
सलमान खान का बड़ा कदम: असम बाढ़ पीड़ितों के लिए बनवाएंगे 500 घर
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने असम के बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। उन्होंने एक एनजीओ के साथ मिलकर 500 बाढ़-रोधी सेमी-परमानेंट घर बनाने का फैसला किया है। इसके अलावा, उनकी बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन प्रभावित लोगों तक लगातार भोजन और राहत सामग्री पहुंचा रही है।
खबर का निचोड़
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने असम के बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। उन्होंने एक एनजीओ के साथ मिलकर 500 बाढ़-रोधी सेमी-परमानेंट घर बनाने का फैसला किया है। इसके अलावा, उनकी बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन प्रभावित लोगों तक लगातार भोजन और राहत सामग्री पहुंचा रही है।
असम के बाढ़ पीड़ितों के मसीहा बने सलमान खान
असम में हर साल आने वाली भीषण बाढ़ न जाने कितने परिवारों के आशियाने उजाड़ देती है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान असम के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए हैं। आपदा की इस घड़ी में उन्होंने न केवल प्रभावितों के दर्द को समझा, बल्कि उनके पुनर्वास के लिए एक बड़ी पहल की है। सलमान खान का यह कदम बेघर हुए सैकड़ों लोगों के जीवन में नई उम्मीद की किरण लेकर आया है।
500 परिवारों को मिलेगा नया आशियाना
रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान खान ने असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में 500 सेमी-परमानेंट (अस्थायी-स्थायी) घर बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने एक सामाजिक संस्था (NGO) के साथ हाथ मिलाया है। ये घर उन परिवारों को दिए जाएंगे, जिन्होंने बाढ़ के प्रकोप में अपना सब कुछ खो दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बेघर हुए लोगों को सिर छिपाने के लिए एक सुरक्षित और टिकाऊ जगह मुहैया कराना है।
खास तकनीक से तैयार होंगे बाढ़-रोधी घर
इन घरों का निर्माण विशेष रूप से असम के मौसम और भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
ये घर पूरी तरह से बांस और टिन शेड के इस्तेमाल से तैयार किए जाएंगे।
घरों का डिजाइन पूरी तरह से बाढ़-रोधी (Flood-resistant) होगा, ताकि भविष्य में जलभराव या बाढ़ आने पर इन्हें नुकसान न पहुंचे।
प्रत्येक घर के निर्माण में लगभग ₹35,000 से ₹40,000 तक की लागत आने का अनुमान है।
यह योजना न केवल लोगों को त्वरित राहत देगी, बल्कि कम लागत में एक सुरक्षित छत भी प्रदान करेगी।
'बीइंग ह्यूमन' पहुंचा रही है भोजन और राहत
घर बनाने की योजना के साथ-साथ राहत कार्य भी तेजी से चलाए जा रहे हैं। सलमान खान की चैरिटेबल संस्था 'बीइंग ह्यूमन' जमीन पर उतरकर लगातार काम कर रही है। संस्था के वालंटियर्स बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक सूखा राशन, बना हुआ खाना और जरूरत का सामान पहुंचा रहे हैं। संकट के इस दौर में भोजन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराकर संस्था हजारों जिंदगियों को सहारा दे रही है।
बॉलीवुड का 'दबंग' अंदाज में सामाजिक दायित्व
सलमान खान अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपने परोपकारी कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। असम के बाढ़ पीड़ितों के लिए शुरू किया गया यह अभियान एक बार फिर साबित करता है कि वे जरूरत के समय हमेशा देश के नागरिकों के साथ खड़े रहते हैं। बाढ़ के पानी में सब कुछ गंवा चुके परिवारों के लिए 500 नए घरों की यह सौगात एक नई शुरुआत की नींव रखेगी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन: ₹1 लाख के आरोप पर भड़कीं उर्फी जावेद, दिया करारा जवाब
फैज़ान अंसारी ने दावा किया है कि उर्फी जावेद को जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ₹1 लाख का भुगतान किया गया था। इस गंभीर आरोप का जवाब देते हुए उर्फी जावेद ने अंसारी को आड़े हाथों लिया और अपने सोशल मीडिया चार्ज का हवाला देते हुए इस दावे को पूरी तरह से बेबुनियाद और हास्यास्पद करार दिया।
फैज़ान अंसारी ने दावा किया है कि उर्फी जावेद को जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ₹1 लाख का भुगतान किया गया था। इस गंभीर आरोप का जवाब देते हुए उर्फी जावेद ने अंसारी को आड़े हाथों लिया और अपने सोशल मीडिया चार्ज का हवाला देते हुए इस दावे को पूरी तरह से बेबुनियाद और हास्यास्पद करार दिया।
क्या है पूरा विवाद?
