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रिश्वत की सोच रहे हैं तो 100 बार सोचें: तुकाराम मुंढे

रिश्वत की सोच रहे हैं तो 100 बार सोचें: तुकाराम मुंढे

Delight News
📅 17 Aug2026

महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने साफ किया है कि वे घमंडी नहीं बल्कि अपने रुख में पूरी तरह स्पष्ट हैं। भ्रष्टाचार और लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि उनके सामने रिश्वत देने की हिम्मत कोई आसानी से नहीं कर सकता। 1999 बैच के आईएएस अधिकारी अपने सख्त एक्शन के लिए जाने जाते हैं।

रिश्वत की सोच रहे हैं तो 100 बार सोचें: तुकाराम मुंढे
महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने साफ किया है कि वे घमंडी नहीं बल्कि अपने रुख में पूरी तरह स्पष्ट हैं। भ्रष्टाचार और लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि उनके सामने रिश्वत देने की हिम्मत कोई आसानी से नहीं कर सकता। 1999 बैच के आईएएस अधिकारी अपने सख्त एक्शन के लिए जाने जाते हैं।
दबंग छवि और भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के प्रमुख तुकाराम मुंढे अपनी सख्त कार्यशैली के लिए पूरे राज्य में पहचाने जाते हैं। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद से ही उन्होंने नियम-कायदों से कोई समझौता नहीं किया। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी छवि और कामकाज के तरीके पर खुलकर बात की।
मुंढे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी व्यक्ति उनके पास आकर गलत काम कराने या रिश्वत देने की जुर्रत नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा सोचता भी है, तो उसे कम से कम सौ बार सोचना पड़ेगा। उनका यह बयान प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचाने के साथ-साथ यह संदेश भी देता है कि उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है।
घमंडी नहीं, केवल अपने काम में स्पष्ट
प्रशासनिक गलियारों में तुकाराम मुंढे को अक्सर कठोर और घमंडी कहा जाता है। इस धारणा पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि लोग उन्हें गलत समझते हैं। वे घमंडी बिल्कुल नहीं हैं, बल्कि वे जो सोचते हैं और जो नियम कहते हैं, उसे बिना किसी झिझक के सामने रख देते हैं।
उनका मानना है कि काम के प्रति यह स्पष्टता और ईमानदारी ही लोगों को कभी-कभी कठोर लग सकती है। जनहित में कड़े फैसले लेना और नियमों का पूरी सख्ती से पालन कराना ही उनकी प्राथमिकता रही है, भले ही इसके लिए उन्हें किसी भी विरोध का सामना करना पड़े।
ताबड़तोड़ कार्रवाई से हड़कंप
एफडीए चीफ का पद संभालने के बाद से ही तुकाराम मुंढे लगातार ताबड़तोड़ एक्शन ले रहे हैं। मिलावटखोरी, नकली दवाओं की बिक्री और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उन्होंने मुहीम छेड रखी है। राज्यभर में हो रही छापेमारी और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई से नियम तोड़ने वालों में खौफ का माहौल है।
आईएएस अधिकारी के रूप में अपने दो दशक से अधिक के करियर में मुंढे का कई बार तबादला हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी कार्यशैली कभी नहीं बदली। उनका सीधा संदेश है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या रिश्वतखोरी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बीमार पत्नी का बहाना बना शिक्षिका पर डाला अनैतिक दबाव, आरोपी गिरफ्तार

बीमार पत्नी का बहाना बना शिक्षिका पर डाला अनैतिक दबाव, आरोपी गिरफ्तार

Delight News
📅 02 Oct2026

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक प्राइवेट स्कूल संचालक का शर्मनाक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी संचालक शिक्षिका पर 'पत्नी बीमार है' का बहाना बनाकर अवैध संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था।

