
यूपीएससी प्रीलिम्स 2026: जीएस पेपर-1 के 10 सबसे पेचीदा सवाल
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा 24 मई 2026 को आयोजित प्रीलिम्स परीक्षा के सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-1 ने अभ्यर्थियों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया। इस बार का प्रश्नपत्र पारंपरिक रट्टेबाज़ी से दूर, पूरी तरह वैचारिक स्पष्टता और समसामयिक मुद्दों के गहरे विश्लेषण पर आधारित था। कई प्रामाणिक स्रोतों और विषय विशेषज्ञों के अनुसार, इस पेपर के 10 प्रश्न ऐसे थे जिन्होंने सबसे अनुभवी उम्मीदवारों के भी पसीने छुड़ा दिए।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा 24 मई 2026 को आयोजित प्रीलिम्स परीक्षा के सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-1 ने अभ्यर्थियों को गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया। इस बार का प्रश्नपत्र पारंपरिक रट्टेबाज़ी से दूर, पूरी तरह वैचारिक स्पष्टता और समसामयिक मुद्दों के गहरे विश्लेषण पर आधारित था। कई प्रामाणिक स्रोतों और विषय विशेषज्ञों के अनुसार, इस पेपर के 10 प्रश्न ऐसे थे जिन्होंने सबसे अनुभवी उम्मीदवारों के भी पसीने छुड़ा दिए।
परीक्षा का बदला मिजाज
यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा हमेशा से अपने सरप्राइज एलिमेंट के लिए जानी जाती है, लेकिन इस साल के जीएस पेपर-1 ने विश्लेषणात्मक क्षमता की एक नई परिभाषा तय की। परीक्षा कक्ष से बाहर निकले छात्रों और कोचिंग दिग्गजों का मानना है कि इस बार सीधे तौर पर फैक्ट्स पूछने के बजाय, अवधारणाओं के अंतर्संबंधों (interconnected concepts) पर ध्यान केंद्रित किया गया। जिसने भी केवल सतही तौर पर पढ़ाई की थी, उसके लिए विकल्पों को एलिमिनेट करना लगभग असंभव साबित हुआ।
वो 10 सवाल जिन्होंने चकराया सिर
इस साल के प्रश्नपत्र में 10 ऐसे सवाल रहे, जो अपनी जटिल भाषा और गूढ़ विकल्पों के कारण सबसे कठिन माने जा रहे हैं:
अर्थव्यवस्था और बैंकिंग का पेचीदा मोड़: बैंकिंग तरलता (liquidity) और केंद्रीय बैंक के डिजिटल करेंसी (CBDC) के मैक्रो-इकोनॉमिक प्रभावों को जोड़कर एक ऐसा वैचारिक सवाल पूछा गया, जिसने अच्छे-अच्छे अर्थशास्त्रियों को उलझा दिया।
पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय संधियां: वैश्विक कार्बन बाजार (Article 6 of Paris Agreement) के व्यावहारिक क्रियान्वयन और जैव विविधता से जुड़े कड़े नियमों पर आधारित सवाल सीधे वैश्विक नीति दस्तावेजों से उठाए गए थे।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की नई सीमाएं: क्वांटम कंप्यूटिंग और जेनेटिक इंजीनियरिंग (CRISPR-Cas9 के नए वेरिएंट्स) के अनुप्रयोगों पर पूछे गए सवाल केवल खबरों पर नहीं, बल्कि उनके गहरे तकनीकी सिद्धांतों पर आधारित थे।
प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास का अनूठा संगम: विजयनगर साम्राज्य की प्रशासनिक बारीकियों और गुप्त काल के भूमि अनुदानों को लेकर पूछे गए कथनों ने इतिहास के विशेषज्ञों को भी किताबों के पन्ने पलटने पर मजबूर कर दिया।
भू-राजनीति और मैपिंग: पश्चिम एशिया और लाल सागर के आसपास के बदलते राजनीतिक भूगोल और जलडमरूमध्यों (Straits) के रणनीतिक महत्व पर बेहद सूक्ष्म मिलान वाले सवाल पूछे गए।
संविधान और न्यायिक व्याख्याएं: हाल के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आलोक में 'निजता के अधिकार' और 'कानूनी प्रक्रिया' (Due Process of Law) के बारीक अंतर पर एक बेहद उलझाने वाला वैचारिक प्रश्न था।
अंतरराष्ट्रीय संबंध (IR): वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (Supply Chain Resilience) और सेमीकंडक्टर डिप्लोमेसी को लेकर बने बहु-कथनीय सवाल ने छात्रों का काफी समय लिया।
भूगोल के भौतिक सिद्धांत: जलवायु परिवर्तन के दौर में महासागरीय धाराओं (Ocean Currents) के बदलते पैटर्न और अल नीनो-मॉडिकी के प्रभाव पर एकदम सटीक वैज्ञानिक समझ की मांग करने वाला प्रश्न शामिल था।
सरकारी योजनाएं और उनके बारीक नियम: डिजिटल इंडिया के तहत लाए गए नए डेटा प्रोटेक्शन नियमों के क्लॉज को लेकर एक बहु-विकल्पीय प्रश्न काफी जटिल था।
कृषि और मृदा विज्ञान: टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) के अंतर्गत 'रीजेनरेटिव फार्मिंग' के सूक्ष्म जैविक प्रभावों पर आधारित सवाल ने पारंपरिक कृषि ज्ञान को चुनौती दी।
वैचारिक स्पष्टता ही एकमात्र रास्ता
इन 10 सवालों के विश्लेषण से यह साफ संदेश मिलता है कि देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा को पास करने का कोई शॉर्टकट नहीं है। रटने की प्रवृत्ति अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी है। आने वाले समय में जो अभ्यर्थी अखबारों के संपादकीय और मानक पाठ्यपुस्तकों के बीच एक मजबूत वैचारिक पुल बनाने में कामयाब होंगे, वही इस परीक्षा के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे।

