
विज्ञापन विवाद: कृति सेनन के पहनावे पर छिड़ी बहस, राजनीति और बॉलीवुड आमने-सामने
कृति सेनन के एक विज्ञापन पर पहनावे को लेकर शुरू हुआ विवाद राजनीति और बॉलीवुड तक फैल गया है। एक तरफ जहां कंगना रनौत और किरन रिजिजू ने ऐतराज जताया, वहीं राहुल गांधी ने कृति का समर्थन किया। ब्रांड ने विज्ञापन वापस ले लिया है, जिससे संस्कृति और आधुनिकता की बहस तेज हो गई है।
खबर का निचोड़
कृति सेनन के एक विज्ञापन पर पहनावे को लेकर शुरू हुआ विवाद राजनीति और बॉलीवुड तक फैल गया है। एक तरफ जहां कंगना रनौत और किरन रिजिजू ने ऐतराज जताया, वहीं राहुल गांधी ने कृति का समर्थन किया। ब्रांड ने विज्ञापन वापस ले लिया है, जिससे संस्कृति और आधुनिकता की बहस तेज हो गई है।
विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद और ब्रांड का कदम
हाल ही में अभिनेत्री कृति सेनन का एक ज्वेलरी ब्रांड जीवा का विज्ञापन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया। इस विज्ञापन में कृति के पहनावे को लेकर अभिनेत्री कंगना रनौत ने कड़ी आपत्ति जताई। कंगना का तर्क था कि विज्ञापन में दिखाया गया पहनावा भारतीय संस्कृति के अनुकूल नहीं है। मामला तूल पकड़ते ही और तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आते ही ज्वेलरी ब्रांड ने बिना देर किए उस विज्ञापन को अपने प्लेटफॉर्म से हटा लिया। ब्रांड के इस कदम ने आग में घी का काम किया और यह मुद्दा देखते ही देखते मनोरंजन गलियारों से निकलकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया।
राजनीतिक खेमों में बंटी प्रतिक्रियाएं और नेताओं के बयान
इस विवाद पर देश के दिग्गज नेता भी दो गुटों में बंटते नजर आए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी खुलकर कृति सेनन के समर्थन में उतर आए। उन्होंने अभिव्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पहनावे की पसंद को हर नागरिक का अधिकार बताया। इसके विपरीत, केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कंगना रनौत के रुख का समर्थन किया। रिजिजू ने सांस्कृतिक मूल्यों और मर्यादाओं की रक्षा करने की बात पर जोर देते हुए कंगना के तर्कों को वजन दिया। राजनीतिक दिग्गजों के इन बयानों ने इस कमर्शियल विवाद को एक राष्ट्रीय बहस में तब्दील कर दिया है।
सोनू निगम के फर्जी बयान का खंडन और कृति की सफाई
विवाद के इस दौर में कई फेक न्यूज और मनगढ़ंत बयान भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। मशहूर गायक सोनू निगम के नाम से एक बयान धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा था, जिसका खंडन करते हुए सोनू ने खुद सामने आकर सच्चाई बताई और ऐसी अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया। चारों तरफ से घिरने के बाद आखिरकार कृति सेनन ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने अपनी सफाई में दो टूक अंदाज में कहा कि सच्ची संस्कृति कपड़ों से नहीं बल्कि इंसान के दिल और विचारों से जुड़ी होती है। कृति के इस बयान के बाद उनके फैंस और कई अन्य कलाकारों ने भी उनका समर्थन किया है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371: विशेष प्रावधान, क्षेत्रीय संतुलन और प्रासंगिकता
भारतीय संविधान के भाग XXI के अंतर्गत अनुच्छेद 371 और इसके उप-अनुच्छेद (371A से 371J) कुछ विशेष राज्यों को अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह व्यवस्था क्षेत्रीय आकांक्षाओं को संतुलित करने, आदिवासी संस्कृति की रक्षा करने और देश के संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए की गई है।
सारांश
भारतीय संविधान के भाग XXI के अंतर्गत अनुच्छेद 371 और इसके उप-अनुच्छेद (371A से 371J) कुछ विशेष राज्यों को अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह व्यवस्था क्षेत्रीय आकांक्षाओं को संतुलित करने, आदिवासी संस्कृति की रक्षा करने और देश के संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए की गई है।
परिचय एवं संवैधानिक पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान के मूल प्रारूप में 26 जनवरी 1950 से अनुच्छेद 371 शामिल था, जो मूल रूप से राज्यों के संक्रमणकालीन प्रावधानों से संबंधित था। हालांकि, समय के साथ क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने तथा पूर्वोत्तर एवं अन्य पिछड़े क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368 के तहत) के माध्यम से अनुच्छेद 371 (A से J) जोड़े गए।
प्रमुख राज्यों से संबंधित विशेष प्रावधान
इस शृंखला के तहत विभिन्न राज्यों के लिए विशिष्ट व्यवस्थाएं की गई हैं:
अनुच्छेद 371: महाराष्ट्र (विदर्भ, मराठवाड़ा) और गुजरात (सौराष्ट्र, कच्छ) के राज्यपालों को क्षेत्रीय विकास बोर्ड स्थापित करने की विशेष जिम्मेदारी दी गई है।
