
पैदल चलना अब मौलिक अधिकार: फुटपाथ पर आपका हक सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न हिस्सा माना है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह निर्णय शहरी बुनियादी ढांचे की कमी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करता है। अब सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना राज्य का अनिवार्य संवैधानिक दायित्व बन गया है।
खबर का सार
सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न हिस्सा माना है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह निर्णय शहरी बुनियादी ढांचे की कमी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करता है। अब सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना राज्य का अनिवार्य संवैधानिक दायित्व बन गया है।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा: संवैधानिक सुरक्षा कवच
भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में कंक्रीट के जंगल तो बन गए, लेकिन उन जंगलों के बीच चलने वाले इंसान की राह हर दिन कठिन होती जा रही है। आए दिन सड़कों पर पैदल यात्रियों के साथ होने वाली दुर्घटनाएं केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे की विफलता का परिणाम हैं। इसी चिंता को संज्ञान में लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए पैदल चलने को जीवन के मौलिक अधिकार के अंतर्गत मान्यता दी है।
अनुच्छेद 21 और चलने की आजादी
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, उसमें 'गरिमा के साथ जीने का अधिकार' भी शामिल है। सुरक्षित फुटपाथों के बिना जीवन का यह अधिकार अधूरा है। जब एक पैदल यात्री को सड़क के जोखिम भरे किनारों पर चलने के लिए मजबूर किया जाता है, तो राज्य उसके जीवन के अधिकार की रक्षा करने में विफल रहता है। अब पैदल चलना मात्र एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संरक्षण प्राप्त अधिकार है।
अव्यवस्था के खिलाफ न्यायिक रुख
देश के अधिकांश महानगरों में फुटपाथ या तो अतिक्रमण का शिकार हैं, या फिर वहां बिजली के खंभे, खोमचे और निर्माण सामग्री का कब्जा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन जमीनी वास्तविकताओं पर प्रहार करते हुए कहा है कि सड़कों पर केवल गाड़ियों का अधिकार नहीं है। बुनियादी ढांचे के नियोजन में पैदल चलने वालों की प्राथमिकताओं को दरकिनार करना अब कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं होगा। स्थानीय निकायों और सरकारी एजेंसियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि फुटपाथ बाधा मुक्त, साफ और सुरक्षित हों।
भविष्य की राह और सुरक्षा
यह फैसला केवल एक कानूनी व्याख्या नहीं, बल्कि शहरों के डिजाइन को बदलने का एक आह्वान है। आने वाले समय में, यह अधिकार शहरी विकास परियोजनाओं को प्रभावित करेगा। पैदल पथों का निर्माण और उनका रखरखाव अब किसी औपचारिकता का हिस्सा नहीं, बल्कि अनिवार्य जन सेवा का हिस्सा बन गया है। जब पैदल यात्री सुरक्षित महसूस करेगा, तभी शहर वास्तव में रहने योग्य बनेंगे। यह निर्णय उन लाखों लोगों की जीत है जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर निकलते हैं, क्योंकि अब उनके पास अधिकार का मजबूत आधार है।

ईरान के बाकी हिस्सों को भी तबाह कर दूंगा: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को बयान दिया है कि जरूरत पड़ने पर उन्हें ईरान के बचे हुए हिस्से को भी तबाह करना पड़ सकता है। ट्रंप के अनुसार ईरान को दोबारा विकसित होने में 25 साल लग सकते हैं। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के नए हमलों में मदद करने वाला कोई भी देश उसका 'वैध निशाना' होगा।
डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक आक्रामक बयान देते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो उन्हें ईरान के बाकी बचे हिस्सों को भी पूरी तरह तबाह करना पड़ सकता है। ट्रंप का दावा है कि यदि ऐसा होता है, तो ईरान को अपनी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा या विकसित करने में कम से कम 25 साल का लंबा समय लग सकता है। इस तीखे बयान से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां और अधिक बढ़ गई हैं।
ईरान का पलटवार और आक्रामक रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ईरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका द्वारा किए जाने वाले किसी भी नए हमले में किसी अन्य देश ने मदद की, तो वह देश भी ईरान की नजर में उसका 'वैध निशाना' बन जाएगा। इस चेतावनी ने क्षेत्रीय संघर्ष के दायरे को और अधिक व्यापक होने की आशंका को जन्म दे दिया है।

भारत ने किया 'प्रलय' क्वासी बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण
भारत ने गुरुवार को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित 'प्रलय' क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर विकसित किया है, जबकि इसका निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने किया है।
ओडिशा तट से सफल परीक्षण
गुरुवार को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित 'प्रलय' क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण संपन्न हुआ। इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे भारतीय सेना की मारक क्षमता और अधिक पुख्ता हो गई है।
स्वदेशी तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण
इस अत्याधुनिक मिसाइल को अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता का प्रतीक माना जा रहा है। 'प्रलय' मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की अन्य प्रमुख प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
निर्माण और उत्पादन में भागीदारी
इस मिसाइल के विकास और उत्पादन प्रक्रिया में रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों ने अहम भूमिका निभाई है। DRDO के विकास और उत्पादन भागीदार के रूप में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने इस मिसाइल का निर्माण किया है। इस सफल परीक्षण के बाद भारतीय सेना की रक्षा और आक्रमण क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

