
सुभाष चंद्रा और रिलायंस आमने-सामने: मीडिया जंग पर घमासान
ज़ी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी की मीडिया कंपनियों पर उनके खिलाफ भ्रामक खबरें प्रसारित करने का गंभीर आरोप लगाया है। जवाब में रिलायंस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी के खिलाफ कभी नहीं किया गया है।
ज़ी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी की मीडिया कंपनियों पर उनके खिलाफ भ्रामक खबरें प्रसारित करने का गंभीर आरोप लगाया है। जवाब में रिलायंस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी के खिलाफ कभी नहीं किया गया है।
मीडिया बाजार में छिड़ा नया घमासान
भारतीय मीडिया जगत में उस वक्त भूचाल आ गया जब दिग्गज व्यवसायी और ज़ी (Zee) के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने उद्योगपति मुकेश अंबानी की मीडिया कंपनियों पर सीधा हमला बोल दिया। चंद्रा का आरोप है कि अंबानी के स्वामित्व वाले मीडिया संस्थान उनके खिलाफ लगातार एक एजेंडे के तहत गलत और भ्रामक खबरें फैला रहे हैं। इस बयान ने कॉर्पोरेट गलियारों में खलबली मचा दी है।
₹22,000 करोड़ के कर्ज पर छिड़ा विवाद
विवाद की मुख्य वजह सुभाष चंद्रा के वित्तीय मामलों से जुड़ी एक रिपोर्ट है। चंद्रा का दावा है कि उनकी कंपनियों को लेकर यह झूठा दावा किया गया कि उनका ₹22,000 करोड़ का भारी-भरकम कर्ज घटकर महज ₹6.5 करोड़ रह गया है। उनका कहना है कि इस तरह की गलत रिपोर्ट्स का मकसद उनकी और उनके ब्रांड की प्रतिष्ठा को बाजार में धूमिल करना है।
रिलायंस का तीखा पलटवार
सु सुभाष चंद्रा के इन तीखे आरोपों के बाद रिलायंस समूह की तरफ से भी तुरंत और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए चंद्रा के सभी दावों का खंडन किया है। रिलायंस की ओर से कहा गया कि उनके मीडिया संस्थानों की साख पेशेवर और स्वतंत्र पत्रकारिता पर आधारित है तथा उनका उपयोग कभी भी किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है।
कॉरपोरेट जगत में चर्चाओं का बाजार गर्म
देश के दो सबसे बड़े मीडिया और व्यावसायिक दिग्गजों के बीच छिड़ी इस तनातनी ने पूरे उद्योग का ध्यान खींच लिया है। एक तरफ जहां सुभाष चंद्रा अपने ऊपर हो रहे हमलों को सुनियोजित साजिश बता रहे हैं, वहीं रिलायंस ने अपनी पारदर्शिता का हवाला दिया है। यह विवाद आने वाले दिनों में भारतीय कॉरपोरेट और मीडिया क्षेत्र में समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

2029 पीएम रेस: केजरीवाल को पछाड़कर अभिजीत दीपके ने चौंकाया
इंडिया टुडे के हालिया 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने 2029 लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। प्रधानमंत्री पद की पसंद के मामले में सीजेपी संस्थापक और पूर्व आप कार्यकर्ता अभिजीत दीपके (1.3%) ने अरविंद केजरीवाल (1.2%) को पीछे छोड़ दिया है। वहीं पीएम मोदी शीर्ष पर बरकरार हैं।
खबर का निचोड़
इंडिया टुडे के हालिया 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने 2029 लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। प्रधानमंत्री पद की पसंद के मामले में सीजेपी संस्थापक और पूर्व आप कार्यकर्ता अभिजीत दीपके (1.3%) ने अरविंद केजरीवाल (1.2%) को पीछे छोड़ दिया है। वहीं पीएम मोदी शीर्ष पर बरकरार हैं।
राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा उलटफेर
