
उर्फी जावेद का धर्म परिवर्तन? एक्ट्रेस ने खुद सामने आकर खोली अफवाहों की पोल
सोशल मीडिया सेंसेशन उर्फी जावेद एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनके अतरंगी कपड़े नहीं बल्कि उनके धर्म परिवर्तन का दावा है। मीता चौधरी नाम की एक महिला ने दावा किया कि उर्फी ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है और अपना नया नाम 'रीता भारद्वाज' रख लिया है। हालांकि, उर्फी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने कभी अपना नाम या धर्म नहीं बदला है।
सोशल मीडिया सेंसेशन उर्फी जावेद एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनके अतरंगी कपड़े नहीं बल्कि उनके धर्म परिवर्तन का दावा है। मीता चौधरी नाम की एक महिला ने दावा किया कि उर्फी ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है और अपना नया नाम 'रीता भारद्वाज' रख लिया है। हालांकि, उर्फी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने कभी अपना नाम या धर्म नहीं बदला है।
नाम और धर्म बदलने के दावे पर उर्फी का करारा जवाब
इंटरनेट पर आए दिन किसी न किसी सेलिब्रिटी को लेकर अफवाहें उड़ती रहती हैं, लेकिन जब बात उर्फी जावेद की हो, तो मामला पल भर में वायरल हो जाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर मीता चौधरी नाम की एक महिला का पोस्ट तेजी से फैला, जिसमें यह दावा किया गया कि उर्फी जावेद अब मुस्लिम से हिंदू बन चुकी हैं। इस पोस्ट में आगे यह भी कहा गया कि धर्म बदलने के बाद एक्ट्रेस ने अपना नाम बदलकर रीता भारद्वाज कर लिया है।
जैसे ही यह खबर जंगल की आग की तरह फैली, हमेशा बेबाकी से अपनी बात रखने वाली उर्फी जावेद ने इस पर चुप्पी तोड़ी। उर्फी ने इन दावों को पूरी तरह से बकवास और मनगढ़ंत करार दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की बातों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है और उन्होंने कभी भी अपना नाम या धर्म नहीं बदला है।
'अपने शब्दों को लेकर भी नंगी होती हूं'
अपने अनोखे फैशन सेंस के लिए पहचानी जाने वाली उर्फी जावेद अपने बयानों को लेकर भी उतनी ही सुर्खियां बटोरती हैं। इस अफवाह पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया। उर्फी ने कहा, "मैंने कभी अपना नाम या धर्म नहीं बदला। मैं सिर्फ कपड़ों को लेकर नहीं बल्कि अपने शब्दों को लेकर भी नंगी होती हूं, लेकिन आज मेरा मूड नहीं है।"
उर्फी का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह ट्रोलर्स या अफवाह फैलाने वालों को हल्के में नहीं लेतीं। जहां लोग उनके इस बेबाक अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे हमेशा की तरह उनका पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं।
अफवाहों का बाजार और सोशल मीडिया की हकीकत
यह पहली बार नहीं है जब उर्फी जावेद को लेकर इस तरह की झूठी खबरें सामने आई हैं। इससे पहले भी उनके लुक्स, पर्सनल लाइफ और बयानों को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ाई जा चुकी हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी बिना सिर-पैर की बात को सच मान लेना बेहद आम हो गया है।
मीता चौधरी के इस दावे के पीछे की वजह क्या थी, यह तो साफ नहीं हो पाया है, लेकिन उर्फी के सीधे और तीखे जवाब ने इस पूरे विवाद पर पूरी तरह से पूर्णविराम लगा दिया है। एक्ट्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह जैसी हैं, वैसी ही रहेंगी और किसी भी तरह की झूठी खबर उनके वजूद को नहीं बदल सकती। फिलहाल, इस स्पष्टीकरण के बाद उन सभी दावों पर पानी फिर गया है जो उनके रीता भारद्वाज बनने की कहानी बुन रहे थे।

पावरस्टार पवन सिंह का धमाकेदार पुश-अप्स वीडियो इंटरनेट पर वायरल
रिएलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' के मंच पर पवन सिंह ने कॉमेडियन भारती सिंह को अपनी पीठ पर बैठाकर पुश-अप्स लगाकर हर किसी को हैरान कर दिया। इस मजेदार और पावर-पैक मोमेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। भारती के चिर-परिचित मजाकिया अंदाज ने इस पल को और भी यादगार बना दिया।
रिएलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' के मंच पर पवन सिंह ने कॉमेडियन भारती सिंह को अपनी पीठ पर बैठाकर पुश-अप्स लगाकर हर किसी को हैरान कर दिया। इस मजेदार और पावर-पैक मोमेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। भारती के चिर-परिचित मजाकिया अंदाज ने इस पल को और भी यादगार बना दिया।
