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यशस्वी जायसवाल को डेट करने की खबरों पर मृणाल ठाकुर का करारा जवाब, बोलीं- 'ब्रो रिलैक्स'

यशस्वी जायसवाल को डेट करने की खबरों पर मृणाल ठाकुर का करारा जवाब, बोलीं- 'ब्रो रिलैक्स'

Delight News
📅 09 Aug2026

ऐक्ट्रेस मृणाल ठाकुर ने भारतीय क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल के साथ डेटिंग की अफवाहों पर तीखा और स्पष्ट जवाब दिया है। मुंबई के एक कैफे से जुड़ी झूठी खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मृणाल ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया और लोगों की समझ पर सवाल उठाया।

यशस्वी जायसवाल को डेट करने की खबरों पर मृणाल ठाकुर का करारा जवाब, बोलीं- 'ब्रो रिलैक्स'
खबर का निचोड़:
ऐक्ट्रेस मृणाल ठाकुर ने भारतीय क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल के साथ डेटिंग की अफवाहों पर तीखा और स्पष्ट जवाब दिया है। मुंबई के एक कैफे से जुड़ी झूठी खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मृणाल ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया और लोगों की समझ पर सवाल उठाया।
यशस्वी जायसवाल और मृणाल ठाकुर की डेटिंग की अफवाहें
बॉलीवुड गलियारों और खेल जगत की दुनिया में इन दिनों एक नई अफवाह ने जोर पकड़ा था, जिसमें ऐक्ट्रेस मृणाल ठाकुर और युवा भारतीय क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल के बीच अफेयर के दावे किए जा रहे थे। इस तरह की खबरें सोशल मीडिया पर तब तेजी से वायरल हुईं जब दोनों को कथित तौर पर मुंबई के एक लोकप्रिय कैफे में एक साथ देखा गया। इन दावों में दोनों के बीच दस साल के उम्र के फासले को भी बड़ा मुद्दा बनाया गया। देखते ही देखते इंटरनेट पर इन अटकलों का बाजार गर्म हो गया और फैंस के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
सोशल मीडिया पर मृणाल का तीखा रिएक्शन
इन तमाम बेबुनियाद अफवाहों के तूल पकड़ने के बाद आखिरकार मृणाल ठाकुर ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ दी। अभिनेत्री ने इस दावे से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। मृणाल ने कमेंट बॉक्स में तीखे अंदाज में लिखा, "ब्रो रिलैक्स, दिखाओ एकसाथ कहां हैं? आप लोग इतने पढ़े-लिखे होकर कैसे ऐसी अफवाहों को सच मान लेते हैं।" उनके इस दो-टूक जवाब ने साफ कर दिया कि वायरल हो रही ये खबरें किसी सच्चाई पर आधारित नहीं बल्कि केवल कल्पना की उपज थीं।
वायरल खबरों की सच्चाई और सोशल मीडिया का दायरा
आज के डिजिटल दौर में किसी भी सेलिब्रिटी या खिलाड़ी के बारे में अफवाहें फैलना आम बात हो गई है। कई बार सिर्फ कयासों या बिना किसी ठोस सबूत के तस्वीरों को जोड़कर सनसनीखेज खबरें बना दी जाती हैं। यशस्वी जायसवाल जैसे उभरते हुए और स्टार क्रिकेटर तथा मृणाल ठाकुर जैसी लोकप्रिय अभिनेत्री को लेकर उड़ी यह अफवाह भी इसी फेहरिस्त का हिस्सा थी। मृणाल के इस बेबाक बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर बिना जांच-परख के परोसी जाने वाली हर जानकारी सच नहीं होती और सेलेब्रिटीज अपनी निजी जिंदगी को लेकर कितनी सजगता रखते हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी का आगाज: बेरोजगारी के खिलाफ नया सियासी शंखनाद

कॉकरोच जनता पार्टी का आगाज: बेरोजगारी के खिलाफ नया सियासी शंखनाद

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📅 09 Aug2026

अभिजीत दीपके के नेतृत्व में नवगठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने देशव्यापी अभियान 'क्या बोलती पब्लिक' की शुरुआत कर दी है। यह संगठन फिलहाल राजनीतिक दल के बजाय एक जन दबाव समूह के रूप में बेरोजगारी और परीक्षा घोटालों जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरेगा।

