
वल्लूर थर्मल पावर प्रोजेक्ट: एनजीटी का नया आदेश और यूपीएससी परिप्रेक्ष्य
वल्लूर थर्मल पावर प्रोजेक्ट वर्तमान में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और गर्म अपशिष्ट जल के निर्वहन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की जाँच के दायरे में है। यह परियोजना तमिलनाडु के ऊर्जा परिदृश्य और तटीय नियमन क्षेत्र के अनुपालन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वल्लूर थर्मल पावर प्रोजेक्ट वर्तमान में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और गर्म अपशिष्ट जल के निर्वहन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की जाँच के दायरे में है। यह परियोजना तमिलनाडु के ऊर्जा परिदृश्य और तटीय नियमन क्षेत्र के अनुपालन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
परिचय एवं अवस्थिति
वल्लूर थर्मल पावर प्रोजेक्ट तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में स्थित एक प्रमुख कोयला आधारित विद्युत संयंत्र है। इसकी कुल स्थापित क्षमता 1500 मेगावाट है, जिसमें 500 मेगावाट की तीन इकाइयाँ शामिल हैं। इस परियोजना का विकास एनटीपीसी तमिलनाडु एनर्जी कंपनी लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह कंपनी राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम और तमिलनाडु पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच एक संयुक्त उद्यम है। इस संयंत्र से उत्पादित कुल बिजली का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा तमिलनाडु को आवंटित किया जाता है, जबकि शेष बिजली आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और पुडुचेरी को आपूर्ति की जाती है।
परिचालन विशेषताएँ एवं पर्यावरण पहल
यह संयंत्र अपनी अनूठी तकनीकी और अवसंरचनात्मक विशेषताओं के लिए जाना जाता है। संयंत्र में प्रतिवर्ष लगभग 9 मिलियन मीट्रिक टन कोयले की खपत होती है, जिसे महानदी, सेंट्रल और ईस्टर्न कोलफील्ड्स से रेल-सह-समुद्र मार्ग द्वारा एन्नोर बंदरगाह तक लाया जाता है। बंदरगाह से संयंत्र तक कोयला परिवहन के लिए एक लंबी पाइप कन्वेयर प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जो एन्नोर क्रीक के ऊपर धूल-मुक्त संचालन सुनिश्चित करती है। इसके अतिरिक्त, संयंत्र की संपूर्ण जल आवश्यकता को पूरा करने के लिए समुद्र के पास एक विलवणीकरण इकाई स्थापित की गई है।
वर्तमान विवाद और विनियामक चुनौतियाँ
इस परियोजना से संबंधित हालिया घटनाक्रम में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की दक्षिणी पीठ ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि संयंत्र द्वारा कोसस्थलाईयार नदी और उसकी सहायक जलधाराओं में सीधे गर्म अपशिष्ट जल का विसर्जन किया जा रहा है। यह आरोप पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और तटीय नियमन क्षेत्र की स्वीकृतियों के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। ऐसे मामले थर्मल पावर प्लांटों के संचालन में पर्यावरणीय मानकों के कड़ाई से अनुपालन और विनियामक निगरानी की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं।

विदेशी फंडिंग के आरोपों पर आशुतोष रांका का पलटवार
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के विदेशी फंडिंग के आरोपों पर सीजीपी के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उन्हें विदेशी फंड मिल रहा था, तो मंत्री उनसे हाथ क्यों मिला रहे थे और चाय-नाश्ता क्यों कर रहे थे? इस मामले पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बीजेपी को आड़े हाथों लिया है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से लगाए गए विदेशी फंडिंग के गंभीर आरोपों पर 'सीजीपी' के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कड़े सवाल पूछते हुए कहा है कि यदि उन्हें या उनके संगठन को किसी भी प्रकार की विदेशी फंडिंग मिल रही थी, तो केंद्रीय मंत्री उनसे मुलाकात क्यों कर रहे थे और उनके साथ हाथ क्यों मिला रहे थे?
चाय-नाश्ते और महुआ मोइत्रा का तंज
आशुतोष रांका ने आगे सवाल किया कि जब उन पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, तब उनके साथ बैठकर चाय-नाश्ता क्यों किया जा रहा था? इस पूरे घटनाक्रम और विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी कूदते हुए इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा है और निशाना साधा है।

