
मूड ऑफ द नेशन सर्वे: पीएम पद की रेस में मोदी-राहुल के साथ नए चेहरों की चर्चा और चुनावी हलचल
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने देश की राजनीतिक सरगर्मी को अचानक एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। इस बार के सर्वे में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर पारंपरिक राजनीतिक चेहरों के साथ-साथ कुछ दिलचस्प और नए नाम भी सामने आए हैं, जिसने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है।
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने देश की राजनीतिक सरगर्मी को अचानक एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। इस बार के सर्वे में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर पारंपरिक राजनीतिक चेहरों के साथ-साथ कुछ दिलचस्प और नए नाम भी सामने आए हैं, जिसने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है।
सर्वे के नए समीकरण और सियासी चर्चा
देश के सबसे बड़े राजनीतिक सर्वेक्षणों में शुमार 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) ने एक बार फिर चुनावी पंडितों को माथापच्ची करने पर मजबूर कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की परंपरागत टक्कर के बीच, इस बार सर्वे में कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके का नाम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि मुख्य मुकाबला एनडीए औरI.INDIA गठबंधन के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है, लेकिन ऐसे नए और अनोखे नाम राजनीतिक चर्चाओं को अधिक रोचक और अप्रत्याशित बना देते हैं।
2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की बिसात
आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव देश की राजनीति की अगली दिशा तय करेंगे। इन सभी राज्यों में बेहद कड़े और कांटे के मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जहां सत्ता बनाए रखने और विपक्ष के हमलों से निपटने की चुनौती है, वहीं पंजाब का सियासी अखाड़ा हमेशा की तरह बहुकोणीय संघर्ष और स्थानीय मुद्दों से घिरा हुआ है। क्षेत्रीय दल इन चुनावों में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।
सरकार की स्थिरता और राष्ट्रीय मुद्दे
एक अन्य हालिया सर्वे के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा और एनडीए गठबंधन को बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है, जो केंद्र की मोदी सरकार की राजनीतिक स्थिति को मजबूत और स्थिर दर्शाता है। देश की जनता के बीच नीतियों और नेतृत्व को लेकर जो राय बन रही है, वह सत्ता पक्ष के लिए राहत की खबर है। हालांकि, दूसरी तरफ युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दे जैसे पेपर लीक और बेरोजगारी लगातार राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्ष के निशाने पर बने हुए हैं। ये मुद्दे आने वाले चुनावों में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं और पार्टियों को अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट: भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर और वैश्विक परिदृश्य
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी प्रमुख फ्लैगशिप रिपोर्ट 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) के अक्टूबर 2026 संस्करण में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं में गति और ढांचागत सुधारों के बल पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
सारांश
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी प्रमुख फ्लैगशिप रिपोर्ट 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) के अक्टूबर 2026 संस्करण में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं में गति और ढांचागत सुधारों के बल पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा वर्ष में दो बार (अप्रैल और अक्टूबर में) 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) रिपोर्ट जारी की जाती है। यह रिपोर्ट वैश्विक उत्पादन, मुद्रास्फीति, वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP), चालू खाता संतुलन और बेरोजगारी दर जैसे प्रमुख संकेतकों पर आंकड़े तथा पूर्वानुमान प्रदान करती है। हाल ही में अक्टूबर 2026 में जारी रिपोर्ट में आईएमएफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास अनुमान में उल्लेखनीय सुधार किया है।
