
पुणे में जहरीली शराब का कहर: 14 लोगों की दर्दनाक मौत से मचा कोहराम!
पुणे के पिंपरी चिंचवड और हडपसर इलाके में जहरीली शराब पीने से 14 लोगों की मौत ने पूरे महाराष्ट्र को हिलाकर रख दिया है। पुलिस ने मामले में मुख्य शराब माफिया समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। यह खौफनाक घटना इस बात का सबूत है कि कैसे अवैध शराब का काला कारोबार मासूम लोगों की जिंदगी निगल रहा है।
सोर्स: पीटीआई
पुणे, महाराष्ट्र का एक ऐसा शहर जिसे ज्ञान, आईटी और औद्योगिक विकास का केंद्र माना जाता है, आज मातम में डूबा है। पिंपरी चिंचवड और हडपसर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में जहरीली शराब (Spurious Liquor) ने जो खौफनाक तांडव मचाया है, उसने न केवल स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि पूरे राज्य की व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में अब तक 14 मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि कई अन्य अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। यह कोई पहली बार नहीं है जब अवैध शराब के कारोबार ने किसी घर का चिराग बुझाया हो, लेकिन इस बार की घटना ने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है।
क्या हुआ था उस मनहूस दिन?
घटना की शुरुआत तब हुई जब पिंपरी चिंचवड और हडपसर के अलग-अलग इलाकों में कुछ लोगों ने स्थानीय स्तर पर खरीदी गई अवैध शराब का सेवन किया। शराब पीने के कुछ ही घंटों के भीतर पीड़ितों को उल्टियां, धुंधला दिखाई देना, तेज पेट दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं शुरू हो गईं। शुरुआत में लोग इसे सामान्य बीमारी समझ रहे थे, लेकिन जब मरने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ने लगा, तो इलाके में सनसनी फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिन लोगों ने वह शराब पी थी, उनकी हालत इतनी तेजी से बिगड़ी कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। अस्पताल ले जाते-लेते कई लोगों ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों का कहना है कि यह शराब मिथाइल अल्कोहल (Methyl Alcohol) की अत्यधिक मात्रा से युक्त थी, जो शरीर में जाते ही जहर का काम करती है।
पुलिस की कार्रवाई: शराब माफियाओं के खिलाफ बड़ा एक्शन
इस दुखद घटना के बाद हरकत में आई पुणे पुलिस ने युद्ध स्तर पर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने विशेष टीमों का गठन किया। कड़ी मशक्कत के बाद, पुलिस ने इस अवैध कारोबार के सरगना (माफिया) समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।
पकड़े गए आरोपियों के पास से भारी मात्रा में मिलावटी कच्चा माल और शराब बनाने के उपकरण भी बरामद किए गए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ये लोग सस्ते नशे के नाम पर रसायनों का मिश्रण करके जहरीली शराब तैयार करते थे और उसे झुग्गी-बस्तियों या कम आय वाले इलाकों में खपा देते थे। आरोपियों के खिलाफ हत्या (IPC की संबंधित धाराएं) और आबकारी अधिनियम के तहत गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं।
अवैध शराब का काला कारोबार: एक कभी न खत्म होने वाला जाल
पुणे जैसे विकसित शहर में जहरीली शराब का यह जाल कैसे फैल गया, यह सबसे बड़ा विचारणीय प्रश्न है। अवैध शराब के धंधे में बहुत अधिक मुनाफा होता है, जिसकी वजह से माफिया और स्थानीय अपराधियों का एक संगठित गिरोह सक्रिय रहता है। ये लोग अक्सर उन रसायनों का उपयोग करते हैं जो औद्योगिक कार्यों (जैसे पेंट, वार्निश या क्लीनिंग एजेंट) के लिए होते हैं।
इन माफियाओं का नेटवर्क इतना गहरा है कि वे प्रशासनिक आंखों में धूल झोंकने के लिए समय-समय पर अपनी जगह बदलते रहते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोग, जो महंगी शराब नहीं खरीद सकते, अक्सर इन सस्ती और जानलेवा शराब के आदी हो जाते हैं। प्रशासन की ढिलाई और भ्रष्टाचार की परतें इस काले कारोबार को पनपने का अवसर देती हैं।
सामाजिक और आर्थिक असर: एक परिवार की तबाही
14 लोगों की मौत का मतलब केवल 14 आंकड़े नहीं हैं। ये 14 वे परिवार हैं जिनके सिर से पिता का साया उठ गया, किसी की पत्नी विधवा हो गई और किसी के बच्चे अनाथ हो गए। इन मृतकों में अधिकांश दिहाड़ी मजदूर और श्रमिक वर्ग के लोग थे, जो दिन भर की मेहनत के बाद थकान मिटाने के नाम पर इस जहर के चंगुल में फंस गए।
एक-एक करके हुई इन मौतों ने पिंपरी चिंचवड और हडपसर के माहौल को गमगीन कर दिया है। लोग गुस्से में हैं और प्रशासन से यह पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी नाक के नीचे यह अवैध धंधा कैसे फला-फूला? क्या आबकारी विभाग की जिम्मेदारी केवल टैक्स वसूलना है या समाज की सुरक्षा करना भी?