सूर्यकुमार यादव ने परिवार संग पीएम मोदी से की मुलाकात
दिवाली से पहले भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव ने अपने परिवार के साथ दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पीएम नरेंद्र मोदी से खास मुलाकात की। इस दौरान एक छोटी बच्ची ने पीएम मोदी के सामने भजन गाया, जिसे सुनकर उन्होंने तालियां बजाते हुए उसकी जमकर तारीफ की।
दिवाली के पावन अवसर से पहले भारत के क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात का एक बेहद खास वीडियो भी सामने आया है। इस दौरान सूर्यकुमार यादव की पत्नी देविशा और उनकी बेटी रिद्धिमा भी उनके साथ मौजूद थीं।
बच्ची के भजन पर पीएम मोदी ने बजाईं तालियां
मुलाकात के दौरान माहौल उस समय बेहद खुशनुमा हो गया जब एक छोटी बच्ची ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने एक सुंदर भजन प्रस्तुत किया। बच्ची की सुरीली आवाज और भजन सुनकर पीएम मोदी काफी प्रसन्न नजर आए और उन्होंने तालियां बजाकर बच्ची का उत्साहवर्धन किया और उसकी जमकर तारीफ की।

FSSAI ने Old Monk को रम मानने से किया इनकार
महाराष्ट्र में ओल्ड मॉंक की बिक्री पर फिलहाल रोक लगी हुई है क्योंकि FSSAI ने इस पेय को रम मानने से इनकार करते हुए इसके लेबल पर आपत्ति जताई है। इसके बाद निर्माता कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है और वह नया लेबल FSSAI को सौंपेगी। इस बिक्री के रुकने से राज्य आबकारी विभाग को करीब 350 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लोकप्रिय पेय 'ओल्ड मॉंक' (Old Monk) को रम मानने से साफ इनकार कर दिया है। प्राधिकरण ने इस पेय के लेबल पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। इस तकनीकी और प्रशासनिक पेंच के कारण महाराष्ट्र राज्य में ओल्ड मॉंक की बिक्री फिलहाल शुरू नहीं हो पा रही है।
कंपनी का फैसला और वित्तीय नुकसान
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद, निर्माता कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका वापस ले ली है। अब कंपनी की ओर से एक नया लेबल तैयार करके FSSAI को सौंपा जाएगा, ताकि मंजूरी मिलने के बाद बाजार में उत्पादों की बिक्री दोबारा शुरू हो सके। हालांकि, इस बिक्री के लंबे समय तक रुकने की वजह से राज्य के आबकारी विभाग को लगभग 350 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।

फलाहारी महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री को लिखा पत्र, मांगी माफी
मंदिर-मस्जिद प्रकरण के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री को पत्र लिखकर मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में आकर माफी मांगने की हिदायत दी है। यह विवाद कथा के दौरान भगवान राम और कृष्ण की तुलना में दिए गए बयान के बाद उठा है।
मंदिर-मस्जिद प्रकरण के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की हिदायत दी है।
बयान के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद धीरेंद्र शास्त्री द्वारा हाल ही में एक कथा के दौरान दिए गए बयान के बाद उपजा है। कथा के दौरान उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण के संदर्भ में तुलनात्मक टिप्पणी की थी, जिसके बाद से विभिन्न धार्मिक हलकों में विरोध देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में फलाहारी महाराज ने पत्र जारी कर इस पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।

यूपी की पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने दिया इस्तीफा
उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के बाद अब पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। वह यूपी सरकार में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के पद पर तैनात थीं। अनुपमा पेशे से सिंगर और सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी हैं, जिनके 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के बाद अब पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। अनुपमा सरोज उत्तर प्रदेश सरकार में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रही थीं। उनके इस अचानक इस्तीफे के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा और चुनावी अटकलें
अधिकारी अनुपमा सरोज प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ अपनी गायकी के पेशे यानी बतौर सिंगर भी पहचानी जाती हैं। वह समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी हैं। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेजी से लगाई जा रही हैं कि वह आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में चुनावी मैदान में उतर सकती हैं।
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