कॉकरोच जनता पार्टी का आगाज: बेरोजगारी के खिलाफ नया सियासी शंखनाद
खबर का निचोड़
अभिजीत दीपके के नेतृत्व में नवगठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने देशव्यापी अभियान 'क्या बोलती पब्लिक' की शुरुआत कर दी है। यह संगठन फिलहाल राजनीतिक दल के बजाय एक जन दबाव समूह के रूप में बेरोजगारी और परीक्षा घोटालों जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरेगा।
राजनीति के मैदान में उतरी 'कॉकरोच जनता पार्टी'
भारतीय राजनीतिक पटल पर एक दिलचस्प और नए संगठन का उदय हुआ है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने अपनी 15 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम की घोषणा के साथ ही देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अभिजीत दीपके को इस नए संगठन का संस्थापक और संयोजक बनाया गया है। शुरुआत में इस संगठन को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं, लेकिन CJP ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल एक राजनीतिक दल का रूप नहीं लेगी, बल्कि एक मजबूत 'जन दबाव समूह' के तौर पर काम करेगी। यह समूह सीधे तौर पर आम जनता और युवाओं के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनेगा और सत्ता पर दबाव बनाएगा।
युवाओं की आवाज और 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान
देश के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी एक नासूर बनती जा रही है। इसी समस्या को जड़ से समझने और उसका समाधान ढूंढने के लिए CJP ने 'क्या बोलती पब्लिक' नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान का आगाज किया है। इस अभियान के तहत पार्टी देश के कोने-कोने में जाकर युवाओं और आम नागरिकों के मन टटोलेगी। इसके साथ ही, झारखंड में हालिया भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं के खिलाफ यह संगठन पूरी ताकत से छात्रों के संघर्ष का समर्थन करेगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले सिस्टम के खिलाफ यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी मुश्किलें
संयोजक अभिजीत दीपके ने हाल ही में तीखे राजनीतिक बयान देते हुए एक केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे को जनता के मन से डर के खत्म होने का बड़ा प्रतीक बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आगामी 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में पूरी तरह से देश के युवाओं और उनकी आजीविका पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है। हालांकि, इन तीखे तेवरों के बीच दीपके की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं। देशविरोधी गतिविधियों के समर्थन के गंभीर आरोपों के चलते दिल्ली पुलिस में उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, जिससे यह नया संगठन कानूनी विवादों के घेरे में भी आ गया है।
भारत-फ्रांस राफेल रक्षा सौदा: रणनीतिक और आर्थिक आयाम

भारत-फ्रांस राफेल रक्षा सौदा: रणनीतिक और आर्थिक आयाम

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📅 09 Aug2026

भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों का यह विस्तृत प्रस्ताव 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को सुदृढ़ करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसमें उन्नत तकनीक हस्तांतरण और स्वदेशी हथियारों का एकीकरण शामिल है, जो भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।

भारत-फ्रांस राफेल रक्षा सौदा: रणनीतिक और आर्थिक आयाम
सारांश
भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों का यह विस्तृत प्रस्ताव 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को सुदृढ़ करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसमें उन्नत तकनीक हस्तांतरण और स्वदेशी हथियारों का एकीकरण शामिल है, जो भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।
सामरिक महत्व और वायुसेना की आवश्यकताएं
भारतीय वायुसेना अपनी स्क्वाड्रन संख्या में आई कमी को पूरा करने और अपनी हवाई रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए इस अनुबंध को एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। यह विमान अत्यधिक ऊंचाई और कठिन मौसम में भी प्रभावी ढंग से संचालन करने में सक्षम है। राफेल का यह बेड़ा देश के रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए एक बल गुणक के रूप में कार्य करेगा।
मेक इन इंडिया और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
इस प्रस्ताव के तहत अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इससे घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा और वैश्विक स्तर के विमानन विनिर्माण का पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा। इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण भारत को भविष्य के रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर करेगा।
स्वदेशी हथियारों का एकीकरण
प्रस्तावित समझौते की एक प्रमुख विशेषता इसमें स्वदेशी प्रणालियों को शामिल करना है। इसके तहत राफेल विमानों में भारत में विकसित 'अस्त्र' जैसी अत्याधुनिक स्वदेशी मिसाइलों और अन्यविशिष्ट युद्ध उपकरणों का एकीकरण किया जाएगा। यह समावेशी दृष्टिकोण भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठनों की क्षमताओं को वैश्विक पटल पर मजबूती प्रदान करता है।
वित्तीय और रणनीतिक निहितार्थ
इस रक्षा सौदे से भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ता मिलेगी। विशाल वित्तीय निवेश और स्थानीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला का विकास रोजगार के नए अवसरों का सृजन करेगा। यह पहल भारत की रक्षा खरीद नीति को रणनीतिक स्वायत्तता और दीर्घकालिक परिचालन readiness के उद्देश्यों के साथ संरेखित करती है।
आरक्षण पर मोहन भागवत का बड़ा बयान और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का स्पष्ट रुख

