
NEET विवाद के बाद CJP की हुंकार: अब देशव्यापी बनेगा बेरोजगारी का मुद्दा *
NEET पेपर लीक विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बेरोजगारी को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का ऐलान किया है। जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के समर्थन के बाद, सीजेपी ने शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों और युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई है।
खबर का निचोड़
NEET पेपर लीक विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बेरोजगारी को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का ऐलान किया है। जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के समर्थन के बाद, सीजेपी ने शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों और युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई है।
NEET आंदोलन से उठी नई क्रांति की आवाज
NEET पेपर लीक मामले ने देशभर के लाखों परीक्षार्थियों और उनके परिवारों को हिलाकर रख दिया है। सड़कों पर उतरे छात्रों का आक्रोश अब सिर्फ एक परीक्षा में हुई गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कमियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों ने इस गुस्से को एक नया मंच दिया, जहां छात्रों के साथ-साथ बड़ी संख्या में देश का बेरोजगार युवा भी एकजुट हुआ।
जंतर-मंतर से देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
इस जन-आक्रोश के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने युवाओं की आवाज को और बुलंद करने का फैसला किया है। प्रदर्शन के दौरान दीपके ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर जुटा जनसैलाब केवल एक परीक्षा के नतीजों से असंतुष्ट नहीं था, बल्कि यह उस हताशा का प्रतीक था जो देश का हर दूसरा शिक्षित युवा झेल रहा है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी आज के समय की सबसे विकराल समस्याओं में से एक बन चुकी है और अब वक्त आ गया है कि इसे एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाए।
शिक्षा प्रणाली में सुधार की सख्त जरूरत
अभिजीत दीपके ने जोर देकर कहा कि सीजेपी का मुख्य उद्देश्य केवल राजनीतिक बयानबाजी करना नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। देश में बार-बार होते पेपर लीक, परीक्षाओं में देरी और उसके बाद रोजगार के अवसरों की कमी ने युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। पार्टी अब इस पूरे तंत्र को बदलने की दिशा में काम करेगी ताकि किसी भी होनहार छात्र का भविष्य चंद भ्रष्ट तत्वों की वजह से बर्बाद न हो।
युवाओं के भरोसे पर टिकी भावी रणनीति
सीजेपी आने वाले दिनों में बेरोजगारी और शिक्षा सुधार के मुद्दों को लेकर पूरे देश में अभियान चलाने की योजना बना रही है। दीपके का मानना है कि जब तक देश का युवा अपने अधिकारों के लिए जागरूक और एकजुट नहीं होगा, तब तक इस सड़े-गले सिस्टम को बदलना मुमकिन नहीं है। युवाओं के बढ़ते समर्थन को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा देश की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है।

एयरबैग खुला फिर भी नहीं बची जान, अतीक के बेटे की मौत का सच आया सामने
अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत की वजह सीटबेल्ट न लगाना बनी। तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराने पर एयरबैग तो खुला, लेकिन बिना सीटबेल्ट के शरीर तेज झटके से टकरा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 23 गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है।
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अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत की वजह सीटबेल्ट न लगाना बनी। तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराने पर एयरबैग तो खुला, लेकिन बिना सीटबेल्ट के शरीर तेज झटके से टकरा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 23 गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है।
एयरबैग खुलने के बाद भी क्यों नहीं बची जान?
अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की दर्दनाक सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के वक्त कार का एयरबैग पूरी तरह खुला था, लेकिन इसके बावजूद अबान की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गाड़ियों में सुरक्षा के आधुनिक फीचर्स भले ही मौजूद हों, लेकिन लापरवाही के आगे वे बेअसर साबित हो जाते हैं।
तेज रफ्तार और डिवाइडर से जोरदार टक्कर
यह हादसा बेहद भयावह था। तेज रफ्तार से दौड़ रही कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क के बीच बने डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के आगे के हिस्से के परखच्चे उड़ गए। हादसों के दौरान कार में लगे सुरक्षा सिस्टम ने काम किया और ड्राइवर साइड का एयरबैग तुरंत खुल गया। हालांकि, इस तकनीकी सुरक्षा का अबान को कोई फायदा नहीं मिल सका क्योंकि उन्होंने कार चलाते समय सीटबेल्ट नहीं पहनी हुई थी।
सीटबेल्ट न लगाने का खौफनाक अंजाम
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और पुलिस जांच के मुताबिक, जब कोई कार तेज रफ्तार में टकराती है, तो बिना सीटबेल्ट के बैठा व्यक्ति जड़त्व (Inertia) के नियम के कारण बेहद तेज गति से आगे की तरफ फेंकता है। एयरबैग का काम इंसान और स्टेयरिंग या डैशबोर्ड के बीच एक कुशन बनाना होता है, लेकिन इसका सही फायदा तभी मिलता है जब सीटबेल्ट व्यक्ति को उसकी जगह पर रोके रखे। सीटबेल्ट न होने की वजह से अबान का शरीर एयरबैग के खुलने की गति और टक्कर के प्रभाव से सीधे स्टेयरिंग और कार के अंदरूनी हिस्से से टकरा गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 23 गंभीर चोटों का खुलासा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस हादसे की भयावहता को पूरी तरह साफ कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अबान के शरीर पर कुल 23 गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। शरीर के अंदरूनी हिस्सों और सिर में आई गंभीर चोटें ही उनकी मौत का मुख्य कारण बनीं। कार का ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने और सीटबेल्ट का सहारा न मिलने की वजह से शरीर को संभलने का एक मौका भी नहीं मिला। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सिर्फ एयरबैग के भरोसे रहना जानलेवा साबित हो सकता है।

सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके की पुलिस अफसर से तीखी बहस, वीडियो वायरल
सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके का एक सीनियर पुलिस अधिकारी के साथ तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दीपके का आरोप है कि पुलिस उनके घर आने वाले मेहमानों को रोक रही थी। भड़के दीपके ने अफसर से साफ कहा, "मैं किससे मिलूंगा, यह तय करने वाले आप कौन होते हैं?"
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सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके का एक सीनियर पुलिस अधिकारी के साथ तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दीपके का आरोप है कि पुलिस उनके घर आने वाले मेहमानों को रोक रही थी। भड़के दीपके ने अफसर से साफ कहा, "मैं किससे मिलूंगा, यह तय करने वाले आप कौन होते हैं?"
घर के बाहर हंगामा
नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के आवास के बाहर उस वक्त माहौल गरमा गया जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ उनकी तीखी झड़प हो गई। इस पूरी घटना का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है। वीडियो में अभिजीत दीपके बेहद गुस्से में नजर आ रहे हैं और पुलिस अधिकारी के रवैये पर कड़ा एतराज जता रहे हैं।
'आप तय करने वाले कौन होते हैं?'
वायरल क्लिप में देखा जा सकता है कि दीपके पुलिस अफसर पर चिल्लाते हुए उनसे सवाल कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारी की कार्यशैली पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, "मैं अपने घर में किससे मिलूंगा और किससे नहीं, यह तय करने का अधिकार आपको किसने दिया? आप यह तय करने वाले कौन होते हैं?" दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस अफसर उनके घर आने वाले लोगों और मेहमानों के साथ बदतमीजी कर रहे थे और उन्हें जबरन अंदर दाखिल होने से रोक रहे थे।
निजता और अधिकारों पर उठाया सवाल
अभिजीत दीपके ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने व्यक्तिगत अधिकारों और निजता का हनन बताया है। उनका कहना है कि किसी भी नागरिक को अपने घर पर मेहमानों से मिलने का लोकतांत्रिक अधिकार है। पुलिस द्वारा घर के दरवाजे पर पहरा देकर आने-जाने वालों को रोकना और उनके साथ दुर्व्यवहार करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और तानाशाही रवैया है। दीपके के इस आक्रामक रुख के सामने पुलिस अधिकारी बैकफुट पर नजर आए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। बड़ी संख्या में लोग अभिजीत दीपके के समर्थन में उतर आए हैं और पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। यूज़र्स का मानना है कि पुलिस को किसी नागरिक के निजी जीवन और उसके मेहमानों पर इस तरह की पाबंदी लगाने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। वहीं, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

जनरेशन गटर से 'हमारी ताकत' तक: कंगना रनौत का यू-टर्न *
बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने चर्चित बयान 'जनरेशन गटर' पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है। अब उन्होंने जेन ज़ी (Gen Z) की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत और सरकार का अहम हिस्सा बताया है। कंगना के इस रुख से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।
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बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने चर्चित बयान 'जनरेशन गटर' पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है। अब उन्होंने जेन ज़ी (Gen Z) की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत और सरकार का अहम हिस्सा बताया है। कंगना के इस रुख से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।
बयानों की राजनीति और कंगना का नया रुख
बॉलीवुड में अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर और अब राजनीतिक पारी खेल रहीं कंगना रनौत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में युवा पीढ़ी को लेकर 'जनरेशन गटर' जैसी तीखी टिप्पणी करने के बाद उठे विवाद के बीच अब उनके सुर पूरी तरह बदल चुके हैं। अपने पिछले बयान से कदम पीछे खींचते हुए कंगना ने देश के युवाओं, विशेषकर 'जेन ज़ी' की खुलकर वकालत की है और उन्हें भारत का भविष्य करार दिया है।
जेन ज़ी को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
कंगना रनौत ने अपने ताजा बयान में युवा पीढ़ी की ऊर्जा और देश के विकास में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा न सिर्फ जागरूक है बल्कि देश की प्रगति में सीधा योगदान दे रहा है। कंगना के अनुसार, जेन ज़ी आज की सरकार का एक अभिन्न हिस्सा है। जो युवा झारखंड में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं या जो देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मेडल जीतकर ला रहे हैं, वे सभी इसी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जेन ज़ी हमारी सबसे बड़ी ताकत है और पूरे देश को अपनी इस युवा पीढ़ी पर गर्व है।
विवाद से तारीफ तक का सफर
कंगना का यह बयान उनके पिछले रुख के ठीक विपरीत माना जा रहा है। इससे पहले जब उन्होंने युवाओं के एक वर्ग के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था, तब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों में उनकी व्यापक आलोचना हुई थी। विपक्ष ने भी उनके उस बयान को देश के युवाओं का अपमान बताया था। हालांकि, अब कंगना द्वारा की गई इस तारीफ को एक रणनीतिक बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सांसद बनने के बाद कंगना अब अपने सार्वजनिक बयानों को लेकर अधिक सतर्क हो रही हैं और जनभावनाओं को संतुलित करने का प्रयास कर रही हैं।
युवाओं को साधने की राजनीतिक कोशिश
भारत एक ऐसा देश है जहां की अधिकांश आबादी युवा है। किसी भी राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि के लिए युवाओं की आकांक्षाओं को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। कंगना का यह बदला हुआ अंदाज इसी बात का संकेत है कि वह अपनी राजनीतिक छवि को एक परिपक्व और समावेशी नेता के रूप में ढालना चाहती हैं। जनरेशन गटर से लेकर 'देश की सबसे बड़ी ताकत' तक का यह सफर दिखाता है कि राजनीति में बयानों के मायने कितनी तेजी से बदलते हैं।

अमीषा पटेल ने बताया 'कभी शादी न करने' का बड़ा कारण
बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल ने सोशल मीडिया पर अपने शादी के प्लान्स को लेकर बड़ा खुलासा किया है। फैन्स के सवालों का बेबाकी से जवाब देते हुए अमीषा ने साफ कर दिया कि वह कभी शादी नहीं करेंगी। उन्होंने सिंगल रहने को अपनी सबसे बड़ी खुशी और आजादी बताया है।
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बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल ने सोशल मीडिया पर अपने शादी के प्लान्स को लेकर बड़ा खुलासा किया है। फैन्स के सवालों का बेबाकी से जवाब देते हुए अमीषा ने साफ कर दिया कि वह कभी शादी नहीं करेंगी। उन्होंने सिंगल रहने को अपनी सबसे बड़ी खुशी और आजादी बताया है।
शादी के सवाल पर अमीषा पटेल का बेबाक जवाब
बॉलीवुड में 'गदर' और 'कहो ना प्यार है' जैसी सुपर-हिट फिल्मों से लोगों के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री अमीषा पटेल अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर फैंस के साथ एक 'आस्क मी एनीथिंग' (Ask Me Anything) सेशन आयोजित किया। इस सेशन के दौरान प्रशंसकों ने उनसे उनके करियर, पर्सनल लाइफ और भविष्य की योजनाओं से जुड़े कई सवाल पूछे। हालांकि, सबसे ज्यादा ध्यान उस सवाल ने खींचा जो अक्सर भारतीय समाज में हर सिंगल इंसान से पूछा जाता है—"आप शादी कब कर रही हैं?"
सिंगल लाइफ की आजादी और प्यार का दायरा
शादी के इस सीधे सवाल का जवाब अमीषा ने बिना किसी झिझक के बेहद स्पष्ट शब्दों में दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह अपनी लाइफ में कभी भी शादी नहीं करेंगी। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि वह इस वक्त सिंगल रहकर बेहद खुश और संतुष्ट हैं। शादी न करने की वजह बताते हुए अमीषा ने कहा कि उनके पास पहले से ही लगभग 100 बेहद करीबी दोस्तों और परिवार के सदस्यों का एक मजबूत दायरा है, जो उनसे बिना किसी शर्त के बेहद प्यार करते हैं।
रिश्तों में बदलाव का डर या व्यक्तिगत स्वतंत्रता?