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैज़ान अंसारी ने हाल ही में एक सनसनीखेज बयान देते हुए आरोप लगाया कि अभिजीत दीपके ने उर्फी जावेद को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए ₹1 लाख दिए थे। इस खबर के सामने आते ही डिजिटल मीडिया और फैंस के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
प्रदर्शनों में मशहूर हस्तियों की मौजूदगी हमेशा से ध्यान खींचती रही है, लेकिन इस तरह के वित्तीय लेन-देन के दावों ने इस मामले को और अधिक तूल दे दिया। फैज़ान अंसारी के इस आरोप के बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या उर्फी जावेद ने सचमुच पैसों के लिए इस आंदोलन का रुख किया था।
उर्फी जावेद का पलटवार: 'मेरी एक रील की कीमत तो पता करो'
आरोपों के सामने आते ही उर्फी जावेद ने अपने जाने-पहचाने बेबाक अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फैज़ान अंसारी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उर्फी ने कहा कि यह दावा करने वाला इंसान पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना बयानबाज़ी कर रहा है।
उर्फी ने तंज कसते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले को पहले यह जांच-पड़ताल कर लेनी चाहिए कि वह अपने एक सोशल मीडिया रील या प्रमोशन के लिए कितना चार्ज करती हैं। उनका इशारा साफ था कि ₹1 लाख की रकम उनकी ब्रांड वैल्यू और एक रील की फीस के मुकाबले बेहद मामूली है, ऐसे में इतनी रकम के लिए किसी आंदोलन में शामिल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
डिजिटल स्पेस में बयानों की जंग
उर्फी जावेद अपने अतरंगी फैशन सेंस और बेबाक बोल के लिए अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। विवादों से उनका पुराना नाता रहा है, लेकिन किसी आंदोलन में पैसे लेकर शामिल होने का आरोप उनके पेशेवर जीवन से जुड़ा एक नया मोड़ था।
फैज़ान अंसारी के बयान और उस पर उर्फी के कड़े जवाब ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक तरफ आरोपों के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो धड़ों में बंट गए थे, वहीं उर्फी के इस तीखे जवाब ने उनके प्रशंसकों को उनके समर्थन में ला खड़ा किया है। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी ट्रेंड कर रहा है और लोग दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाओं पर अपनी नज़र बनाए हुए हैं।

अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान की भीषण सड़क हादसे में मौत
झांसी में हुए एक भीषण सड़क हादसे में माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद और उसके एक साथी की जान चली गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब अबान अपने भाई अली से जेल में मिलने जा रहा था। कार की रफ्तार तेज होने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया।
झांसी में हुए एक भीषण सड़क हादसे में माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद और उसके एक साथी की जान चली गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब अबान अपने भाई अली से जेल में मिलने जा रहा था। कार की रफ्तार तेज होने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया।
झांसी हाईवे पर दर्दनाक हादसा, कार के उड़े परखच्चे
उत्तर प्रदेश के झांसी में गुरुवार की सुबह एक बड़ा हादसा सामने आया। माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा अबान अहमद अपने साथियों के साथ प्रयागराज से झांसी की ओर जा रहा था। रास्ते में नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित हो गई और जोरदार तरीके से डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इस हादसे में अबान अहमद और कार में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
जेल में बंद भाई से मुलाकात करने जा रहा था अबान
प्राप्त विवरण के अनुसार, अबान अहमद झांसी की जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मुलाकात करने के उद्देश्य से निकला था। प्रयागराज से झांसी की लंबी दूरी तय करते समय कार की गति काफी तेज थी। अचानक संतुलन बिगड़ने से यह बड़ा हादसा हो गया। कार में कुल पांच लोग सवार थे, जिनमें से दो की जान चली गई और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायलों की हालत गंभीर, अस्पताल में इलाज जारी
हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी घायलों को तुरंत पास के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। चिकित्सकों के अनुसार घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उनका गहन इलाज चल रहा है। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सड़क सुरक्षा और हाई स्पीड का जानलेवा संयोजन
हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों का अनियंत्रित होना अक्सर गंभीर हादसों की वजह बनता है। इस दुर्घटना में भी तेज रफ्तार ही मुख्य कारण बनकर सामने आई है। सुबह के समय हाईवे पर वाहनों की गति अधिक होना और अचानक नियंत्रण खो देना जानलेवा साबित हुआ। घटना के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा, जिसे पुलिस ने सुचारू कराया।

