
सिंधु घाटी सभ्यता: कांस्य युग का रहस्यमयी और आधुनिक साम्राज्य
सिंधु घाटी सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी और उन्नत शहरी सभ्यताओं में से एक है। अपनी बेहतरीन नगर नियोजन, ग्रिड प्रणाली, उन्नत जल निकासी और जीवंत व्यापार के लिए प्रसिद्ध यह सभ्यता आज भी इतिहासकारों को आकर्षित करती है। बिना किसी केंद्रीय राजा या मंदिर के साक्ष्य के, इस प्राचीन समाज ने कृषि, कला और वैश्विक व्यापार में नए मानक स्थापित किए, जिसका अंत आज भी एक रहस्य है।
निचोड़ (Summary):
सिंधु घाटी सभ्यता दुनिया की सबसे पुरानी और उन्नत शहरी सभ्यताओं में से एक है। अपनी बेहतरीन नगर नियोजन, ग्रिड प्रणाली, उन्नत जल निकासी और जीवंत व्यापार के लिए प्रसिद्ध यह सभ्यता आज भी इतिहासकारों को आकर्षित करती है। बिना किसी केंद्रीय राजा या मंदिर के साक्ष्य के, इस प्राचीन समाज ने कृषि, कला और वैश्विक व्यापार में नए मानक स्थापित किए, जिसका अंत आज भी एक रहस्य है।
इतिहास का गौरव: सिंधु घाटी सभ्यता
हज़ारों साल पहले जब दुनिया के अधिकांश हिस्से कबीलों और जंगलों में जी रहे थे, तब भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम में एक ऐसी सभ्यता फल-फूल रही थी जिसकी आधुनिकता आज के इंजीनियरों को भी हैरान कर देती है। हम बात कर रहे हैं सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता की। यह केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि प्राचीन मानव बुद्धि का शिखर है।
शानदार नगर नियोजन और जीवनशैली
इस सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत इसका नगर नियोजन था। यहाँ के शहर, जैसे हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो, एक सख्त ग्रिड पैटर्न पर बने थे जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90 डिग्री) पर काटती थीं। पक्की ईंटों के दो मंजिला मकान, हर घर में निजी कुआं और स्नानघर होना इसकी भव्यता को दर्शाता है। लेकिन सबसे चमत्कारी थी यहाँ की जल निकासी प्रणाली (ड्रेनेज सिस्टम)। सड़कों के किनारे बनी नालियां ढकी होती थीं और उनमें सफाई के लिए मैनहोल भी थे, जो स्वच्छता के प्रति उनके समर्पण को दिखाते हैं। विशाल स्नानागार और अन्न भंडारण के लिए बने बड़े-बड़े अन्नागार (Granaries) उनकी दूरदर्शिता के प्रतीक थे।
प्रमुख शहर और उनकी अनूठी विशेषताएँ
इस सभ्यता के अलग-अलग शहरों की अपनी विशेष पहचान थी। मोहनजो-दड़ो जहाँ अपने 'महान स्नानागार' के लिए प्रसिद्ध था, वहीं गुजरात का लोथल दुनिया के सबसे पुराने मानव निर्मित गोदीबाड़े (Dockyard) के लिए जाना जाता है। धौलावीरा अपनी उत्कृष्ट जल संचयन प्रणाली (Water Harvesting) और यूनीक साइनबोर्ड के लिए मशहूर है, जबकि राजस्थान का कालीबंगा चूड़ियों के कारखाने और जुते हुए खेतों के साक्ष्य देता है। हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो में मुख्य अंतर यह था कि हड़प्पा में अनाज के गोदाम नदियों के करीब थे, जबकि मोहनजो-दड़ो में विशाल प्रशासनिक और सार्वजनिक इमारतें अधिक थीं।
व्यापार, कृषि और रहस्यमयी लिपि
यहाँ की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि और व्यापार था। किसान गेहूं, जौ, कपास और मटर उगाते थे और उन्होंने कूबड़ वाले बैल और भेड़-बकरी जैसे जानवरों को पालतू बनाया था। लोथल के बंदरगाह से इनका व्यापार सुदूर मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) तक होता था। व्यापार में प्रामाणिकता के लिए ये मुहरों (Seals) का इस्तेमाल करते थे, जिन पर एक सींग वाले गैंडे (Unicorn) और बैल के चित्र मिलते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनकी चित्रमयी लिपि को आज तक कोई पढ़ नहीं पाया है, जिससे इनके कई राज़ अब भी दफन हैं।
धार्मिक आस्था और सभ्यता का अंत
खुदाई में मिली मूर्तियां बताती हैं कि वे प्रकृति और मातृशक्ति के उपासक थे। मातृदेवी की मूर्तियां और पशुपति शिव की मुहर (जिसमें एक योगी के चारों ओर जानवर बैठे हैं) उनके धार्मिक जीवन की झलक देती हैं। लगभग 1900 ईसा पूर्व के बाद इस महान सभ्यता का पतन होने लगा। इसके अंत के पीछे बाढ़, जलवायु परिवर्तन, सिंधु नदी का मार्ग बदलना या बाहरी आक्रमण जैसे कई सिद्धांत दिए जाते हैं। वजह चाहे जो भी हो, यह सभ्यता आज भी हमें सिखाती है कि असल विकास कंक्रीट के महलों में नहीं, बल्कि एक अनुशासित और स्वच्छ जीवनशैली में होता है।

