
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नाखुश CJP, बड़े आंदोलन की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपराधिक इतिहास वाले प्रदर्शनकारियों को रिहा न करने का फैसला सुनाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। 'सिटीज़ंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे नामंजूर कर दिया है। संगठन ने अदालत के रुख के खिलाफ फिर से बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
खबर का निचोड़ (Summary):
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपराधिक इतिहास वाले प्रदर्शनकारियों को रिहा न करने का फैसला सुनाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। 'सिटीज़ंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे नामंजूर कर दिया है। संगठन ने अदालत के रुख के खिलाफ फिर से बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
शीर्ष अदालत का सख्त फैसला और बढ़ता विरोध
देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा प्रदर्शनकारियों की रिहाई को लेकर दिया गया एक फैसला अब बड़े विवाद का रूप लेता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन प्रदर्शनकारियों का पुराना आपराधिक इतिहास है या जिन पर पहले से एफआईआर (FIR) दर्ज हैं, उन्हें कोई राहत नहीं दी जाएगी और न ही रिहा किया जाएगा। अदालत के इस रुख के सामने आते ही मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करना शुरू कर दिया है।
CJP ने खोला मोर्चा: "फैसला मंजूर नहीं"
अदालत के इस फैसले पर 'सिटीज़ंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) ने कड़ा ऐतराज जताया है। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट यह कह रहा है कि पहले से दर्ज एफआईआर वाले लोगों को रिहा नहीं किया जाएगा, तो यह निर्णय उन्हें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है। CJP का मानना है कि प्रदर्शन के अधिकार और विचाराधीन मामलों को एक साथ जोड़कर देखना प्रदर्शनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने जैसा है।
फिर बड़े आंदोलन की आहट
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद CJP ने शांत बैठने की बजाय अपने तेवर और सख्त कर लिए हैं। संगठन ने साफ कर दिया है कि वह इस निर्णय के खिलाफ चुप नहीं रहेगा। प्रवक्ता ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस फैसले के विरोध में जल्द ही एक बार फिर से बड़ा जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा। संगठन का यह रुख इशारा करता है कि आने वाले दिनों में यह कानूनी और सामाजिक लड़ाई सड़कों पर भी देखने को मिल सकती है।
न्यायिक आदेश और जन-अधिकारों के बीच टकराव
प्रदर्शनकारियों की रिहाई से जुड़ा यह मामला अब कानून-व्यवस्था और मौलिक अधिकारों के बीच की एक जटिल बहस बन चुका है। एक तरफ जहां शीर्ष अदालत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को लेकर सख्त रुख अपना रही है, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक संगठन इसे असहमति की आवाज दबाने के रूप में देख रहे हैं। इस ताजा घटनाक्रम ने न केवल न्यायिक फैसले पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक नए जमीनी संघर्ष की बुनियाद भी रख दी है।

नितिन गडकरी की दो टूक: सुस्त ठेकेदारों की खैर नहीं
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खराब काम और परियोजनाओं में देरी करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने एक साल के भीतर अधिकतम ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और लापरवाह अधिकारियों को निलंबित करने का रिकॉर्ड बनाने की दो टूक घोषणा की है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खराब काम और परियोजनाओं में देरी करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने एक साल के भीतर अधिकतम ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और लापरवाह अधिकारियों को निलंबित करने का रिकॉर्ड बनाने की दो टूक घोषणा की है।
ठेकेदारों पर बरसे केंद्रीय मंत्री
देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने सख्त तेवर के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने लापरवाह ठेकेदारों और सुस्त कार्यशैली अपनाने वालों के खिलाफ बड़ा बयान दिया है। गडकरी ने साफ कर दिया है कि अब विकास कार्यों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो कंपनियां समय पर काम पूरा नहीं करती हैं और घटिया स्तर की सामग्री का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा।
ब्लैकलिस्ट करने का बनेगा रिकॉर्ड
अपने तीखे तेवर दिखाते हुए नितिन गडकरी ने कहा है कि वह आने वाले एक साल के भीतर अधिकतम संख्या में ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। उनका यह बयान उन तमाम एजेंसियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो काम तो ले लेती हैं, लेकिन सालों-साल तक उसे लटकाए रखती हैं। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि परियोजनाओं में देरी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने में अब कोई देरी नहीं होगी।
लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज
इस पूरी व्यवस्था में केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि सुस्त अधिकारी भी केंद्रीय मंत्री के निशाने पर हैं। गडकरी ने घोषणा की है कि जनता के पैसों का दुरुपयोग करने वाले और फाइलों को बिना वजह अटकाने वाले अधिकारियों को भी निलंबित किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह अब इस लचर व्यवस्था को रोकने वाले नहीं हैं और भ्रष्ट तथा लापरवाह तंत्र के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। जनता के हित में उठाए जा रहे इन कदमों से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