भारत हेतु मुख्य आर्थिक अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो पूर्व अनुमानों से अधिक है। आईएमएफ के अनुसार, भारत में उपभोग मांग, निजी निवेश में उछाल तथा जीवंत सेवा क्षेत्र के कारण यह मजबूत आर्थिक गति बनी हुई है। रिपोर्ट में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति 2026 में 5 प्रतिशत रहने तथा चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
वैश्विक आर्थिक रुझान
वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान है। उभरते और विकासशील एशियाई देशों की वृद्धि दर 2026 में 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा लागत में वृद्धि, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक आर्थिक स्थिति खंडित और दबाव में है।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक आर्थिक गतिशीलता के अंतर्गत महत्वपूर्ण है। वैश्विक मंदी और अनिश्चितता के दौर में भारत की 7 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि दर देश की रणनीतिक स्वायत्तता, व्यापक आंतरिक बाजार और आर्थिक नीतियों की सुदृढ़ता को रेखांकित करती है।

अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष: निजी क्षेत्र में अनुसंधान का सशक्तिकरण
भारत सरकार की प्रमुख पहल अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय कोष प्रबंधकों (SLFMs) के पहले समूह की घोषणा की है। 1 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पस वाले इस फंड का उद्देश्य अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए शून्य या कम ब्याज दरों पर दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है।
सारांश
भारत सरकार की प्रमुख पहल अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय कोष प्रबंधकों (SLFMs) के पहले समूह की घोषणा की है। 1 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पस वाले इस फंड का उद्देश्य अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए शून्य या कम ब्याज दरों पर दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
अक्टूबर 2026 में अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय फंड मैनेजरों के पहले समूह की स्वीकृति के साथ अपनी परिचालन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। यह पहल भारत में अनुसंधान और विकास क्षेत्र में वित्तीय अंतर को दूर करने और उच्च-जोखिम वाले नवाचारों के लिए पेशेंट कैपिटल (दीर्घकालिक पूंजी) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
प्रशासनिक एवं शासी संरचना
इस योजना का नोडल विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) है। इसका संचालन अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तहत गठित एक विशेष उद्देश्य कोष (Special Purpose Fund) और स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई द्वारा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला ANRF शासी बोर्ड इस योजना को रणनीतिक दिशा प्रदान करता है।
कार्यान्वयन और वित्तपोषण ढांचा
RDIF की कुल बजटीय निधि 1 लाख करोड़ रुपये है। फंड सीधे उद्योगों या स्टार्टअप्स में निवेश न करके द्वितीय-स्तरीय फंड मैनेजरों (SLFMs) के माध्यम से पूंजी का वितरण करेगा। ये SLFMs वैकल्पिक निवेश कोष (AIF), विकास वित्त संस्थान (DFI) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) हो सकते हैं, जो आरडीआई योगदान के बराबर निजी पूंजी जुटाने में भी मदद करेंगे।
मुख्य उद्देश्य और लक्षित क्षेत्र
इस फंड का मुख्य लक्ष्य सनराइज क्षेत्रों तथा रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में निजी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है। यह उच्च प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों (TRL) वाले परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट्स का वित्तपोषण करने, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण और डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स की स्थापना को सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित है।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीतियों, और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प से सीधे तौर पर जुड़ा है। यह व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक आधुनिक प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत करती है।

भारतीय तटरक्षक बल द्वारा माउंट मुकुट का सफल आरोहण और भूगोल