टीवी पर बाबरी मस्जिद का विध्वंस देखते हुए रो पड़ी थीं सोनिया गांधी
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक इंटरव्यू में कहा है कि दिसंबर 1992 में टीवी पर बाबरी मस्जिद का विध्वंस देखते हुए वह रो पड़ी थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस की कुछ नाकामियों ने बीजेपी और उसकी हिंदुत्व की राजनीति के उभार में भूमिका निभाई है।
बाबरी मस्जिद विध्वंस पर छलके आंसू
सोनिया गांधी ने एक इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया कि दिसंबर 1992 में जब वह टीवी पर बाबरी मस्जिद का विध्वंस देख रही थीं, तो उस दृश्य को देखकर वह रो पड़ी थीं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में पुरानी यादों और बहसों को एक बार फिर से ताजा कर दिया है।
कांग्रेस की नाकामियों और बीजेपी का उभार
इसके साथ ही सोनिया गांधी ने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस पार्टी की कुछ अपनी नाकामियां रहीं हैं। उन्होंने माना कि पार्टी की इन्हीं चूकों ने देश में बीजेपी और उसकी हिंदुत्व की राजनीति के उभार में एक बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि कई मामलों में उनकी पार्टी जरूरत से ज्यादा निश्चिंत रही थी।

इमर्जेंसी पर सोनिया गांधी का बयान, संजय अकेले कसूरवार नहीं
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों के लिए दिवंगत संजय गांधी को अकेले जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि संजय के आसपास राजीव गांधी जैसे लोग भी थे जिनका नजरिया अलग था और इंदिरा गांधी के कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी उन पर काफी दबाव था।
संजय गांधी अकेले जिम्मेदार नहीं
सोनिया गांधी ने अपने बयान में कहा है कि इमरजेंसी के वक्त केवल दिवंगत संजय गांधी ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं थे। उनके मुताबिक, उस दौरान इंदिरा गांधी के कुछ वरिष्ठ सहयोगियों की ओर से उन पर काफी दबाव बनाया गया था, जिसके कारण कई फैसले लिए गए।
राजीव गांधी का अलग था नजरिया
इस दौरान उन्होंने यह भी साझा किया कि संजय गांधी के आसपास कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिनका नज़रिया उनसे बिल्कुल अलग था। सोनिया गांधी ने विशेष तौर पर उल्लेख किया कि राजीव गांधी की राय और सोच इस मामले में अलग थी, जो इस ऐतिहासिक दौर के भीतर के समीकरणों को दर्शाती है।

