
वी-डेम डेमोक्रेसी इंडेक्स और भारत में चुनावी लोकतंत्र की स्थिति
वी-डेम इंस्टीट्यूट की नवीनतम डेमोक्रेसी रिपोर्ट ने भारत के चुनावी लोकतंत्र सूचकांक में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत का स्कोर वर्ष 1975 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक स्वतंत्रताओं और वैधानिक स्वतंत्रता पर गहरे प्रभाव को रेखांकित करता है।
वी-डेम डेमोक्रेसी इंडेक्स और भारत में चुनावी लोकतंत्र की स्थिति
सारांश
वी-डेम इंस्टीट्यूट की नवीनतम डेमोक्रेसी रिपोर्ट ने भारत के चुनावी लोकतंत्र सूचकांक में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत का स्कोर वर्ष 1975 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक स्वतंत्रताओं और वैधानिक स्वतंत्रता पर गहरे प्रभाव को रेखांकित करता है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
स्वीडन के वी-डेम (Varieties of Democracy) संस्थान द्वारा जारी यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र की गुणवत्ता का आकलन करती है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत को 'चुनावी निरंकुशता' (Electoral Autocracy) की श्रेणी में रखा गया है। यह गिरावट मुख्य रूप से वर्ष 2009 के बाद से निरंतर देखी जा रही है, जो संस्थागत तंत्र में बढ़ते दबाव का संकेत देती है।
प्रभावित क्षेत्र और चिंताएं
लोकतांत्रिक मूल्यों के सूचकांक में मीडिया की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक समाज की सक्रियता और विपक्षी दलों के राजनीतिक स्पेस में कमी को प्रमुख कारण बताया गया है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संचालन के बावजूद, संस्थागत जवाबदेही और कानून के शासन में आई शिथिलता ने वैश्विक स्तर पर भारतीय लोकतंत्र की रेटिंग को प्रभावित किया है।
सरकारी प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण
भारतीय प्रशासनिक हलकों और नीति निर्माताओं द्वारा इन सूचकांकों की कार्यप्रणाली और उनकी तटस्थता पर अक्सर सवाल उठाए जाते रहे हैं। सरकार का पक्ष यह रहा है कि ऐसे सूचकांक अक्सर पश्चिमी दृष्टिकोण और अपर्याप्त या पक्षपाती डेटा पर आधारित होते हैं, जो देश की विशाल और जीवंत लोकतांत्रिक विविधता को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्व
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 (राजव्यवस्था और शासन) के लिए यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें लोकतंत्र की परिभाषा, संस्थागत स्वायत्तता, स्वतंत्र न्यायपालिका, मीडिया की भूमिका और वैश्विक लोकतंत्र सूचकांकों की विश्वसनीयता जैसे आयामों पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे इस प्रकार के मूल्यांकनों का अध्ययन करते समय वैश्विक मानकों और राष्ट्रीय संप्रभुता के बीच के संतुलन को समझें।

तिरंगे की आड़ में उत्पात का इरादा: संजय निरुपम
शिवसेना (शिंदे गुट) नेता संजय निरुपम ने आरोप लगाया है कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपेके की दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा रैली आयोजित करने के पीछे मुख्य मकसद तिरंगे की आड़ में उत्पात मचाना था। उन्होंने कहा कि झंडा फहराने की अपील केवल एक बहाना मात्र थी, जिसका असल उद्देश्य कुछ और ही था।
शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपेके को लेकर एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा रैली निकालने के पीछे कोई नेक इरादा नहीं था, बल्कि इसके जरिए शहर की शांति और व्यवस्था को प्रभावित करने की योजना थी।
तिरंगा रैली को बताया महज एक बहाना
संजय निरुपम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिल्ली के कनॉट प्लेस में जिस तरह से लोगों से झंडा फहराने की अपील की गई थी, वह केवल एक ढाल थी। उनके मुताबिक असली मकसद तिरंगे की आड़ में सार्वजनिक स्थल पर उत्पात मचाना और अराजकता फैलाना था।
राजनीतिक गलियारों में गरमाई सियासत
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। इस प्रकार के आयोजनों और उनके पीछे छिपे इरादों को लेकर विभिन्न नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी इस तरह की गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।

दिल्ली में प्रदर्शनों के बीच युवाओं ने बनाए अनोखे ऑनलाइन गेम्स
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शनों के बीच युवाओं ने 'भाग नेहा भाग', 'जंतर-मंतर चलो' और 'जंतर-मंतर टू जेल' जैसे मुफ्त ऑनलाइन गेम्स तैयार किए हैं। इन गेम्स में खिलाड़ियों को पुलिस, बैरिकेड्स और आंसू गैस से बचते हुए 'लोकतंत्र' के सिक्के जुटाने होते हैं।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विभिन्न प्रदर्शनों के बीच युवाओं ने विरोध जताने और अपनी बात रखने का अनोखा तरीका खोज निकाला है। युवाओं द्वारा 'भाग नेहा भाग', 'जंतर-मंतर चलो' और 'जंतर-मंतर टू जेल' नाम से मुफ्त ऑनलाइन गेम्स विकसित किए गए हैं। ये गेम्स सोशल मीडिया और युवाओं के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन रहे हैं।
बैरिकेड्स और आंसू गैस से बचने की चुनौती
इन गेम्स की थीम पूरी तरह से मैदानी प्रदर्शनों पर आधारित है। गेम में खिलाड़ियों के पास प्रदर्शनकारी या पुलिसकर्मी बनने का विकल्प रहता है। बतौर प्रदर्शनकारी खेलते हुए खिलाड़ियों को रास्ते में आने वाले पुलिस बैरिकेड्स और दागे जाने वाले आंसू गैस के गोलों से खुद को बचाते हुए आगे बढ़ना होता है।
लोकतंत्र के सिक्के और डिटेंशन सेंटर का सफर
गेमिंग कांसेप्ट को रोचक बनाने के लिए इसमें खास टास्क जोड़े गए हैं। एक गेम में खिलाड़ी को आगे बढ़ते हुए 'लोकतंत्र' और 'जवाबदेही' के सिक्के जमा करने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं दूसरे गेम में यदि खिलाड़ी पुलिस की पकड़ में आ जाता है, तो उसे पकड़कर डिटेंशन सेंटर ले जाया जाता है।

