
मोबाइल बैन से तमिलनाडु के मंदिरों में घटी श्रद्धालुओं की भीड़
तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित देवराजस्वामी मंदिर में मोबाइल फोन पर लगे प्रतिबंध का सीधा असर श्रद्धालुओं की आवक पर दिखा है। प्रशासन द्वारा पवित्र वातावरण बनाए रखने के लिए लागू किए गए इस नियम के बाद मंदिर आने वाले लोगों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
खबर का निचोड़
तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित देवराजस्वामी मंदिर में मोबाइल फोन पर लगे प्रतिबंध का सीधा असर श्रद्धालुओं की आवक पर दिखा है। प्रशासन द्वारा पवित्र वातावरण बनाए रखने के लिए लागू किए गए इस नियम के बाद मंदिर आने वाले लोगों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
भक्ति पर भारी पड़ी डिजिटल दूरी
डिजिटल दौर में किसी जगह जाकर तस्वीर न ले पाना कई लोगों के लिए उस अनुभव को अधूरा बना देता है। तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर कांचीपुरम स्थित प्रसिद्ध देवराजस्वामी मंदिर में ऐसा ही एक अनूठा बदलाव देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन ले जाने पर लगाई गई रोक के बाद से यहाँ श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भारी कमी आई है।
मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, जब से परिसर में स्मार्टफोन पूरी तरह बैन किए गए हैं, तब से आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। जो मंदिर पहले हर दिन हजारों लोगों की चहल-पहल से गुंजायमान रहता था, वहाँ अब तुलनात्मक रूप से शांति दिखाई दे रही है।
पवित्रता बनाम आधुनिक युवाओं की पसंद
इस कड़े फैसले के पीछे मंदिर प्रबंधन का तर्क बेहद स्पष्ट है। प्रशासन का मानना है कि मंदिर केवल घूमने या तस्वीरें खिंचवाने की जगह नहीं हैं, बल्कि यह ईश्वर से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का केंद्र हैं। लगातार बजते फोन, सेल्फी लेने की होड़ और सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने की आदत से मंदिर परिसर का आध्यात्मिक माहौल प्रभावित हो रहा था। इसी वजह से पूजा-अर्चना के दौरान पवित्रता और श्रद्धालुओं की एकाग्रता बनाए रखने के लिए मोबाइल बैन का फैसला लिया गया।
दूसरी तरफ, युवाओं और सोशल मीडिया जनरेशन के बीच इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं। कई युवा श्रद्धालुओं का मानना है कि स्मार्टफोन आज की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। सुरक्षा, अपनों से संपर्क और अपनी यात्रा की यादों को सहेजने के लिए फोन जरूरी होता है। ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध को कुछ लोग अत्यधिक सख्त नियम मान रहे हैं, जिससे उनकी मंदिर आने की उत्सुकता कम हुई है।
डिजिटल लाइफस्टाइल और आस्था का टकराव
देवराजस्वामी मंदिर का यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि आज की लाइफस्टाइल में तकनीक किस कदर घुल-मिल गई है। एक ओर जहाँ पारंपरिक व्यवस्थाएं धार्मिक स्थलों के मूल स्वरूप को सहेजने का प्रयास कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर आधुनिक पीढ़ी की आदतें इन नियमों से मेल नहीं खा पा रही हैं। फिलहाल, मंदिर प्रशासन अपने फैसले पर कायम है और उसका पूरा ध्यान परिसर के भीतर भक्तिभाव को प्राथमिकता देने पर है।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर यूपी के गरीब युवा
कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में घाघरा नदी किनारे बसे गांवों के गरीब युवाओं को निशाना बना रहा है। गैंग मुंबई-महाराष्ट्र में मजदूरी करने वाले युवाओं को पैसे और अपराध की दुनिया में नाम कमाने का लालच देकर अपना स्लीपर सेल तैयार कर रहा है।
पैसों और नाम का दिया जा रहा लालच
पुलिस और सुरक्षा तंत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई गैंग मुख्य रूप से उन गरीब युवाओं को अपना शिकार बना रहा है जो काम की तलाश में मुंबई या महाराष्ट्र के अन्य शहरों में मजदूरी करने जाते हैं। गैंग के गुर्गे इन युवाओं को जल्दी पैसे कमाने और जरायम की दुनिया में दबदबा व नाम बनाने का लालच देते हैं। इसी प्रलोभन के जरिए वे युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने स्लीपर सेल के रूप में भर्ती कर रहे हैं।
जांच में जुटी खुफिया एजेंसियां
इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच के दौरान हुआ, जब बहराइच क्षेत्र से छह आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। इन गिरफ्तारियों के बाद से ही खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र में सक्रिय हो गई हैं और इस गिरोह के बाकी तारों को खंगालने में लगी हुई हैं।

AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी ₹10,000 के पर्सनल बॉन्ड और एक जमानत्दार वाले नोटिस को उन्होंने चुनौती दी थी। कोर्ट ने नोटिस रद्द करने से इनकार करते हुए केस सामग्री उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने नेहा बोरा को ₹10,000 का पर्सनल बॉन्ड भरने और साथ में एक जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए एक नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के खिलाफ नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और इसे रद्द करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, अदालत ने मामले की समीक्षा करने के बाद नोटिस को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट का अहम निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए राहत के तौर पर मजिस्ट्रेट को एक निर्देश जरूर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले से जुड़ी जितनी भी जरूरी और संबंधित सामग्री या दस्तावेज हैं, वे सभी नेहा बोरा को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अपना पक्ष सही तरीके से रख सकें। अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी प्रक्रियात्मक कार्रवाइयों पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई जाएगी।

यूपी टीजीटी के 17,735 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) के 17,735 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 24 अक्टूबर से शुरू होकर 26 नवंबर तक चलेगा। इसके लिए लिखित परीक्षा 23-24 दिसंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 24 अक्टूबर से शुरू हो रही है, जबकि आवेदन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 26 नवंबर तय की गई है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए समय रहते अपना पंजीकरण पूरा कर लें।
परीक्षा तिथियों की घोषणा
आयोग ने नोटिफिकेशन के साथ ही परीक्षा की तिथियों का भी ऐलान कर दिया है। टीजीटी पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 23 और 24 दिसंबर 2026 को किया जाएगा। इस परीक्षा के माध्यम से हजारों योग्य शिक्षकों का चयन कर उन्हें राज्य के माध्यमिक स्कूलों में नियुक्त किया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार सभी आवश्यक विवरणों और आवेदन प्रक्रिया के लिए आधिकारिक पोर्टल upsessb.up.gov.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।

हरियाणा: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम के उद्योगों को ₹10,000 करोड़ का नुकसान
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हालिया हड़ताल के कारण गुरुग्राम के उद्योगों को लगभग ₹10,000 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उद्योग संगठन PFTI के अनुसार, इस बिजली संकट से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ और जनरेटर का इस्तेमाल करने से लागत दोगुनी होकर 22 से 23 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई। हालांकि, अब यह हड़ताल खत्म हो चुकी है।
उत्पादन पर पड़ा गहरा असर
उद्योग संगठन PFTI (पीएफटीआई) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बिजली संकट गहराने की वजह से औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ग्रिड की बिजली न मिलने के कारण उद्योगों को अपने संयंत्र चलाने के लिए जनरेटर का भारी मात्रा में सहारा लेना पड़ा।
लागत में हुई भारी बढ़ोतरी
जनरेटर से बिजली का विकल्प अपनाने के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है। जनरेटर से बिजली प्राप्त करने पर लागत लगभग दोगुनी होकर 22 से 23 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई, जिससे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति पर काफी दबाव पड़ा। हालांकि, राहत की बात यह है कि बिजली कर्मचारियों की यह हड़ताल अब समाप्त हो चुकी है और स्थिति सामान्य होने की ओर बढ़ रही है।

रास्ते पर बैरिकेड लगा दिया, कहीं यमुना में नेवी न तैनात कर दें: अभिजीत दीपके
सीजेपी के अभिजीत दीपके ने नेताओं की हिरासत पर सरकार पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वे फ्लाइट और सड़क से हिरासत में लिए जा चुके हैं, अब बस नाव से गिरफ्तार होना बाकी है। दीपके ने तंज कसते हुए कहा कि रास्ते पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं, पता नहीं यमुना में कहीं नेवी न तैनात कर दें।
सरकार की कार्रवाई पर तीखा कटाक्ष
अभिजीत दीपके ने सरकार के रवैये पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे और उनके साथी नेताओं को फ्लाइट और सड़क के रास्ते से पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है। अब केवल नाव के जरिए गिरफ्तार होना ही बाकी रह गया है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की ओर से की गई भारी घेराबंदी को लेकर तंज कसा।
'यमुना में नेवी तैनात न कर दें'
दीपके ने आगे कहा कि सड़कों पर जिस तरह से बैरिकेड्स लगाकर आवाजाही को रोका गया है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि कहीं सरकार यमुना नदी में नेवी (नौसेना) की तैनाती न कर दे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एक विरोध प्रदर्शन (प्रोटेस्ट) को लेकर प्रशासन के भीतर इतना ज्यादा डर बना हुआ है, जिसके लिए इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है।
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