
राहुल गांधी पर दिए बयान पर शशि थरूर की सफाई *
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान पर दिए अपने बयान पर सफाई दी है। थरूर का कहना है कि उनकी बात को तोड़-मरोड़कर पार्टी और शीर्ष नेतृत्व पर हमले के रूप में पेश किया जा रहा है, जो बुरी नीयत का नतीजा है।
खबर का निचोड़
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान पर दिए अपने बयान पर सफाई दी है। थरूर का कहना है कि उनकी बात को तोड़-मरोड़कर पार्टी और शीर्ष नेतृत्व पर हमले के रूप में पेश किया जा रहा है, जो बुरी नीयत का नतीजा है।
बयानों का बवंडर और थरूर की खरी-खरी
राजनीतिक गलियारों में बयानों के तीर चलना आम बात है, लेकिन जब तीर अपनी ही पार्टी की तरफ उठता दिखे, तो सियासी पारा चढ़ना तय है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर हाल ही में अपने एक बयान को लेकर फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कैंपेन की Gen Z के बीच पहुंच को लेकर दिए गए अपने बयान पर अब थरूर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और यह उनकी ही पार्टी या नेतृत्व पर किसी भी तरह का हमला नहीं है।
क्या था विवाद का मुख्य जरिया
विवाद की शुरुआत तब हुई जब शशि थरूर ने स्वीकार किया था कि राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कैंपेन युवाओं और खासकर Gen Z को उस हद तक आकर्षित नहीं कर पाया, जितना प्रभाव प्रतिद्वंद्वी 'CJP' के कैंपेन ने छोड़ा। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक विरोधी सक्रिय हो गए और इसे कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी कलह और राहुल गांधी के नेतृत्व पर थरूर के सवाल के रूप में प्रचारित किया जाने लगा।
'नाकामी और बुरी नीयत का नतीजा'
बढ़ते विवाद के बीच शशि थरूर ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि किसी सामान्य बातचीत या विश्लेषणात्मक टिप्पणी को अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत का नाम देना बेबुनियाद है। थरूर के मुताबिक, उनके बयान को इस तरह पेश करना विरोधियों की नाकामी और बुरी नीयत के मिले-जुले इरादों का परिणाम है। उनका मकसद पार्टी को कमजोर करना नहीं, बल्कि रणनीतिक बातचीत का एक हिस्सा था।
निष्पक्ष विश्लेषण या पार्टी से दूरी
शशि थरूर अपनी बेबाक शैली और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। राजनीति विश्लेषकों का मानना है कि थरूर अक्सर अभियानों का निष्पक्ष आकलन करते हैं, जिसे अक्सर राजनीतिक रंग दे दिया जाता है। इस बार भी उन्होंने युवाओं के रुझान को लेकर एक व्यवहारिक बात रखी थी, जिसे पार्टी के खिलाफ बयानबाजी मान लिया गया। थरूर के इस ताजा स्पष्टीकरण ने फिलहाल विरोधियों की बयानबाजी पर विराम लगाने की कोशिश की है, लेकिन यह घटना दिखाती है कि चुनाव और युवाओं को साधने की होड़ में हर एक बयान कितना मायने रखता है।

काजल राघवानी का पवन सिंह पर बड़ा खुलासा, जबरन किसिंग सीन कराने का आरोप
भोजपुरी सिनेमा में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अभिनेत्री काजल राघवानी ने पावरस्टार पवन सिंह पर संगीन आरोप लगाए। एक शो के दौरान काजल ने खुलासा किया कि पवन सिंह ने सेट पर उनसे जबरदस्ती किसिंग सीन कराया और विरोध करने पर शूटिंग छोड़कर चले गए। साथ ही आम्रपाली दुबे पर भी गंभीर आरोप जड़े।
खबर का निचोड़
भोजपुरी सिनेमा में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अभिनेत्री काजल राघवानी ने पावरस्टार पवन सिंह पर संगीन आरोप लगाए। एक शो के दौरान काजल ने खुलासा किया कि पवन सिंह ने सेट पर उनसे जबरदस्ती किसिंग सीन कराया और विरोध करने पर शूटिंग छोड़कर चले गए। साथ ही आम्रपाली दुबे पर भी गंभीर आरोप जड़े।
विवादों में भोजपुरी इंडस्ट्री: पवन सिंह पर लगे गंभीर आरोप