अनुच्छेद 371A से 371H: नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, सिक्किम, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के लिए वहां की पारंपरिक संस्कृति, भूमि अधिकारों, स्थानीय कानूनों और आंतरिक कानून-व्यवस्था को बनाए रखने हेतु राज्यपाल या राष्ट्रपति को विशेष शक्तियां प्रदान की गई हैं।
अनुच्छेद 371I & 371J: गोवा विधानसभा में न्यूनतम 30 सदस्यों का प्रावधान करता है, जबकि अनुच्छेद 371J हैदराबाद-कर्नाटक (कल्याण कर्नाटक) क्षेत्र के लिए एक अलग विकास बोर्ड की स्थापना का प्रावधान करता है।
शक्तियों के संतुलन और शासन में भूमिका
संविधान के इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य नियंत्रण और संतुलन (Checks and Balances) के सिद्धांत को सुदृढ़ करना है। यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि सरकार का प्रत्येक अंग या प्रशासनिक तंत्र इस प्रकार कार्य करे कि कोई भी इकाई सत्ता का केंद्रीकरण न करे और संवैधानिक दायित्वों की पूर्ति हो सके। विशेष क्षेत्रीय प्रावधान मुख्यधारा से पिछड़े क्षेत्रों को समान अवसर और विकास की गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय भारतीय राजव्यवस्था और संविधान (Indian Polity and Constitution) के अंतर्गत अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह असममितीय संघवाद (Asymmetric Federalism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो विविधता में एकता के भारतीय मॉडल को व्यावहारिक रूप देता है।

'माय भारत' मंच: युवा सशक्तिकरण और विकसित भारत का रोडमैप
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अंतर्गत 'माय भारत' (MY Bharat) मंच ने 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत अभियान' के तहत देश भर में युवा संसदों और मेलों का आयोजन किया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म 15 से 29 वर्ष के युवाओं को कौशल विकास, नेटवर्किंग और सामुदायिक परिवर्तन का अवसर प्रदान करता है।
सारांश
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अंतर्गत 'माय भारत' (MY Bharat) मंच ने 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत अभियान' के तहत देश भर में युवा संसदों और मेलों का आयोजन किया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म 15 से 29 वर्ष के युवाओं को कौशल विकास, नेटवर्किंग और सामुदायिक परिवर्तन का अवसर प्रदान करता है।
परिचय एवं नवीनतम पहल
हाल ही में 'माय भारत' (MY Bharat) मंच द्वारा 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत अभियान' के अंतर्गत देश भर के 1,469 स्थानों पर पड़ोस युवा संसदों (Neighbourhood Youth Parliaments) और युवा मेलों का आयोजन किया गया है। यह पहल देश के युवाओं को सकारात्मक दिशा देने, नशा मुक्त समाज के निर्माण और जमीनी स्तर पर जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित की गई है।
संस्थागत ढांचा और उद्देश्य
यह मंच युवा मामलों के विभाग, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के तहत स्थापित एक स्वायत्त निकाय है। इसे भारत सरकार द्वारा सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम XXI, 1860 के तहत एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के गतिशील युवाओं की आवश्यकताओं को पूरा करना और उन्हें 'विकसित भारत' के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए एक डिजिटल रूप से सशक्त मंच प्रदान करना है।
मंच की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली
माय भारत प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकी आधारित एक संस्थागत तंत्र है जो युवाओं को सरकार, व्यवसाय और गैर-लाभकारी संगठनों के विभिन्न कार्यक्रमों व सीखने के अवसरों से जोड़ता है। यह मंच युवाओं को अपने कौशल-सेट और गतिविधियों को सूचीबद्ध करते हुए व्यक्तिगत प्रोफाइल बनाने की अनुमति देता है। इसके माध्यम से युवा एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं, संभावित मेंटर्स से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं तथा उद्योग जगत के साथ अपने पेशेवर नेटवर्क का विस्तार कर सकते हैं।
परीक्षाोपयोगी और प्रशासनिक महत्व
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय सामाजिक न्याय, मानव संसाधन विकास और सुशासन के अंतर्गत अत्यंत प्रासंगिक है। देश के जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) का सही दिशा में उपयोग करने, कौशल उन्नयन और युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इस प्रकार के तकनीकी प्लेटफॉर्म एक प्रभावी प्रशासनिक और नीतिगत उपकरण हैं।

सारस क्रेन: अखिल भारतीय जनगणना, पारिस्थितिकी और संरक्षण स्थिति
