
सीमा पार अब 'जीरो टॉलरेंस': अमित शाह का कड़ा फरमान, घुसपैठियों की खैर नहीं!
गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सीमाओं पर अवैध निर्माण के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति का ऐलान कर दिया है। 15 किलोमीटर के दायरे में अब कोई भी अवैध ढांचा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का यह सख्त कदम सुरक्षा ग्रिड को और भी अधिक अभेद्य बना देगा, जिससे सीमाई गांवों में रहने वाले लोगों को एक नई सुरक्षा का एहसास होगा।
सोर्स: एनडीटीवी
भारत की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता और दृढ़ता का परिचय दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा की है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के 15 किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध निर्माण के खिलाफ यह 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति न केवल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सीमावर्ती इलाकों की संप्रभुता को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम सीमा सुरक्षा ग्रिड को और भी अधिक प्रभावी और अभेद्य बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सुरक्षा ग्रिड को अभेद्य बनाने की रणनीति
सीमावर्ती क्षेत्रों में अक्सर देखा जाता है कि संदिग्ध गतिविधियों के लिए अवैध ढांचों का इस्तेमाल किया जाता है। ये अवैध निर्माण घुसपैठियों, तस्करी और राष्ट्र विरोधी तत्वों के लिए छिपने या अपनी गतिविधियां संचालित करने का सुरक्षित जरिया बन जाते हैं। गृह मंत्रालय की नई नीति के तहत, सीमा से सटे 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले हर ढांचे की बारीकी से जांच की जाएगी।
सरकार का यह निर्णय इस बात को सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा बलों की नजर से कोई भी गतिविधि ओझल न रहे। जब सीमा के निकट किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होगा, तो निगरानी में किसी भी प्रकार का अवरोध नहीं आएगा। इससे ड्रोन गतिविधियों, संदिग्ध आवाजाही और खुफिया जानकारी जुटाने में सुरक्षा बलों को बहुत मदद मिलेगी।
सीमावर्ती गांवों के लिए एक नई सुरक्षा का एहसास
अक्सर सीमाई गांवों में रहने वाले लोगों को अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती है। गृह मंत्री द्वारा घोषित इस नीति से इन गांवों के निवासियों में एक नई सुरक्षा का एहसास जगा है। जब सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध ढांचे नहीं होंगे, तो स्वाभाविक रूप से वहां की सुरक्षा चाक-चौबंद होगी। इससे न केवल स्थानीय निवासियों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि उनके जीवन में स्थिरता भी आएगी।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। इस नीति के लागू होने से असामाजिक तत्वों का डर कम होगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों को अधिक सुरक्षित ढंग से अंजाम दिया जा सकेगा।
सुरक्षा के नए आयाम और तकनीकी निगरानी
गृह मंत्रालय की यह 'जीरो टॉलरेंस' नीति केवल निर्माण गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सुरक्षा योजना का हिस्सा है। भारत सरकार लगातार अपनी सीमाओं पर अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। इसमें स्मार्ट फेंसिंग, सेंसर, लेजर वॉल और उच्च तकनीक वाले सर्विलांस कैमरे शामिल हैं।
अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने से इन तकनीकी उपकरणों की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाएगी। बिना किसी बाधा वाली खुली सीमा पर सुरक्षा बल आसानी से संदिग्धों को ट्रैक कर सकेंगे। यह नीति स्पष्ट संदेश देती है कि भारत की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सीमा के पास का इलाका पूरी तरह से निगरानी के दायरे में होगा।
नीति का क्रियान्वयन: एक चुनौतीपूर्ण लेकिन आवश्यक कदम
15 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माण को हटाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसमें स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच बेहतरीन समन्वय की आवश्यकता होगी। गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में सख्ती बरतें और किसी भी प्रकार के राजनीतिक या सामाजिक दबाव में आए बिना इस नीति को लागू करें।
इस नीति के क्रियान्वयन में मुख्य बिंदु निम्नलिखित होंगे:
सर्वेक्षण: सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी निर्माणों का भौतिक और दस्तावेजी सत्यापन।
चिह्नित करना: ऐसे ढांचों की पहचान करना जो सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हैं या जिनके पास उचित कानूनी अनुमति नहीं है।
सख्ती से कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और ढांचों को गिराने की प्रक्रिया।
पारदर्शिता: कार्रवाई के दौरान पूरी पारदर्शिता बरतना ताकि आम जनता को विश्वास में लिया जा सके।
अवैध निर्माण का मुद्दा क्यों है इतना गंभीर?
