
सबमरीन केबल्स: वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी का मुख्य आधार और रणनीतिक महत्व
आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था और डिजिटल संचार व्यवस्था मुख्य रूप से समुद्र के नीचे बिछे फाइबर-ऑप्टिक केबल्स (सबमरीन केबल्स) पर टिकी है। ऐतिहासिक 'ऑल-रेड लाइन' टेलीग्राफ नेटवर्क से विकसित होकर, ये केबल्स आज दुनिया का 99% से अधिक अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक संचालित करती हैं। वैश्विक रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टिकोण से इनका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
खबर का निचोड़
आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था और डिजिटल संचार व्यवस्था मुख्य रूप से समुद्र के नीचे बिछे फाइबर-ऑप्टिक केबल्स (सबमरीन केबल्स) पर टिकी है। ऐतिहासिक 'ऑल-रेड लाइन' टेलीग्राफ नेटवर्क से विकसित होकर, ये केबल्स आज दुनिया का 99% से अधिक अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक संचालित करती हैं। वैश्विक रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टिकोण से इनका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
विस्तृत विश्लेषण
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकासक्रम
19वीं शताब्दी में ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा शुरू की गई 'ऑल-रेड लाइन' ने दुनिया भर को टेलीग्राफ केबल्स के माध्यम से जोड़कर रणनीतिक संचार की नींव रखी थी। वर्तमान में, तांबे के तारों वाले टेलीग्राफ केबल्स का स्थान अत्याधुनिक फाइबर-ऑप्टिक सबमरीन केबल्स ने ले लिया है। ये केबल्स प्रकाश की गति (लेजर तकनीक) से डेटा संचारित करती हैं, जिससे संदेश भेजने की अवधि महीनों से घटकर नैनो-सेकंड में बदल चुकी है। उपग्रह (सैटेलाइट) संचार की तुलना में ये केबल्स अधिक लागत प्रभावी, तीव्र और उच्च बैंडविड्थ प्रदान करने वाली हैं।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और महत्व
डिजिटल युग में सबमरीन केबल्स को वैश्विक अर्थव्यवस्था की 'लाइफलाइन' माना जाता है। वित्तीय लेनदेन, क्लाउड कंप्यूटिंग, अंतरराष्ट्रीय कॉल्स और इंटरनेट का वैश्विक डेटा प्रवाह इन्हीं के माध्यम से संभव होता है। वर्तमान में गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी बड़ी टेक कंपनियां (हाइपरस्केलर्स) इन केबल्स के निर्माण और संचालन में भारी निवेश कर रही हैं। भौगोलिक रूप से, लाल सागर, मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर जैसे जलमार्ग इन केबल्स के प्रमुख वैश्विक जंक्शन हैं।
सामरिक चुनौतियां और सुरक्षा जोखिम
सबमरीन केबल्स अत्यधिक संवेदनशील बुनियादी ढांचा (Critical Information Infrastructure) हैं, जो विभिन्न भौतिक और साइबर खतरों के प्रति संवेदनशील हैं। समुद्र के नीचे भूकंप, सुनामी या जहाजों के लंगर (Anchors) से इन्हें नुकसान पहुंचने का जोखिम रहता है। इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक तनाव के चलते दुश्मन देशों द्वारा इन केबल्स को काटने या उनके डेटा को इंटरसेप्ट (जासूसी) करने का खतरा हमेशा बना रहता है। हाल के दिनों में लाल सागर और बाल्टिक सागर में केबल्स के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भारत की स्थिति और रणनीतिक कदम
भारत अपनी विशाल डिजिटल अर्थव्यवस्था के कारण सबमरीन केबल्स पर अत्यधिक निर्भर है। मुंबई, चेन्नई, कोच्चि और विशाखापत्तनम भारत के प्रमुख केबल लैंडिंग स्टेशन (CLS) हैं। भारत सरकार ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए 'कोच्चि-लक्षद्वीप द्वीप समूह सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी' (KLI-SOFC) और 'चेन्नई-अंडमान और निकोबार द्वीप समूह' (CANI) परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है। ये पहल सुरक्षा और डिजिटल समावेशन दोनों दृष्टिकोणों से गेम-चेंजर साबित हो रही हैं।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य (Facts for Competitive Exams)
डेटा प्रवाह हिस्सेदारी: वैश्विक इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय वॉयस ट्रैफिक का लगभग 95% से 99% हिस्सा सबमरीन केबल्स के माध्यम से ही स्थानांतरित होता है, न कि उपग्रहों के माध्यम से।
ऑल-रेड लाइन (All-Red Line): यह 19वीं और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाला एक वैश्विक टेलीग्राफ केबल नेटवर्क था, जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूरी तरह ब्रिटिश क्षेत्रों से गुजारा गया था।
केबल लैंडिंग स्टेशन (CLS): यह वह तटीय स्थान होता है जहां समुद्र के नीचे से आने वाली केबल मुख्य भूमि के जमीनी नेटवर्क (Terrestrial Network) से जुड़ती है।
KLI और CANI परियोजनाएं: भारत सरकार के संचार मंत्रालय द्वारा बीएसएनएल (BSNL) के माध्यम से लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार के लिए क्रियान्वित की गई मुख्य सबमरीन केबल परियोजनाएं हैं।