सिंगर नेहा सिंह राठौर विवाद पर कंगना रनौत की प्रतिक्रिया
एक निजी न्यूज़ चैनल द्वारा सिंगर नेहा सिंह राठौर को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद माफी मांगने का मामला सामने आया है। इस पर नेहा ने अभिनेत्री कंगना रनौत को टैग करते हुए सवाल पूछा था, जिसके जवाब में कंगना ने कहा कि टीआरपी के लिए किसी भी महिला को बदनाम करना बेहद घटिया बात है।
एक निजी न्यूज़ चैनल ने अपनी एक रिपोर्ट के दौरान सिंगर नेहा सिंह राठौर को लेकर बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस खबर के सामने आने और विवाद बढ़ने के बाद संबंधित चैनल ने उनसे माफी मांग ली थी। इसके बाद नेहा सिंह राठौर ने अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत को सोशल मीडिया पर टैग करते हुए लिखा कि क्या आपको डर नहीं लगता?
कंगना रनौत ने की निंदा और दी तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके और नेहा सिंह राठौर के राजनीतिक विचार एक-दूसरे के विपरीत हैं और वे उनके विचारों को अस्वीकार करती हैं। इसके बावजूद कंगना ने कड़े शब्दों में कहा कि सिर्फ टीआरपी या लोकप्रियता हासिल करने के लिए किसी भी महिला को इस तरह से बदनाम करना बेहद घटिया हरकत है।
चैनल के प्रमुख पर जिम्मेदारी लेने की मांग
कंगना रनौत ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के मामलों की जिम्मेदारी चैनल के शीर्ष अधिकारियों को लेनी चाहिए। मीडिया घरानों द्वारा इस प्रकार की भाषा का प्रयोग और महिलाओं के प्रति ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं, जिन पर लगाम लगनी चाहिए।

आचार संहिता उल्लंघन केस: सपा विधायक रागिनी सोनकर पर गैर जमानती वारंट
जौनपुर (यूपी) में एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर सहित 3 लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता और कोविड-19 गाइडलाइन के उल्लंघन के मामले में कोर्ट के आदेश के बावजूद लगातार अनुपस्थित रहने पर की गई है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर समेत कुल तीन लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। अदालत का यह सख्त रुख उस स्थिति में सामने आया है जब आरोपियों की तरफ से लगातार कोर्ट के आदेशों की अनदेखी की जा रही थी।
2022 विधानसभा चुनाव से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान का है। चुनाव प्रचार के वक्त आचार संहिता और कोविड-19 महामारी से जुड़ी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने का आरोप इन पर लगा था। इसी मामले की सुनवाई के सिलसिले में अदालत द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद आरोपी कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे थे।
अगली सुनवाई की तारीख तय
न्यायालय द्वारा निर्देशों की लगातार अवहेलना और अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए यह कानूनी कार्रवाई की गई है। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई आगामी 22 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

लंदन में ध्रुव राठी का विरोध, 'भारत प्रेमी' बोले- PM मोदी के साथ हैं
लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में शनिवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे यूट्यूबर ध्रुव राठी का जोरदार विरोध हुआ। स्थिति को संभालते हुए पुलिस ने दोनों गुटों को अलग रखा। वहीं 'इंडिया डायस्पोरा यूके' के संस्थापक हृदेश गुप्ता ने अपील जारी कर कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में शनिवार को एक बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रसिद्ध यूट्यूबर ध्रुव राठी को वहां मौजूद दूसरे गुट के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव और नारेबाजी के बीच पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों गुटों को अलग रखा, जिससे स्थिति नियंत्रण में रही।
'भारत प्रेमी' गुट का जवाबी प्रदर्शन
ध्रुव राठी के प्रदर्शन के जवाब में वहां बड़ी संख्या में 'भारत प्रेमी' लोग एकत्र हो गए और उन्होंने जवाबी प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाथों में तिरंगा लिए इन प्रदर्शनकारियों ने देश और प्रधानमंत्री के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इस दौरान माहौल पूरी तरह से गर्मा गया था, जिसे पुलिस अधिकारियों ने मुस्तैदी से संभाला।
इंडिया डायस्पोरा यूके की अपील
इस पूरे घटनाक्रम के बीच 'इंडिया डायस्पोरा यूके' के संस्थापक हृदेश गुप्ता का बयान भी सामने आया। उन्होंने सभी 'भारत प्रेमी' लोगों और प्रवासी भारतीयों से एकजुट रहने की अपील जारी की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय नागरिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के संवैधानिक संस्थानों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।
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