सिलीगुड़ी में सैनिकों के बीच पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दिवाली मिलन समारोह के दौरान वायुसेना के जवानों से मुलाकात की और उन्हें मिठाई खिलाई। उन्होंने सैनिकों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनका मनोबल ही सबसे बड़ा हथियार है।
जवानों को खिलाई मिठाई
इस खास मुलाकात के दौरान रक्षा मंत्री ने वायुसेना के जवानों से बातचीत की और उन्हें अपने हाथों से मिठाई खिलाकर दीवाली की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान सैनिकों के चेहरे पर एक अलग ही उत्साह देखने को मिला, जो त्योहार के मौके पर उनके अपनों से दूर रहने की कमी को थोड़ा कम करता है।
सैनिकों का मनोबल सबसे बड़ा हथियार
संबोधन और बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह ने सैनिकों के त्याग, साहस और देश के प्रति समर्पण की खुलकर सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे सैनिकों का उच्च मनोबल ही देश का सबसे बड़ा और मजबूत हथियार है। इसके साथ ही उन्होंने सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करने की बात पर जोर देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया।

पीएम मोदी इस बार भी जवानों के साथ मनाएंगे दिवाली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए घोषणा की है कि वह इस बार भी जवानों के बीच ही त्योहार मनाएंगे। उन्होंने इसे अपनी नियमित परंपरा बताया है, जिसे वह साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से लगातार निभा रहे हैं।
जवानों के साथ त्योहार मनाने की परंपरा
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल को अपनी एक नियमित परंपरा करार दिया है। उन्होंने साझा किया कि साल 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से ही वह हर साल दीपावली का पर्व सैनिकों के बीच जाकर मनाते आ रहे हैं।
सरहद पर जाकर बढ़ाते हैं हौसला
अपनी इस विशेष परंपरा के तहत प्रधानमंत्री हर साल किसी न किसी बॉर्डर या सैन्य ठिकाने पर पहुंचते हैं। वहां तैनात जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाना और उनके साथ खुशियां बांटना उनकी प्राथमिकता रही है।

iOS की सीक्रेट ब्लॉक लिस्ट में मोदी-राहुल के नाम
एक रिसर्चर ने एप्पल की 1 लाख शब्दों वाली गोपनीय बहुभाषी सूची का खुलासा किया है, जिन्हें iOS कीबोर्ड ऑटो-करेक्ट या स्वाइप टाइपिंग में नहीं सुझाता। इस सूची में हिंदी के 3,913 शब्द शामिल हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के नाम भी स्वाइप टाइपिंग से बाहर रखे गए हैं।
सीक्रेट लिस्ट में हिंदी के शब्द शामिल
शोधकर्ता के अनुसार, इस बहुभाषी सूची में शामिल शब्दों को iOS कीबोर्ड ऑटो-करेक्ट सुझावों या स्वाइप टाइपिंग में रिकमेंड नहीं करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सीक्रेट लिस्ट में हिंदी भाषा के भी 3,913 शब्द और वाक्य मौजूद हैं।
स्वाइप टाइपिंग से बाहर दिग्गज नेता
इस ब्लॉक लिस्ट में हिंदी के कई चर्चित शब्दों के साथ-साथ देश के बड़े राजनीतिक चेहरों के नाम भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नाम भी iOS की स्वाइप टाइपिंग में नहीं आते हैं। एप्पल द्वारा बनाए गए इन सख्त एल्गोरिदम का उद्देश्य कीबोर्ड स्वाइपिंग के दौरान कुछ खास और संवेदनशील शब्दों के अपने-आप टाइप होने से रोकना है।
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