
रेलवे में सरकारी नौकरी का शानदार मौका: 1599 अप्रेंटिस पदों पर बंपर भर्ती शुरू
रेलवे भर्ती सेल, भुवनेश्वर ने पूर्वी तट रेलवे के तहत 1599 अप्रेंटिस पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 15 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सुनहरा अवसर उन युवाओं के लिए है जो रेलवे सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
खबर का निचोड़
रेलवे भर्ती सेल, भुवनेश्वर ने पूर्वी तट रेलवे के तहत 1599 अप्रेंटिस पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 15 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सुनहरा अवसर उन युवाओं के लिए है जो रेलवे सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
रेलवे अप्रेंटिस भर्ती का पूरा विवरण
भारतीय रेलवे में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए पूर्वी तट रेलवे (ECoR) ने एक बेहतरीन अवसर प्रदान किया है। रेलवे भर्ती सेल (RRC) भुवनेश्वर ने वर्ष 2026-27 के लिए अप्रेंटिसशिप के तहत कुल 1599 पदों पर भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। इस भर्ती के माध्यम से विभिन्न ट्रेडों में युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे।
आवेदन प्रक्रिया आज यानी 26 अगस्त 2026 से आधिकारिक वेबसाइट पर शुरू हो चुकी है। जिन उम्मीदवारों के पास निर्धारित योग्यता है, वे बिना अंतिम तिथि का इंतजार किए तुरंत आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती अभियान से जुड़े सभी महत्वपूर्ण आंकड़े और तिथियां स्पष्ट कर दी गई हैं ताकि युवाओं को आवेदन करने में कोई परेशानी न हो।
महत्वपूर्ण तिथियां और आयु सीमा
इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर ही अपना आवेदन पत्र सफलताપૂર્વक जमा कर दें।
आयु सीमा की बात करें तो आवेदकों की न्यूनतम आयु 15 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना 15 सितंबर 2026 को आधार मानकर की जाएगी। आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में नियमानुसार छूट का प्रावधान भी दिया गया है।
शैक्षिक योग्यता और चयन प्रक्रिया
आरआरसी ईसीओआर अप्रेंटिस भर्ती 2026 के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं कक्षा या इसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इसके साथ ही संबंधित ट्रेड में आईटीआई (ITI) का प्रमाण पत्र होना भी आवश्यक है।
चयन प्रक्रिया पूरी तरह से मेरिट के आधार पर होगी। 10वीं कक्षा और आईटीआई परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर एक संयुक्त मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसी मेरिट लिस्ट के आधार पर योग्य उम्मीदवारों को विभिन्न डिवीजनों और वर्कशॉप्स में अप्रेंटिस प्रशिक्षण के लिए चुना जाएगा। किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा या इंटरव्यू का आयोजन इस प्रक्रिया में नहीं किया जाएगा।

आठवें वेतन आयोग पर बड़ी मांगें: पेंशन और फिटमेंट फैक्टर पर टिकी नजरें
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से हलचल तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने कई बड़े प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें पेंशन बहाली के नियमों में बदलाव से लेकर फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी तक के मुद्दे शामिल हैं। इन बदलावों से करोड़ों कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद है।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से हलचल तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने कई बड़े प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें पेंशन बहाली के नियमों में बदलाव से लेकर फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी तक के मुद्दे शामिल हैं। इन बदलावों से करोड़ों कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद है।
पेंशन कम्यूटेशन और बहाली के नियमों में बदलाव की मांग
कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांगों में पेंशन कम्यूटेशन की अवधि को कम करना शामिल है। वर्तमान नियमों के तहत कम्यूटेड पेंशन की बहाली 15 साल में होती है, जिसे घटाकर 11 साल करने का प्रस्ताव दिया गया है। यदि इस मांग पर विचार होता है, तो लाखों पेंशनभोगियों को वित्तीय रूप से बड़ा लाभ मिलेगा और उनकी पेंशन तय समय से पहले पूरी बहाल हो सकेगी।
फिटमेंट फैक्टर और सैलरी हाइक पर टिकी निगाहें
वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम कड़ी होता है। कर्मचारी संगठन इस बार फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 करने की जोरदार मांग कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इसे बढ़ाकर 2.1 भी तय करती है, तो भी केंद्रीय कर्मचारियों के न्यूनतम मूल वेतन में एक बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। इससे महंगाई के दौर में कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पुरानी पेंशन योजना और फैमिली यूनिट के दायरे पर चर्चा
चर्चा के केंद्र में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली का मुद्दा भी बना हुआ है, जिसे लेकर कर्मचारी लंबे समय से मुखर हैं। इसके साथ ही फैमिली यूनिट के मौजूदा ढांचे में भी बदलाव की मांग उठ रही है। वर्तमान व्यवस्था में फैमिली यूनिट को 35 यूनिट माना जाता है, जिसे बढ़ाकर 5 यूनिट करने का सुझाव दिया गया है ताकि इसमें माता-पिता को भी शामिल किया जा सके।
हितधारकों से विचार-विमर्श और आगे की प्रक्रिया
आयोग इस समय विभिन्न कर्मचारी संगठनों और हितधारकों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है। सभी पक्षों की दलीलों और वित्तीय पहलुओं का बारीकी से अध्ययन करने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा। इन प्रस्तावों पर सरकार का रुख क्या रहता है, इस पर देश भर के केंद्रीय कर्मचारियों की निगाहें टिकी हुई हैं।

