
राजस्थान रॉयल्स: अश्विन ने पराग की कप्तानी पर उठाए सवाल
राजस्थान रॉयल्स की हालिया हार के बाद पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने टीम प्रबंधन और कप्तान रियान पराग की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अश्विन ने मुख्य रूप से युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के साथ टीम द्वारा किए गए व्यवहार पर निराशा जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि टीम ने वैभव को आवश्यक समर्थन और सही मार्गदर्शन नहीं दिया, जिससे उनके प्रदर्शन पर असर पड़ा और....
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का मंच हमेशा से ही रोमांच, उतार-चढ़ाव और कभी-कभी विवादों का केंद्र रहा है। हाल ही में राजस्थान रॉयल्स की एक निराशाजनक हार के बाद क्रिकेट गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह हार केवल मैदान पर रनों की कमी या विकेटों के पतन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने टीम प्रबंधन की कार्यप्रणाली और कप्तान रियान पराग की रणनीतिक सूझबूझ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे प्रकरण में सबसे चर्चित नाम बनकर उभरे हैं—पूर्व भारतीय दिग्गज स्पिनर और क्रिकेट के रणनीतिकार रविचंद्रन अश्विन।
अश्विन, जो अपनी बेबाक राय और खेल की गहरी समझ के लिए जाने जाते हैं, ने हार के ठीक बाद टीम की 'युवा नीति' और विशेष रूप से युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी के प्रबंधन पर निशाना साधा है। आइए, इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।
हार की पटकथा: कहाँ चूकी राजस्थान रॉयल्स?
राजस्थान रॉयल्स की यह हार प्रशंसकों के लिए एक बड़ा झटका थी। अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से उतरी टीम न केवल लय से भटकी हुई दिखी, बल्कि मैदान पर लिए गए फैसले भी काफी चौंकाने वाले थे। मैच के दौरान टीम का मिडिल ऑर्डर बिखर गया और गेंदबाजों के पास बचाव के लिए पर्याप्त लक्ष्य नहीं था।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान रॉयल्स ने इस मैच में अति-आत्मविश्वास दिखाया, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। हालांकि, हार के कारणों का विश्लेषण करते हुए जब अश्विन का बयान सामने आया, तो चर्चा का केंद्र 'रणनीति' से बदलकर 'खिलाड़ियों के प्रबंधन' पर आ गया।
रविचंद्रन अश्विन का तीखा प्रहार: 'प्रतिभा का दमन'
रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी जैसे होनहार खिलाड़ी को जिस तरह से इस्तेमाल किया गया, वह टीम की हार की एक बड़ी वजह बना। अश्विन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक युवा खिलाड़ी जब टीम में शामिल होता है, तो उसे आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। लेकिन राजस्थान रॉयल्स की ओर से उन्हें न तो उचित भूमिका मिली और न ही मानसिक सहयोग।
अश्विन ने कहा, "जब आप एक युवा खिलाड़ी को टीम में लेते हैं, तो आपकी जिम्मेदारी केवल उसे खिलाना नहीं, बल्कि उसे विकसित करना भी होती है। वैभव के साथ जो हुआ, वह मार्गदर्शन की कमी का जीता-जागता उदाहरण है।"
वैभव सूर्यवंशी: एक चमकता सितारा, जो ढंक दिया गया
वैभव सूर्यवंशी, जिन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य के रूप में देखा जा रहा है, के लिए यह सीजन काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। उनके खेल में परिपक्वता और आक्रामकता का एक दुर्लभ मिश्रण है। लेकिन टीम प्रबंधन द्वारा उन्हें कभी टॉप ऑर्डर में तो कभी फिनिशर की भूमिका में भेजने से उनके स्वाभाविक खेल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
अश्विन का तर्क है कि वैभव को ऐसे नाजुक समय पर क्रीज पर उतारा गया, जहाँ उन्हें अपनी तकनीक को सेट करने का मौका ही नहीं मिला। लगातार पोजीशन बदलने से किसी भी खिलाड़ी का आत्मविश्वास डगमगाना स्वाभाविक है। अश्विन के अनुसार, वैभव का 'मिसमैनेजमेंट' न केवल खिलाड़ी के लिए, बल्कि टीम के भविष्य के लिए भी हानिकारक है।
कप्तान रियान पराग और टीम प्रबंधन की भूमिका
कप्तान रियान पराग, जो खुद एक युवा खिलाड़ी हैं और टीम के नेतृत्व का भार उठा रहे हैं, इस हार के बाद निशाने पर हैं। अश्विन ने इशारों-इशारों में कहा कि एक कप्तान को न केवल रन बनाने चाहिए, बल्कि अपने साथियों की क्षमता को पहचानकर उन्हें सही अवसर देना चाहिए।
मैच की रणनीति को लेकर अश्विन ने सवाल उठाया कि क्या टीम के पास 'प्लान बी' तैयार था? यदि शुरुआती विकेट गिर गए थे, तो क्या वैभव को और अधिक जिम्मेदारी देकर या अनुभवी खिलाड़ियों के साथ उनकी साझेदारी कराकर स्थिति को सुधारा जा सकता था? टीम प्रबंधन की ओर से स्पष्टता की कमी साफ दिखाई दे रही थी।
क्या दबाव ने ले ली बाजी?
