
सिकल सेल रोग उन्मूलन: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में एक मील का पत्थर
भारत के राष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस समारोह की अध्यक्षता की। यह आयोजन सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की प्रगति और देश की जनजातीय आबादी को इस आनुवंशिक स्वास्थ्य संकट से मुक्त कराने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो आगामी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
खबर का निचोड़:
भारत के राष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस समारोह की अध्यक्षता की। यह आयोजन सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की प्रगति और देश की जनजातीय आबादी को इस आनुवंशिक स्वास्थ्य संकट से मुक्त कराने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो आगामी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विस्तृत विश्लेषण
पृष्ठभूमि और वर्तमान संदर्भ
भारत सरकार ने जनजातीय आबादी में अत्यधिक प्रचलित सिकल सेल रोग (SCD) के उन्मूलन को अपनी सर्वोच्च स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल किया है। अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा और जागरूकता बढ़ाने का एक प्रमुख मंच बना। केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक देश से सिकल सेल एनीमिया को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।
सिकल सेल रोग का विज्ञान और प्रभाव
सिकल सेल रोग एक वंशानुगत या आनुवंशिक रक्त विकार है, जो मुख्य रूप से लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) को प्रभावित करता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति में सामान्य गोलाकार और लचीली लाल रक्त कोशिकाएं हंसिया (Sickle) या आधे चांद के आकार में बदल जाती हैं। यह विकृति कोशिकाओं के लचीलेपन को समाप्त कर देती है, जिससे वे रक्त वाहिकाओं में फंस जाती हैं और शरीर के अंगों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है। इसके परिणामस्वरूप तीव्र दर्द (क्राइसिस), क्रोनिक एनीमिया और महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर क्षति पहुंचती है।
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन
केंद्रीय बजट में घोषित इस मिशन का औपचारिक शुभारंभ प्रधान मंत्री द्वारा मध्य प्रदेश के शहडोल से किया गया था। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश के 17 उच्च-प्रचलित राज्यों के 278 जिलों में रहने वाले लगभग 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग करना है। इसके तहत विशेष रूप से 0 से 40 वर्ष की आयु वर्ग की जनजातीय आबादी पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि इस आनुवंशिक बीमारी के संचरण चक्र को समय रहते रोका जा सके।
रणनीतिक हस्तक्षेप और क्रियान्वयन
सरकार इस मिशन को तीन मुख्य स्तंभों—स्वास्थ्य प्रावधान, सामाजिक जागरूकता और अंतर-विभागीय समन्वय—के आधार पर संचालित कर रही है। इसके तहत सिकल सेल जेनेटिक स्टेटस कार्ड (Sickle Cell Genetic Status Card) वितरित किए जा रहे हैं, जो विवाह-पूर्व परामर्श में सहायक होते हैं ताकि भावी पीढ़ियों में इस रोग के प्रसार को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के माध्यम से रोगियों की ट्रैकिंग और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर उपचार व हाइड्रोक्सीयूरिया जैसी आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
परीक्षा के लिए प्रशासनिक और सामाजिक महत्व
नीतिगत दृष्टिकोण से, यह मिशन न केवल सतत विकास लक्ष्य-3 (SDG-3: अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह देश के सबसे कमजोर और हाशिए पर मौजूद जनजातीय समुदायों (विशेष रूप से PVTGs) के स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार करने का एक प्रभावी प्रयास है। परीक्षा में इस विषय से रोग के जैविक स्वरूप, मिशन के राष्ट्रीय लक्ष्यों और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रश्न पूछे जाने की प्रबल संभावना है।

ईरान के बाकी हिस्सों को भी तबाह कर दूंगा: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को बयान दिया है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें ईरान के बचे हुए हिस्से को भी तबाह करना पड़ सकता है। ट्रंप के अनुसार ईरान को दोबारा विकसित होने में 25 साल लग सकते हैं। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के नए हमलों में मदद करने वाला कोई भी देश उसका 'वैध निशाना' होगा।
डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक आक्रामक बयान देते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो उन्हें ईरान के बाकी बचे हिस्सों को भी पूरी तरह तबाह करना पड़ सकता है। ट्रंप का दावा है कि यदि ऐसा होता है, तो ईरान को अपनी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा या विकसित करने में कम से कम 25 साल का लंबा समय लग सकता है। इस तीखे बयान से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां और अधिक बढ़ गई हैं।
ईरान का पलटवार और आक्रामक रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ईरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका द्वारा किए जाने वाले किसी भी नए हमले में किसी अन्य देश ने मदद की, तो वह देश भी ईरान की नजर में उसका 'वैध निशाना' बन जाएगा। इस चेतावनी ने क्षेत्रीय संघर्ष के दायरे को और अधिक व्यापक होने की आशंका को जन्म दे दिया है।

भारत ने किया 'प्रलय' क्वासी बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण
भारत ने गुरुवार को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित 'प्रलय' क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर विकसित किया है, जबकि इसका निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने किया है।
ओडिशा तट से सफल परीक्षण
गुरुवार को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित 'प्रलय' क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण संपन्न हुआ। इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे भारतीय सेना की मारक क्षमता और अधिक पुख्ता हो गई है।
स्वदेशी तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण
इस अत्याधुनिक मिसाइल को अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जा रहा है। 'प्रलय' मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की अन्य प्रमुख प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
निर्माण और उत्पादन में भागीदारी
इस मिसाइल के विकास और उत्पादन प्रक्रिया में रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों ने अहम भूमिका निभाई है। DRDO के विकास और उत्पादन भागीदार के रूप में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने इस मिसाइल का निर्माण किया है। इस सफल परीक्षण के बाद भारतीय सेना की रक्षा और आक्रमण क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