मुस्कुराए, हाथ पकड़कर दिखाया रामेश्वरम मंदिर; जिनपिंग की अगवानी करते दिखे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में भारत आए सभी राष्ट्राध्यक्षों का भारत मंडपम में स्वागत किया. सात साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का प्रधानमंत्री मोदी ने हाथ मिलाकर स्वागत किया और इस दौरान दोनों नेता मुस्कुराकर मिले. प्रधानमंत्री ने जिनपिंग को बैकग्राउंड में लगे रामेश्वरम मंदिर (तमिलनाडु) के कॉरिडोर के बारे में भी बताया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में भारत आए सभी राष्ट्राध्यक्षों का भारत मंडपम में स्वागत किया. सात साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का प्रधानमंत्री मोदी ने हाथ मिलाकर स्वागत किया और इस दौरान दोनों नेता मुस्कुराकर मिले. प्रधानमंत्री ने जिनपिंग को बैकग्राउंड में लगे रामेश्वरम मंदिर (तमिलनाडु) के कॉरिडोर के बारे में भी बताया.
भारत मंडपम में भव्य स्वागत
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन का माहौल बेहद खास रहा. इस वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत करने पहुंचे सभी प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों की अगवानी की. आयोजन स्थल पर भारत की मेहमाननवाज संस्कृति और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां दुनिया भर के दिग्गज नेता एक छत के नीचे एकत्र हुए.
सात साल बाद शी जिनपिंग का आगमन
इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा रही. गलवान घाटी की झड़प के बाद पिछले सात वर्षों में यह उनका पहला भारत दौरा है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बीच जिनपिंग का यह कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
मुस्कान और हाथ मिलाकर गर्मजोशी
जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत मंडपम पहुंचे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़कर उनका स्वागत किया. दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और उनके चेहरों पर साफ मुस्कान नजर आई. इस सहज मुलाकात ने कूटनीतिक हलकों में चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए सकारात्मक संदेश दिया है.
रामेश्वरम मंदिर के कॉरिडोर की झलक
स्वागत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को विशेष रूप से सजाए गए बैकग्राउंड से रूबरू कराया. यह बैकग्राउंड तमिलनाडु के प्रसिद्ध ऐतिहासिक रामेश्वरम मंदिर के भव्य कॉरिडोर को दर्शा रहा था. पीएम मोदी ने खुद खड़े होकर जिनपिंग को इस धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर की विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

पीएम मोदी के नेमप्लेट पर दिखा 'भारत', BRICS समिट की तस्वीर वायरल
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। उनके सामने रखी नेमप्लेट पर 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा हुआ स्पष्ट रूप से नजर आया है। इस तस्वीर के सामने आने के बाद देश के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। इस दौरान पीएम मोदी के सामने रखी नेमप्लेट पर 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिखा हुआ स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस वैश्विक मंच पर देश के नाम को लेकर यह बदलाव कूटनीतिक और राजनीतिक हलकों में खासी توجہ का केंद्र रहा है।
वैश्विक मंच पर 'भारत' नाम की गूंज
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में देश की पहचान को स्वदेशी और सांस्कृतिक आयाम देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS शिखर सम्मेलन में भाषण दिया, तो पूरी दुनिया की निगाहें उनके संबोधन के साथ-साथ उनके सामने रखी नेमप्लेट पर भी टिकी थीं। नेमप्लेट पर अंग्रेजी या अन्य किसी शब्द के बजाय हिंदी के मूल शब्द 'भारत' का प्रयोग किया जाना देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गर्व को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से वायरल हो गई है और आम जनता के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषक भी इस पर अपनी तीखी और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
ग्लोबल साउथ और नए नियमों की हुंकार
सिर्फ नेमप्लेट ही नहीं, बल्कि इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए भाषण ने भी वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को अब केवल 'नियम मानने वाला' बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें 'नियम बनाने वाला' बनना होगा। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में उनकी बड़ी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा वैचारिक संदेश है।
कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चा की शुरुआत
इस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री के तेवर और नेमप्लेट पर लिखा 'भारत' शब्द यह स्पष्ट करता है कि देश अब वैश्विक मंचों पर अपनी शर्तों और अपनी पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। दुनिया के प्रमुख देशों के नेताओं के बीच आयोजित इस बैठक में भारत की यह उपस्थिति न सिर्फ कूटनीतिक लिहाज से अहम है, बल्कि यह देश के भविष्य के वैश्विक रुख की एक मजबूत झलक भी पेश करती है।