कुशीनगर में सनसनी: बीमार पत्नी का बहाना बना शिक्षिका पर डाला अनैतिक दबाव, आरोपी गिरफ्तार
खबर का निचोड़
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक प्राइवेट स्कूल संचालक का शर्मनाक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी संचालक शिक्षिका पर 'पत्नी बीमार है' का बहाना बनाकर अवैध संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था।
शर्मनाक करतूत का वीडियो वायरल
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। एक प्राइवेट स्कूल के संचालक ने मर्यादा की सभी सीमाएं लांघते हुए अपने ही स्कूल की एक महिला शिक्षिका पर अनुचित और अनैतिक दबाव बनाने का प्रयास किया। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
वीडियो में स्कूल संचालक शिक्षिका को अपनी ओर आकर्षित करने और अनुचित संबंध बनाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाता दिख रहा है। वह महिला शिक्षिका से यह कहते हुए दबाव बना रहा था कि उसकी पत्नी बीमार रहती है। आरोपी की इस ओछी हरकत का वीडियो जैसे ही सार्वजनिक हुआ, लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और सोशल मीडिया पर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामला संज्ञान में आते ही कुशीनगर पुलिस तुरंत हरकत में आई और घटना की जांच शुरू कर दी। पीड़िता की शिकायत और वायरल वीडियो के साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया।
पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी स्कूल संचालक को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी पंजीकृत कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर प्राइवेट संस्थानों और शैक्षणिक परिसरों में कार्यरत महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ महिलाओं को सशक्त बनाने और कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल देने के दावे किए जाते हैं, वहीं इस प्रकार की घटनाएं कार्यप्रणाली की पोल खोलती हैं।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने भी इस घटना पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है। लोगों का मानना है कि इस तरह के कृत्य से शिक्षा के पवित्र मंदिर की छवि धूमिल होती है। फिलहाल आरोपी पुलिस की कस्टडी में है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
रैपिडो चालक बोला- मैं गे हूं, युवती के 'पिंक राइड' बुक करने पर पहुंचा राइडर ; कंपनी ने दी प्रतिक्रिया

रैपिडो चालक बोला- मैं गे हूं, युवती के 'पिंक राइड' बुक करने पर पहुंचा राइडर ; कंपनी ने दी प्रतिक्रिया

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📅 02 Oct2026

महाराष्ट्र की एक युवती द्वारा रैपिडो की केवल महिलाओं के लिए आरक्षित 'पिंक बाइक' सेवा बुक करने पर एक पुरुष चालक पहुंच गया। विरोध करने पर राइडर ने अजीब तर्क दिया। राइड कैंसिल करने पर युवती को जुर्माना भी भरना पड़ा। शिकायत के बाद कंपनी ने संबंधित कैप्टन को हटा दिया है।

रैपिडो पिंक राइड विवाद: महिला के लिए पहुंचे पुरुष राइडर ने क्या कहा?
खबर का निचोड़:
महाराष्ट्र की एक युवती द्वारा रैपिडो की केवल महिलाओं के लिए आरक्षित 'पिंक बाइक' सेवा बुक करने पर एक पुरुष चालक पहुंच गया। विरोध करने पर राइडर ने अजीब तर्क दिया। राइड कैंसिल करने पर युवती को जुर्माना भी भरना पड़ा। शिकायत के बाद कंपनी ने संबंधित कैप्टन को हटा दिया है।
सुरक्षा का दावा और एक अजीब घटना
सुरक्षा और सुविधा के नाम पर राइड-शेयरिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए कभी-कभी अजीबोगरीब स्थितियां पैदा हो जाती हैं। ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र से सामने आया है, जहां एक युवती ने रैपिडो ऐप पर विशेष रूप से महिलाओं के लिए उपलब्ध 'पिंक बाइक' सेवा की बुकिंग की थी। लेकिन जब राइडर मौके पर पहुंचा, तो सामने एक पुरुष चालक खड़ा था। जब युवती ने इस पर आपत्ति जताई और सवाल पूछा, तो राइडर ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया, "मैडम, मैं गे हूं"।
फर्जी प्रोफाइल और कैंसिलेशन फीस का झोल
युवती के अनुसार, रैपिडो ऐप पर राइडर की प्रोफाइल में एक महिला की तस्वीर लगी हुई थी, जिसके आधार पर उसने राइड सुरक्षित मानकर बुक की थी। लेकिन धरातल पर सच्चाई पूरी तरह अलग निकली। जब युवती ने सुरक्षा कारणों से इस यात्रा को पूरा करने से इनकार किया और राइड कैंसिल की, तो उसे ऐप की तरफ से ₹15 का फाइन (कैंसिलेशन शुल्क) भी भरना पड़ा। महिला ने सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए यह भी चिंता जताई कि राइडर के पास उसका चेहरा और लाइव लोकेशन देखने की सुविधा पहले से ही मौजूद थी।
सोशल मीडिया पर हंगामा और कंपनी की कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आते ही सोशल मीडिया पर सुरक्षा मानकों को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाए कि जब सेवा विशेष रूप से महिलाओं के लिए है, तो एक पुरुष राइडर महिला की प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करके कैसे सिस्टम को चकमा दे सकता है। मामले का संज्ञान लेते हुए रैपिडो कंपनी ने अपनी प्रतिक्रिया जारी की। कंपनी ने युवती से असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया और बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संबंधित कैप्टन को प्लेटफॉर्म से तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया है।
औद्योगिक संबंध संहिता 2020 में स्थायी आदेशों का बढ़ता प्रभाव