शासन और प्रशासन की जवाबदेही
महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद की घोषणा की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पैसा किसी की जान की भरपाई कर सकता है? असली सुधार तब होगा जब शासन स्तर पर कड़े कानून लागू किए जाएंगे।
1. कठोर निगरानी: आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस को ऐसे क्षेत्रों में गुप्त मुखबिरों का नेटवर्क मजबूत करना होगा जहां अवैध शराब बनने की संभावना अधिक है।
2. सख्त सजा: इस तरह के मामलों में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि अपराधियों के मन में डर पैदा हो।
3. जन जागरूकता: आम जनता को अवैध शराब के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करना जरूरी है। उन्हें यह समझना होगा कि सस्ते नशे के चक्कर में वे अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।
4. भ्रष्टाचार पर लगाम: अक्सर देखा जाता है कि पुलिस या स्थानीय नेताओं की मिलीभगत से ही ऐसे अड्डे चलते हैं। ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों और व्यक्तियों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
निष्कर्ष: अब भी वक्त है संभलने का
पुणे की यह घटना केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की नाकामी की दास्तान है जो नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही। 14 लोगों की जान जाना किसी भी सभ्य समाज के लिए एक बड़ा कलंक है। अगर अब भी सबक नहीं लिया गया, तो पुणे ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
अवैध शराब का यह काला धंधा न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि यह हमारे समाज की जड़ों को भी खोखला कर रहा है। हमें यह याद रखना होगा कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण तभी हो सकता है जब प्रशासन पारदर्शी हो और जनता जागरूक। उम्मीद की जानी चाहिए कि पुणे पुलिस की कार्रवाई और सरकार की सख्ती इस काले कारोबार की कमर तोड़ देगी, ताकि भविष्य में किसी भी 'प्यास' की कीमत किसी को अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।

सत्य निकेतन हादसा: फरार पीजी मालिक की तलाश में जुटी पुलिस
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
अचानक ढही इमारत और मातम का माहौल
दिल्ली के व्यस्त और छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाके सत्य निकेतन में एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ अचानक एक पीजी की इमारत भरभराकर ढह गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। मलबे के नीचे दबने से तीन बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस भयानक दुर्घटना ने स्थानीय प्रशासन और भवन निर्माण सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरार हुआ पीजी मालिक आनंद बंसल
हादसे की भनक लगते ही पीजी का मालिक आनंद बंसल मौके से फरार हो गया। प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस खतरनाक इमारत को सुरक्षा के लिहाज से एक साल पहले ही खाली कराया गया था। इसके बावजूद वहाँ किस तरह की गतिविधियां चल रही थीं और लापरवाही किसकी थी, यह पुलिस जांच का मुख्य विषय बन गया है। मालिक की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरी लापरवाही की परते खुल सकेंगी।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आरोपी मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। आरोपी की तलाश में लगातार विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
बचाव अभियान और घायलों का इलाज
घटनास्थल पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। प्रशासन और बचाव दल मलबे को हटाने में जुटे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और फंसा न हो। हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदयविदारक घटना पर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस दुर्घटना में घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की है। देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस तरह संबल मिलना इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़ा संताप कम करने वाला कदम है।
प्रशासनिक अमला और राहत कार्य
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और राहत दल तुरंत हरकत में आ गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। पीएम मोदी ने खुद इस बात की जानकारी दी कि अधिकारी और बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने और हादसे से प्रभावित हर संभव व्यक्ति तक मदद पहुँचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरक्षा और लापरवाही के सवाल
राजधानी दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की पुरानी या कमजोर इमारतों का जर्जर हालत में होना एक बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सत्य निकेतन की इस घटना ने एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच में जुट गया है कि आखिर इस इमारत के गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या यहाँ किसी प्रकार की प्रशासनिक अनदेखी या नियमों की अवहेलना हुई थी।

दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
घटना का दर्दनाक मंजर और प्रशासनिक हलचल