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का चकाचौंध भरा पर्दा एक बार फिर अंदरूनी काले सच और आपसी विवादों के कारण कटघरे में खड़ा हो गया है। इस बार निशाने पर हैं भोजपुरी सिनेमा के 'पावरस्टार' कहे जाने वाले अभिनेता और गायक पवन सिंह। इंडस्ट्री की मशहूर और लोकप्रिय अभिनेत्री काजल राघवानी ने पवन सिंह पर काम के दौरान असभ्य व्यवहार और मनमानी करने के बेहद गंभीर और चौकाने वाले आरोप लगाए हैं। इस खुलासे के बाद से ही पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री और सोशल मीडिया पर तहलका मच गया है।
'भोजपुरी बवाल' के प्रोमो में खुला सच
यह पूरा मामला 'भोजपुरी बवाल' शो के हालिया प्रोमो के बाद सामने आया है। इस प्रोमो वीडियो में काजल राघवानी बेहद बेबाकी से अपने कड़वे अनुभवों को साझा करती नजर आ रही हैं। काजल का कहना है कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान पवन सिंह उनके साथ किसिंग सीन करना चाहते थे। जब काजल ने इस सीन को करने से साफ शब्दों में इनकार कर दिया, तो पवन सिंह गुस्सा हो गए। काजल के अनुसार, पवन सिंह ने सीन के लिए जबरदस्ती की और जब बात नहीं बनी, तो वह सेट छोड़कर चले गए।
मना करने पर सेट छोड़कर जाने की जिद
काजल राघवानी ने प्रोमो में साफ तौर पर कहा कि पवन सिंह का रवैया सेट पर हमेशा से अपनी बात मनवाने वाला रहा है। अगर कोई उनके मनमुताबिक काम नहीं करता, तो वे शूटिंग रोक देते हैं या सेट छोड़कर चले जाते हैं। काजल ने दर्द बयां करते हुए बताया कि एक कलाकार के तौर पर अपनी सीमाओं को तय करना उनका हक है, लेकिन इंडस्ट्री के बड़े सितारे अपनी ताकत के बल पर सह-कलाकारों पर दबाव बनाने से नहीं चूकते।
आम्रपाली दुबे और निरहुआ का भी आया नाम
काजल राघवानी का गुस्सा सिर्फ पवन सिंह तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने इंडस्ट्री की एक और दिग्गज अभिनेत्री आम्रपाली दुबे पर भी तीखा हमला बोला। काजल का आरोप है कि आम्रपाली दुबे ने दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' के साथ अपने संपर्कों और प्रभाव का इस्तेमाल करके उन्हें कई प्रोजेक्ट्स से बाहर करवाया। काजल के मुताबिक, इंडस्ट्री में ग्रुपिज्म और पर्सनल रिश्तों के आधार पर कलाकारों का काम छीना जाता है, जिससे कई प्रतिभाशाली कलाकारों का करियर प्रभावित होता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
काजल राघवानी के इस बयान के बाद से ही पवन सिंह और आम्रपाली दुबे के फैंस और ट्रोल्स के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। जहां एक तरफ काजल के समर्थक उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पवन सिंह के फैंस इन आरोपों को पब्लिसिटी स्टंट बता रहे हैं। फिलहाल इस पूरे मामले पर पवन सिंह, आम्रपाली दुबे या निरहुआ की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

साजन के सेट पर क्या सच में संजय दत्त को हुआ था माधुरी से प्यार? निर्देशक का बड़ा खुलासा *
90 के दशक में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित के अफेयर की चर्चाएं जोरों पर थीं। अब ब्लॉकबस्टर फिल्म 'साजन' के निर्देशक लॉरेंस डीसूजा ने इन अफवाहों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने खुलासा किया कि शूटिंग के दौरान संजय अक्सर कैमरे के पीछे से माधुरी के क्लोज़-अप शॉट्स देखा करते थे।
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90 के दशक में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित के अफेयर की चर्चाएं जोरों पर थीं। अब ब्लॉकबस्टर फिल्म 'साजन' के निर्देशक लॉरेंस डीसूजा ने इन अफवाहों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने खुलासा किया कि शूटिंग के दौरान संजय अक्सर कैमरे के पीछे से माधुरी के क्लोज़-अप शॉट्स देखा करते थे।
'साजन' के सेट की वो अनदेखी कहानियां