16 करोड़ के कर्ज में फंसे अभिनेता राजपाल यादव, शाहजहांपुर में दो संपत्तियां होंगी नीलाम
चेक बाउंस और बैंक कर्ज के मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 16 करोड़ रुपये से अधिक के बकाए की वसूली के लिए उनकी यूपी के शाहजहांपुर स्थित दो संपत्तियों की नीलामी का नोटिस जारी किया है। यह नीलामी 9 सितंबर को होगी।
खबर का निचोड़
चेक बाउंस और बैंक कर्ज के मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 16 करोड़ रुपये से अधिक के बकाए की वसूली के लिए उनकी यूपी के शाहजहांपुर स्थित दो संपत्तियों की नीलामी का नोटिस जारी किया है। यह नीलामी 9 सितंबर को होगी।
बैकफुट पर आए राजपाल यादव: शाहजहांपुर की जायदाद पर बैंक का कब्जा
अपनी बेजोड़ कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाले बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव इस वक्त बेहद गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। लंबे समय से चले आ रहे चेक बाउंस और भारी-भरकम बैंक कर्ज के मामले में अब उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मुंबई की ओर से उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में स्थित उनकी दो प्रमुख संपत्तियों की नीलामी का आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया गया है। आगामी 9 सितंबर को इन संपत्तियों की बोली लगाई जाएगी।
16 करोड़ का बकाया और बैंक का नोटिस
यह पूरा मामला करोड़ों रुपये के बकाया कर्ज से जुड़ा हुआ है। राजपाल यादव पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का 16 करोड़ रुपये से भी अधिक का कर्ज बकाया है। समय पर भुगतान न होने और वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा न कर पाने के कारण बैंक ने यह कड़ा रुख अपनाया है। बैंक की ओर से शाहजहांपुर शहर और उनके पैतृक गांव में स्थित दोनों संपत्तियों पर नीलामी का नोटिस चस्पा कर दिया गया है। इस नोटिस के सार्वजनिक होने के बाद से ही शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
कैसे शुरू हुआ वित्तीय संकट का यह दौर?
राजपाल यादव के इस संकट की शुरुआत कुछ साल पहले हुई थी, जब उन्होंने अपने निर्देशन में फिल्म बनाने के लिए भारी कर्ज लिया था। इसके बाद से ही वे लगातार पैसों के लेनदेन और चेक बाउंस से जुड़े कानूनी मुकदमों में उलझते चले गए। कानूनी दांव-पेच और बैंक के बढ़ते दबाव के बीच उन्हें पहले भी इस मामले में अदालती कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, इस बार बैंक ने बकाए की शत-प्रतिशत वसूली के लिए सीधे अचल संपत्ति की बिक्री का रास्ता चुना है।
9 सितंबर का दिन तय: क्या बचेगा राजपाल का आशियाना?
शाहजहांपुर में चस्पा किए गए नोटिस के अनुसार, नीलामी प्रक्रिया की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 9 सितंबर को होने वाली इस नीलामी के जरिए बैंक अपनी डूबी हुई रकम का एक बड़ा हिस्सा वसूल करने की कोशिश करेगा। राजपाल यादव के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये संपत्तियां उनके गृह नगर और जड़ों से जुड़ी हुई हैं। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर अभिनेता या उनकी लीगल टीम की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन 9 सितंबर की तारीख अब उनके करियर और निजी जिंदगी दोनों के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाली है।

बीइंग ह्यूमन' विवाद: सलमान खान और बहन अलवीरा को कोर्ट का समन
चंडीगढ़ की एक अदालत ने 'बीइंग ह्यूमन' ज्वेलरी से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान और कंपनी के निदेशकों को समन भेजा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शोरूम खोलने के नाम पर झूठे वादे कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई।
सार: चंडीगढ़ की एक अदालत ने 'बीइंग ह्यूमन' ज्वेलरी से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान और कंपनी के निदेशकों को समन भेजा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शोरूम खोलने के नाम पर झूठे वादे कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई।
बीइंग ह्यूमन ब्रांड पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप
बॉलीवुड के दबंग अभिनेता सलमान खान और उनका चैरिटी ब्रांड 'बीइंग ह्यूमन' एक बार फिर कानूनी अड़चनों में घिर गया है। चंडीगढ़ की एक स्थानीय अदालत ने एक कारोबारी की शिकायत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री और 'स्टाइल एंड कंटेंट ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड' के शीर्ष निदेशकों को समन जारी कर जवाब तलब किया है। मामला एक शो-रूम फ्रेंचाइजी में करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?