वैश्विक नियामक ढांचा: अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इन केबल्स की सुरक्षा और रखरखाव 'संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि' (UNCLOS) के प्रावधानों के तहत संचालित होता है।

बीएसआईपी में साइंटिस्ट बी के पदों पर बंपर भर्तियां शुरू
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पालयोसाइंसेज (BSIP) ने साइंटिस्ट बी के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 10 अगस्त 2026 से 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह वैज्ञानिक क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा अवसर है।
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पालयोसाइंसेज (BSIP) ने साइंटिस्ट बी के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 10 अगस्त 2026 से 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह वैज्ञानिक क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा अवसर है।
भर्ती प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पालयोसाइंसेज (BSIP) ने वैज्ञानिक बनने का सपना देख रहे योग्य युवाओं के लिए एक शानदार और सुनहरा अवसर पेश किया है। संस्थान द्वारा साइंटिस्ट बी के पदों पर सीधी भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज यानी 10 अगस्त 2026 से आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। जो उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करना चाहते हैं, वे 4 सितंबर 2026 तक अपना ऑनलाइन आवेदन सुरक्षित रूप से जमा कर सकते हैं। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है।
शैक्षणिक योग्यता और पात्रता के मानदंड
इस भर्ती अभियान के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में उच्च शिक्षा और विशेषज्ञता होनी चाहिए। बीएसआईपी के निर्धारित मानकों के अनुसार विभिन्न विभागों के अंतर्गत पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक और शोध योग्यताएं तय की गई हैं। उम्मीदवारों को पूरी तरह आश्वस्त हो जाना चाहिए कि वे सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता और अन्य श्रेणियों में दी जाने वाली छूट से जुड़ी तमाम जरूरी जानकारियां संस्थान द्वारा जारी विस्तृत विज्ञापन में उपलब्ध कराई गई हैं।
ऑनलाइन आवेदन करने की सरल प्रक्रिया
इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बीएसआईपी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आसानी से अपना ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। अंतिम तिथि यानी 4 सितंबर 2026 के करीब आने पर वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक और सर्वर संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें। आवेदन फॉर्म भरते समय अपने सभी जरूरी दस्तावेज, प्रमाण पत्र और फोटोग्राफ एकदम सही तरीके से अपलोड करें।
चयन प्रक्रिया और मिलने वाला वेतनमान
बीएसआईपी साइंटिस्ट बी पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन पारदर्शी और उच्च स्तरीय मानदंडों के आधार पर किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक रिकॉर्ड की स्क्रीनिंग और साक्षात्कार प्रक्रिया मुख्य रूप से शामिल होगी। इस पद पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को शानदार वेतनमान के साथ-साथ सरकार द्वारा निर्धारित अन्य बेहतरीन भत्ते भी प्राप्त होंगे। पालयोसाइंसेज और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में करियर संवारने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए यह एक बेहतरीन और ऐतिहासिक अवसर है।

निजी क्षेत्र का पहला एफएफएससी 'ईवेरेस्ट' रॉकेट इंजन लॉन्च
बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष स्टार्टअप एस्ट्रोब्रेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने भारत के पहले निजी रूप से निर्मित 800 किलोन्यूटन 'फुल-फ्लो स्टेज्ड कम्बशन' (FFSC) एलओएक्स-मीथेन रॉकेट इंजन 'ईवेरेस्ट' का अनावरण किया है। यह उन्नत इंजन देश के पुनर्चक्रण योग्य मध्यम-भार प्रक्षेपण वाहनों को सशक्त बनाने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सारांश:
बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष स्टार्टअप एस्ट्रोब्रेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने भारत के पहले निजी रूप से निर्मित 800 किलोन्यूटन 'फुल-फ्लो स्टेज्ड कम्बशन' (FFSC) एलओएक्स-मीथेन रॉकेट इंजन 'ईवेरेस्ट' का अनावरण किया है। यह उन्नत इंजन देश के पुनर्चक्रण योग्य मध्यम-भार प्रक्षेपण वाहनों को सशक्त बनाने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण:
'ईवेरेस्ट' इंजन की तकनीकी विशेषताएँ और संरचना
एस्ट्रोब्रेस स्पेस टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित 'ईवेरेस्ट' एक 80-टन वर्ग का उच्च-थ्रस्ट (800 किलोन्यूटन) तरल-प्रोपेलेंट रॉकेट इंजन है। यह लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) और लिक्विड मीथेन के संयोजन (मेथालॉक्स) का उपयोग करता है। यह इंजन दुनिया की सबसे उन्नत और जटिल 'फुल-फ्लो स्टेज्ड कम्बशन' (FFSC) आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिसमें ईंधन और ऑक्सीडाइज़र दोनों को मुख्य दहन कक्ष में प्रवेश करने से पहले पूरी तरह से गैसीकृत किया जाता है। इससे इंजन की दक्षता, चेंबर का दबाव और विशिष्ट आवेग (लगभग 340 सेकंड) अत्यधिक बढ़ जाता है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत की स्थिति
