
विनेश फोगाट: ट्रायल में हार और संघर्ष की कहानी
एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल में विनेश फोगाट को मीनाक्षी गोयत से हार का सामना करना पड़ा। विवादों के बाद मिली अनुमति के बावजूद, उनकी हार ने नई बहस छेड़ दी है। विनेश ने व्यवस्था और कुश्ती महासंघ (WFI) पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए, जिसे अध्यक्ष संजय सिंह ने सिरे से नकारा है। बावजूद हार के, विनेश ने इसे वापसी करने वाली महिला पहलवानों के लिए....
भारतीय कुश्ती का अखाड़ा एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार केंद्र में हैं भारतीय कुश्ती की 'आयरन लेडी' विनेश फोगाट और एशियाई खेल 2026 के लिए आयोजित चयन ट्रायल। वर्षों तक देश को गौरव दिलाने वाली विनेश फोगाट को ट्रायल के दौरान मीनाक्षी गोयत से हार का सामना करना पड़ा। यह हार केवल एक मुकाबले का अंत नहीं, बल्कि भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) और व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े विवाद की शुरुआत है।
इस पूरे घटनाक्रम ने खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच एक तीखी बहस छेड़ दी है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से और बारीकी से समझते हैं।
1. पृष्ठभूमि: क्या हुआ अखाड़े में?
एशियाई खेल 2026 की तैयारियों के बीच आयोजित चयन ट्रायल में विनेश फोगाट अपनी वापसी की राह तलाश रही थीं। ओलंपिक और विश्व स्तर की पदक विजेता होने के बावजूद, विनेश को उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा जिसका वह लंबे समय से विरोध करती आई हैं—ट्रायल। मीनाक्षी गोयत के साथ हुए मुकाबले में तकनीकी और शारीरिक रूप से विनेश अपनी लय में नहीं दिखीं, और अंततः उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
यह हार अप्रत्याशित थी, जिसने न केवल उनके समर्थकों को चौंकाया, बल्कि कुश्ती जगत में भविष्य की संभावनाओं पर भी सवालिया निशान लगा दिए।
2. आरोपों की बौछार: विनेश बनाम महासंघ
हार के तुरंत बाद विनेश फोगाट ने मौन नहीं साधा। उन्होंने अपनी हार को केवल खेल का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया और व्यवस्था पर निशाना साधा। विनेश के मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:
सुनियोजित षड्यंत्र: विनेश का आरोप है कि ट्रायल की प्रक्रिया और उन्हें दिए गए समय में धांधली की गई है। उनका दावा है कि व्यवस्था ने उनके खिलाफ काम किया है।
पक्षपात का आरोप: विनेश ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) पर खुलेआम पक्षपात का आरोप लगाया। उनका कहना है कि महासंघ के कुछ पदाधिकारी व्यक्तिगत द्वेष के कारण उनके खेल करियर को प्रभावित कर रहे हैं।
मानसिक प्रताड़ना: विनेश ने यह भी संकेत दिया कि उन्हें ट्रायल तक पहुंचने के दौरान जिस तरह की प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ा, उसने उनकी मानसिक और शारीरिक तैयारी पर नकारात्मक असर डाला।
3. महासंघ का पलटवार: संजय सिंह की सफाई
आरोपों के जवाब में WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह से 'निराधार' और 'खेल की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला' बताया।
निष्पक्ष प्रक्रिया का दावा: संजय सिंह का कहना है कि ट्रायल पूरी तरह से पारदर्शी थे और इसमें किसी भी पहलवान के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया।
नियम सर्वोपरि: महासंघ के अनुसार, नियम सभी के लिए समान हैं, चाहे वह कोई भी बड़ा खिलाड़ी क्यों न हो। हार-जीत खेल का हिस्सा है और इसे बहानेबाजी में नहीं बदलना चाहिए।
खेल राजनीति से दूर: उन्होंने स्पष्ट किया कि महासंघ का काम केवल खेल और खिलाड़ियों को सुविधाएं प्रदान करना है, न कि किसी के करियर को समाप्त करना।
4. एक 'कानूनी मील का पत्थर': विनेश का दृष्टिकोण
हार के बावजूद विनेश फोगाट ने इस पूरी घटना को 'सकारात्मक' मोड़ देने की कोशिश की है। उनके अनुसार, यह ट्रायल केवल एक मुकाबला नहीं था, बल्कि उन महिला पहलवानों के लिए एक संघर्ष था जो लंबे समय से व्यवस्था के खिलाफ लड़ रही हैं।
विनेश का तर्क है: "भले ही मैं आज हार गई, लेकिन ट्रायल में मेरी उपस्थिति और महासंघ के नियमों को चुनौती देना एक कानूनी मील का पत्थर साबित होगा। यह भविष्य की उन महिला खिलाड़ियों के लिए रास्ता साफ करेगा जिन्हें न्याय के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है।"
5. क्या यह भारतीय कुश्ती के अंत की शुरुआत है?