राष्ट्रीय सुरक्षा के जानकारों का मानना है कि सीमा के पास अवैध निर्माण अक्सर 'स्थानीय समर्थन' का भ्रम पैदा करते हैं, जिसका फायदा दुश्मन देश के एजेंट्स उठाते हैं। इन ढांचों का उपयोग हथियार छिपाने, अवैध संचार नेटवर्क बनाने और सीमा पार से आने वाले लोगों को आश्रय देने में किया जाता है। इसलिए, गृह मंत्री की यह 'जीरो टॉलरेंस' नीति एक कड़ा संदेश है कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की सेंधमारी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत की संप्रभुता और मजबूती का संकल्प
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लिया गया यह निर्णय प्रधानमंत्री के 'सुरक्षित भारत, सशक्त भारत' के विजन को दर्शाता है। सीमाओं की सुरक्षा किसी भी देश के लिए प्राथमिकता होती है, और भारत इस दिशा में दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश कर रहा है। 'जीरो टॉलरेंस' की नीति यह सुनिश्चित करेगी कि भारत की सीमाएं न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि वे चौकन्नी भी हैं।
यह कदम न केवल वर्तमान सुरक्षा चिंताओं को दूर करेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी एक मजबूत दीवार तैयार करेगा। भारत अब अपनी सीमाओं के प्रति बेहद सतर्क है और किसी भी बाहरी या आंतरिक खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सुरक्षा की इस नई रणनीति से देशवासियों का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है कि भारत की सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं।

सत्य निकेतन हादसा: फरार पीजी मालिक की तलाश में जुटी पुलिस
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
अचानक ढही इमारत और मातम का माहौल
दिल्ली के व्यस्त और छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाके सत्य निकेतन में एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ अचानक एक पीजी की इमारत भरभराकर ढह गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। मलबे के नीचे दबने से तीन बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस भयानक दुर्घटना ने स्थानीय प्रशासन और भवन निर्माण सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरार हुआ पीजी मालिक आनंद बंसल
हादसे की भनक लगते ही पीजी का मालिक आनंद बंसल मौके से फरार हो गया। प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस खतरनाक इमारत को सुरक्षा के लिहाज से एक साल पहले ही खाली कराया गया था। इसके बावजूद वहाँ किस तरह की गतिविधियां चल रही थीं और लापरवाही किसकी थी, यह पुलिस जांच का मुख्य विषय बन गया है। मालिक की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरी लापरवाही की परते खुल सकेंगी।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आरोपी मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। आरोपी की तलाश में लगातार विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
बचाव अभियान और घायलों का इलाज
घटनास्थल पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। प्रशासन और बचाव दल मलबे को हटाने में जुटे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और फंसा न हो। हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदयविदारक घटना पर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस दुर्घटना में घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की है। देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस तरह संबल मिलना इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़ा संताप कम करने वाला कदम है।
प्रशासनिक अमला और राहत कार्य
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और राहत दल तुरंत हरकत में आ गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। पीएम मोदी ने खुद इस बात की जानकारी दी कि अधिकारी और बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने और हादसे से प्रभावित हर संभव व्यक्ति तक मदद पहुँचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरक्षा और लापरवाही के सवाल
राजधानी दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की पुरानी या कमजोर इमारतों का जर्जर हालत में होना एक बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सत्य निकेतन की इस घटना ने एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच में जुट गया है कि आखिर इस इमारत के गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या यहाँ किसी प्रकार की प्रशासनिक अनदेखी या नियमों की अवहेलना हुई थी।

दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
घटना का दर्दनाक मंजर और प्रशासनिक हलचल
राजधानी दिल्ली के व्यस्त क्षेत्र सत्य निकेतन में इमारत ढहने की इस आकस्मिक दुर्घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अचानक हुए इस हादसे की चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, इस भयानक मलबे के नीचे दबने से छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और स्थानीय लोग तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद बांसुरी स्वराज का दौरा