एफएफएससी (FFSC) तकनीक अपनी अत्यधिक जटिल टर्बोमैचरी और थर्मल स्थितियों के कारण वैश्विक स्तर पर बेहद दुर्लभ है। इस तकनीक के विकास के साथ भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद इस विशिष्ट तकनीक को हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है, जबकि एस्ट्रोब्रेस वैश्विक स्तर पर ऐसी उच्च-थ्रस्ट इंजन विकसित करने वाली चुनिंदा वाणिज्यिक कंपनियों में शामिल हो गई है। यह उपलब्धि पारंपरिक अंतरिक्ष शक्तियों के समकक्ष भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तकनीकी परिपक्वता को दर्शाती है।
औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और भविष्य के अनुप्रयोग
यह इंजन विशेष रूप से अगली पीढ़ी के पुनर्चक्रण योग्य (reusable) मध्यम-भार वाले लॉन्च वाहनों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 30 टन तक के पेलोड को ले जाने में सक्षम हैं। कंपनी का उद्देश्य उन्नत धातु 3D-प्रिंटिंग तकनीकों का उपयोग करके वार्षिक आधार पर 50 इंजनों के निर्माण की क्षमता विकसित करना है। अंतरिक्ष मिशनों में तीव्र प्रतिक्रिया और लॉन्च-ऑन-डिमांड क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए यह पहल भारत के बढ़ते अंतरिक्ष उद्योग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

भारत के समुद्री प्रशासन के डिजिटल आधुनिकीकरण हेतु ई-समुद्र पोर्टल
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया 'ई-समुद्र' पोर्टल भारत के समुद्री प्रशासन में डिजिटल क्रांति लाने की एक एकीकृत पहल है। यह मंच समुद्री क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, लाइसेंसिंग और विनियामक प्रक्रियाओं को सुगम, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सारांश:
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया 'ई-समुद्र' पोर्टल भारत के समुद्री प्रशासन में डिजिटल क्रांति लाने की एक एकीकृत पहल है। यह मंच समुद्री क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, लाइसेंसिंग और विनियामक प्रक्रियाओं को सुगम, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण:
ई-समुद्र पोर्टल की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया ई-समुद्र पोर्टल भारत के समुद्री क्षेत्र (मैरिटाइम सेक्टर) में तकनीकी एकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के शिपिंग प्रशासन को पूरी तरह से डिजिटल बनाना और 'ई-गवर्नेंस' के दायरे को और अधिक व्यापक करना है। यह पोर्टल पारंपरिक कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है, जिससे प्रशासनिक जटिलताएं कम होती हैं।
पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं और कार्यप्रणाली
यह एकीकृत पोर्टल जहाजों के पंजीकरण, नाविकों (सीफेयरर्स) के प्रमाणन, और विभिन्न विनियामक सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से उद्योग से जुड़े हितधारक बिना किसी भौतिक हस्तक्षेप के ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अपनी फाइलों की वास्तविक समय (रियल-टाइम) ट्रैकिंग कर सकते हैं। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ती है और सेवाओं के वितरण में लगने वाले समय में भारी कमी आती है।
समुद्री क्षेत्र पर प्रभाव और प्रशासनिक लाभ
ई-समुद्र पोर्टल के लागू होने से भारत के समुद्री प्रशासन की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह पहल देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार सुगमता) को बढ़ावा देती है और वैश्विक मानकों के अनुरूप भारतीय शिपिंग सेक्टर को मजबूत करती है। इसके अलावा, सटीक और केंद्रीयकृत डेटा प्रबंधन से नीति निर्माण तथा रणनीतिक निर्णयों में तेजी आएगी, जिससे भारत को एक अग्रणी वैश्विक समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के विजन को बल मिलेगा।

नकली आईएएस और डोभाल का 'जासूस': खगड़िया में 100 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश
बिहार के खगड़िया में पुलिस ने मनीष गुप्ता नामक एक बड़े ठग को गिरफ्तार किया है। खुद को आईएएस और एनएसए अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताकर उसने करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई। उसके पास से ड्राइवरलेस टेस्ला कार, लग्जरी गाड़ियां और बारहसिंगा के सींग बरामद हुए हैं।
> न्यूज़ समरी
> बिहार के खगड़िया में पुलिस ने मनीष गुप्ता नामक एक बड़े ठग को गिरफ्तार किया है। खुद को आईएएस और एनएसए अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताकर उसने करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई। उसके पास से ड्राइवरलेस टेस्ला कार, लग्जरी गाड़ियां और बारहसिंगा के सींग बरामद हुए हैं।
>
शातिर ठग का मायाजाल