भारतीय राजनीति में जनमत के मिजाज को भांपने वाले इंडिया टुडे के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे ने इस बार सभी को चौंका दिया है। आगामी 2029 के लोकसभा चुनावों को लेकर जनता की पसंद का जो आंकड़ा सामने आया है, उसने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है। इस सर्वे की सबसे बड़ी और अप्रत्याशित बात यह है कि आम आदमी पार्टी से अलग होकर अपनी राह बनाने वाले पूर्व आप कार्यकर्ता और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को पीछे छोड़ दिया है।
आंकड़े जो कहानी बयां करते हैं
प्रधानमंत्री पद के लिए देश की जनता की पहली पसंद कौन है, इस सवाल पर जनता का फैसला बेहद दिलचस्प रहा। सर्वे के नतीजों के मुताबिक, देश के 1.3 प्रतिशत लोगों ने अभिजीत दीपके को भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पसंद बताया है। वहीं, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल 1.2 प्रतिशत समर्थन के साथ उनके ठीक पीछे खिसक गए हैं। यह अंतर भले ही आंकड़ों में मामूली दिखे, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं। एक स्थापित राष्ट्रीय पार्टी के नेता को पछाड़कर एक उभरते हुए चेहरे का आगे निकलना बड़ा बदलाव दर्शाता है।
शीर्ष पर अब भी पीएम मोदी का दबदबा
देश की मुख्य राजनीतिक लड़ाई के शीर्ष पायदान पर स्थिति स्पष्ट बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 48.7 प्रतिशत जनता की पहली पसंद के साथ सबसे आगे बने हुए हैं। उनके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी 27.1 प्रतिशत समर्थन हासिल करके दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़े हैं। सर्वे साफ दिखाता है कि जहां राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष नेताओं के बीच मुख्य मुकाबला जारी है, वहीं क्षेत्रीय और उभरते विकल्पों को लेकर भी जनता अपनी राय बदल रही है।
केजरीवाल के लिए बड़ा झटका
अरविंद केजरीवाल के लिए यह सर्वे आंकड़े से ज्यादा एक बड़ा राजनीतिक संदेश लेकर आया है। राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने की कोशिशों में जुटी आम आदमी पार्टी के लिए यह नतीजा किसी झटके से कम नहीं है। कभी 'आप' के मंच से अपनी पहचान बनाने वाले अभिजीत दीपके का केजरीवाल से आगे निकल जाना यह दर्शाता है कि जनता अब नए विकल्पों को भी गंभीरता से ले रही है। 2029 की राजनीतिक बिसात पर यह बदलाव आने वाले समय में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

रक्षाबंधन पर सोने-चांदी में भारी गिरावट, जानें नया रेट
त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹3,300 सस्ता होकर ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी भी ₹5,000 गिरकर ₹2,45,500 प्रति किलो पर आ गई है।
खबर का निचोड़
त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹3,300 सस्ता होकर ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी भी ₹5,000 गिरकर ₹2,45,500 प्रति किलो पर आ गई है।
त्योहारी सीजन में खरीदारों की बल्ले-बल्ले
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आभूषणों की खरीदारी करने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। त्योहारी उमंग के बीच कीमतों में आई इस कमी से बाजार में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ने की पूरी उम्मीद है। जो लोग रक्षाबंधन के मौके पर कीमती धातुओं में निवेश या उपहार खरीदने की योजना बना रहे थे, उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है।
सोने की कीमतों में हैट्रिक गिरावट
