
मिर्ज़ापुर में बीना त्रिपाठी का 'दिमाग' बना बंदूक से बड़ा हथियार
मिर्ज़ापुर के हिंसक साम्राज्य में कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी बिना किसी हथियार या बाहुबल के अपनी जगह बनाती हैं। रसिका दुगल द्वारा अभिनीत यह किरदार अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और सहज समझ के बल पर परिवार के शोषण और हिंसा से जूझते हुए अपना वर्चस्व स्थापित करता है।
खबर का निचोड़
मिर्ज़ापुर के हिंसक साम्राज्य में कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी बिना किसी हथियार या बाहुबल के अपनी जगह बनाती हैं। रसिका दुगल द्वारा अभिनीत यह किरदार अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और सहज समझ के बल पर परिवार के शोषण और हिंसा से जूझते हुए अपना वर्चस्व स्थापित करता है।
बंदूक और बाहुबल के बीच बुद्धि का खेल
मिर्ज़ापुर की हिंसक और खूनी दुनिया में कालीन भैया का राज चलता है, जहाँ हर पुरुष पात्र अपनी ताकत, बंदूक, पैसे और जातिगत दंभ के दम पर अपनी जगह बनाने में लगा है। इस क्रूर साम्राज्य में अपना अस्तित्व बचाए रखना आसान काम नहीं है। लेकिन इस पूरे माहौल में एक किरदार ऐसा है जो पुरुषों की इस हिंसक भीड़ में बिल्कुल अलग राह चुनता है।
बीना त्रिपाठी: बिना सेना और बंदूक की ताकत
कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी, जिसका किरदार अभिनेत्री रसिका दुगल ने निभाया है, के पास न तो कोई बाहुबल है और न ही पुरुषों की कोई हथियारबंद फौज। बीना के हाथ में कोई बंदूक नहीं होती, लेकिन उनके पास एक ऐसा हथियार है जो बंदूक की गोली से भी ज्यादा घातक साबित होता है—उनकी तीक्ष्ण बुद्धि और परिस्थितियों को भांपने की अद्भुत क्षमता।
शोषण और अपमान से भरा पारिवारिक अतीत
बीना कभी भी उस जीवन का हिस्सा नहीं बनना चाहती थीं जिसमें उन्हें जबरन धकेल दिया गया था। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी के साथ उनकी शादी एक ऐसा फैसला था जिसे उन्होंने कभी दिल से स्वीकार नहीं किया। उम्र का बड़ा फासला, दांपत्य जीवन की कमियां और आसपास फैली खूनी हिंसा से बीना को हमेशा नफरत रही। परिवार के भीतर भी उनके लिए स्थितियां बेहद कठिन थीं। उनके ससुर सत्यानंद त्रिपाठी (कुलभूषण खरबंदा) और घर के लगभग हर पुरुष ने उनका शोषण और उत्पीड़न किया।
मिर्ज़ापुर की जंग में बुद्धिमत्ता का वर्चस्व
पारिवारिक उत्पीड़न और चारों तरफ से खतरों से घिरे होने के बावजूद, बीना ने कभी घुटने नहीं टेके। उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे अत्याचारों का जवाब हथियारों से देने के बजाय अपनी सधी हुई चालों से दिया। 'मिर्ज़ापुर: द मूवी' की कहानी में भी उनका यही दिमाग और रणनीति बनाने का हुनर उन्हें एक मजबूत स्थिति में खड़ा करता है। रसिका दुगल ने इस किरदार में जिस तरह की गहराई और चतुरता भरी है, उसने बीना त्रिपाठी को इस खूनी गाथा का सबसे अप्रत्याशित और ताकतवर खिलाड़ी बना दिया है।

अपनी ही फिल्में क्यों नहीं देखतीं प्रीति ज़िंटा? खुला राज
बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति ज़िंटा ने अपनी फिल्में न देखने की एक अनोखी वजह साझा की है। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि जब भी वह खुद को पर्दे पर देखती हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि वह इससे भी बेहतर एक्टिंग कर सकती थीं। वहीं प्रीति जल्द ही अपकमिंग फिल्म 'वाइब' में एक सुपर स्पाई के रोल में पर्दे पर वापसी करेंगी।
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बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति ज़िंटा ने अपनी फिल्में न देखने की एक अनोखी वजह साझा की है। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि जब भी वह खुद को पर्दे पर देखती हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि वह इससे भी बेहतर एक्टिंग कर सकती थीं। वहीं प्रीति जल्द ही अपकमिंग फिल्म 'वाइब' में एक सुपर स्पाई के रोल में पर्दे पर वापसी करेंगी।
पर्दे पर खुद को देखने से क्यों कतराती हैं प्रीति?