इस घटना ने कई कड़वे सवाल खड़े किए हैं:
1. अनुभव बनाम युवा शक्ति: क्या भारतीय कुश्ती में अब बदलाव का दौर आ चुका है? मीनाक्षी गोयत की जीत यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी अब अनुभवी दिग्गजों को चुनौती देने के लिए तैयार है।
2. महासंघ की विश्वसनीयता: क्या WFI की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता है? विनेश जैसे बड़े खिलाड़ी के आरोप यह दर्शाते हैं कि खिलाड़ी और प्रबंधन के बीच गहरा अविश्वास है।
3. खिलाड़ियों का भविष्य: क्या हम व्यक्तिगत विवादों में एक और प्रतिभाशाली खिलाड़ी के करियर को दांव पर लगा रहे हैं?
6. निष्कर्ष: विवादों के पार खेल की चिंता
एशियाई खेल 2026 जैसे बड़े मंच से पहले, इस तरह के विवाद भारतीय कुश्ती के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। जब खेल के मैदान के बजाय चर्चाओं का केंद्र 'आरोप-प्रत्यारोप' बन जाते हैं, तो कहीं न कहीं खिलाड़ी का मनोबल प्रभावित होता है।
विनेश फोगाट का संघर्ष भारतीय खेल इतिहास में दर्ज रहेगा, चाहे परिणाम जो भी हो। हालांकि, भारतीय कुश्ती महासंघ को भी यह समझना होगा कि पारदर्शिता ही एकमात्र रास्ता है जिससे खिलाड़ियों और प्रशंसकों का विश्वास जीता जा सकता है।
फिलहाल, अखाड़े में धूल अभी शांत नहीं हुई है। क्या विनेश फोगाट अपनी इस हार के बाद वापसी करेंगी या यह उनके शानदार करियर का एक दुखद अंत है? यह समय बताएगा। लेकिन एक बात निश्चित है—भारतीय कुश्ती को अब केवल ताकत नहीं, बल्कि बेहतर प्रबंधन और निष्पक्ष न्याय की भी सख्त आवश्यकता है।
यह रिपोर्ट वर्तमान खेल परिदृश्य और उपलब्ध समाचार स्रोतों के विश्लेषण पर आधारित है। खेल जगत से जुड़ी ऐसी ही और गहन जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहें।

सत्य निकेतन हादसा: फरार पीजी मालिक की तलाश में जुटी पुलिस
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
अचानक ढही इमारत और मातम का माहौल
दिल्ली के व्यस्त और छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाके सत्य निकेतन में एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ अचानक एक पीजी की इमारत भरभराकर ढह गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। मलबे के नीचे दबने से तीन बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस भयानक दुर्घटना ने स्थानीय प्रशासन और भवन निर्माण सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरार हुआ पीजी मालिक आनंद बंसल
हादसे की भनक लगते ही पीजी का मालिक आनंद बंसल मौके से फरार हो गया। प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस खतरनाक इमारत को सुरक्षा के लिहाज से एक साल पहले ही खाली कराया गया था। इसके बावजूद वहाँ किस तरह की गतिविधियां चल रही थीं और लापरवाही किसकी थी, यह पुलिस जांच का मुख्य विषय बन गया है। मालिक की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरी लापरवाही की परते खुल सकेंगी।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आरोपी मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। आरोपी की तलाश में लगातार विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
बचाव अभियान और घायलों का इलाज
घटनास्थल पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। प्रशासन और बचाव दल मलबे को हटाने में जुटे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और फंसा न हो। हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदयविदारक घटना पर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस दुर्घटना में घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की है। देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस तरह संबल मिलना इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़ा संताप कम करने वाला कदम है।
प्रशासनिक अमला और राहत कार्य
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और राहत दल तुरंत हरकत में आ गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। पीएम मोदी ने खुद इस बात की जानकारी दी कि अधिकारी और बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने और हादसे से प्रभावित हर संभव व्यक्ति तक मदद पहुँचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरक्षा और लापरवाही के सवाल
राजधानी दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की पुरानी या कमजोर इमारतों का जर्जर हालत में होना एक बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सत्य निकेतन की इस घटना ने एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच में जुट गया है कि आखिर इस इमारत के गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या यहाँ किसी प्रकार की प्रशासनिक अनदेखी या नियमों की अवहेलना हुई थी।

दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
घटना का दर्दनाक मंजर और प्रशासनिक हलचल
राजधानी दिल्ली के व्यस्त क्षेत्र सत्य निकेतन में इमारत ढहने की इस आकस्मिक दुर्घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अचानक हुए इस हादसे की चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, इस भयानक मलबे के नीचे दबने से छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और स्थानीय लोग तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद बांसुरी स्वराज का दौरा