भारतीय सिनेमा के इतिहास में 1991 में आई फिल्म 'साजन' एक मील का पत्थर साबित हुई थी। बेहतरीन संगीत, भावुक कहानी और संजय दत्त, माधुरी दीक्षित व सलमान खान की तिकड़ी ने पर्दे पर जादू चला दिया था। इस फिल्म की सफलता के साथ ही जिस एक चीज ने सबसे ज्यादा मीडिया और फैंस का ध्यान खींचा, वह थी संजय दत्त और माधुरी दीक्षित की ऑफ-स्क्रीन केमेस्ट्री। दशकों बाद अब फिल्म के निर्देशक लॉरेंस डीसूजा ने उस दौर की अफवाहों और सेट के माहौल से पर्दा उठाया है।
कैमरे के पीछे संजय दत्त की नजरें
लॉरेंस डीसूजा ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में बताया कि शूटिंग के दौरान सेट का माहौल हमेशा बहुत जीवंत रहता था। जब उनसे संजय दत्त और माधुरी दीक्षित के बीच रोमांस की खबरों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। निर्देशक के अनुसार, जब भी वह माधुरी के क्लोज़-अप शॉट्स शूट करते थे, तो संजय दत्त मॉनिटर या कैमरे के पास आकर बड़े ध्यान से उन दृश्यों को देखते थे। संजय का यह अंदाज सेट पर मौजूद लोगों का ध्यान खींचता जरूर था, लेकिन निर्देशक ने इसे पेशेवर आदर और सहज आकर्षण के रूप में ही देखा।
अफवाहें या सिर्फ गॉसिप?
उस दौर में फिल्मी पत्रिकाओं में दोनों के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की खबरें छपा करती थीं। हालांकि, लॉरेंस डीसूजा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी सेट पर दोनों के बीच किसी तरह के प्रेम-संबंध को व्यक्तिगत रूप से महसूस नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह दो बेहतरीन कलाकारों का एक-दूसरे के काम को सराहने का तरीका भर था। संजय का कैमरे से माधुरी को देखना केवल उनके खूबसूरत प्रदर्शन को निहारना था, न कि किसी ऑफ-स्क्रीन रोमांस का सबूत।
ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री का वो जादुई दौर
चाहे अफवाहों में सच्चाई हो या न हो, लेकिन 'साजन' और उसके बाद 'खलनायक' जैसी फिल्मों में संजय दत्त और माधुरी दीक्षित की जोड़ी को दर्शकों ने सिर-आंखों पर बिठाया। पर्दे पर उनकी सहज अदाकारी और स्वाभाविक जुड़ाव ने हर सीन में जान फूंक दी थी। लॉरेंस डीसूजा का यह ताजा बयान एक बार फिर फैंस को 90 के दशक के उस सुनहरे दौर में ले जाता है, जहां सेट की हर छोटी बात एक बड़ी खबर बन जाया करती थी।

केजरीवाल का विवादास्पद बयान: पीएम मोदी पर टिप्पणी से भड़का सियासी घमासान
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर दी गई एक विवादास्पद टिप्पणी के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। बीजेपी नेताओं और स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल की भाषा पर कड़ा एतराज जताया है। बीजेपी ने इसे केजरीवाल की मानसिकता का सबूत बताते हुए चौतरफा हमला बोला है।
खबर का निचोड़
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर दी गई एक विवादास्पद टिप्पणी के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। बीजेपी नेताओं और स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल की भाषा पर कड़ा एतराज जताया है। बीजेपी ने इसे केजरीवाल की मानसिकता का सबूत बताते हुए चौतरफा हमला बोला है।
बयानों के तीर और बढ़ता सियासी पारा
दिल्ली की राजनीति में जुबानी जंग अक्सर नए स्तर को छूती रही है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का एक बयान सीधे विवादों के घेरे में आ गया है। एक हालिया इंटरव्यू में सीजेपी प्रोटेस्ट का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा कि विरोध प्रदर्शन में शामिल लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'ठोकने' आए थे। इस एक शब्द ने भारतीय राजनीति के गलियारों में भूचाल ला दिया है। एक पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेता के मुंह से ऐसे शब्दों का प्रयोग होते ही विपक्षी दल आक्रामक हो गए हैं और उनके बयान की चौतरफा निंदा शुरू हो गई है।
स्वाति मालीवाल ने भाषा पर उठाए गंभीर सवाल