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने भारत के सबसे ऊंचे उड़ने वाले पक्षी 'सारस क्रेन' (Sarus Crane) की आबादी का आकलन करने के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण की घोषणा की है। आर्द्रभूमि (Wetlands) और कृषि-पारिस्थितिकी प्रणालियों के स्वास्थ्य के सूचक इस पक्षी को आवास विनाश, कीटनाशकों के उपयोग और बिजली की तारों से टकराने जैसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
सारांश
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने भारत के सबसे ऊंचे उड़ने वाले पक्षी 'सारस क्रेन' (Sarus Crane) की आबादी का आकलन करने के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण की घोषणा की है। आर्द्रभूमि (Wetlands) और कृषि-पारिस्थितिकी प्रणालियों के स्वास्थ्य के सूचक इस पक्षी को आवास विनाश, कीटनाशकों के उपयोग और बिजली की तारों से टकराने जैसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
परिचय एवं वर्तमान संदर्भ
अक्टूबर 2026 में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने देश भर में सारस क्रेन की जनसंख्या का सटीक अनुमान लगाने, उनके प्रजनन स्थलों का मानचित्रण करने और संरक्षण नीतियों के लिए एक नया राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने हेतु अखिल भारतीय सारस क्रेन सर्वेक्षण का आयोजन किया है। यह पहल विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के अवसर पर शुरू की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिक वैज्ञानिकों, स्थानीय समुदायों और वन विभागों के सहयोग से डेटा अंतराल को भरना है।
प्रमुख शारीरिक विशेषताएं एवं व्यवहार
सारस क्रेन (Antigone antigone) दुनिया का सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी है, जिसकी ऊंचाई लगभग 1.5 से 1.8 मीटर तक होती है। यह भारत में पाई जाने वाली क्रेन की एकमात्र स्थायी निवासी (Resident Breeding) प्रजाति है। इसका शरीर मुख्य रूप से स्लेटी (धूसर) रंग का होता है, जबकि सिर और ऊपरी गर्दन पर लाल रंग की त्वचा होती है। यह पक्षी एकनिष्ठ (Monogamous) होता है और जीवनभर एक ही साथी के साथ जोड़ा बनाकर रहता है।
आवास एवं वितरण
सारस क्रेन मुख्य रूप से आर्द्रभूमियों, दलदलों, उथले जल निकायों, घास के मैदानों और सिंचित कृषि क्षेत्रों (विशेषकर धान के खेतों) में निवास करते हैं। भारत में इनका मुख्य वितरण गंगा के मैदानी भागों, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में है। इनमें से सर्वाधिक आबादी उत्तर प्रदेश में पाई जाती है, जहां इसे आधिकारिक राज्य पक्षी (State Bird) का दर्जा प्राप्त है।
प्रमुख खतरे एवं संरक्षण स्थिति
यह प्रजाति मुख्य रूप से आर्द्रभूमि के क्षरण, कृषि भूमि के उपयोग में परिवर्तन, रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग, हाई-टेंशन बिजली लाइनों से टकराकर करंट लगने, तथा आवारा कुत्तों द्वारा अंडों व चूजों के शिकार जैसे खतरों का सामना कर रही है। संरक्षण की दृष्टि से इसे आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में 'सुभेद्य' (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, यह साइट्स (CITES) के परिशिष्ट-II और भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत उच्च स्तरीय कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के अंतर्गत अत्यंत प्रासंगिक है। सारस क्रेन कृषि-आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर स्पीशीज (Indicator Species) है। स्थानीय किसानों के साथ मिलकर सामुदायिक संरक्षण (Community Conservation) को बढ़ावा देना तथा ओवरहेड पावर लाइनों का सुरक्षित प्रबंधन करना प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण उपाय प्रस्तुत करता है।

विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट: भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर और वैश्विक परिदृश्य
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी प्रमुख फ्लैगशिप रिपोर्ट 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) के अक्टूबर 2026 संस्करण में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं में गति और ढांचागत सुधारों के बल पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
सारांश
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी प्रमुख फ्लैगशिप रिपोर्ट 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) के अक्टूबर 2026 संस्करण में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं में गति और ढांचागत सुधारों के बल पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा वर्ष में दो बार (अप्रैल और अक्टूबर में) 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) रिपोर्ट जारी की जाती है। यह रिपोर्ट वैश्विक उत्पादन, मुद्रास्फीति, वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP), चालू खाता संतुलन और बेरोजगारी दर जैसे प्रमुख संकेतकों पर आंकड़े तथा पूर्वानुमान प्रदान करती है। हाल ही में अक्टूबर 2026 में जारी रिपोर्ट में आईएमएफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास अनुमान में उल्लेखनीय सुधार किया है।