ग्लोबल साउथ को 'रूल शेपर' बनाएं: पीएम मोदी का ब्रिक्स में आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स समिट को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है। उन्होंने 'ग्लोबल साउथ' को दुनिया के नियम तय करने में अहम भूमिका निभाने की जोरदार वकालत की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत किसी के खिलाफ नहीं बल्कि सबको साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है। उन्होंने 'ग्लोबल साउथ' देशों से अपील की कि वे केवल दूसरों के बनाए नियमों का पालन करने तक सीमित न रहें, बल्कि खुद 'रूल शेपर' की भूमिका निभाएं।
ब्रिक्स का दो दशकों का सफर और वैश्विक पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स समिट को संबोधित करते हुए संगठन की दो दशकों की यात्रा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक मजबूत और अलग पहचान बनाई है। दुनिया भर में इस संगठन के बढ़ते प्रभाव ने यह साबित कर दिया है कि यह मंच आपसी सहयोग और विकास के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
हम किसी के खिलाफ नहीं, सबका साथ हमारी नीति
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में यह संदेश दिया कि ब्रिक्स का उद्देश्य किसी भी देश के खिलाफ खड़ा होना नहीं है। भारत की विदेश नीति हमेशा से सबको साथ लेकर चलने की रही है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हम टकराव की राजनीति में विश्वास नहीं रखते, बल्कि पूरी दुनिया को एक परिवार मानकर सामूहिक प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।
ग्लोबल साउथ को 'रूल शेपर' बनने की सख्त जरूरत
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने विकासशील देशों के समूह यानी 'ग्लोबल साउथ' के भविष्य पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब इन देशों को केवल दूसरों के द्वारा तय किए गए नियमों का आंख मूंदकर पालन करने वाला नहीं बनना चाहिए। इसके विपरीत, ग्लोबल साउथ के देशों को अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए खुद वैश्विक व्यवस्था के 'रूल शेपर' यानी नियम तय करने वाले बनना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय नीतियों में उनकी आवाज और हितों को पूरी प्राथमिकता मिल सके।

उत्तराखंड: पूर्व सीएम के पीए पर ईडी का शिकंजा, कैश और घड़ियां बरामद
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व पीए चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस छापेमारी में 32 लाख रुपये नकद, भारी मात्रा में सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद हुई हैं।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व पीए चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस छापेमारी में 32 लाख रुपये नकद, भारी मात्रा में सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद हुई हैं।
ईडी की बड़ी कार्रवाई और बरामदगी
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए ताबड़तोड़ छापे मारे हैं। यह कार्रवाई राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व निजी सचिव चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर की गई है। जांच एजेंसी को छापेमारी के दौरान मौके से करीब 32 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। इसके अलावा अकूत संपत्ति का खुलासा करते हुए भारी मात्रा में सोने के सिक्के और आभूषण भी हाथ लगे हैं।
सोने के सिक्के और लग्जरी घड़ियों का जखीरा
छापेमारी के दौरान ईडी की टीम को चंदन सिंह जीना के घर से सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि बेशकीमती सामान भी मिला है। अधिकारियों ने मौके से 13 गोल्ड कॉइन यानी सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन अपने कब्जे में ली हैं। शौक और रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां से रोलेक्स और राडो जैसे बड़े ब्रांड्स की कुल 12 लग्जरी घड़ियां भी बरामद हुई हैं। इन सभी की कीमत बाजार में काफी अधिक आंकी जा रही है।
परीक्षा घोटाले से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरी कार्रवाई उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा-2016 में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधलियों के मामले से जुड़ी हुई है। इसी मामले की गहराई से जांच करने के लिए ईडी ने यह कदम उठाया है। शुरुआती जांच और दस्तावेजों की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि जीना के परिवारवालों के बैंक खातों में 52.16 लाख रुपये की संदिग्ध रकम मिली है। जांच एजेंसियां अब इन खातों और संपत्तियों के स्रोतों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई हैं।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App