
NEET पेपर लीक महापाप: पीएम मोदी का दोषियों पर सख्त एक्शन का ऐलान
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एनडीए संसदीय दल की बैठक में उन्होंने इसे 'घोर पाप' करार देते हुए 13 आरोपियों के गैंग को सख्त सजा दिलाने की बात कही। पीएम ने सभी हितधारकों के साथ मिलकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का भी संकल्प लिया।
खबर का निचोड़:
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एनडीए संसदीय दल की बैठक में उन्होंने इसे 'घोर पाप' करार देते हुए 13 आरोपियों के गैंग को सख्त सजा दिलाने की बात कही। पीएम ने सभी हितधारकों के साथ मिलकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का भी संकल्प लिया।
एनडीए बैठक में गरमाया पेपर लीक का मुद्दा
देशभर के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने अब देश के शीर्ष राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। मंगलवार को आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों की मेहनत से खिलवाड़ करने वाली यह हरकत किसी महापाप से कम नहीं है।
13 आरोपियों के गैंग पर गिरेगी गाज
प्रधानमंत्री ने इस धांधली में शामिल 13 आरोपियों के गिरोह का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने साफ किया कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल रही हैं और कानून के तहत इन दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। पीएम का संदेश स्पष्ट था कि देश की परीक्षा प्रणाली की साख और युवाओं के भरोसे को तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सीजेपी के संसद मार्च के बाद बढ़ा राजनीतिक तापमान
NEET परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सीजेपी (CJP) द्वारा किए गए संसद मार्च के तुरंत बाद प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी सामने आई है। संसद से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर जारी घमासान के बीच पीएम मोदी के इस बयान को सरकार के कड़े और स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है।
भविष्य के लिए मजबूत और पारदर्शी सिस्टम की तैयारी
केवल दोषियों को सजा देना ही इस समस्या का अंतिम समाधान नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भविष्य में किसी भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा का पेपर लीक न हो, इसके लिए एक मजबूत और अभेद्य व्यवस्था तैयार करनी होगी। उन्होंने सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स), शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों को एकजुट होकर एक ऐसा फुलप्रूफ तंत्र बनाने का आह्वान किया, जिससे परीक्षाओं की पारदर्शिता और पवित्रता पूरी तरह सुरक्षित रहे।
> NEET-UG परीक्षा की तैयारी में छात्र सालों की कड़ी मेहनत और समर्पण लगाते हैं। इस तरह की धांधली न केवल उनके सपनों पर पानी फेरती है, बल्कि पूरी प्रशासनिक प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। सरकार अब इस पूरे ढांचे को पारदर्शी बनाने के लिए निर्णायक कदम उठा रही है।
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बोरोफीन आधारित जैव-स्नेहक: औद्योगिक ऊर्जा दक्षता में एक क्रांतिकारी नवाचार
गुवाहाटी स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी' (IASST) के वैज्ञानिकों ने कैस्टर ऑयल (अरंडी के तेल) में 'बोरोफीन' को बायो-लुब्रिकेंट एडिटिव के रूप में उपयोग करने में सफलता प्राप्त की है। यह नवाचार घर्षण को 42 प्रतिशत तक कम कर मशीनों की कार्यक्षमता बढ़ाने और ऊर्जा संरक्षण में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
सारांश
गुवाहाटी स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी' (IASST) के वैज्ञानिकों ने कैस्टर ऑयल (अरंडी के तेल) में 'बोरोफीन' को बायो-लुब्रिकेंट एडिटिव के रूप में उपयोग करने में सफलता प्राप्त की है। यह नवाचार घर्षण को 42 प्रतिशत तक कम कर मशीनों की कार्यक्षमता बढ़ाने और ऊर्जा संरक्षण में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
विस्तृत विश्लेषण
बोरोफीन: एक अद्वितीय नैनो-सामग्री
बोरोफीन एक द्वि-आयामी (2D) नैनो-सामग्री है, जो पूरी तरह से बोरॉन परमाणुओं से निर्मित होती है। ग्राफीन के विपरीत, बोरोफीन अत्यधिक 'बहुरूपी' (polymorphic) है, जिसका अर्थ है कि इसे विभिन्न संरचनात्मक विन्यासों में व्यवस्थित किया जा सकता है। अपनी विशिष्ट भौतिक और रासायनिक विशेषताओं जैसे कि उच्च यांत्रिक शक्ति, लचीलापन, तापीय और विद्युत चालकता के कारण यह सामग्री वर्तमान में शोध का केंद्र बनी हुई है। अब तक इसका उपयोग मुख्य रूप से बैटरी, सुपरकैपेसिटर और ईंधन सेल जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों में करने के लिए किया जाता रहा है।
लुब्रिकेशन में तकनीकी breakthrough