'भोजपुरी बवाल' के मंच पर हुआ असली 'पावर' शो
भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और गायक पवन सिंह अपने दमदार अभिनय और गायकी के साथ-साथ अपनी फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में रिएलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' के सेट पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने दर्शकों को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया। शो में बतौर खास मेहमान शामिल हुईं देश की मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह ने जब पवन सिंह की फिटनेस को चुनौती दी, तो पावरस्टार ने इसे बड़े ही अनोखे अंदाज में स्वीकार किया।
जब 'पावर' पर बैठा 'जनरेटर'
वायरल हो रहे प्रोमो वीडियो में देखा जा सकता है कि पवन सिंह पुश-अप्स लगाने की स्थिति में आते हैं और भारती सिंह बिना झिझक उनकी पीठ पर बैठ जाती हैं। भारती के वजन के बावजूद पवन सिंह बिना रुके और बेहद आसानी से पुश-अप्स मारना शुरू कर देते हैं। पवन सिंह की इस बेमिसाल ताकत और स्टेमिना को देखकर सेट पर मौजूद सभी लोग ताली बजाने पर मजबूर हो गए। इस दौरान भारती सिंह का सेंस ऑफ ह्यूमर भी चरम पर था। उन्होंने हंसते हुए कहा कि जब 'पावर' के ऊपर 'जनरेटर' बैठेगा, तो सोचिए कितनी शानदार और डबल पावर देखने को मिलेगी। भारती की इस बात पर सेट पर ठहाके गूंज उठे।
सोशल मीडिया पर छा गया वीडियो
इस मजेदार और हैरत अंगेज वीडियो के सामने आते ही यह इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल गया। पवन सिंह के फैंस उनके इस अंदाज की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि पवन सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें भोजपुरी इंडस्ट्री का 'पावरस्टार' क्यों कहा जाता है। वहीं दूसरी तरफ, भारती सिंह और पवन सिंह की यह जुगलबंदी लोगों को खूब पसंद आ रही है। कमेंट सेक्शन में फैंस दिल और फायर वाले इमोजी की बारिश कर रहे हैं।
पावरस्टार का जलवा और दर्शकों का प्यार
पवन सिंह अक्सर अपने गानों और फिल्मों को लेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन टीवी शो के दौरान उनकी यह ऑन-स्क्रीन एनर्जी दर्शकों को खूब भा रही है। 'भोजपुरी बवाल' का यह एपिसोड इस समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंडिंग लिस्ट में शामिल हो चुका है। पवन सिंह की फिटनेस और भारती सिंह के कॉमिक टाइमिंग ने मिलकर इस प्रोमो को बेहद खास बना दिया है।

सुधर जाओ वरना...' स्वतंत्रता दिवस पर बाबा रामदेव का सरकार को कड़ा अल्टीमेटम
सरकारी नौकरियों में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ योगगुरु रामदेव ने मोर्चा खोल दिया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तंत्र में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन के रास्ते पर उतरना पड़ेगा।
सरकारी नौकरियों में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ योगगुरु रामदेव ने मोर्चा खोल दिया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तंत्र में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन के रास्ते पर उतरना पड़ेगा।
रामदेव का अल्टीमेटम: नौकरियों में धांधली पर फूटा गुस्सा
देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां पूरा राष्ट्र जश्न में डूबा था, वहीं योगगुरु रामदेव के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रामदेव ने सरकारी नौकरियों में हो रही कथित गड़बड़ियों और रिश्वतखोरी के दीमक पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और व्यवस्था में फैला भ्रष्टाचार बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है। अगर समय रहते प्रशासनिक कमियों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो देश में असंतोष की ज्वाला भड़क सकती है।
'रामदेव को फिर न उतरना पड़े मैदान में': आंदोलन की चेतावनी
वर्ष 2011 के काले धन विरोधी आंदोलन की याद ताजा करते हुए बाबा रामदेव ने कहा, "देश में चारों तरफ हंगामा मचा है। ऐसे में अगर बार-बार आंदोलन करने पड़े तो देश की प्रगति की रफ्तार कैसे बनी रहेगी? इसीलिए सुधर जाओ, नहीं तो देश में और बड़े आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।"
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि व्यवस्था को ऐसी नौबत नहीं आने देनी चाहिए कि रामदेव को दोबारा सड़क पर उतरकर आंदोलन की कमान संभालनी पड़े। उनका इशारा साफ था कि देश का युवा आज हताश है और पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहा है।