धीरेंद्र शास्त्री पर आपराधिक शिकायत, भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित बयान
बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आगरा सिविल कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई है। अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह द्वारा दर्ज इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि श्रीकृष्ण बहुत टेढ़े हैं और वह 3 जगह से टेढ़े खड़े होते हैं।
आगरा कोर्ट में दर्ज हुई शिकायत
बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आगरा सिविल कोर्ट में एक आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई है। यह कानूनी कदम अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह की ओर से उठाया गया है। उन्होंने शास्त्री के हालिया बयान को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला और मानहानिकारक बताया है।
बयान पर क्यों खड़ा हुआ विवाद
शिकायत के अनुसार, धीरेंद्र शास्त्री पर आरोप है कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की है। शास्त्री ने अपने एक वक्तव्य के दौरान कथित तौर पर कहा था कि "भगवान श्रीकृष्ण बहुत टेढ़े हैं और वह 3 जगह से टेढ़े खड़े होते हैं"। इस टिप्पणी को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय वकीलों में रोष व्याप्त हो गया।
कानूनी प्रक्रिया और आगे का मामला
अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह का तर्क है कि इस प्रकार के वक्तव्य से करोड़ों सनातन धर्मियों की आस्था और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति सम्मान को ठेस पहुंची है। आगरा सिविल कोर्ट में शिकायत दर्ज होने के बाद अब नजरें अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस मामले में शास्त्री को समन जारी किया जाता है या उनसे जवाब तलब किया जाता है।

धनतेरस पर बिना बिल वाला सोना: सर्वे में बड़ा खुलासा
लोकलसर्किल (LocalCircles) के एक हालिया सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 6% से बढ़ाकर 15% की गई इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी के कारण बिना बिल का सोना पक्के बिल की तुलना में काफी सस्ता पड़ रहा है। इसके चलते धनतेरस पर सोना खरीदने का प्लान बना रहे हर 10 में से लगभग 3 लोग (29%) बिना बिल के सोना खरीदने की सोच रहे हैं।
टैक्स बढ़ोतरी से बिना बिल का सोना सस्ता
सर्वे के आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार द्वारा सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने और उस पर लगने वाले जीएसटी के कारण औपचारिक यानी पक्के बिल वाले सोने की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इसके विपरीत, अनौपचारिक या बिना बिल वाला सोना पक्के बिल वाले सोने की तुलना में उपभोक्ताओं को काफी सस्ता महसूस हो रहा है। कीमतों के इस अंतर ने ग्राहकों को अनौपचारिक बाजार की ओर आकर्षित किया है।
सर्वे में चौंकाने वाला आंकड़ा आया सामने
लोकलसर्किल के इस सर्वे के अनुसार, इस धनतेरस पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हर 10 में से लगभग 3 लोग (29%) बिना बिल के सोना खरीदने पर विचार कर रहे हैं। पक्के बिल पर लगने वाले अतिरिक्त टैक्स से बचने की चाहत में लोग इस अनौपचारिक रास्ते की तरफ झुक रहे हैं।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
बिना बिल के सोने की बिक्री का यह बढ़ता रुझान न केवल सरकारी खजाने को राजस्व का नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सोने के बाजार की पारदर्शिता को भी प्रभावित करता है। पक्के बिल के बिना सोना खरीदने से ग्राहकों को भविष्य में शुद्धता की गारंटी और बिक्री के समय कानूनी सुरक्षा नहीं मिल पाती, फिर भी उच्च करों के चलते ग्राहक इस विकल्प की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

भारत की एयर डिफेंस मजबूत, ₹30,000 करोड़ की डील
भारतीय सेना की हवाई सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से लगभग ₹30,000 करोड़ की स्वदेशी QRSAM मिसाइल प्रणाली की डील अंतिम मंजूरी के बिल्कुल करीब है। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से इसकी मंजूरी मिलना बाकी है। इस प्रणाली के तहत BEL सिस्टम का एकीकरण करेगी और BDL मिसाइलों की आपूर्ति करेगी।
कैबिनेट मंजूरी का इंतजार
इस मेगा डिफेंस डील को अमली जामा पहनाने के लिए अब केवल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की औपचारिक मंजूरी मिलने का इंतजार बाकी है। इस रक्षा सौदे के पूरा होने से भारत की स्वदेशी मिसाइल विनिर्माण क्षमता को और अधिक बल मिलेगा तथा देश की रक्षा तैयारी अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ होगी।
प्रमुख रक्षा कंपनियों की अहम भूमिका
इस स्वदेशी मिसाइल प्रणाली परियोजना में देश की प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इस पूरे सिस्टम का एकीकरण (इंटीग्रेशन) करने का काम करेगी। वहीं दूसरी ओर, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) इन उन्नत मिसाइलों की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
मारक क्षमता और सुरक्षा दायरा
यह अत्याधुनिक स्वदेशी QRSAM प्रणाली बेहद घातक और तीव्र प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। यह प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और आधुनिक ड्रोनों को सटीकता के साथ निशाना बनाकर नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसके बेड़े में शामिल होने से भारतीय सेना का एयर डिफेंस नेटवर्क पहले से कहीं अधिक ताकतवर और सुरक्षित हो जाएगा।
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