दिल्ली सर्राफा असोसिएशन की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने के भाव में ₹3,300 प्रति 10 ग्राम की बड़ी कटौती देखी गई। इस गिरावट के बाद अब बाजार में सोने की कीमत ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई है। गौर करने वाली बात यह है कि सोने के दामों में यह लगातार तीसरे दिन की गिरावट है। पिछले तीन कारोबारी दिनों के आंकड़ों को देखें तो सोना कुल मिलाकर ₹4,700 तक सस्ता हो चुका है। लगातार हो रही इस नरमी ने सर्राफा व्यापारियों और खरीदारों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
चांदी के भाव में भी भारी सेंध
केवल सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की चमक भी इस रक्षाबंधन पर थोड़ी फीकी पड़ती नजर आई। चांदी के भाव में एक ही दिन में ₹5,000 प्रति किलोग्राम की बड़ी टूट दर्ज की गई है। इस भारी गिरावट के साथ दिल्ली में चांदी का भाव घटकर ₹2,45,500 प्रति किलोग्राम पर आ पहुंचा है। एक ही दिन में पांच हजार रुपये की यह बड़ी गिरावट औद्योगिक मांग और स्थानीय सर्राफा बाजार के रुझानों में आए बदलाव की ओर इशारा करती है।
सर्राफा बाजार की बदलती चाल
त्योहारों के ऐन वक्त पर धातुओं के दामों में आई इस गिरावट को बाजार विश्लेषक काफी अहम मान रहे हैं। आमतौर पर त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतें ऊपर चढ़ती हैं, लेकिन इस बार सर्राफा बाजार का रुख पूरी तरह विपरीत नजर आ रहा है। लगातार तीन दिनों से सोने के गिरते दाम और चांदी में आई अचानक गिरावट से स्थानीय बाजार में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में सराफा बाजार किस दिशा में जाएगा, इस पर व्यापारियों की नजर बनी हुई है।

महाराष्ट्र FDA की बड़ी कार्रवाई: सिप्ला की पुणे यूनिट का लाइसेंस रद्द
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला की पुणे स्थित यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। जांच के दौरान भंडारण, पैकेजिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग में कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
खबर का निचोड़
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला की पुणे स्थित यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। जांच के दौरान भंडारण, पैकेजिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग में कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
FDA की जांच में उजागर हुईं गंभीर खामियां
पुणे के वाडकी क्षेत्र में संचालित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज की कैरी एंड फॉरवर्डिंग (C&F) यूनिट पर महाराष्ट्र FDA की टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस जांच का मुख्य उद्देश्य जीवनरक्षक दवाओं के रखरखाव और गुणवत्ता मानकों की पड़ताल करना था। हालांकि, निरीक्षण के दौरान वहां का नजारा गुणवत्ता मानकों के बिल्कुल विपरीत मिला।
जांच अधिकारियों को यूनिट में दवाओं के भंडारण से लेकर उनके वितरण तक के स्तर पर लापरवाही देखने को मिली। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर दवाइयों का रखरखाव किया जा रहा था, जो कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
फर्श पर रखी मिलीं दवाएं और पैकेजिंग में गड़बड़ी
निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, वाडकी स्थित इस गोदाम में दवाएं सीधे फर्श पर रखी पाई गईं। नियमानुसार दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त पैलेट और रैक की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन वहां इनका अभाव दिखा। नमी और गंदगी के संपर्क में आने से दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने का सीधा जोखिम बना हुआ था।