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। नेताओं ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर पूरी स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रशासनिक अधिकारियों से घटना के कारणों की पूरी रिपोर्ट मांगी। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा बलों और राहत कर्मियों का बड़ा अमला भी मौजूद रहा, जो लगातार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा हुआ था।
युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य
मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद संभाली और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मलबे में फंसे एक-एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाए। इसके साथ ही, अस्पतालों में भर्ती घायलों को बिना किसी देरी के बेहतर से बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी पीड़ित को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि यह इमारत किस वजह से ढही और इसमें किन नियमों की अनदेखी की गई थी।

सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी की दो टूक
दिल्ली के सत्य निकेतन में घटी दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर दुर्घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजधानी में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं।
छात्रों का जीवन संघर्षों से भरा और अब हालात जानलेवा
राहुल गांधी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश का युवा और छात्र वर्ग पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनगिनत संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आने वाले इन युवाओं को यदि इस तरह के जानलेवा हालातों का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों और कोचिंग hubs के आसपास रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बचाव दलों के लिए तत्काल निर्देश और हर संभव प्रयास
घटना की सूचना मिलते ही राहुल गांधी ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया है कि बचाव दल बिना एक भी पल गंवाए मलबे में फंसे प्रत्येक छात्र तक पहुंचे। उनका साफ कहना था कि इस आपदा की घड़ी में हर एक छात्र की जान बेहद कीमती है और उसकी रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास तुरंत किए जाने चाहिए।
मुश्किल घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ी है पार्टी
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक दलों द्वारा प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाने का सिलसिला जारी है। राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से और अपनी पार्टी की ओर से यह विश्वास दिलाया है कि इस विकट और मुश्किल घड़ी में वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: 80 पदों पर भर्ती का शानदार मौका
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
खबर का निचोड़
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 अगस्त 2026 को शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। जो उम्मीदवार देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों पर अपनी जगह बनाना चाहते हैं, उन्हें तय समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन पत्र जमा करना होगा। अंतिम समय में सर्वर पर लोड बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए समय से पहले आवेदन करना समझदारी होगी।
रिक्तियों का विवरण और योग्यता
इस बार कुल 80 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा से जुड़े तमाम नियम यूपीएससी के आधिकारिक विज्ञापन में विस्तार से दिए गए हैं। सामान्यतः इस पद के लिए उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही तय आयु सीमा के दायरे में आने वाले आवेदक ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।
चयन प्रक्रिया और वेतनमान
चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त होती है, जिसमें आमतौर पर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू) शामिल होते हैं। लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अगले चरण के लिए बुलाया जाता है। इस पद पर चयनित होने वाले युवाओं को आकर्षक वेतनमान और सरकारी सेवाओं मिलने वाले तमाम बेहतरीन लाभ व भत्ते दिए जाते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
कैसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां ओटीआर (One Time Registration) प्रक्रिया पूरी करने के बाद ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती के लिंक पर क्लिक करना होगा। मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सावधानीपूर्वक भरने और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद आवेदन पत्र को सबमिट कर दें। भविष्य के संदर्भ के लिए फाइनल सबमिट किए गए फॉर्म का एक प्रिंटआउट अपने पास जरूर सुरक्षित रख लें।
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