आरक्षण पर मोहन भागवत का बड़ा बयान और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का स्पष्ट रुख

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📅 09 Aug2026

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया है कि जब तक समाज में भेदभाव मौजूद है, आरक्षण जारी रहना चाहिए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर साफ कर दिया है कि एससी-एसटी आरक्षण ऐतिहासिक पिछड़ेपन पर आधारित है, इसलिए इसमें क्रीमी लेयर लागू नहीं हो सकती।

आरक्षण पर मोहन भागवत का बड़ा बयान और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का स्पष्ट रुख
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया है कि जब तक समाज में भेदभाव मौजूद है, आरक्षण जारी रहना चाहिए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर साफ कर दिया है कि एससी-एसटी आरक्षण ऐतिहासिक पिछड़ेपन पर आधारित है, इसलिए इसमें क्रीमी लेयर लागू नहीं हो सकती।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान: सामाजिक भेदभाव मिटने तक जारी रहेगा आरक्षण
आरक्षण पर क्या बोले मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण के मुद्दे पर एक स्पष्ट और दूरदर्शी बयान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि जब तक देश में सामाजिक भेदभाव और असमानता की जड़ें मजबूत हैं, तब तक आरक्षण की व्यवस्था का जारी रहना बेहद जरूरी है। भागवत के इस बयान ने देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
लाभान्वितों की सामाजिक जिम्मेदारी
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने सिर्फ आरक्षण के समर्थन की बात नहीं की, बल्कि इसके दायरे से लाभान्वित होने वाले वर्ग को भी एक आईना दिखाया है। उनका मानना है कि जो लोग इस व्यवस्था का लाभ उठाकर आगे बढ़ चुके हैं, उनका यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि वे समाज के उन अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक मदद पहुंचाएं जो अब भी जरूरतमंद हैं। यह दृष्टिकोण समाज के भीतर एक सहयोगात्मक और प्रगतिशील संस्कृति को बढ़ावा देने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा
एक तरफ जहां सामाजिक संगठनों और विचारकों की ओर से बयान सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यायिक मोर्चे पर भी स्थिति स्पष्ट हो रही है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर अपने रुख से पर्दा उठाया है। सरकार ने अदालत को बताया है कि अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए मिलने वाला आरक्षण पूरी तरह से ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक स्थिति पर।
क्रीमी लेयर और नीतिगत बदलाव पर रुख
केंद्र सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी जोड़ा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की तरह एससी-एसटी वर्ग में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। सरकार के अनुसार, इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण आरक्षण नीति में किसी भी तरह के बदलाव का अधिकार केवल देश की संसद के पास सुरक्षित है। न्यायालयीन प्रक्रिया के जरिए इसमें फेरबदल नहीं किया जा सकता, जिससे यह साफ होता है कि नीतिगत निर्णय विधायिका के दायरे में ही लिए जाएंगे।
मक्का संयुक्त प्रतिरोध समझौता: वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा का नया आयाम

मक्का संयुक्त प्रतिरोध समझौता: वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा का नया आयाम

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📅 09 Aug2026

तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान द्वारा हस्ताक्षरित मक्का संयुक्त प्रतिरोध समझौता एक नया त्रिपक्षीय सामरिक और सैन्य गठबंधन है। यह समझौता पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हुए आपसी रक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और सामूहिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित है।