औद्योगिक मशीनरी में घर्षण और टूट-फूट ऊर्जा हानि के प्रमुख कारण हैं। कैस्टर ऑयल एक नवीकरणीय और जैव-निम्नीकरणीय (biodegradable) स्नेहक है, लेकिन इसके प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए इसमें एडिटिव्स की आवश्यकता होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कैस्टर ऑयल में केवल 0.1 प्रतिशत (वजन के अनुसार) बोरोफीन मिलाने से इसके घर्षण-रोधी गुणों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। यह मिश्रण किसी भी रासायनिक संशोधन के बिना आसानी से घुल जाता है।
कार्यप्रणाली और लाभ
जब यह बोरोफीन-युक्त स्नेहक मशीनरी में कार्य करता है, तो यह संपर्क सतहों पर एक टिकाऊ 'ट्राइबोफिल्म' (tribofilm) का निर्माण करता है। यह सुरक्षात्मक परत आयरन ऑक्साइड, कार्बनयुक्त प्रजातियों और बोरॉन-आधारित यौगिकों से बनी होती है। यह परत कतरनी तनाव (shear stress) को कम करती है, भार वहन क्षमता को बढ़ाती है और मशीनी पुर्जों की घिसावट को न्यूनतम करती है।
भविष्य की संभावनाएं
यह अनुसंधान न केवल मशीन की दक्षता में सुधार करता है, बल्कि परिचालन लागत को कम करने में भी सहायक है। इसकी 'ग्रीन लुब्रिकेशन' क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, समुद्री अनुप्रयोगों और टिकाऊ विनिर्माण उद्योगों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल स्नेहकों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दीर्घकाल में वैश्विक औद्योगिक ऊर्जा खपत को कम करने में योगदान दे सकती है।

UPPSC PCS 2026: उत्तर प्रदेश में 500 पदों पर भर्ती, आवेदन शुरू
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीसीएस 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत राज्य के विभिन्न उच्च पदों के लिए कुल 500 रिक्तियां निकाली गई हैं। योग्य अभ्यर्थी 27 जुलाई 2026 तक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यह प्रशासनिक सेवा में करियर बनाने का सुनहरा मौका है।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीसीएस 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत राज्य के विभिन्न उच्च पदों के लिए कुल 500 रिक्तियां निकाली गई हैं। योग्य अभ्यर्थी 27 जुलाई 2026 तक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। यह प्रशासनिक सेवा में करियर बनाने का सुनहरा मौका है।
प्रशासनिक सेवा में जाने का बड़ा मौका
उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए एक बार फिर से सरकारी सेवा में अपना परचम लहराने का अवसर आ गया है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने कंबाइंड स्टेट/अपर सबऑर्डिनेट सर्विसेज यानी पीसीएस परीक्षा 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार आयोग ने कुल 500 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की है, जो कि राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह परीक्षा उन उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जो राज्य के शीर्ष अधिकारियों के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां
इच्छुक और योग्य उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए अपनी दावेदारी पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा 25 जून 2026 से ही सक्रिय कर दी गई है। जो उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित परीक्षा का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें 27 जुलाई 2026 तक आवेदन की अंतिम तिथि का ध्यान रखना होगा। अंतिम क्षणों की हड़बड़ी से बचने के लिए समय रहते ही प्रक्रिया पूरी कर लेना समझदारी है।
पात्रता और परीक्षा प्रक्रिया
पीसीएस परीक्षा के माध्यम से चयन प्रक्रिया का दायरा काफी व्यापक होता है। इसमें शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मानकों को पूरा करना अनिवार्य है। परीक्षा के विभिन्न चरणों में सफलता प्राप्त करने के लिए विषय चयन और तैयारी की रणनीति बेहद अहम भूमिका निभाती है। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन करने से पहले आयोग द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ लें ताकि फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो।
कैसे करें आवेदन
आयोग ने पूरी आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन सुगम बनाया है। उम्मीदवारों को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां दिए गए पंजीकरण अनुभाग में अपनी बेसिक जानकारी दर्ज करने के बाद, आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करना होगा। आवेदन शुल्क का भुगतान डिजिटल माध्यमों से करके प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकता है। आवेदन जमा करने के बाद उसका एक प्रिंटआउट भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है, क्योंकि चयन के अगले चरणों में इसकी जरूरत पड़ सकती है।

NEET पेपर लीक: दोषियों को सजा के लिए खुलेंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट
NEET-UG 2026 में पेपर लीक और धांधली के बढ़ते विवादों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। सरकार अब परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करेगी। पीएम ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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NEET-UG 2026 में पेपर लीक और धांधली के बढ़ते विवादों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। सरकार अब परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करेगी। पीएम ने स्पष्ट किया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फास्ट-ट्रैक न्याय की तैयारी
परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा पर सरकार का कड़ा रुख अब जमीन पर उतरता दिख रहा है। NEET-UG जैसी बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों और देशभर में मचे बवाल के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णायक कदम उठाते हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को समयबद्ध तरीके से कड़ी सजा दिलाना है, जो सुनियोजित तरीके से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को धूमिल करने की कोशिश करते हैं। प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि युवाओं का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कठोर कार्रवाई का संकल्प
अधिकारियों को इस दिशा में सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकार की स्पष्ट रणनीति है कि पेपर लीक में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। इन फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स के जरिए अदालती कार्यवाही को गति दी जाएगी ताकि मुकदमों का निपटारा वर्षों तक खिंचने के बजाय जल्दी हो सके। यह कदम उन लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा भरोसा है, जिन्होंने अपनी मेहनत और सपनों को इस परीक्षा के साथ जोड़ रखा है। परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने और भविष्य में परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में इसे एक ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है।
छात्रों के हित सर्वोपरि
देशभर में चल रहे प्रदर्शनों और बढ़ते आक्रोश के बीच सरकार का यह कदम स्थिति को संभालने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने दोहराया है कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अब देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन अदालतों के गठन के बाद दोषियों पर कानूनी शिकंजा कितनी तेजी से कसता है। परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखना न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि यह करोड़ों युवाओं के सपनों की रक्षा का भी सवाल है। आने वाले समय में यह व्यवस्था कैसे काम करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

ट्रोलिंग के बाद धर्मेंद्र प्रधान की बेटी ने डिसेबल किया इंस्टाग्राम
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेटी नैमिषा प्रधान ने ऑनलाइन ट्रोलिंग के चलते अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिसेबल कर दिया है। CJP के प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी यूनिवर्सिटी 'टफ्ट्स' के अकाउंट पर 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के कमेंट्स की बाढ़ ला दी, जिससे दबाव में आकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेटी नैमिषा प्रधान ने ऑनलाइन ट्रोलिंग के चलते अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिसेबल कर दिया है। CJP के प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी यूनिवर्सिटी 'टफ्ट्स' के अकाउंट पर 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के कमेंट्स की बाढ़ ला दी, जिससे दबाव में आकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
विरोध की आंच अब अमेरिका तक
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर चल रहा राजनीतिक और सामाजिक विवाद अब सात समंदर पार तक पहुंच गया है। विरोध प्रदर्शनों और ऑनलाइन ट्रोलिंग का असर केवल मंत्री जी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव उनके परिवार पर भी पड़ता दिख रहा है। सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के हालिया प्रदर्शनों के बीच, विरोध की यह गूंज अब अमेरिका की प्रतिष्ठित टफ्ट्स यूनिवर्सिटी (Tufts University) तक जा पहुंची है।
यूनिवर्सिटी के पेज पर कमेंट्स की बाढ़
सोमवार को टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर अचानक भारतीय यूजर्स के कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कमेंट सेक्शन में लगातार 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के नारे लिखे जाने लगे। यूजर्स ने शिक्षा मंत्री के फैसलों और नीतियों पर अपना गुस्सा जताने के लिए उनकी बेटी के शिक्षण संस्थान के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। देखते ही देखते यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा और यूनिवर्सिटी का कमेंट बॉक्स एक तरह से डिजिटल विरोध प्रदर्शन का मैदान बन गया।