इसके अलावा, 'रेक्टिन प्लस' (Rectin Plus) टैबलेट्स की पैकेजिंग और बैच रिकॉर्ड में भारी अनियमतियां दर्ज की गईं। किसी भी गड़बड़ी के मामले में बाजार से दवा को वापस मंगाने (रिकॉल) की जो स्थापित प्रक्रिया होती है, उससे जुड़े रिकॉर्ड भी अधूरे और अस्पष्ट पाए गए।
कड़े एक्शन से दवा उद्योग में हड़कंप
इन तमाम अनियमितताओं को बेहद गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र FDA ने सिप्ला की इस पुणे यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। नियामक निकाय के इस सख्त फैसले से भारतीय फार्मा क्षेत्र और वितरण नेटवर्क में हलचल तेज हो गई है।
FDA अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मरीजों की सेहत और दवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मानक नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर आगे भी इसी तरह की कठोर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई जारी रहेगी।

मेटा का नया एआई एजेंट 'प्रोजेक्ट हैच': अब खुद करेगा शॉपिंग और टेबल बुकिंग
मेटा एक क्रांतिकारी एआई एजेंट 'प्रोजेक्ट हैच' का परीक्षण कर रहा है, जो सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है। यह तकनीक रेस्तरां में टेबल बुक करने, ऑनलाइन खरीदारी करने और पालतू जानवरों की देखभाल के लिए व्यक्ति ढूंढने जैसे जटिल काम खुद निपटा सकती है।
मेटा का नया एआई एजेंट 'प्रोजेक्ट हैच': अब खुद करेगा शॉपिंग और टेबल बुकिंग
खबर का निचोड़:
मेटा एक क्रांतिकारी एआई एजेंट 'प्रोजेक्ट हैच' का परीक्षण कर रहा है, जो सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है। यह तकनीक रेस्तरां में टेबल बुक करने, ऑनलाइन खरीदारी करने और पालतू जानवरों की देखभाल के लिए व्यक्ति ढूंढने जैसे जटिल काम खुद निपटा सकती है।
एआई की दुनिया में नया मोड़
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में मेटा एक बड़ा धमाका करने की तैयारी में है। अब तक एआई मॉडल्स का इस्तेमाल केवल टेक्स्ट जनरेट करने, सवालों के जवाब देने या तस्वीरें बनाने के लिए प्रमुखता से होता आया है। लेकिन मेटा का नया एआई एजेंट 'प्रोजेक्ट हैच' इस परिदृश्य को पूरी तरह बदलने वाला है। यह तकनीक चैटबॉट की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते हुए वास्तविक दुनिया के कार्यों को स्वचालित रूप से पूरा करने में सक्षम है।
क्या है 'प्रोजेक्ट हैच' और कैसे करता है काम
वर्तमान में मेटा अपने कर्मचारियों के बीच 'प्रोजेक्ट हैच' का इन-हाउस परीक्षण कर रही है। यह महज एक वर्चुअल असिस्टेंट नहीं है, बल्कि एक ऐसा इंटेलिजेंट एजेंट है जो यूजर के निर्देशों पर सीधे एक्शन लेता है। यह विभिन्न वेबसाइटों पर जाकर फॉर्म भर सकता है, जटिल विषयों पर गहन शोध कर सकता है और खरीदारी की प्रक्रिया को शुरू से अंत तक पूरा कर सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह डिजिटल दुनिया में एक इंसानी यूजर की तरह नेविगेट करता है।
रोजमर्रा के कामों में मिलेगी सीधी मदद
इस एआई एजेंट के आने से आम जिंदगी बेहद आसान हो जाएगी। उदाहरण के लिए, यदि आपको किसी पसंदीदा रेस्तरां में टेबल बुक करनी है, तो आपको कई ऐप्स खंगालने की जरूरत नहीं होगी; 'प्रोजेक्ट हैच' यह काम आपके लिए खुद कर देगा। इसी तरह, घर के लिए सामान की खरीदारी करनी हो या फिर अपने पालतू जानवर की देखभाल के लिए किसी सही व्यक्ति (पेट सिटर) की तलाश करनी हो, यह एजेंट आपके निर्देशों के आधार पर तुरंत समाधान निकालेगा।
टेक जगत में प्रतिस्पर्धा और भविष्य की झलक