शीर्षक (Title):
मक्का संयुक्त प्रतिरोध समझौता: वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा का नया आयाम
सारांश (Summary):
तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान द्वारा हस्ताक्षरित मक्का संयुक्त प्रतिरोध समझौता एक नया त्रिपक्षीय सामरिक और सैन्य गठबंधन है। यह समझौता पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हुए आपसी रक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और सामूहिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर केंद्रित है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उद्देश्य
अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के परिदृश्य में यह समझौता तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा और कूटनीतिक साझेदारी का एक नया अध्याय है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिरता को सुदृढ़ करना और किसी भी बाह्य सुरक्षा चुनौती का मिलकर सामना करना है। यह समझौता तीनों देशों की सेनाओं के बीच अंतःसक्रियता (इंटरऑपरेबिलिटी) बढ़ाने और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संस्थागत रूप देने के लिए एक औपचारिक मंच प्रदान करता है।
रणनीतिक और रक्षा सहयोग के प्रमुख आयाम
इस समझौते के तहत तीनों राष्ट्र रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन, सैन्य प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियानों पर विशेष बल दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक स्थायी समन्वय समिति का गठन किया गया है, जो रणनीतिक खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान को सुनिश्चित करेगी।
भू-राजनीतिक निहितार्थ और प्रभाव
पश्चिम एशिया में बदलते कूटनीतिक समीकरणों और वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था के बीच इस त्रिपक्षीय गठबंधन के गहरे भू-राजनीतिक निहितार्थ हैं। यह समझौता एक तरफ जहां क्षेत्रीय रक्षा स्वायत्तता को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी तरफ यह वैश्विक महाशक्तियों के प्रभाव संतुलन को भी प्रभावित करता है। दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के बीच सामरिक गलियारों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह गठबंधन अत्यधिक सामयिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ और उसका ऐतिहासिक महत्व

भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ और उसका ऐतिहासिक महत्व

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📅 09 Aug2026

महात्मा गांधी के नेतृत्व में 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ 'भारत छोड़ो आंदोलन' भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और निर्णायक चरण था। मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान से शुरू हुए इस आंदोलन ने 'करो या मरो' के मंत्र के साथ ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया था।

शीर्षक (Title): भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ और उसका ऐतिहासिक महत्व
सारांश (Summary):
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ 'भारत छोड़ो आंदोलन' भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और निर्णायक चरण था। मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान से शुरू हुए इस आंदोलन ने 'करो या मरो' के मंत्र के साथ ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया था।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और तात्कालिक कारण
द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को बिना सहमती के शामिल किए जाने और क्रिप्स मिशन की विफलता ने भारतीय राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से असंतुष्ट कर दिया था। कांग्रेस ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का बिगुल बजाने का निर्णय लिया, जिसके तहत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की मुंबई बैठक में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया गया।
करो या मरो का नारा और नेतृत्व
महात्मा गांधी ने इस आंदोलन के दौरान 'करो या मरो' (Do or Die) का ओजस्वी नारा दिया। आंदोलन के प्रस्ताव की घोषणा के साथ ही ब्रिटिश सरकार ने ऑपरेशन विक्टर के तहत गांधी जी सहित लगभग सभी शीर्ष कांग्रेसी नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर लिया। नेतृत्वविहीन हो जाने के बावजूद देश की जनता ने स्वतःस्फूर्त होकर इस आंदोलन को अभूतपूर्व दिशा प्रदान की।
जन-भागीदारी और समानांतर सरकारें
यह आंदोलन केवल नेताओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग—विद्यार्थियों, किसानों, महिलाओं और कामगारों—ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया। देश के कई हिस्सों में ब्रिटिश प्रशासन को उखाड़ फेंका गया और बलिया, ताम्लुक तथा सतारा जैसी जगहों पर समानांतर सरकारों (प्रति सरकार) की स्थापना की गई।
दूरगामी परिणाम और राष्ट्रीय प्रभाव
यद्यपि ब्रिटिश सरकार ने इस आंदोलन का दमन क्रूरतापूर्वक किया, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया कि अब भारतीयों पर अधिक समय तक औपनिवेशिक शासन बनाए रखना असंभव है। इस आंदोलन ने भारत की स्वतंत्रता के मार्ग को प्रशस्त किया और राष्ट्रीय एकता की भावना को सर्वोपरि स्थापित किया।

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