प्रशासनिक पारदर्शिता और युवाओं का भविष्य
रामदेव ने जोर देकर कहा कि स्वतंत्रता का असली मतलब तब तक अधूरा है, जब तक आम नागरिक को बिना रिश्वत और सिफारिश के उसका हक न मिले। भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़े और रिश्वतखोरी जैसी घटनाओं ने योग्य अभ्यर्थियों के मनोबल को तोड़ा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सके।
सियासी गलियारों में गर्माहट
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर योगगुरु का यह सख्त रुख कई मायनों में अहम माना जा रहा है। रामदेव के इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासनिक महकमे और सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस चेतावनी को किस तरह लेती है और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए क्या कदम उठाती है।

वंदे मातरम विवाद: बीजेपी का राहुल-सोनिया पर बड़ा आरोप, कांग्रेस की सफाई
स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने पूरा वंदे मातरम गाने से रोका। वहीं, कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज करते हुए इसे गलतफहमी करार दिया है।
स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने पूरा वंदे मातरम गाने से रोका। वहीं, कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज करते हुए इसे गलतफहमी करार दिया है।
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत पर सियासी घमासान
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि ध्वजारोहण के समय जब वंदे मातरम गाया जा रहा था, तब राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने उसे पूरा गाने से रोकने का इशारा किया। बीजेपी का कहना है कि यह राष्ट्रगीत का अनादर है और कांग्रेस नेतृत्व की मानसिकता को उजागर करता है।
बीजेपी का तीखा हमला
बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस हमेशा से राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत के प्रति उदासीन रही है। पार्टी के अनुसार, वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि वंदे मातरम के दौरान बीच में ही रोकने का प्रयास किया गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और देश भावना के खिलाफ है।
कांग्रेस की ओर से आई सफाई
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बीजेपी के दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और भ्रामक बताया। जयराम रमेश के अनुसार, वीडियो में दिख रहा सोनिया गांधी का इशारा राष्ट्रगीत को रोकने के लिए नहीं था, बल्कि वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बैठने के लिए सही स्थान या कुर्सी का प्रबंध करने का आग्रह कर रही थीं।
वीडियो क्लिप पर बढ़ा विवाद
घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बीजेपी समर्थक इसे कांग्रेस की संकीर्ण सोच का सबूत बताकर प्रसारित कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी मामले को राजनीतिक रूप देने के लिए एक सामान्य से दृश्य को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। दोनों ही पार्टियां इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्कों के साथ डटी हुई हैं।

लाल किले के जश्न से फिर दूर रहे राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दूसरे साल लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। साल 2024 में राहुल गांधी को पांचवीं पंक्ति में बैठाए जाने पर भारी विवाद हुआ था, जिसके बाद से दोनों शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
खबर का निचोड़
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दूसरे साल लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। साल 2024 में राहुल गांधी को पांचवीं पंक्ति में बैठाए जाने पर भारी विवाद हुआ था, जिसके बाद से दोनों शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
लाल किले पर विपक्ष की गैरमौजूदगी और सियासी गरमाहट
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से जब तिरंगा फहराया जा रहा था, तब दर्शक दीर्घा में विपक्ष की दो सबसे प्रमुख आवाजों की अनुपस्थिति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार दूसरे साल इस राष्ट्रीय उत्सव से दूर रहे। स्वतंत्रता दिवस जैसे ऐतिहासिक और औपचारिक मौके पर देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं का शामिल न होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