औद्योगिक संबंध संहिता 2020 में स्थायी आदेशों का बढ़ता प्रभाव

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📅 02 Oct2026

औद्योगिक संबंध संहिता (IR Code) 2020 के तहत स्थायी आदेश (Standing Orders) सेवा शर्तों, अनुशासन और रोजगार सुरक्षा को स्पष्ट करने वाले प्रमुख कानूनी ढाँचे हैं। प्रयोज्यता की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी करने से व्यावसायिक सुगमता बढ़ी है, जबकि श्रम कल्याण और औद्योगिक शांति के बीच संतुलन कायम किया गया है।

Standing Orders in Labour Law Reform
शीर्षक (Title)
औद्योगिक संबंध संहिता 2020 में स्थायी आदेशों का बढ़ता प्रभाव
सारांश (Summary)
औद्योगिक संबंध संहिता (IR Code) 2020 के तहत स्थायी आदेश (Standing Orders) सेवा शर्तों, अनुशासन और रोजगार सुरक्षा को स्पष्ट करने वाले प्रमुख कानूनी ढाँचे हैं। प्रयोज्यता की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी करने से व्यावसायिक सुगमता बढ़ी है, जबकि श्रम कल्याण और औद्योगिक शांति के बीच संतुलन कायम किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis)
पृष्ठभूमि एवं वैधानिक ढाँचा
औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम 1946 को अब औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में समाहित कर दिया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों में नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच रोजगार की शर्तों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना है। यह ढाँचा काम के घंटे, छुट्टियों का दायरा, शिफ्ट संचालन, छुट्टी का प्रकार, और सेवा समाप्ति से जुड़े नियमों को मानकीकृत करता है, जिससे औद्योगिक विवादों की गुंजाइश न्यूनतम हो जाती है।
प्रयोज्यता सीमा में बदलाव
नए लेबर कोड के तहत स्थायी आदेशों की अनिवार्यता के लिए प्रतिष्ठान में श्रमिकों की न्यूनतम सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर दी गई है। अब केवल 300 या उससे अधिक श्रमिकों वाले औद्योगिक संस्थानों के लिए ही औपचारिक स्थायी आदेश बनाना और प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर अनुपालन बोझ (Compliance Burden) को कम करना और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देना है।
मॉडल स्थायी आदेश और लचीलापन
केंद्र सरकार विभिन्न उद्योगों के लिए 'मॉडल स्थायी आदेश' (Model Standing Orders) जारी करती है। यदि कोई प्रतिष्ठान अपनी विशिष्ट शर्तों को लागू नहीं करता है, तो उस पर सरकार द्वारा निर्धारित मॉडल आदेश स्वतः लागू माने जाते हैं। इसके साथ ही, नियोक्ताओं को बाज़ार की बदलती माँगों के अनुसार कार्यबल के आकार को व्यवस्थित करने में अधिक लचीलापन प्राप्त हुआ है, जबकि श्रमिकों के अधिकारों को निर्धारित प्रक्रियाओं के अधीन रखा गया है।
विवाद निवारण एवं प्रशासनिक प्रक्रिया
स्थायी आदेशों के तहत किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट जाँच प्रक्रिया का प्रावधान है। श्रमिक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल है। प्रमाणीकरण अधिकारी (Certifying Officer) यह सुनिश्चित करता है कि आदेश के नियम निष्पक्ष हों। इस प्रकार यह ढाँचा न केवल नियोक्ताओं को प्रशासनिक स्पष्टता प्रदान करता है, बल्कि श्रमिकों को मनमाने निष्कासन से सुरक्षा भी देता है।
4 श्रम संहिताओं का श्रम बाजार पर प्रभाव और सुधार

4 श्रम संहिताओं का श्रम बाजार पर प्रभाव और सुधार

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📅 02 Oct2026

​द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को निरस्त करके चार एकीकृत श्रम संहिताओं—वेतन संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020), तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता (2020)—का ढांचा तैयार किया है।