केजरीवाल की इस टिप्पणी पर सबसे पहली और तीखी प्रतिक्रिया राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की तरफ से आई। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से इस्तेमाल की जा रही इस तरह की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। मालीवाल ने केजरीवाल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीधा सवाल दागा कि "यह किस तरह की भाषा है?" एक जननेता द्वारा देश के प्रधानमंत्री के संदर्भ में 'ठोकने' जैसे असंसदीय या सड़कछाप शब्द का प्रयोग राजनीतिक मर्यादाओं के पतन की ओर इशारा करता है। मालीवाल की इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस को और तेज कर दिया है।
बीजेपी का करारा हमला और सिरसा की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने केजरीवाल के इस बयान को हाथों-हाथ लेते हुए इसे एक गंभीर मुद्दा बना दिया है। दिल्ली सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता मंजिंदर सिंह सिरसा ने केजरीवाल पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि आखिरकार इस बेशर्म आदमी ने अपनी आतंकी सोच को कबूल कर ही लिया। बीजेपी का कहना है कि यह केवल एक असावधान टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की मानसिकता का सच उजागर करती है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि संवैधानिक पदों पर बैठे या रह चुके नेताओं को अपनी भाषा का संयम नहीं भूलना चाहिए, और इस प्रकार की उकसाने वाली भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

6 महीने बचे हैं': जब डॉक्टर ने अदनान सामी के पिता के सामने कह दी थी यह खौफनाक बात *
मशहूर गायक अदनान सामी ने खुलासा किया है कि अत्यधिक वजन के कारण एक समय डॉक्टर ने उनके पिता के सामने ही उनके पास केवल छह महीने की जिंदगी बचने की चेतावनी दी थी। इस दिल दहला देने वाली बात से उन्हें झटका लगा, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और वजन घटाकर शानदार वापसी की।
खबर का निचोड़
मशहूर गायक अदनान सामी ने खुलासा किया है कि अत्यधिक वजन के कारण एक समय डॉक्टर ने उनके पिता के सामने ही उनके पास केवल छह महीने की जिंदगी बचने की चेतावनी दी थी। इस दिल दहला देने वाली बात से उन्हें झटका लगा, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और वजन घटाकर शानदार वापसी की।
मौत की चेतावनी और पिता का दर्द
संगीत की दुनिया में अपनी जादुई आवाज से लाखों दिलों पर राज करने वाले गायक अदनान सामी की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ भी आया था, जब उनकी सांसों पर वक्त की पाबंदी लग गई थी। अदनान ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि अत्यधिक वजन की वजह से डॉक्टरों ने उन्हें साफ कह दिया था कि उनके पास जीने के लिए सिर्फ छह महीने बचे हैं। सबसे ज्यादा तकलीफदेह बात यह थी कि यह चेतावनी उनके पिता के सामने दी गई थी।
अदनान सामी के मुताबिक, डॉक्टर का इस तरह सीधे उनके पिता के सामने ऐसी गंभीर बात कहना उन्हें अंदर तक चुभ गया था। उन्होंने कहा कि जब किसी मरीज की इतनी गंभीर स्थिति के बारे में उसके करीबियों को सीधे तौर पर बताया जाता है, तो वे बहुत ज्यादा भावुक होकर प्रतिक्रिया देते हैं। अपने पिता को उस असहनीय मानसिक दर्द से गुजरते देखना अदनान के लिए खुद की बीमारी से भी बड़ा झटका था।
चेतावनी को किया नजरअंदाज और बदली किस्मत
आमतौर पर ऐसी डरावनी खबर किसी भी इंसान को मानसिक रूप से तोड़ सकती है, लेकिन अदनान ने हार मानने के बजाय एक अलग राह चुनी। उन्होंने डॉक्टर की उस खौफनाक चेतावनी को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और नकारात्मकता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने इस मुश्किल चुनौती को अपनी ताकत बनाया और अपनी जीवनशैली को बदलने का मजबूत फैसला लिया।
इसके बाद जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। अदनान सामी ने कड़े अनुशासन, डाइट और वर्कआउट के दम पर 100 किलोग्राम से भी ज्यादा वजन घटाकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। जिस डॉक्टर ने उन्हें केवल छह महीने की मोहलत दी थी, अदनान ने अपनी अटूट इच्छाशक्ति से उस आंकड़े को झुठला दिया।