धीरेंद्र शास्त्री पर आपराधिक शिकायत, भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित बयान
बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आगरा सिविल कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह द्वारा दर्ज इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि श्रीकृष्ण बहुत टेढ़े हैं और वह 3 जगह से टेढ़े खड़े होते हैं।
आगरा कोर्ट में दर्ज हुई शिकायत
बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आगरा सिविल कोर्ट में एक आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई है। यह कानूनी कदम अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह की ओर से उठाया गया है। उन्होंने शास्त्री के हालिया बयान को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला और मानहानिकारक बताया है।
बयान पर क्यों खड़ा हुआ विवाद
शिकायत के अनुसार, धीरेंद्र शास्त्री पर आरोप है कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की है। शास्त्री ने अपने एक वक्तव्य के दौरान कथित तौर पर कहा था कि "भगवान श्रीकृष्ण बहुत टेढ़े हैं और वह 3 जगह से टेढ़े खड़े होते हैं"। इस टिप्पणी को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय वकीलों में रोष व्याप्त हो गया।
कानूनी प्रक्रिया और आगे का मामला
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह का तर्क है कि इस प्रकार के वक्तव्य से करोड़ों सनातन धर्मियों की आस्था और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति सम्मान को ठेस पहुंची है। आगरा सिविल कोर्ट में शिकायत दर्ज होने के बाद अब नजरें अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस मामले में शास्त्री को समन जारी किया जाता है या उनसे जवाब तलब किया जाता है।

धनतेरस पर बिना बिल वाला सोना: सर्वे में बड़ा खुलासा
लोकलसर्किल (LocalCircles) के एक हालिया सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 6% से बढ़ाकर 15% की गई इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी के कारण बिना बिल का सोना पक्के बिल की तुलना में काफी सस्ता पड़ रहा है। इसके चलते धनतेरस पर सोना खरीदने का प्लान बना रहे हर 10 में से लगभग 3 लोग (29%) बिना बिल के सोना खरीदने की सोच रहे हैं।
टैक्स बढ़ोतरी से बिना बिल का सोना सस्ता
सर्वे के आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार द्वारा सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने और उस पर लगने वाले जीएसटी के कारण औपचारिक यानी पक्के बिल वाले सोने की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इसके विपरीत, अनौपचारिक या बिना बिल वाला सोना पक्के बिल वाले सोने की तुलना में उपभोक्ताओं को काफी सस्ता महसूस हो रहा है। कीमतों के इस अंतर ने ग्राहकों को अनौपचारिक बाजार की ओर आकर्षित किया है।
सर्वे में चौंकाने वाला आंकड़ा आया सामने
लोकलसर्किल के इस सर्वे के अनुसार, इस धनतेरस पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हर 10 में से लगभग 3 लोग (29%) बिना बिल के सोना खरीदने पर विचार कर रहे हैं। पक्के बिल पर लगने वाले अतिरिक्त टैक्स से बचने की चाहत में लोग इस अनौपचारिक रास्ते की तरफ झुक रहे हैं।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
बिना बिल के सोने की बिक्री का यह बढ़ता रुझान न केवल सरकारी खजाने को राजस्व का नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सोने के बाजार की पारदर्शिता को भी प्रभावित करता है। पक्के बिल के बिना सोना खरीदने से ग्राहकों को भविष्य में शुद्धता की गारंटी और बिक्री के समय कानूनी सुरक्षा नहीं मिल पाती, फिर भी उच्च करों के चलते ग्राहक इस विकल्प की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

भारत की एयर डिफेंस मजबूत, ₹30,000 करोड़ की डील
भारतीय सेना की हवाई सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से लगभग ₹30,000 करोड़ की स्वदेशी QRSAM मिसाइल प्रणाली की डील अंतिम मंजूरी के बिल्कुल करीब है। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से इसकी मंजूरी मिलना बाकी है। इस प्रणाली के तहत BEL सिस्टम का एकीकरण करेगी और BDL मिसाइलों की आपूर्ति करेगी।
कैबिनेट मंजूरी का इंतजार
इस मेगा डिफेंस डील को अमली जामा पहनाने के लिए अब केवल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की औपचारिक मंजूरी मिलने का इंतजार बाकी है। इस रक्षा सौदे के पूरा होने से भारत की स्वदेशी मिसाइल विनिर्माण क्षमता को और अधिक बल मिलेगा तथा देश की रक्षा तैयारी अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ होगी।
प्रमुख रक्षा कंपनियों की अहम भूमिका
इस स्वदेशी मिसाइल प्रणाली परियोजना में देश की प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इस पूरे सिस्टम का एकीकरण (इंटीग्रेशन) करने का काम करेगी। वहीं दूसरी ओर, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) इन उन्नत मिसाइलों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
मारक क्षमता और सुरक्षा दायरा
यह अत्याधुनिक स्वदेशी QRSAM प्रणाली बेहद घातक और तीव्र प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। यह प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और आधुनिक ड्रोनों को सटीकता के साथ निशाना बनाकर नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसके बेड़े में शामिल होने से भारतीय सेना का एयर डिफेंस नेटवर्क पहले से कहीं अधिक ताकतवर और सुरक्षित हो जाएगा।
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