अमीषा पटेल का मानना है कि उनकी मौजूदा जिंदगी पूरी तरह से संतुलित और खुशहाल है। वह किसी भी नए इंसान के आने से अपनी इस लाइफस्टाइल और खुशियों में बदलाव नहीं चाहतीं। अभिनेत्री के अनुसार, वह नहीं चाहतीं कि कोई एक शख्स उनकी जिंदगी में आए और उस खुशहाल माहौल को बदल दे जिसे उन्होंने सालों में अपने करीबियों के साथ मिलकर बनाया है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और फैंस उनके इस बेबाक और स्पष्ट नजरिए की काफी तारीफ कर रहे हैं।
अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने का मिसाल
आमतौर पर बॉलीवुड इंडस्ट्री में सेलेब्रिटीज अपनी पर्सनल लाइफ और शादी जैसे मुद्दों पर बात करने से बचते हैं या फिर गोल-मोल जवाब देते हैं। ऐसे में अमीषा पटेल का यह निडर अंदाज उनके फैंस को काफी पसंद आया। समाज के तय मानकों और शादी के पारंपरिक दबाव को किनारे रखते हुए अमीषा ने यह साबित कर दिया है कि खुद की खुशी और मानसिक शांति किसी भी रिश्ते से ऊपर होती है। अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद आज अमीषा अपनी शर्तों पर जिंदगी जी रही हैं।

अन्ना हजारे पर अभिजीत दीपके का विवादित बयान: कहा- 'बुड्ढे लोग कब तक लेंगे फैसले?'
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से मिलने से साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने 60-70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को राजनीति और सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेने की सलाह देते हुए तीखी टिप्पणी की, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
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कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से मिलने से साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने 60-70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को राजनीति और सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेने की सलाह देते हुए तीखी टिप्पणी की, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
अन्ना हजारे पर विवादित बयान और राजनीतिक भूचाल
राजनीतिक गलियारों में अक्सर अपने बयानों से सनसनी फैलाने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उनके निशाने पर देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे हैं। अन्ना हजारे से मुलाकात की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर दीपके ने न केवल साफ शब्दों में इंकार कर दिया, बल्कि बुजुर्ग नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर तीखा हमला भी बोला।
अभिजीत दीपके ने सख्त लहजे में कहा कि जो लोग 60 से 70 साल की उम्र पार कर चुके हैं, अब उन्हें पूरी तरह से रिटायर हो जाना चाहिए। युवा नेतृत्व की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि जिन बुजुर्गों ने अपनी जिंदगी में सब कुछ हासिल कर लिया है, वे आखिर कब तक युवा पीढ़ी के भविष्य के फैसले लेते रहेंगे? उनके इस बयान ने देश के वरिष्ठ नेताओं और बुजुर्ग कार्यकर्ताओं के योगदान पर नई बहस छेड़ दी है।
युवा बनाम बुजुर्ग: एक नई वैचारिक जंग
दीपके का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीति और सामाजिक आंदोलनों में युवाओं की भागीदारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, अन्ना हजारे जैसे कद के जननेता के लिए 'बुड्डा' जैसे कड़े शब्द का इस्तेमाल करने पर कई सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आलोचकों का मानना है कि विचारों में मतभेद हो सकता है, लेकिन किसी वरिष्ठ व्यक्ति के प्रति इस तरह की भाषा शैली मर्यादा के खिलाफ है।
दूसरी ओर, दीपके के समर्थकों का तर्क है कि उनका रुख युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने और पुरानी व्यवस्था को बदलने की दिशा में एक सख्त संदेश है। दीपके का मानना है कि बदलती दुनिया में नए विचारों और नई सोच की जरूरत है, जिसे केवल युवा पीढ़ी ही सही तरीके से लागू कर सकती है।
आने वाले समय में गहरा सकता है विवाद
अन्ना हजारे ने देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बड़े जनआंदोलनों की अगुवाई की है और देश की राजनीति को एक नया मोड़ दिया है। ऐसे में उनके खिलाफ की गई यह टिप्पणी केवल एक व्यक्तिगत बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच के टकराव के रूप में देखी जा रही है।
अब देखना यह होगा कि इस तीखे बयान पर अन्ना हजारे या उनके समर्थकों की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, अभिजीत दीपके के इस रुख ने राजनीतिक माहौल में गरमाहट जरूर ला दी है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
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