
उपराष्ट्रपति द्वारा 'ज्ञानी अर्थ' स्वदेशी एआई स्टैक का शुभारंभ
भारत के उपराष्ट्रपति ने 'ज्ञानी अर्थ' नामक स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) स्टैक का अनावरण किया है। इसमें 'इवोन 3.3' भाषा मॉडल और 'प्लेक्सस' एजेंटिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह पहल देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने और डिजिटल संप्रभुता को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
सारांश (Summary): भारत के उपराष्ट्रपति ने 'ज्ञानी अर्थ' नामक स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) स्टैक का अनावरण किया है। इसमें 'इवोन 3.3' भाषा मॉडल और 'प्लेक्सस' एजेंटिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह पहल देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने और डिजिटल संप्रभुता को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
भारत सरकार डिजिटल संप्रभुता और आत्मनिर्भरता को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में उपराष्ट्रपति द्वारा 'ज्ञानी अर्थ' (Gnani Artha) स्वदेशी एआई स्टैक को लॉन्च किया गया है। यह तकनीक देश की अपनी डेटा सुरक्षा, भाषाई विविधता और रणनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है, जो विदेशी तकनीकी प्लेटफार्मों पर निर्भरता को कम करती है।
मुख्य घटक और विशेषताएं
इस स्वदेशी एआई स्टैक के दो प्रमुख घटक हैं। पहला 'इवोन 3.3' (Evon 3.3) फाउंडेशन भाषा मॉडल है, जो विभिन्न भारतीय भाषाओं और जटिल संदर्भों को समझने में सक्षम है। दूसरा 'प्लेक्सस' (Plexus) एजेंटिक प्लेटफॉर्म है, जो स्वायत्त रूप से कार्य करने और कार्यप्रवाह को स्वचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ढांचा उद्योगों, शासन और सार्वजनिक सेवाओं में एआई के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करता है।
परीक्षा के लिए महत्व
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय विज्ञान और प्रौद्योगिकी खंड के अंतर्गत 'स्वदेशी तकनीक', 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' और 'डिजिटल इंडिया' पहल से सीधे जुड़ा हुआ है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित करता है।

दलित आरक्षण: क्रिमी लेयर पर आपस में भिड़े चिराग और मांझी
सुप्रीम कोर्ट के दलित आरक्षण में उप-वर्गीकरण और क्रिमी लेयर वाले फैसले ने एनडीए के दो प्रमुख दलित चेहरों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। चिराग पासवान ने क्रिमी लेयर का कड़ा विरोध करते हुए जीतन राम मांझी के इस्तीफे की मांग की, तो मांझी ने भी पलटवार करते हुए चिराग से इस्तीफा मांग लिया।
खबर का निचोड़
सुप्रीम कोर्ट के दलित आरक्षण में उप-वर्गीकरण और क्रिमी लेयर वाले फैसले ने एनडीए के दो प्रमुख दलित चेहरों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। चिराग पासवान ने क्रिमी लेयर का कड़ा विरोध करते हुए जीतन राम मांझी के इस्तीफे की मांग की, तो मांझी ने भी पलटवार करते हुए चिराग से इस्तीफा मांग लिया।
आरक्षण विवाद: एनडीए के दो सहयोगियों में तलवारें खिंची
सुप्रीम कोर्ट के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) आरक्षण में उप-वर्गीकरण और क्रिमी लेयर लागू करने के फैसले के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार में सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के दो प्रमुख दलित नेता—केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी—आपस में भिड़ गए हैं। इस वैचारिक मतभेद ने अब व्यक्तिगत राजनीतिक हमले का रूप ले लिया है, जिससे एनडीए के भीतर का तनाव खुलकर सामने आ गया है।
चिराग का कड़ा रुख: 'पहले मांझी दें इस्तीफा'
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण में क्रिमी लेयर के सिद्धांत को लागू करने का पुरजोर विरोध किया है। उनका तर्क है कि छुआछूत और सामाजिक अस्पृश्यता की पृष्ठभूमि के कारण दलित समुदाय को आरक्षण मिला है, यह केवल आर्थिक उत्थान का जरिया नहीं है। चिराग ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर क्रिमी लेयर की व्यवस्था लागू ही करनी है, तो इसकी शुरुआत सबसे पहले जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन से होनी चाहिए। चिराग के अनुसार, मांझी परिवार लंबे समय से सत्ता के शीर्ष पदों का लाभ उठा रहा है, इसलिए उन्हें तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
मांझी का पलटवार: 'चिराग नहीं चाहते दूसरों का भला'