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के 17 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित 7,045 मीटर ऊंची चोटी 'माउंट मुकुट' पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया है। 'तट से पर्वत' (Tat Se Parwat) अभियान के तहत यह उपलब्धि वर्ष 2027 में तटरक्षक बल की स्वर्ण जयंती पर प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारियों का हिस्सा है।
सारांश
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के 17 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित 7,045 मीटर ऊंची चोटी 'माउंट मुकुट' पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया है। 'तट से पर्वत' (Tat Se Parwat) अभियान के तहत यह उपलब्धि वर्ष 2027 में तटरक्षक बल की स्वर्ण जयंती पर प्रस्तावित माउंट एवरेस्ट अभियान की तैयारियों का हिस्सा है।
परिचय एवं अभियान की पृष्ठभूमि
हाल ही में भारतीय तटरक्षक बल के 17 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने दार्जिलिंग स्थित हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (HMI) के मार्गदर्शन में 7,045 मीटर ऊंचे माउंट मुकुट पर विजय प्राप्त की है। यह अभियान बल के 18 महीने लंबे कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम का पांचवां और अंतिम चरण था, जिसका उद्देश्य तटरक्षक कर्मियों को अत्यधिक ऊंचाई की विषम परिस्थितियों और दुर्गम भू-भाग के लिए तैयार करना है।
भौगोलिक स्थिति और बनावट
माउंट मुकुट भारत के उत्तराखंड राज्य में गढ़वाल हिमालय के ज़ास्कर श्रेणी (Zaskar Range) में माउंट कामेट के निकट स्थित एक उच्च तुंगता वाली चोटी है। यह गंगोत्री समूह की चोटियों का हिस्सा है और नंदा देवी अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस चोटी का नाम इसके मुकुट के समान दिखने वाले विशिष्ट आकार के कारण 'मुकुट' पड़ा है, जो गढ़वाल की हरी-भरी घाटियों और तिब्बती पठार के शुष्क परिदृश्य के बीच एक संक्रमण क्षेत्र का निर्माण करती है।
गढ़वाल हिमालय की मुख्य विशेषताएं
गढ़वाल हिमालय मध्य हिमालय का पश्चिमी भाग बनाता है, जो मुख्य रूप से उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में विस्तृत है। यह पश्चिम में टोंस नदी से लेकर पूर्व में काली नदी तक फैला हुआ है। इसकी उत्तरी सीमा तिब्बत (चीन) से तथा दक्षिणी सीमा शिवालिक पहाड़ियों से मिलती है। इस क्षेत्र में भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी और यमुना जैसी प्रमुख नदियां प्रवाहित होती हैं, तथा यहां चीड़, बांज, देवदार और रोडोडेंड्रोन के घने वन पाए जाते हैं।
सामरिक एवं परीक्षाोपयोगी महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय भूगोल, पर्यावरण विज्ञान और राष्ट्रीय सुरक्षा बलों की गतिविधियों से जुड़ा है। समुद्र तट पर सुरक्षा दायित्वों का निर्वहन करने वाले बल द्वारा उच्च हिमालयी शिखरों को फतह करना सैनिकों के मानसिक दृढ़, शारीरिक सहनशक्ति और सामरिक उच्च-तुंगता दक्षता (High-Altitude Preparedness) को प्रदर्शित करता है।

कोरोनरी थ्रोम्बोसिस: कारण, लक्षण एवं निवारक स्वास्थ्य रणनीतियाँ
प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन के पश्चात 'कोरोनरी थ्रोम्बोसिस' (Coronary Thrombosis) की समस्या चर्चा के केंद्र में आई है। यह हृदय की धमनियों में रक्त के थक्के जमने से उत्पन्न होने वाली एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है, जो मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या हृदय घात (Heart Attack) का मुख्य कारण बनती है।
सारांश
प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन के पश्चात 'कोरोनरी थ्रोम्बोसिस' (Coronary Thrombosis) की समस्या चर्चा के केंद्र में आई है। यह हृदय की धमनियों में रक्त के थक्के जमने से उत्पन्न होने वाली एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है, जो मायोकार्डियल इन्फार्क्शन या हृदय घात (Heart Attack) का मुख्य कारण बनती है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
हाल ही में एक वरिष्ठ अभिनेता के निधन के बाद कार्डियोवैस्कुलर विकारों और कोरोनरी थ्रोम्बोसिस को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। कोरोनरी थ्रोम्बोसिस वह स्थिति है जिसमें हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन एवं पोषक तत्व आपूर्ति करने वाली कोरोनरी धमनियों में थक्का (Blood Clot) बन जाता है। इसके कारण रक्त प्रवाह आंशिक या पूर्ण रूप से बाधित हो जाता है, जिससे हृदय की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
पैथोफिसियोलॉजी और मुख्य कारण