एक नया अवतार और प्रेरणादायी सफर
अदनान सामी का यह ट्रांसफॉर्मेशन केवल वजन घटाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह जिजीविषा और मानसिक मजबूती का जीता-जागता सबूत है। डॉक्टर की उस चेतावनी ने अदनान के पिता को गहराई से झकझोर दिया था, लेकिन अदनान की जिद ने न केवल उनके पिता का विश्वास लौटाया, बल्कि खुद को एक नया जीवन भी दिया। आज उनका यह सफर लाखों उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी भी बीमारी या शारीरिक समस्या के आगे घुटने टेक देते हैं।

एयरपोर्ट पर कोमल रानी स्वर्णकार संग दिखे गोविंदा, उड़ीं डेटिंग की अफवाहें
मुंबई एयरपोर्ट पर बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा को अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार के साथ स्पॉट किए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर उनके अफेयर की चर्चाएं तेज हो गई हैं। गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा के एक पुराने बयान ने इन अफवाहों को और अधिक हवा दे दी है, जिससे प्रशंसक हैरान हैं।
खबर का निचोड़
मुंबई एयरपोर्ट पर बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा को अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार के साथ स्पॉट किए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर उनके अफेयर की चर्चाएं तेज हो गई हैं। गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा के एक पुराने बयान ने इन अफवाहों को और अधिक हवा दे दी है, जिससे प्रशंसक हैरान हैं।
एयरपोर्ट स्पॉटिंग ने बढ़ाईं हलचल
बॉलीवुड के 'हीरो नंबर वन' गोविंदा एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्हें मुंबई एयरपोर्ट पर अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखा गया। जैसे ही दोनों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, उनके रिलेशनशिप को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया। लंबे समय बाद गोविंदा किसी पब्लिक प्लेस पर इस तरह स्पॉट हुए हैं, जिसके चलते यह खबर आग की तरह फैल गई।
पुराना बयान और सुनीता आहूजा की नापसंदगी
इस पूरी हलचल के बीच गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा का एक पुराना इंटरव्यू अचानक चर्चा में आ गया है। सुनीता ने एक बातचीत के दौरान 'कोमल' नाम का जिक्र करते हुए खुलकर अपनी नापसंदगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था, "कोमल नाम की एक लड़की है... मुझे यह नाम बिल्कुल पसंद नहीं है। मैं उससे नफरत करती हूं।" एयरपोर्ट पर कोमल रानी स्वर्णकार के साथ गोविंदा की मौजूदगी के बाद अब फैंस सुनीता के उस बयान को इस घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं।
कौन हैं कोमल रानी स्वर्णकार?
कोमल रानी स्वर्णकार एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा हैं। वह अभिनय और मॉडलिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। गोविंदा के साथ उनकी बॉन्डिंग और एयरपोर्ट पर एक साथ नजर आने की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दोनों की ओर से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गॉसिप कॉरिडोर में गरमाया माहौल
गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी को दशकों हो चुके हैं और इंडस्ट्री में उन्हें एक मजबूत जोड़ी के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में कोमल के साथ गोविंदा का नाम जुड़ना और सुनीता का पुराना बयान सामने आना, बी-टाउन के गॉसिप गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। अब हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या गोविंदा या सुनीता इस वायरल खबर पर कोई सफाई जारी करते हैं या नहीं।
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