चिराग पासवान के इस बयान के बाद हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने भी जोरदार पलटवार किया। मांझी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि आरक्षण का लाभ दलित समुदाय के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचना अनिवार्य है। उन्होंने चिराग पर आरोप लगाया कि वे नहीं चाहते कि समाज के वंचित और शोषित वर्गों को उनका हक मिले। मांझी ने चिराग पासवान की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि खुद केंद्रीय मंत्री पद पर बैठे चिराग को नैतिक आधार पर तुरंत अपना इस्तीफा दे देना चाहिए।
एनडीए की बढ़ीं मुश्किलें, गर्माया राजनीतिक माहौल
आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर गठबंधन के दो प्रमुख मंत्रियों के बीच इस तरह की बयानबाजी ने केंद्र और बिहार सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक तरफ जहां चिराग पासवान अपनी पार्टी के मुख्य दलित वोट बैंक को साधे रखने के लिए क्रिमी लेयर के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ जीतन राम मांझी 'महादलित' कार्ड खेलकर आरक्षण के भीतर आरक्षण की वकालत कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच जारी इस जुबानी जंग ने राज्य में राजनीतिक पारे को चरम पर पहुंचा दिया है।

जयपुर में NEET PG परीक्षा रद्द: बिजली गुल होने पर हंगामा, अब 5 सितंबर को होगा पेपर
जयपुर के सीतापुरा स्थित ION डिजिटल जोन सेंटर पर NEET PG-2026 परीक्षा के दौरान बिजली गुल होने से भारी हंगामा खड़ा हो गया। सिस्टम बार-बार बंद होने से नाराज अभ्यर्थियों ने केंद्र के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर नई तारीख 5 सितंबर तय कर दी है।
खबर का निचोड़
जयपुर के सीतापुरा स्थित ION डिजिटल जोन सेंटर पर NEET PG-2026 परीक्षा के दौरान बिजली गुल होने से भारी हंगामा खड़ा हो गया। सिस्टम बार-बार बंद होने से नाराज अभ्यर्थियों ने केंद्र के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर नई तारीख 5 सितंबर तय कर दी है।
सिस्टम हुआ ठप, छात्रों का फूटा गुस्सा
देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET PG-2026 के दौरान जयपुर के सीतापुरा स्थित ION डिजिटल जोन केंद्र पर अचानक तकनीकी व्यवधान खड़ा हो गया। परीक्षा शुरू होते ही केंद्र में बिजली गुल हो गई, जिससे परीक्षार्थियों के कंप्यूटर सिस्टम बार-बार बंद होने लगे। परीक्षा में खलल पड़ने से अभ्यर्थियों का कीमती समय बर्बाद हुआ, जिसके बाद उनका सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने केंद्र परिसर में जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।
घंटों की मशक्कत के बाद प्रशासन का फैसला
सेंटर पर मचे हंगामे और अभ्यर्थियों के आक्रोश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। छात्रों का आरोप था कि बैकअप की समुचित व्यवस्था न होने के कारण उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। कंप्यूटर स्क्रीन अचानक बंद होने और समय कम पड़ने के चलते परीक्षार्थी परीक्षा कक्ष से बाहर निकल आए। स्थिति को नियंत्रण में लाने और मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा आयोजकों ने सीतापुरा केंद्र की परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया।
5 सितंबर को दोबारा आयोजित होगी परीक्षा
परीक्षा रद्द होने की घोषणा के साथ ही आयोजकों ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए नई तारीख का भी तुरंत एलान कर दिया। अब इस परीक्षा केंद्र के अभ्यर्थियों के लिए NEET PG परीक्षा 5 सितंबर को पुनः आयोजित की जाएगी। संबंधित एजेंसियों ने आश्वासन दिया है कि नई तिथि पर सभी तकनीकी इंतजाम दुरुस्त रखे जाएंगे ताकि किसी भी अभ्यर्थी को दोबारा इस तरह की अव्यवस्था का सामना न करना पड़े। आयोजकों की ओर से छात्रों को नए एडमिट कार्ड और समय से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइंस जल्द जारी की जाएंगी।

सीजेपी नेताओं पर सोनम वांगचुक का बड़ा बयान
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख चेहरों—अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका—पर निशाना साधते हुए कहा है कि ये नेता कोई संत नहीं हैं, बल्कि इनकी गहरी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। वांगचुक का मानना है कि इन नेताओं की गतिविधियां विशुद्ध रूप से सत्ता और प्रभाव से प्रेरित हैं।
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पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख चेहरों—अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका—पर निशाना साधते हुए कहा है कि ये नेता कोई संत नहीं हैं, बल्कि इनकी गहरी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। वांगचुक का मानना है कि इन नेताओं की गतिविधियां विशुद्ध रूप से सत्ता और प्रभाव से प्रेरित हैं।
राजनीति में संतों की जगह नहीं
लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और नवोन्मेषक सोनम वांगचुक अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को लेकर उनका हालिया आकलन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को किसी त्याग या जनसेवा के लिए समर्पित संत समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार, इन नेताओं के हर कदम के पीछे सुनियोजित राजनीतिक उद्देश्य छिपे हैं।
व्यक्तिगत बातचीत नहीं, केवल प्रत्यक्ष आकलन
सोनम वांगचुक ने यह भी साफ किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर सीजेपी के तीनों नेताओं से सीधे तौर पर कोई व्यक्तिगत चर्चा नहीं की है। हालांकि, सार्वजनिक मंचों पर उनके व्यवहार, भाषणों और सांगठनिक फैसलों को देखकर वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। वांगचुक का कहना है कि राजनीति में शामिल होने वाले लोगों का प्राथमिक मकसद अक्सर शक्ति हासिल करना होता है। किसी व्यक्ति की राजनीतिक आकांक्षाएं होना स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन जनता को इसे निस्वार्थ सेवा मानकर भ्रमित नहीं होना चाहिए।
'महत्वाकांक्षाहीन संत' होने का ढोंग नहीं
वांगचुक ने सीजेपी की कार्यशैली और उसके प्रमुख चेहरों की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, "वे निश्चित रूप से ऐसे संत नहीं हैं जिन्हें किसी चीज़ की चाहत न हो।" इस टिप्पणी ने पार्टी के भीतर और बाहर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अक्सर नए दौर के राजनीतिक दल खुद को पारंपरिक नेताओं से अलग और पूरी तरह जनता के प्रति समर्पित दिखाने का प्रयास करते हैं। वांगचुक के इस बयान ने सीजेपी के इसी दाव-पेच पर सीधा प्रहार किया है।
बयानों के बाद गरमाई सियासत
सोनम वांगचुक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीजेपी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिशों में जुटी है। अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे नेताओं की पहचान अब तक मुखर चेहरों के रूप में रही है। लेकिन एक प्रमुख और सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उनकी महत्वाकांक्षाओं को सार्वजनिक रूप से रेखांकित किए जाने के बाद, पार्टी की छवि और उसके आगामी राजनीतिक सफर पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।

दलीप ट्रॉफी: इशान किशन चोटिल, 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने संभाली ईस्ट ज़ोन की कमान
दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में सेंट्रल ज़ोन के खिलाफ मैच के दौरान ईस्ट ज़ोन के कप्तान इशान किशन की कलाई में चोट लग गई। उनके मैदान से बाहर जाने के बाद 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को टीम की कमान सौंपी गई। सीनियर क्रिकेट में वैभव का कप्तानी के तौर पर यह पहला अनुभव है।
खबर का निचोड़
दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में सेंट्रल ज़ोन के खिलाफ मैच के दौरान ईस्ट ज़ोन के कप्तान इशान किशन की कलाई में चोट लग गई। उनके मैदान से बाहर जाने के बाद 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को टीम की कमान सौंपी गई। सीनियर क्रिकेट में वैभव का कप्तानी के तौर पर यह पहला अनुभव है।
इशान किशन की चोट और मैदान पर अचानक बदला घटनाक्रम
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में ईस्ट ज़ोन को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब उनके नियमित कप्तान और स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज इशान किशन चोटिल होकर मैदान से बाहर चले गए। सेंट्रल ज़ोन की पहली पारी के 19वें ओवर के दौरान इशान की दाहिने हाथ की कलाई में तेज गेंद लगने से गंभीर चोट आई। दर्द से कराहते इशान को तुरंत मेडिकल टीम की देखरेख में मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। मैच के इस नाजुक मोड़ पर टीम प्रबंधन और सीनियर खिलाड़ियों ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने भारतीय घरेलू क्रिकेट के गलियारों में हलचल पैदा कर दी।
15 साल के वैभव सूर्यवंशी के कंधों पर आई कप्तानी की जिम्मेदारी
इशान के बाहर होते ही कप्तानी का जिम्मा किसी अनुभवी खिलाड़ी के बजाय 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को सौंपा गया। जैसे ही वैभव ने मैदान पर फील्ड सेट करना शुरू किया, वह सीनियर पुरुष क्रिकेट के इतिहास में कप्तानी करने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए। इतनी कम उम्र में दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित और उच्च-स्तरीय रेड-बॉल टूर्नामेंट में ईस्ट ज़ोन की अगुवाई करना किसी सपने से कम नहीं है। हालांकि, वैभव के चेहरे पर कप्तानी का कोई दबाव नजर नहीं आया और उन्होंने बेहद शांत भाव से खेल की रणनीति पर काम करना शुरू किया।