बिहार के खगड़िया जिले में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को दबोचा है, जिसके कारनामों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। मनीष गुप्ता नाम का यह शख्स खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी और देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का बेहद खास 'अंडरकवर एजेंट' बताता था। अपनी इस झूठी और हाई-प्रोफाइल पहचान की आड़ में वह भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाता और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद इस शातिर के कई चौंकाने वाले राज खुले हैं।
करोड़ों की संपत्ति और शाही ठाट-बाट
पड़ताल के दौरान पुलिस को मनीष गुप्ता के ठिकाने से अकूत संपत्ति का पता चला है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए उसने करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति खड़ी कर ली थी। उसके पास से एक ड्राइवरलेस टेस्ला कार और कई अन्य लग्जरी गाड़ियां बरामद हुई हैं, जो उसके शाही और रसूखदार जीवनशैली की गवाही देती हैं। इसके अलावा, उसके पास से 23 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड, भारी मात्रा में विदेशी शराब और वन्यजीव संरक्षण कानून के दायरे में आने वाले बारहसिंगा के सींग भी मिले हैं।
आर्थिक अपराध इकाई संभालेगी कमान
मामले की गंभीरता को देखते हुए खगड़िया पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और करोड़ों की अवैध संपत्ति अर्जित करने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाने के लिए अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष टीम को मैदान में उतारा जाएगा। पुलिस यह खंगालने में जुटी है कि इस ठग ने किन-किन विभागों और बड़े लोगों को अपने झांसे में लिया था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और ठगी के शिकार अन्य लोग भी अब खुलकर सामने आने लगे हैं।

संसद में संग्राम: FCRA और परिसीमन पर महासंग्राम, विपक्ष के बीच पास हुआ ट्रिब्यूनल बिल
संसद के मानसून सत्र में FCRA और परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। हंगामे के बीच न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पारित हो गया है। राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक पर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है, जबकि राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
खबर का निचोड़
संसद के मानसून सत्र में FCRA और परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। हंगामे के बीच न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पारित हो गया है। राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक पर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है, जबकि राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
संसद में उबाल और हंगामे के बीच विधेयक पास
संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों पर गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों के कड़े हंगामे और भारी विरोध के बीच सरकार ने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक को संसद से पारित कराने में सफलता हासिल की है। सदन के भीतर और बाहर जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और अधिक बढ़ने वाला है।
राहुल गांधी का हमला और अमित शाह का पलटवार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने नीट (NEET) पेपर लीक के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर डाली है। इस तीखे हमले ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से मोर्चा संभालते हुए अमित शाह ने छात्रों के विरोध और विपक्ष के हर सवाल का करारा जवाब देने की बात कही है। सरकार का यह रुख साफ संकेत देता है कि वह विपक्ष के दबाव के आगे झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
FCRA और परिसीमन पर सियासी पैंतरेबाजी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर समर्थन जुटाने के लिए FCRA के कुछ प्रावधानों पर नरमी बरतने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस रणनीति की राह आसान नहीं है। द्रमुक (DMK) और राकांपा (NCP-SP) जैसी पार्टियां इसका पुरजोर विरोध कर रही हैं, जिससे क्षेत्रीय समीकरण उलझते नजर आ रहे हैं।
संस्थाओं के नियंत्रण पर छिड़ी जुबानी जंग
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर किया जा रहा है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने FCRA संशोधन का पूरी ताकत से समर्थन किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए 'राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों' पर लगाम कसना बेहद जरूरी है, जिसके लिए यह कानून आवश्यक कदम है।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन, निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
हमारा आधिकारिक एंड्रॉइड एप्लिकेशन Google Play Store पर बहुत जल्द लाइव होने जा रहा है। अपडेट मिलते ही डाउनलोड लिंक यहाँ उपलब्ध करा दी जाएगी।