मैच के दौरान राजस्थान रॉयल्स का बॉडी लैंग्वेज काफी तनावपूर्ण लग रहा था। लगातार हो रही गलतियों और खराब फील्डिंग ने टीम के मनोबल को और गिरा दिया। वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी, जिन पर पहले से ही अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव था, उन्हें प्रबंधन से वह सुरक्षा कवच नहीं मिला जो उन्हें इस बड़े मंच पर टिके रहने के लिए जरूरी था।
अश्विन की बातों का सार यही है कि क्रिकेट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है; यह खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके आत्मविश्वास का खेल है। यदि एक प्रबंधन अपने युवा खिलाड़ियों के साथ खड़ा नहीं हो सकता, तो वे लंबी रेस के घोड़े नहीं बन पाएंगे।
भविष्य की राह: सुधार या और गहराता संकट?
राजस्थान रॉयल्स के लिए अब आगे की राह काफी कठिन है। अश्विन के इन गंभीर सवालों के बाद, टीम प्रबंधन को निश्चित रूप से अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। क्या वे अगले मैचों में वैभव सूर्यवंशी को एक निश्चित भूमिका देंगे? क्या वे कप्तान रियान पराग को और अधिक अनुभवी सलाहकारों का साथ उपलब्ध कराएंगे?
अश्विन का यह बयान किसी व्यक्तिगत हमले से अधिक एक 'अलार्म' की तरह है। यदि राजस्थान रॉयल्स को टूर्नामेंट में वापसी करनी है, तो उन्हें वैभव जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ विश्वास का सेतु बनाना होगा।
निष्कर्ष: प्रतिभा को सहेजने की जरूरत
अंततः, वैभव सूर्यवंशी और राजस्थान रॉयल्स का यह मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में अपनी युवा प्रतिभाओं का सही उपयोग कर रहे हैं? क्रिकेट में हार-जीत तो चलती रहती है, लेकिन एक युवा खिलाड़ी के करियर के साथ 'एक्सपेरिमेंट' करना जोखिम भरा हो सकता है।
रविचंद्रन अश्विन की आलोचना का मुख्य उद्देश्य सुधार की गुंजाइश को तलाशना है। वैभव सूर्यवंशी में वह आग है जो मैच का रुख पलट सकती है, बशर्ते उन्हें सही दिशा और टीम का समर्थन मिले। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राजस्थान रॉयल्स का मैनेजमेंट इस प्रतिक्रिया को किस रूप में लेता है और आने वाले मैचों में क्या वैभव की भूमिका में कोई सकारात्मक बदलाव आता है या नहीं।
क्या आपको लगता है कि अश्विन की राय सही है? क्या एक युवा खिलाड़ी को बार-बार बैटिंग ऑर्डर में ऊपर-नीचे करने से उसके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ता है?