मामले की शुरुआत चंडीगढ़ के एक स्थानीय व्यापारी की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता व्यापारी का आरोप है कि उन्हें 'बीइंग ह्यूमन' ज्वेलरी का एक एक्सक्लूसिव शोरूम खोलने का प्रस्ताव दिया गया था। डील पक्की करते समय ब्रांड प्रतिनिधियों की ओर से बड़े-बड़े वादे किए गए थे। व्यापारी से कहा गया कि शोरूम शुरू होने के बाद कंपनी की तरफ से हर संभव मार्केटिंग समर्थन दिया जाएगा और खुद सलमान खान भी इसके प्रमोशन में शामिल होंगे।
हालांकि, शोरूम खुलने के बाद स्थिति पूरी तरह उलट गई। व्यापारी का दावा है कि न तो वादे के मुताबिक सामान की डिलीवरी की गई और न ही कंपनी ने किसी तरह का सहयोग दिया। इतना ही नहीं, जिस सलमान खान के नाम पर यह सौदा किया गया था, वह भी किसी प्रमोशनल इवेंट का हिस्सा नहीं बने। इसके चलते कारोबारी को भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ा और उनका करोड़ों रुपये का निवेश डूब गया।
अदालत का सख्त रुख और आगे की कार्रवाई
स्थानीय पुलिस में सुनवाई न होने और कंपनी से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के बाद पीड़ित व्यापारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। चंडीगढ़ कोर्ट ने मामले की गंभीरता, पेश किए गए दस्तावेजों और शुरुआती साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सलमान खान समेत सभी मुख्य आरोपियों के नाम समन जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों को तय तारीख पर पेश होकर अपना रुख स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।
इस घटनाक्रम के बाद मनोरंजन जगत और कॉर्पोरेट गलियारों में खलबली मच गई है। फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत काम करने वाले कई अन्य व्यापारियों की नजरें भी अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर टिकी हुई हैं।

राहुल गांधी के हाथ से अनशन तोड़ना चाहते थे सोनम वांगचुक, नहीं मिला जवाब
लद्दाख के प्रमुख एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने खुलासा किया है कि वह अपना अनशन कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हाथों खत्म करना चाहते थे। 'इंडिया टुडे' को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उनकी सहयोगी गीतांजलि इसके लिए प्रयासरत थीं, लेकिन राहुल गांधी की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या जवाब नहीं मिला।
खबर का निचोड़
लद्दाख के प्रमुख एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने खुलासा किया है कि वह अपना अनशन कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हाथों खत्म करना चाहते थे। 'इंडिया टुडे' को दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उनकी सहयोगी गीतांजलि इसके लिए प्रयासरत थीं, लेकिन राहुल गांधी की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या जवाब नहीं मिला।
अनशन और राहुल गांधी से आस
लद्दाख की पर्यावरण सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर मुखर रहने वाले प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका आंदोलन नहीं, बल्कि उनका एक बड़ा राजनीतिक और व्यक्तिगत खुलासा है। सोनम वांगचुक ने बताया है कि वह अपना अनशन देश के मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी के हाथों जल पीकर समाप्त करना चाहते थे।
वांगचुक का मानना था कि विपक्ष के एक प्रमुख चेहरे की मौजूदगी से लद्दाख के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिलती। इसके लिए उनकी टीम ने बाकायदा प्रयास भी किए, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
'नहीं मिला कोई सकारात्मक जवाब'
'इंडिया टुडे' से बातचीत करते हुए सोनम वांगचुक ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "मेरी सहयोगी गीतांजलि मेरी ही इच्छा पर काम कर रही थीं। वह लगातार कोशिश में जुटी थीं कि राहुल गांधी आएँ और मेरे हाथ में पानी का गिलास थमाकर अनशन खत्म कराएँ।"
हालांकि, वांगचुक के अनुसार कांग्रेस की तरफ से इस प्रस्ताव पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि राहुल गांधी या उनके कार्यालय की ओर से इस संबंध में कोई भी सकारात्मक जवाब नहीं मिला। पूरी कोशिशों के बावजूद विपक्षी नेता की ओर से मिली इस खामोशी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
लद्दाख की आवाज़ और राजनीतिक उपेक्षा
सोनम वांगचुक पिछले काफी समय से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। उनका अनशन इसी संघर्ष का एक अहम हिस्सा था। राहुल गांधी से संपर्क साधने की कोशिश के पीछे मकसद यही था कि लद्दाख की संवेदनशील स्थिति पर देश का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
विपक्ष अमूमन ऐसे जनांदोलनों के साथ खड़ा दिखने का प्रयास करता है, लेकिन वांगचुक के इस दावे के बाद कांग्रेस की कार्यशैली और प्राथमिकताओं पर भी चर्चा छिड़ गई है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में हलचल
इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक तरफ जहाँ सोनम वांगचुक के समर्थक इस बात से आहत हैं कि देश के एक प्रमुख एक्टिविस्ट की बात को अनदेखा किया गया, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी की इस मुद्दे पर चुप्पी को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अपने-अपने मायने निकाल रहे हैं।
बिना किसी जवाब के खत्म हुए इस प्रयास ने लद्दाख के आंदोलन और राष्ट्रीय राजनीति के बीच के फासले को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
Delight News
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