UKPSC Veterinary Officer Recruitment 2026: 25 पदों पर भर्ती का शानदार मौका
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने पशुचिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 14 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सरकारी नौकरी पाने का एक बेहतरीन अवसर है।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) ने पशुचिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 14 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सरकारी नौकरी पाने का एक बेहतरीन अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
UKPSC की इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 25 पदों पर योग्य युवाओं का चयन किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 25 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है। उम्मीदवारों के पास आवेदन करने के लिए 14 सितंबर 2026 तक का समय है। समय सीमा समाप्त होने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि अंतिम समय में सर्वर की समस्याओं से बचा जा सके।
आयु सीमा और पात्रता के मानदंड
इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 42 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 01 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उत्तराखंड सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। आवेदकों के पास संबंधित क्षेत्र में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होनी अनिवार्य है।
चयन प्रक्रिया और आवेदन का तरीका
अभ्यर्थियों का चयन लिखित परीक्षा और अन्य निर्धारित चरणों के आधार पर किया जाएगा। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को UKPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करना होगा। वहां विज्ञापित पद (विज्ञापन संख्या: A-2/DR(VO)/S-1/2026) के लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। आवेदन पत्र भरते समय सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक विवरण सावधानीपूर्वक दर्ज करें। निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद ही आवेदन प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।

लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य: दुर्लभ स्म्यू बत्तख और बंगाल फ्लोरिकन की उपस्थिति
असम के लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य में 7वीं काजीरंगा जलपक्षी गणना के दौरान पहली बार दुर्लभ प्रवासी स्म्यू बत्तख (मर्गेलस एल्बेलस) दर्ज की गई। इसके साथ ही, यहाँ गंभीर रूप से संकटग्रस्त बंगाल फ्लोरिकन के देखे जाने से इस संरक्षित क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व और जैव विविधता में सकारात्मक सुधार की पुष्टि हुई है।
सारांश (Summary): असम के लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य में 7वीं काजीरंगा जलपक्षी गणना के दौरान पहली बार दुर्लभ प्रवासी स्म्यू बत्तख (मर्गेलस एल्बेलस) दर्ज की गई। इसके साथ ही, यहाँ गंभीर रूप से संकटग्रस्त बंगाल फ्लोरिकन के देखे जाने से इस संरक्षित क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व और जैव विविधता में सकारात्मक सुधार की पुष्टि हुई है।
भौगोलिक स्थिति और अवस्थिति
लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य भारतीय राज्य असम के नागाओं जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील है और काजीरंगा-ओरंग परिदृश्य (Kaziranga-Orang Landscape) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है। यह अभ्यारण्य बाढ़ के मैदानों, घास के मैदानों और आद्रभूमि का एक अनूठा मिश्रण है, जो विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों और प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श प्राकृतिक आवास प्रदान करता है।
जैव विविधता और प्रमुख प्रजातियाँ
यह अभ्यारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। हाल ही में यहाँ जलपक्षी गणना के दौरान दुर्लभ प्रवासी पक्षी 'स्म्यू' (Smew) की पहली बार उपस्थिति दर्ज की गई है, जो यूरेशियाई क्षेत्र से प्रवास कर यहाँ पहुँचते हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र वैश्विक रूप से संकटग्रस्त 'बंगाल फ्लोरिकन' (Bengal Florican) का भी आश्रय स्थल है, जो इसकी उच्च पारिस्थितिकीय गुणवत्ता को रेखांकित करता है। यहाँ एक समय में एकइन्हीं घास के मैदानों में गैंडों का भी प्रमुख वास हुआ करता था।
संरक्षण और रणनीतिक महत्व
लाखोवा वन्यजीव अभ्यारण्य को पुनर्जीवित करने और इसकी खोई हुई जैव विविधता को वापस लाने के लिए वन विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ब्रह्मपुत्र घाटी के बाढ़ के मैदानों का यह पारिस्थितिकी तंत्र एशियाई हाथियों, जलपक्षियों और कई स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ दुर्लभ प्रजातियों का आगमन इस बात का प्रमाण है कि इस संरक्षित क्षेत्र में संरक्षण रणनीतियाँ सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