भारत हेतु मुख्य आर्थिक अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो पूर्व अनुमानों से अधिक है। आईएमएफ के अनुसार, भारत में उपभोग मांग, निजी निवेश में उछाल तथा जीवंत सेवा क्षेत्र के कारण यह मजबूत आर्थिक गति बनी हुई है। रिपोर्ट में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति 2026 में 5 प्रतिशत रहने तथा चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
वैश्विक आर्थिक रुझान
वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान है। उभरते और विकासशील एशियाई देशों की वृद्धि दर 2026 में 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा लागत में वृद्धि, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक आर्थिक स्थिति खंडित और दबाव में है।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक आर्थिक गतिशीलता के अंतर्गत महत्वपूर्ण है। वैश्विक मंदी और अनिश्चितता के दौर में भारत की 7 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि दर देश की रणनीतिक स्वायत्तता, व्यापक आंतरिक बाजार और आर्थिक नीतियों की सुदृढ़ता को रेखांकित करती है।

अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष: निजी क्षेत्र में अनुसंधान का सशक्तिकरण
भारत सरकार की प्रमुख पहल अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय कोष प्रबंधकों (SLFMs) के पहले समूह की घोषणा की है। 1 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पस वाले इस फंड का उद्देश्य अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए शून्य या कम ब्याज दरों पर दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है।
सारांश
भारत सरकार की प्रमुख पहल अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय कोष प्रबंधकों (SLFMs) के पहले समूह की घोषणा की है। 1 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पस वाले इस फंड का उद्देश्य अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए शून्य या कम ब्याज दरों पर दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
अक्टूबर 2026 में अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय फंड मैनेजरों के पहले समूह की स्वीकृति के साथ अपनी परिचालन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। यह पहल भारत में अनुसंधान और विकास क्षेत्र में वित्तीय अंतर को दूर करने और उच्च-जोखिम वाले नवाचारों के लिए पेशेंट कैपिटल (दीर्घकालिक पूंजी) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
प्रशासनिक एवं शासी संरचना
इस योजना का नोडल विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) है। इसका संचालन अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तहत गठित एक विशेष उद्देश्य कोष (Special Purpose Fund) और स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई द्वारा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला ANRF शासी बोर्ड इस योजना को रणनीतिक दिशा प्रदान करता है।
कार्यान्वयन और वित्तपोषण ढांचा
RDIF की कुल बजटीय निधि 1 लाख करोड़ रुपये है। फंड सीधे उद्योगों या स्टार्टअप्स में निवेश न करके द्वितीय-स्तरीय फंड मैनेजरों (SLFMs) के माध्यम से पूंजी का वितरण करेगा। ये SLFMs वैकल्पिक निवेश कोष (AIF), विकास वित्त संस्थान (DFI) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) हो सकते हैं, जो आरडीआई योगदान के बराबर निजी पूंजी जुटाने में भी मदद करेंगे।
मुख्य उद्देश्य और लक्षित क्षेत्र
इस फंड का मुख्य लक्ष्य सनराइज क्षेत्रों तथा रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में निजी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है। यह उच्च प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों (TRL) वाले परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट्स का वित्तपोषण करने, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण और डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स की स्थापना को सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित है।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीतियों, और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प से सीधे तौर पर जुड़ा है। यह व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक आधुनिक प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत करती है।
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