4 श्रम संहिताओं का श्रम बाजार पर प्रभाव और सुधार
द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को निरस्त करके चार एकीकृत श्रम संहिताओं—वेतन संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020), तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता (2020)—का ढांचा तैयार किया है। यह प्रशासनिक सुधार न्यूनतम मजदूरी की वैधानिक गारंटी, गिग एवं प्लेटफार्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज, और प्रत्यक्ष निश्चित अवधि रोजगार (FTE) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
पृष्ठभूमि और कानूनों का समेकन
भारत के जटिल और असंगठित श्रम कानूनी ढांचे को सुव्यवस्थित करने के लिए 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में एकीकृत किया गया है। वेतन संहिता, 2019 ने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 जैसे चार अधिनियमों का स्थान लिया है। औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 ने औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 सहित तीन कानूनों को समेकित किया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESIC) से संबंधित नौ कानूनों को शामिल किया गया है। व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां (OSHWC) संहिता, 2020 ने कारखाना अधिनियम 1948 सहित 13 कानूनों को एकीकृत किया है।
मुख्य प्रावधान और प्रशासनिक परिवर्तन
वेतन संहिता के अंतर्गत सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक 'फ्लोर वेज' का निर्धारण अनिवार्य किया गया है, जिससे नीचे कोई भी राज्य मजदूरी दर तय नहीं कर सकता। औद्योगिक संबंध संहिता ने बिना सरकारी पूर्व अनुमति के ले-ऑफ या छंटनी की सीमा को 100 श्रमिकों से बढ़ाकर 300 श्रमिक कर दिया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के माध्यम से पहली बार असंगठित, गिग और प्लेटफार्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया गया है। व्यावसायिक सुरक्षा संहिता के तहत 12 घंटे की अधिकतम दैनिक सीमा के साथ 48 घंटे का साप्ताहिक कार्य ढांचा तय किया गया है और ओवरटाइम पर दोगुना वेतन का प्रावधान किया गया है।
अनुपालन और लैंगिक समानता
व्यावसायिक अनुपालन प्रणाली में 'निरीक्षक' (Inspector) के स्थान पर 'फैसिलिटेटर' (Inspector-cum-Facilitator) की अवधारणा प्रस्तुत की गई है, जिससे वेब-आधारित पारदर्शी निरीक्षण और सलाह को बढ़ावा मिलेगा। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए OSHWC संहिता के तहत उनकी सहमति से रात्रि पाली (रात 7 बजे से सुबह 6 बजे) में कार्य करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते नियोक्ता सुरक्षा, परिवहन और क्रेश सुविधाएं सुनिश्चित करे। निश्चित अवधि रोजगार (Fixed Term Employment) के अंतर्गत अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के समान ही आनुपातिक सामाजिक सुरक्षा और एक वर्ष की सेवा के बाद ग्रैच्युटी का अधिकार दिया गया है।
भारतीय रेलवे में 5,000 से ज्यादा पदों पर बंपर वैकेंसी

भारतीय रेलवे में 5,000 से ज्यादा पदों पर बंपर वैकेंसी

Delight News
📅 02 Oct2026

रेलवे भर्ती बोर्ड ने NTPC के तहत स्नातक और 12वीं पास उम्मीदवारों के लिए कुल 5,165 पदों पर भर्तियां निकाली हैं। योग्य अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इनमें स्टेशन मास्टर और ट्रेन क्लर्क सहित कई अहम पद शामिल हैं।

भारतीय रेलवे में 5,000 से ज्यादा पदों पर बंपर वैकेंसी
खबर का निचोड़
रेलवे भर्ती बोर्ड ने NTPC के तहत स्नातक और 12वीं पास उम्मीदवारों के लिए कुल 5,165 पदों पर भर्तियां निकाली हैं। योग्य अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इनमें स्टेशन मास्टर और ट्रेन क्लर्क सहित कई अहम पद शामिल हैं।
मुख्य आर्टिकल
भारतीय रेलवे में 5,165 पदों पर निकली बंपर भर्तियां
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। रेलवे भर्ती बोर्ड ने NTPC श्रेणी के तहत कुल 5,165 रिक्त पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती अभियान में 12वीं पास और ग्रेजुएट दोनों वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग पदों की पेशकश की गई है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल rrbapply.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
ग्रेजुएट युवाओं के लिए 3,477 पदों का अवसर
स्नातक स्तर के अभ्यर्थियों के लिए कुल 3,477 पद आरक्षित किए गए हैं। इन पदों में स्टेशन मास्टर, गुड्स ट्रेन मैनेजर और सीनियर क्लर्क जैसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित पद शामिल हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य है।
12वीं पास के लिए 1,688 पदों पर मौका
जो उम्मीदवार 12वीं कक्षा पास कर चुके हैं, उनके लिए भी भर्ती में बड़ा मौका दिया गया है। इंटरमीडिएट स्तर के अभ्यर्थियों के लिए कुल 1,688 पदों की घोषणा की गई है। इन पदों में कमर्शियल कम टिकट क्लर्क, ट्रेन क्लर्क, जूनियर क्लर्क सह टाइपिस्ट और अकाउंट्स क्लर्क जैसे विभिन्न पद शामिल हैं।
आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर करें आवेदन
इन सभी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया और नियम भर्ती बोर्ड द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत होंगे। योग्य अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें। आवेदन प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी उम्मीदवार रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाकर देख सकते हैं।

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