यह स्थिति मुख्य रूप से एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) की प्रक्रिया से जुड़ी है, जिसमें धमनियों की दीवारों में कोलेस्ट्रॉल, वसा और प्लाक का संचय होता है। धूम्रपान, उच्च रक्तचाप (Hypertension), उच्च कोलेस्ट्रॉल का स्तर, मधुमेह, मोटापा और गतिहीन जीवनशैली (Sedentary Lifestyle) इसके मुख्य जोखिम कारक हैं। धमनियों के भीतर प्लाक फटने पर शरीर थक्का बनाने वाली प्लेटलेट्स को सक्रिय करता है, जो धमनी को अवरुद्ध कर देती हैं।
मुख्य लक्षण एवं पहचान
कोरोनरी थ्रोम्बोसिस के लक्षणों में सीने में तेज दर्द या दबाव, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक पसीना आना, घबराहट, मतली और अचानक तीव्र थकान महसूस होना शामिल है। यदि समय पर इस रक्त अवरोध को दूर न किया जाए, तो यह घातक कार्डियक अरेस्ट या मायोकार्डियल इन्फार्क्शन का रूप ले लेता है।
नैदानिक उपचार एवं निवारक उपाय
इसके तात्कालिक उपचार में थक्का घोलने वाली दवाएं (Thrombolytic drugs), एंटीप्लेटलेट एजेंट और एंटीकोएगुलेंट्स का उपयोग किया जाता है। गंभीर मामलों में रक्त प्रवाह पुन: स्थापित करने के लिए एंजियोप्लास्टी (Stent Placement) या कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की जाती है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परीक्षाोपयोगी महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय सामान्य विज्ञान, मानव शरीर विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के अंतर्गत महत्वपूर्ण है। गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, त्वरित आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया और जीवनशैली में सुधार संबंधी प्रशासनिक पहलों की आवश्यकता है।

तृष्णा उपग्रह मिशन: भारत-फ्रांस अंतरिक्ष सहयोग और प्राकृतिक संसाधन मूल्यांकन
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा 'तृष्णा' (TRISHNA) उपग्रह अगले 12 से 16 महीनों के भीतर प्रक्षेपित किया जाएगा। यह मिशन उच्च-रिजोल्यूशन थर्मल इन्फ्रारेड मैपिंग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर जल संकट, जल विज्ञान और जलवायु परिवर्तन का सटीक अध्ययन करेगा।
सारांश
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा 'तृष्णा' (TRISHNA) उपग्रह अगले 12 से 16 महीनों के भीतर प्रक्षेपित किया जाएगा। यह मिशन उच्च-रिजोल्यूशन थर्मल इन्फ्रारेड मैपिंग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर जल संकट, जल विज्ञान और जलवायु परिवर्तन का सटीक अध्ययन करेगा।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
तृष्णा (Thermal Infra-Red Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment - TRISHNA) भारत और फ्रांस का एक संयुक्त अंतरिक्ष उपग्रह मिशन है। 'मेघा-ट्रॉपिक्स' (Megha-Tropiques) और 'सरल' (SARAL) के बाद यह दोनों देशों द्वारा विकसित किया जा रहा तीसरा प्रमुख उपग्रह है। इसे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के माध्यम से लगभग 761 किलोमीटर की सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (Sun-synchronous orbit) में स्थापित किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य
इस उपग्रह का मुख्य उद्देश्य महाद्वीपीय बायोस्फीयर के ऊर्जा और जल बजट का बारीक निगरानी विश्लेषण करना है। यह कृषि क्षेत्रों में जल तनाव (terrestrial water stress) और वाष्पोत्सर्जन (evapotranspiration) का सटीक डेटा प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, यह तटीय व आंतरिक जल निकायों की गुणवत्ता, शहरी ताप द्वीपों (Urban Heat Islands), ग्लेशियरों के पिघलने की गति तथा ज्वालामुखी गतिविधियों से जुड़े तापीय विचलनों का मूल्यांकन करने में सहायक होगा।
पेलोड एवं तकनीकी विशेषताएं
तृष्णा उपग्रह में दो प्रमुख पेलोड शामिल हैं। पहला 'थर्मल इन्फ्रारेड पेलोड' (TIR) है जिसे फ्रांसीसी एजेंसी CNES द्वारा विकसित किया गया है; यह सतह के तापमान और उत्सर्जनशीलता का उच्च-रिजोल्यूशन डेटा एकत्र करता है। दूसरा पेलोड 'विजिबल-नियर इन्फ्रारेड-शॉर्टवेव इन्फ्रारेड' (VNIR-SWIR) है जिसे इसरो द्वारा निर्मित किया गया है; यह परावर्तनशीलता और वनस्पति संकेतकों की मैपिंग करने में सक्षम है।
रणनीतिक एवं परीक्षाोपयोगी महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन के तहत अत्यंत प्रासंगिक है। तृष्णा मिशन सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेषकर जल संसाधन प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन शमन के लिए वैश्विक डेटा उपलब्ध कराने वाला एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय प्रयास है।
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