सीनियर टीम में पहली बार कप्तानी का अनुभव
यह पहला मौका है जब वैभव सूर्यवंशी ने किसी सीनियर पुरुष टीम की कप्तानी की है। इससे पहले उन्होंने जूनियर स्तर पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और समझदारी से सभी का ध्यान आकर्षित किया था। मैदान पर उतरते ही वैभव ने गेंदबाजी में बदलाव और फील्डिंग सजावट में गजब की परिपक्वता दिखाई। सेंट्रल ज़ोन के बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने गेंदबाजों का इस्तेमाल काफी समझदारी से किया। सीनियर खिलाड़ियों ने भी मैदान पर उनका पूरा समर्थन किया और हर ओवर के बाद उनके साथ रणनीति पर चर्चा करते दिखे।
मुकाबले का रुख और भविष्य की संभावनाएं
वैभव की कप्तानी में ईस्ट ज़ोन की टीम ने सेंट्रल ज़ोन को कड़ी चुनौती देना जारी रखा। कलाई की चोट के कारण इशान किशन की इस मैच में वापसी पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। डॉक्टरों की टीम उनकी चोट का मूल्यांकन कर रही है। अगर इशान बाकी मैच से बाहर रहते हैं, तो वैभव सूर्यवंशी के पास अपनी कप्तानी की क्षमता को साबित करने का यह बेहतरीन मौका होगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस युवा खिलाड़ी के लिए यह मुकाबला उनके करियर का एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है।

IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा: राहुल गांधी से 'सीक्रेट मीटिंग' का दावा
उत्तर प्रदेश की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। बीजेपी प्रवक्ता प्रशांत उमराव ने दावा किया है कि उन्होंने राहुल गांधी से एक गुप्त मुलाकात के बाद पद से इस्तीफा दिया, ताकि आगामी यूपी चुनावों में कांग्रेस के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके।
खबर का निचोड़
उत्तर प्रदेश की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। बीजेपी प्रवक्ता प्रशांत उमराव ने दावा किया है कि उन्होंने राहुल गांधी से एक गुप्त मुलाकात के बाद पद से इस्तीफा दिया, ताकि आगामी यूपी चुनावों में कांग्रेस के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके।
प्रशासनिक गलियारे से राजनीति का गलियारा
उत्तर प्रदेश की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल का अचानक दिया गया इस्तीफा अब सीधे तौर पर राजनीतिक जंग का मैदान बन चुका है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रशांत उमराव के एक हालिया बयान ने इस पूरी घटना को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। बीजेपी का सीधा आरोप है कि इस इस्तीफे के पीछे कोई प्रशासनिक वजह नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक साजिश है।
राहुल गांधी के साथ सीक्रेट मीटिंग का सनसनीखेज दावा
बीजेपी प्रवक्ता प्रशांत उमराव का दावा है कि दिव्या मित्तल ने अपना इस्तीफा देने से ठीक पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी से एक 'सीक्रेट मीटिंग' की थी। उनके अनुसार, इस मुलाकात में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर रणनीति तैयार की गई। बीजेपी का कहना है कि यह इस्तीफा पूरी तरह से पूर्व-नियोजित है और इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक एजेंडे को हवा देना और विपक्ष को फायदा पहुंचाना है।
सरकारी योजनाओं के इस्तेमाल पर तीखे सवाल
बीजेपी ने केवल मुलाकात का आरोप ही नहीं लगाया, बल्कि IAS अधिकारी की कार्यशैली पर भी हमला बोला है। उमराव का कहना है कि दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का इस्तेमाल खुद की ब्रांडिंग के लिए किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की उपलब्धियों को निजी सफलताओं के रूप में जनता के सामने पेश किया गया, जो प्रशासनिक सेवा की गरिमा और आचार संहिता के खिलाफ है।
आरोपों के बाद गरमाई यूपी की राजनीति
इस दावे के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। ब्यूरोक्रेसी से सीधे राजनीति की ओर इशारा करते इस घटनाक्रम पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं। जहां एक तरफ प्रशासनिक हलकों में इस इस्तीफे की वजहों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
भविष्य की रणनीति पर टिकीं निगाहें
दिव्या मित्तल का इस्तीफा स्वीकार होने और उसके बाद सामने आए इस राजनीतिक मोड़ ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी वाकई अब खाकी या आधिकारिक पोषाक छोड़कर खादी धारण करने जा रही हैं? या फिर यह राजनीतिक बयानबाजी का एक हिस्सा भर है? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही साफ हो सकेंगे, लेकिन फिलहाल इस घटना ने राज्य की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
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