बेटी नैमिषा ने उठाया बड़ा कदम
सोशल मीडिया पर बढ़ती ट्रोलिंग और व्यक्तिगत हमलों के बाद केंद्रीय मंत्री की बेटी नैमिषा प्रधान ने अपनी प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया। उन्होंने बिना कोई सार्वजनिक बयान जारी किए चुपचाप अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिसेबल कर दिया। नैमिषा ने साल 2023 में टफ्ट्स यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की थी। जैसे ही ट्रोलर्स ने उनके पुराने शैक्षणिक संस्थान के पेज को निशाना बनाना शुरू किया, विवाद से दूरी बनाने के लिए उन्होंने अपना सोशल मीडिया हैंडल बंद करना ही मुनासिब समझा।
डिजिटल युग में विरोध का बदलता तरीका
यह पूरी घटना दर्शाती है कि आजकल राजनीतिक विरोध केवल सड़कों, रैलियों या संसद तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल युग में ट्रोल्स और प्रदर्शनकारी राजनेताओं के पारिवारिक रिश्तों और उनके बच्चों के शैक्षणिक संस्थानों को भी अपने निशाने पर लेने से नहीं चूक रहे हैं। CJP के प्रदर्शन के बीच जिस तरह से अमेरिकी यूनिवर्सिटी के सोशल मीडिया पेज को निशाना बनाया गया, उसने ऑनलाइन प्राइवेसी और ट्रोलिंग की सीमाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सीजेपी आंदोलन में बगावत: वीरू भाई ने दीपके पर लगाए गंभीर आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन को बड़ा झटका लगा है। प्रमुख प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने आंदोलन से खुद को अलग करते हुए नेता अभिजीत दीपके पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वीरू भाई का कहना है कि पुलिस लाठीचार्ज के दौरान महिलाओं को ढाल की तरह आगे किया गया और सीजेपी अब आम आदमी पार्टी की 'बी-टीम' बनकर रह गई है।
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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन को बड़ा झटका लगा है। प्रमुख प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने आंदोलन से खुद को अलग करते हुए नेता अभिजीत दीपके पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वीरू भाई का कहना है कि पुलिस लाठीचार्ज के दौरान महिलाओं को ढाल की तरह आगे किया गया और सीजेपी अब आम आदमी पार्टी की 'बी-टीम' बनकर रह गई है।
प्रदर्शनकारी का छलका दर्द: आंदोलन को अलविदा
राजनीतिक आंदोलनों के रास्ते अक्सर उतार-चढ़ाव से भरे होते हैं, लेकिन जब विरोध के स्वर अंदर से उठने लगें तो नींव हिलने लगती है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। लंबे समय से सीजेपी-प्रोटेस्ट में सक्रिय भूमिका निभा रहे प्रमुख प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने आंदोलन का साथ छोड़ दिया है। उनके इस फैसले ने सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
लाठीचार्ज के दौरान नेतृत्व पर सवाल
वीरू भाई के इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे की मुख्य वजह पुलिस कार्रवाई के दौरान नेतृत्व की नाकामी बताई जा रही है। उन्होंने सीजेपी नेता अभिजीत दीपके पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि संकट के वक्त वे सही नेतृत्व देने में पूरी तरह विफल रहे। जब स्थिति तनावपूर्ण हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू किया, तो आंदोलन को सही दिशा देने के बजाय जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया गया।
महिलाओं को आगे करने का गंभीर आरोप
सबसे चौंकाने वाला दावा जो वीरू भाई ने किया, वह लाठीचार्ज के दौरान महिलाओं के इस्तेमाल को लेकर है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि प्रदर्शन के दौरान जानबूझकर महिलाओं को आगे कर दिया गया था। इसके पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि नेतृत्व को खुद हिरासत में लिए जाने का डर सता रहा था, इसलिए उन्होंने महिलाओं को सुरक्षा ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। यह आरोप न केवल नैतिक रूप से गंभीर है, बल्कि आंदोलन की साख पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
'आप' की 'बी-टीम' बनने का दावा
आंदोलन के वैचारिक भटकाव पर बात करते हुए वीरू भाई ने सीजेपी की मौजूदा स्थिति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस विजन के साथ सीजेपी की शुरुआत हुई थी, वह अब पटरी से उतर चुकी है। उनके मुताबिक, सीजेपी अब स्वतंत्र राजनीतिक सोच के बजाय आम आदमी पार्टी की 'बी-टीम' की तरह काम कर रही है। अंदरूनी तौर पर बढ़ रहे इस असंतोष से यह साफ है कि आने वाले दिनों में सीजेपी के लिए अपनी राह आसान नहीं रहने वाली।
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