2024 का 'सीटिंग प्रोटोकॉल' विवाद
इस पूरी दूरी की जड़ें साल 2024 के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ी मानी जा रही हैं। 2024 में जब राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद पहली बार लाल किले पहुंचे थे, तब उन्हें मुख्य मंच के सामने पांचवीं पंक्ति में सीट आवंटित की गई थी। आमतौर पर नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्रियों के समकक्ष अगली पंक्तियों में जगह दी जाती है। इस व्यवस्था पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया था और इसे लोकतंत्र व विपक्ष के पद का अपमान करार दिया था।
सरकार की सफाई और कांग्रेस का पलटवार
तत्कालीन विवाद पर रक्षा मंत्रालय और सरकारी अधिकारियों की तरफ से सफाई दी गई थी कि ओलंपिक पदक विजेताओं को अग्रिम पंक्तियों में सम्मान देने के लिए सीटिंग प्लान में बदलाव किया गया था। हालांकि, कांग्रेस ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया था। पार्टी नेताओं का कहना था कि राष्ट्रीय आयोजनों में प्रोटोकॉल का पालन करना सरकार की जिम्मेदारी होती है और विपक्ष के संवैधानिक पद की गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
लगातार दूसरी बार दूरी के मायने
2024 के इस बड़े विवाद के बाद, 2025 में भी दोनों नेताओं ने समारोह से दूरी बनाए रखी थी और अब 2026 में भी यह सिलसिला जारी रहा। इस बार भी लाल किले की प्राचीर के सामने विपक्षी खेमे की अग्रिम कुर्सियां खाली नजर आईं। रक्षा मंत्रालय द्वारा तय प्रोटोकॉल और विपक्षी नेताओं के आत्मसम्मान के बीच खींचतान ने यह साफ कर दिया है कि दो साल पहले शुरू हुआ यह विवाद अब एक बड़ी सियासी खाई का रूप ले चुका है।

लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: 75 मिनट में समेटा 80वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन
80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 75 मिनट का देश के नाम संबोधन दिया। यह पिछले 4 वर्षों में उनका सबसे छोटा भाषण रहा। पिछले वर्ष 103 मिनट के रिकॉर्ड भाषण के बाद, इस बार उन्होंने कम समय में अपनी बात रखते हुए देश के प्राथमिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
खबर का निचोड़
80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 75 मिनट का देश के नाम संबोधन दिया। यह पिछले 4 वर्षों में उनका सबसे छोटा भाषण रहा। पिछले वर्ष 103 मिनट के रिकॉर्ड भाषण के बाद, इस बार उन्होंने कम समय में अपनी बात रखते हुए देश के प्राथमिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
ऐतिहासिक संबोधन और समय का गणित
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया। इस वर्ष उनका भाषण 75 मिनट तक चला, जो पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन दर्ज किया गया है।
समय के इस बदलाव ने राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में ध्यान आकर्षित किया है। यह भाषण उनके पूरे कार्यकाल का चौथा सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस भाषण भी बन गया है।
भाषणों का इतिहास: 2017 से 2025 तक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की अवधि में हमेशा विविधता देखने को मिली है। उनके कार्यकाल का सबसे छोटा भाषण वर्ष 2017 में आया था, जब उन्होंने मात्र 56 मिनट में अपना संबोधन समाप्त किया था।
इसके ठीक विपरीत, पिछले वर्ष यानी 2025 में उन्होंने लाल किले से 103 मिनट का ऐतिहासिक और अपना सबसे लंबा भाषण दिया था। 2025 के लंबे और विस्तृत संबोधन के बाद इस साल 75 मिनट का भाषण एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जहां उन्होंने बात को अधिक सटीक और केंद्रित रखा।
संक्षिप्त संबोधन के मायने
लाल किले से अपने भाषणों में प्रधानमंत्री अक्सर अपनी सरकार की उपलब्धियों, भावी योजनाओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का खाका पेश करते हैं। इस बार 75 मिनट के दायरे में उन्होंने देश के मुख्य विकास लक्ष्यों, सुरक्षा और आम नागरिकों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से शामिल किया।
अवधि भले ही पिछले साल की तुलना में कम रही हो, लेकिन संबोधन का प्रभाव और संदेश की गंभीरता पूरी तरह से कायम रही। यह बदलाव दिखाता है कि रणनीतिक संदेश देने के लिए समय की लंबाई नहीं, बल्कि विषय-वस्तु की स्पष्टता मायने रखती है।
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