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। नेताओं ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर पूरी स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रशासनिक अधिकारियों से घटना के कारणों की पूरी रिपोर्ट मांगी। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा बलों और राहत कर्मियों का बड़ा अमला भी मौजूद रहा, जो लगातार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा हुआ था।
युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य
मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद संभाली और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मलबे में फंसे एक-एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाए। इसके साथ ही, अस्पतालों में भर्ती घायलों को बिना किसी देरी के बेहतर से बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी पीड़ित को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि यह इमारत किस वजह से ढही और इसमें किन नियमों की अनदेखी की गई थी।

सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी की दो टूक
दिल्ली के सत्य निकेतन में घटी दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर दुर्घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजधानी में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं।
छात्रों का जीवन संघर्षों से भरा और अब हालात जानलेवा
राहुल गांधी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश का युवा और छात्र वर्ग पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनगिनत संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आने वाले इन युवाओं को यदि इस तरह के जानलेवा हालातों का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों और कोचिंग hubs के आसपास रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बचाव दलों के लिए तत्काल निर्देश और हर संभव प्रयास
घटना की सूचना मिलते ही राहुल गांधी ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया है कि बचाव दल बिना एक भी पल गंवाए मलबे में फंसे प्रत्येक छात्र तक पहुंचे। उनका साफ कहना था कि इस आपदा की घड़ी में हर एक छात्र की जान बेहद कीमती है और उसकी रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास तुरंत किए जाने चाहिए।
मुश्किल घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ी है पार्टी
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक दलों द्वारा प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाने का सिलसिला जारी है। राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से और अपनी पार्टी की ओर से यह विश्वास दिलाया है कि इस विकट और मुश्किल घड़ी में वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: 80 पदों पर भर्ती का शानदार मौका
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
खबर का निचोड़
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 अगस्त 2026 को शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। जो उम्मीदवार देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों पर अपनी जगह बनाना चाहते हैं, उन्हें तय समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन पत्र जमा करना होगा। अंतिम समय में सर्वर पर लोड बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए समय से पहले आवेदन करना समझदारी होगी।
रिक्तियों का विवरण और योग्यता
इस बार कुल 80 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा से जुड़े तमाम नियम यूपीएससी के आधिकारिक विज्ञापन में विस्तार से दिए गए हैं। सामान्यतः इस पद के लिए उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही तय आयु सीमा के दायरे में आने वाले आवेदक ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।
चयन प्रक्रिया और वेतनमान
चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त होती है, जिसमें आमतौर पर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू) शामिल होते हैं। लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अगले चरण के लिए बुलाया जाता है। इस पद पर चयनित होने वाले युवाओं को आकर्षक वेतनमान और सरकारी सेवाओं मिलने वाले तमाम बेहतरीन लाभ व भत्ते दिए जाते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
कैसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां ओटीआर (One Time Registration) प्रक्रिया पूरी करने के बाद ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती के लिंक पर क्लिक करना होगा। मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सावधानीपूर्वक भरने और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद आवेदन पत्र को सबमिट कर दें। भविष्य के संदर्भ के लिए फाइनल सबमिट किए गए फॉर्म का एक प्रिंटआउट अपने पास जरूर सुरक्षित रख लें।
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