राजधानी दिल्ली के व्यस्त क्षेत्र सत्य निकेतन में इमारत ढहने की इस आकस्मिक दुर्घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अचानक हुए इस हादसे की चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, इस भयानक मलबे के नीचे दबने से छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और स्थानीय लोग तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद बांसुरी स्वराज का दौरा
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। नेताओं ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर पूरी स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रशासनिक अधिकारियों से घटना के कारणों की पूरी रिपोर्ट मांगी। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा बलों और राहत कर्मियों का बड़ा अमला भी मौजूद रहा, जो लगातार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा हुआ था।
युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य
मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद संभाली और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मलबे में फंसे एक-एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाए। इसके साथ ही, अस्पतालों में भर्ती घायलों को बिना किसी देरी के बेहतर से बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी पीड़ित को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि यह इमारत किस वजह से ढही और इसमें किन नियमों की अनदेखी की गई थी।

सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी की दो टूक
दिल्ली के सत्य निकेतन में घटी दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर दुर्घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजधानी में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं।
छात्रों का जीवन संघर्षों से भरा और अब हालात जानलेवा
राहुल गांधी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश का युवा और छात्र वर्ग पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनगिनत संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आने वाले इन युवाओं को यदि इस तरह के जानलेवा हालातों का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों और कोचिंग hubs के आसपास रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बचाव दलों के लिए तत्काल निर्देश और हर संभव प्रयास
घटना की सूचना मिलते ही राहुल गांधी ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया है कि बचाव दल बिना एक भी पल गंवाए मलबे में फंसे प्रत्येक छात्र तक पहुंचे। उनका साफ कहना था कि इस आपदा की घड़ी में हर एक छात्र की जान बेहद कीमती है और उसकी रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास तुरंत किए जाने चाहिए।
मुश्किल घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ी है पार्टी
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक दलों द्वारा प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाने का सिलसिला जारी है। राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से और अपनी पार्टी की ओर से यह विश्वास दिलाया है कि इस विकट और मुश्किल घड़ी में वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: 80 पदों पर भर्ती का शानदार मौका
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
खबर का निचोड़
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 अगस्त 2026 को शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। जो उम्मीदवार देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों पर अपनी जगह बनाना चाहते हैं, उन्हें तय समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन पत्र जमा करना होगा। अंतिम समय में सर्वर पर लोड बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए समय से पहले आवेदन करना समझदारी होगी।
रिक्तियों का विवरण और योग्यता
इस बार कुल 80 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा से जुड़े तमाम नियम यूपीएससी के आधिकारिक विज्ञापन में विस्तार से दिए गए हैं। सामान्यतः इस पद के लिए उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही तय आयु सीमा के दायरे में आने वाले आवेदक ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।
चयन प्रक्रिया और वेतनमान
चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त होती है, जिसमें आमतौर पर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू) शामिल होते हैं। लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अगले चरण के लिए बुलाया जाता है। इस पद पर चयनित होने वाले युवाओं को आकर्षक वेतनमान और सरकारी सेवाओं मिलने वाले तमाम बेहतरीन लाभ व भत्ते दिए जाते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
कैसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां ओटीआर (One Time Registration) प्रक्रिया पूरी करने के बाद ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती के लिंक पर क्लिक करना होगा। मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सावधानीपूर्वक भरने और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद आवेदन पत्र को सबमिट कर दें। भविष्य के संदर्भ के लिए फाइनल सबमिट किए गए फॉर्म का एक प्रिंटआउट अपने पास जरूर सुरक्षित रख लें।
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