सत्य निकेतन हादसा: फरार पीजी मालिक की तलाश में जुटी पुलिस
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
अचानक ढही इमारत और मातम का माहौल
दिल्ली के व्यस्त और छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाके सत्य निकेतन में एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ अचानक एक पीजी की इमारत भरभराकर ढह गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। मलबे के नीचे दबने से तीन बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस भयानक दुर्घटना ने स्थानीय प्रशासन और भवन निर्माण सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरार हुआ पीजी मालिक आनंद बंसल
हादसे की भनक लगते ही पीजी का मालिक आनंद बंसल मौके से फरार हो गया। प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस खतरनाक इमारत को सुरक्षा के लिहाज से एक साल पहले ही खाली कराया गया था। इसके बावजूद वहाँ किस तरह की गतिविधियां चल रही थीं और लापरवाही किसकी थी, यह पुलिस जांच का मुख्य विषय बन गया है। मालिक की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरी लापरवाही की परते खुल सकेंगी।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आरोपी मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। आरोपी की तलाश में लगातार विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
बचाव अभियान और घायलों का इलाज
घटनास्थल पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। प्रशासन और बचाव दल मलबे को हटाने में जुटे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और फंसा न हो। हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदयविदारक घटना पर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस दुर्घटना में घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की है। देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस तरह संबल मिलना इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़ा संताप कम करने वाला कदम है।
प्रशासनिक अमला और राहत कार्य
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और राहत दल तुरंत हरकत में आ गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। पीएम मोदी ने खुद इस बात की जानकारी दी कि अधिकारी और बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने और हादसे से प्रभावित हर संभव व्यक्ति तक मदद पहुँचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरक्षा और लापरवाही के सवाल
राजधानी दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की पुरानी या कमजोर इमारतों का जर्जर हालत में होना एक बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सत्य निकेतन की इस घटना ने एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच में जुट गया है कि आखिर इस इमारत के गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या यहाँ किसी प्रकार की प्रशासनिक अनदेखी या नियमों की अवहेलना हुई थी।

दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
घटना का दर्दनाक मंजर और प्रशासनिक हलचल
राजधानी दिल्ली के व्यस्त क्षेत्र सत्य निकेतन में इमारत ढहने की इस आकस्मिक दुर्घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अचानक हुए इस हादसे की चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, इस भयानक मलबे के नीचे दबने से छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और स्थानीय लोग तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद बांसुरी स्वराज का दौरा
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। नेताओं ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर पूरी स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रशासनिक अधिकारियों से घटना के कारणों की पूरी रिपोर्ट मांगी। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा बलों और राहत कर्मियों का बड़ा अमला भी मौजूद रहा, जो लगातार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा हुआ था।
युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य
मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद संभाली और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मलबे में फंसे एक-एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाए। इसके साथ ही, अस्पतालों में भर्ती घायलों को बिना किसी देरी के बेहतर से बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी पीड़ित को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि यह इमारत किस वजह से ढही और इसमें किन नियमों की अनदेखी की गई थी।

सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी की दो टूक
दिल्ली के सत्य निकेतन में घटी दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर दुर्घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजधानी में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं।
छात्रों का जीवन संघर्षों से भरा और अब हालात जानलेवा
राहुल गांधी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश का युवा और छात्र वर्ग पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनगिनत संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आने वाले इन युवाओं को यदि इस तरह के जानलेवा हालातों का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों और कोचिंग hubs के आसपास रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बचाव दलों के लिए तत्काल निर्देश और हर संभव प्रयास
घटना की सूचना मिलते ही राहुल गांधी ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया है कि बचाव दल बिना एक भी पल गंवाए मलबे में फंसे प्रत्येक छात्र तक पहुंचे। उनका साफ कहना था कि इस आपदा की घड़ी में हर एक छात्र की जान बेहद कीमती है और उसकी रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास तुरंत किए जाने चाहिए।
मुश्किल घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ी है पार्टी
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक दलों द्वारा प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाने का सिलसिला जारी है। राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से और अपनी पार्टी की ओर से यह विश्वास दिलाया है कि इस विकट और मुश्किल घड़ी में वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: 80 पदों पर भर्ती का शानदार मौका
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
खबर का निचोड़
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 अगस्त 2026 को शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। जो उम्मीदवार देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों पर अपनी जगह बनाना चाहते हैं, उन्हें तय समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन पत्र जमा करना होगा। अंतिम समय में सर्वर पर लोड बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए समय से पहले आवेदन करना समझदारी होगी।
रिक्तियों का विवरण और योग्यता
इस बार कुल 80 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा से जुड़े तमाम नियम यूपीएससी के आधिकारिक विज्ञापन में विस्तार से दिए गए हैं। सामान्यतः इस पद के लिए उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही तय आयु सीमा के दायरे में आने वाले आवेदक ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।
चयन प्रक्रिया और वेतनमान
चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त होती है, जिसमें आमतौर पर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू) शामिल होते हैं। लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अगले चरण के लिए बुलाया जाता है। इस पद पर चयनित होने वाले युवाओं को आकर्षक वेतनमान और सरकारी सेवाओं मिलने वाले तमाम बेहतरीन लाभ व भत्ते दिए जाते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
कैसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां ओटीआर (One Time Registration) प्रक्रिया पूरी करने के बाद ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती के लिंक पर क्लिक करना होगा। मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सावधानीपूर्वक भरने और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद आवेदन पत्र को सबमिट कर दें। भविष्य के संदर्भ के लिए फाइनल सबमिट किए गए फॉर्म का एक प्रिंटआउट अपने पास जरूर सुरक्षित रख लें।
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