विदेशी फंडिंग के आरोपों पर आशुतोष रांका का पलटवार
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के विदेशी फंडिंग के आरोपों पर सीजीपी के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उन्हें विदेशी फंड मिल रहा था, तो मंत्री उनसे हाथ क्यों मिला रहे थे और चाय-नाश्ता क्यों कर रहे थे? इस मामले पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बीजेपी को आड़े हाथों लिया है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से लगाए गए विदेशी फंडिंग के गंभीर आरोपों पर 'सीजीपी' के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कड़े सवाल पूछते हुए कहा है कि यदि उन्हें या उनके संगठन को किसी भी प्रकार की विदेशी फंडिंग मिल रही थी, तो केंद्रीय मंत्री उनसे मुलाकात क्यों कर रहे थे और उनके साथ हाथ क्यों मिला रहे थे?
चाय-नाश्ते और महुआ मोइत्रा का तंज
आशुतोष रांका ने आगे सवाल किया कि जब उन पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, तब उनके साथ बैठकर चाय-नाश्ता क्यों किया जा रहा था? इस पूरे घटनाक्रम और विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी कूदते हुए इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा है और निशाना साधा है।

सूर्यकुमार यादव ने परिवार संग पीएम मोदी से की मुलाकात
दिवाली से पहले भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव ने अपने परिवार के साथ दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पीएम नरेंद्र मोदी से खास मुलाकात की। इस दौरान एक छोटी बच्ची ने पीएम मोदी के सामने भजन गाया, जिसे सुनकर उन्होंने तालियां बजाते हुए उसकी जमकर तारीफ की।
दिवाली के पावन अवसर से पहले भारत के क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात का एक बेहद खास वीडियो भी सामने आया है। इस दौरान सूर्यकुमार यादव की पत्नी देविशा और उनकी बेटी रिद्धिमा भी उनके साथ मौजूद थीं।
बच्ची के भजन पर पीएम मोदी ने बजाईं तालियां
मुलाकात के दौरान माहौल उस समय बेहद खुशनुमा हो गया जब एक छोटी बच्ची ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने एक सुंदर भजन प्रस्तुत किया। बच्ची की सुरीली आवाज और भजन सुनकर पीएम मोदी काफी प्रसन्न नजर आए और उन्होंने तालियां बजाकर बच्ची का उत्साहवर्धन किया और उसकी जमकर तारीफ की।

FSSAI ने Old Monk को रम मानने से किया इनकार
महाराष्ट्र में ओल्ड मॉंक की बिक्री पर फिलहाल रोक लगी हुई है क्योंकि FSSAI ने इस पेय को रम मानने से इनकार करते हुए इसके लेबल पर आपत्ति जताई है। इसके बाद निर्माता कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है और वह नया लेबल FSSAI को सौंपेगी। इस बिक्री के रुकने से राज्य आबकारी विभाग को करीब 350 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लोकप्रिय पेय 'ओल्ड मॉंक' (Old Monk) को रम मानने से साफ इनकार कर दिया है। प्राधिकरण ने इस पेय के लेबल पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। इस तकनीकी और प्रशासनिक पेंच के कारण महाराष्ट्र राज्य में ओल्ड मॉंक की बिक्री फिलहाल शुरू नहीं हो पा रही है।
कंपनी का फैसला और वित्तीय नुकसान
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद, निर्माता कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका वापस ले ली है। अब कंपनी की ओर से एक नया लेबल तैयार करके FSSAI को सौंपा जाएगा, ताकि मंजूरी मिलने के बाद बाजार में उत्पादों की बिक्री दोबारा शुरू हो सके। हालांकि, इस बिक्री के लंबे समय तक रुकने की वजह से राज्य के आबकारी विभाग को लगभग 350 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।

फलाहारी महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री को लिखा पत्र, मांगी माफी
मंदिर-मस्जिद प्रकरण के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री को पत्र लिखकर मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में आकर माफी मांगने की हिदायत दी है। यह विवाद कथा के दौरान भगवान राम और कृष्ण की तुलना में दिए गए बयान के बाद उठा है।
मंदिर-मस्जिद प्रकरण के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की हिदायत दी है।
बयान के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद धीरेंद्र शास्त्री द्वारा हाल ही में एक कथा के दौरान दिए गए बयान के बाद उपजा है। कथा के दौरान उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण के संदर्भ में तुलनात्मक टिप्पणी की थी, जिसके बाद से विभिन्न धार्मिक हलकों में विरोध देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में फलाहारी महाराज ने पत्र जारी कर इस पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।

यूपी की पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने दिया इस्तीफा
उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के बाद अब पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। वह यूपी सरकार में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के पद पर तैनात थीं। अनुपमा पेशे से सिंगर और सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी हैं, जिनके 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के बाद अब पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। अनुपमा सरोज उत्तर प्रदेश सरकार में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रही थीं। उनके इस अचानक इस्तीफे के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा और चुनावी अटकलें
अधिकारी अनुपमा सरोज प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ अपनी गायकी के पेशे यानी बतौर सिंगर भी पहचानी जाती हैं। वह समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी हैं। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेजी से लगाई जा रही हैं कि वह आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में चुनावी मैदान में उतर सकती हैं।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App