ई-श्रम पोर्टल के पाँच वर्ष: असंगठित श्रमिकों का सामाजिक सुरक्षा समावेशन
अगस्त 2026 में ई-श्रम पोर्टल ने अपनी स्थापना के पाँच वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह पोर्टल भारत के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने, उन्हें एक विशिष्ट पहचान देने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके तक पहुँचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
सारांश:
अगस्त 2026 में ई-श्रम पोर्टल ने अपनी स्थापना के पाँच वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह पोर्टल भारत के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने, उन्हें एक विशिष्ट पहचान देने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके तक पहुँचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
विस्तृत विश्लेषण:
पोर्टल की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य
श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा विकसित ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत अगस्त 2021 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के करोड़ों असंगठित कामगारों—जैसे निर्माण श्रमिकों, घरेलू कामगारों, कृषि श्रमिकों और प्रवासियों—का एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार करना है। इसके माध्यम से सरकार का लक्ष्य असंगठित अर्थव्यवस्था से जुड़े श्रमबल को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाना और आपातकालीन स्थितियों में उन्हें लक्षित वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
प्रमुख विशेषताएँ एवं यूएएन कार्ड
इस पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले प्रत्येक कामगार को एक बारह अंकों का विशिष्ट यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) युक्त ई-श्रम कार्ड जारी किया जाता है। यह कार्ड पोर्टेबल होता है, जिसका अर्थ है कि श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में इसका लाभ उठा सकते हैं। इसके साथ ही, इस प्लेटफ़ॉर्म को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी अन्य प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पहलों के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे पंजीकृत श्रमिकों को दुर्घटना बीमा का स्वतः लाभ मिलता है।
सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की दिशा
पाँच वर्षों के सफर में इस पोर्टल ने करोड़ों कामगारों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने में सफलता प्राप्त की है। इसके डेटाबेस का उपयोग विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लक्षित लाभार्थियों की पहचान के लिए किया जा रहा है। यह डिजिटल पहल भारत में समावेशी विकास, डेटा-संचालित नीति निर्माण और असंगठित क्षेत्र के सशक्तीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

SEBI का आईटी रेजिलिएंसी इंडेक्स: वित्तीय बाजार अवसंरचना हेतु एक नया मानक *
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा शुरू किया गया आईटी रेजिलिएंसी इंडेक्स (ITRI) बाजार अवसंरचना संस्थानों (MIIs) के लिए एक मात्रात्मक तकनीक स्वास्थ्य स्कोरकार्ड है। यह सूचकांक तकनीकी बुनियादी ढांचे की मजबूती, सुरक्षा और परिचालन स्थिरता का मूल्यांकन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा शुरू किया गया आईटी रेजिलिएंसी इंडेक्स (ITRI) बाजार अवसंरचना संस्थानों (MIIs) के लिए एक मात्रात्मक तकनीक स्वास्थ्य स्कोरकार्ड है। यह सूचकांक तकनीकी बुनियादी ढांचे की मजबूती, सुरक्षा और परिचालन स्थिरता का मूल्यांकन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बाजार अवसंरचना संस्थानों (MIIs) के तकनीकी जोखिमों को कम करने और उनकी प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से आईटी रेजिलिएंसी इंडेक्स (ITRI) की शुरुआत की है। स्टॉक एक्सचेंज, समाशोधन निगम और डिपॉजिटरी जैसे संस्थान वित्तीय प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जिनमें किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा संपूर्ण अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इस सूचकांक का मुख्य उद्देश्य इन संस्थानों की आईटी क्षमताओं का पारदर्शी और मानकीकृत मूल्यांकन करना है।
कार्यप्रणाली और मूल्यांकन के आधार
यह सूचकांक विभिन्न संकेतकों के माध्यम से तकनीकी स्वास्थ्य की गणना करता है। इसमें मुख्य रूप से सिस्टम अपटाइम, आपदा पुनर्प्राप्ति (डिजास्टर रिकवरी) की तैयारी, साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल, घटना प्रतिक्रिया समय और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण को शामिल किया जाता है। इसके तहत प्रत्येक संस्थान को उसके प्रदर्शन के आधार पर एक निश्चित स्कोर प्रदान किया जाता है, जिससे नियामक संस्था को उनकी तकनीकी कमजोरियों की पहचान करने में सहायता मिलती है।
महत्व और संभावित प्रभाव
इस स्कोरकार्ड के लागू होने से बाजार अवसंरचना संस्थानों में सुशासन और उत्तरदायित्व में वृद्धि होगी। यह निवेशकों के विश्वास को मजबूत करता है क्योंकि यह उच्च स्तर की तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है। साथ ही, यह नियामकों को किसी भी संभावित तकनीकी खतरे या साइबर हमले से निपटने के लिए पूर्व-चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाता है, जिससे वित्तीय बाजारों की स्थिरता दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित रहती है।
Delight News
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