती तकनीकी जांच के बाद रोहन और उसके एक अन्य साथी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों को आगामी 11 सितंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि इस बात का खुलासा हो सके कि इस फर्जीवाड़े के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है। इस बीच, मुंबई पुलिस ने स्पष्ट तौर पर यह भी साफ किया है कि इस घटना का प्रधानमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम से कोई सीधा संबंध नहीं है, फिर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
वकीलों के दावे और फरार आरोपी
इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के बीच कानूनी मोर्चे पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। गिरफ्तार रोहन पारेख के वकील ने दावा किया है कि उनका मुक्किल खुद किसी बड़े संगठित गिरोह या धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है, जिसे सोची-समझी साजिश के तहत मोहरा बनाया गया है। पुलिस इस एंगल पर भी बारीकी से तफ्तीश कर रही है। वहीं, इस पूरे प्रकरण में संलिप्त एक तीसरे आरोपी की तलाश में मुंबई पुलिस की विशेष टीमें ताबड़तोड़ छापे मार रही हैं। कानून का शिकंजा कसता जा रहा है और इस खतरनाक फर्जीवाड़े की परतें जल्द ही खुलने की उम्मीद है।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App