मेटा का यह कदम दर्शाता है कि टेक दिग्गज अब केवल 'सूचना देने वाले' एआई से आगे बढ़कर 'काम करने वाले' एआई ऑटोनॉमस एजेंट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि अभी यह प्रोजेक्ट आंतरिक परीक्षण के चरण में है, लेकिन इसके सफल परीक्षण के बाद जब इसे आम यूज़र्स के लिए रोलआउट किया जाएगा, तो यह डिजिटल वर्कफ़्लो और पर्सनल प्रोडक्टिविटी को एक नए स्तर पर ले जाएगा।

श्वेता तिवारी को गाली देने वाले ने मांगी माफी, राज ठाकरे का मनसे एक्शन में
अभिनेत्री श्वेता तिवारी को इंस्टाग्राम पर भद्दे संदेश भेजने वाले शख्स ने लिखित में माफी मांग ली है। श्वेता द्वारा मनसे प्रमुख राज ठाकरे से सवाल उठाने के बाद पार्टी हरकत में आई। मनसे लीगल सेल के वकील ने आरोपी को ढूंढ निकाला, जिसके बाद उसने अपनी गलती मानते हुए माफीनामा दिया।
खबर का निचोड़
अभिनेत्री श्वेता तिवारी को इंस्टाग्राम पर भद्दे संदेश भेजने वाले शख्स ने लिखित में माफी मांग ली है। श्वेता द्वारा मनसे प्रमुख राज ठाकरे से सवाल उठाने के बाद पार्टी हरकत में आई। मनसे लीगल सेल के वकील ने आरोपी को ढूंढ निकाला, जिसके बाद उसने अपनी गलती मानते हुए माफीनामा दिया।
श्वेता तिवारी का सवाल और मनसे की त्वरित कार्रवाई
टीवी उद्योग की जानी-मानी अभिनेत्री श्वेता तिवारी को हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बेहद अरोचक अनुभव का सामना करना पड़ा। इंस्टाग्राम पर एक यूजर द्वारा उन्हें लगातार गाली-गलौज और भद्दे संदेश भेजे जा रहे थे। हैरान करने वाली बात यह थी कि खुद को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का समर्थक बताने वाले इस शख्स के इस व्यवहार से परेशान होकर श्वेता ने चुप रहने के बजाय आवाज उठानी सही समझी।
श्वेता ने सीधे मनसे प्रमुख राज ठाकरे को टैग करते हुए सवाल उठाया कि क्या उनकी पार्टी के समर्थकों को महिलाओं से इस तरह बात करने की सीख दी जाती है। श्वेता का यह सवाल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसने मनसे नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
तीन दिन में पकड़ा गया आरोपी, हाथ से लिखकर मांगी माफी
श्वेता तिवारी के इस कदम के बाद मनसे का लीगल सेल तुरंत एक्शन मोड में आ गया। पार्टी के वकील ने मामले की गंभीरता को समझते हुए साइबर और तकनीकी स्तर पर जांच शुरू की। महज तीन दिनों के भीतर उस अज्ञात शख्स की पहचान कर ली गई जो श्वेता को भद्दे मैसेज भेज रहा था।
पकड़े जाने के बाद आरोपी के तेवर पूरी तरह ढीले पड़ गए। उसने अपनी गलती स्वीकार की और श्वेता तिवारी के नाम हाथ से लिखा एक विस्तृत माफीनामा सौंपा। पत्र में उसने माना कि उसने आवेग और गलतफहमी में आकर अभिनेत्री के साथ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था और भविष्य में कभी ऐसी गलती न दोहराने का वादा किया।
राज ठाकरे और लीगल टीम का जताया आभार
माफीनामा मिलने के बाद श्वेता तिवारी ने राहत की सांस ली और पूरे मामले का सुखद अंत होने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। श्वेता ने मनसे लीगल सेल और खासकर उस वकील की जमकर तारीफ की जिसने इस मामले को इतनी गंभीरता से लिया और चंद दिनों में आरोपी तक पहुंच बनाए।
श्वेता ने राज ठाकरे का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एक जिम्मेदार नेता की तरह उनकी पार्टी ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की और यह साबित किया कि महिलाओं के सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा। इस पूरी घटना ने सोशल मीडिया पर ट्रोल्स को एक कड़ा संदेश दिया है कि डिजिटल दुनिया में किसी महिला को परेशान करना आसान नहीं होगा और गलत हरकतों का अंजाम हमेशा भुगतना पड़ता है।
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