बॉलीवुड की लोकप्रिय एक्ट्रेस प्रीति ज़िंटा ने अपने लंबे करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं और अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रीति खुद अपनी फिल्में देखना बिल्कुल पसंद नहीं करती हैं? हाल ही में 'हिंदुस्तान टाइम्स' को दिए एक खास इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने इस बात का खुलकर खुलासा किया है और इसके पीछे की एक बेहद व्यक्तिगत वजह शेयर की है।
प्रीति का मानना है कि जब भी वह पर्दे पर अपनी किसी फिल्म या सीन को देखती हैं, तो उनके भीतर का कलाकार कभी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं होता। वह जैसे ही स्क्रीन पर खुद को एक्टिंग करते हुए देखती हैं, उनके दिमाग में तुरंत यह विचार आता है कि उस सीन को और भी बेहतर तरीके से किया जा सकता था। इसी स्व-मूल्यांकन (सेल्फ-क्रिटिक) की भावना के कारण वह अपनी फिल्मों को देखने से दूरी बनाकर रखना पसंद करती हैं।
परफेक्शनिज्म और अभिनय के प्रति एक्ट्रेस की सोच
फिल्म जगत में अक्सर कलाकार अपने ही काम को देखकर अपनी तारीफ करते नहीं थकते, लेकिन प्रीति ज़िंटा का दृष्टिकोण इससे काफी अलग नजर आता है। स्क्रीन पर खुद की कमियों या बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश तलाशना यह दिखाता है कि वह अपने अभिनय को लेकर कितनी संजीदा और परफेक्शनिस्ट हैं।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साफ किया कि एक कलाकार के रूप में वह हमेशा नया सीखने और अपने काम में सुधार करने की कोशिश करती रहती हैं। यही वजह है कि पुरानी फिल्मों को दोबारा देखने के बजाय वह अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा सही मानती हैं।
एक्शन अवतार में वापसी: 'वाइब' में बनेंगी सुपर स्पाई
फैंस के लिए अच्छी खबर यह है कि प्रीति ज़िंटा एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह अपनी अपकमिंग एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'वाइब' में एक बेहद दमदार और अलग किरदार में नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में वह 'मैडम एच' नाम की एक जांबाज सुपर स्पाई (Super Spy) की भूमिका निभाती दिखेंगी।
प्रीति के इस नए अवतार को लेकर दर्शकों और उनके प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 'मैडम एच' के रूप में उनका यह एक्शन पैक्ड रोल 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रहा है।

करण जौहर की बड़ी घोषणा: राधा-कृष्ण पर बनाएंगे भक्ति फिल्म
फिल्ममेकर करण जौहर भगवान श्री कृष्ण और राधा पर आधारित एक भक्ति फिल्म प्रोड्यूस करने जा रहे हैं। इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट का निर्देशन सचिन रवि करेंगे। फिलहाल फिल्म का वर्किंग टाइटल 'राधा कृष्ण' रखा गया है और यह अभी डेवलपमेंट स्टेज में है। करण लंबे समय से इस विषय पर फिल्म बनाना चाहते थे।
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फिल्ममेकर करण जौहर भगवान श्री कृष्ण और राधा पर आधारित एक भक्ति फिल्म प्रोड्यूस करने जा रहे हैं। इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट का निर्देशन सचिन रवि करेंगे। फिलहाल फिल्म का वर्किंग टाइटल 'राधा कृष्ण' रखा गया है और यह अभी डेवलपमेंट स्टेज में है। करण लंबे समय से इस विषय पर फिल्म बनाना चाहते थे।
बॉलीवुड निर्देशक और निर्माता करण जौहर एक बार फिर भारतीय सिनेमा में बड़ा धमाका करने की तैयारी में हैं। ग्लैमर और फैमिली ड्रामा फिल्मों के लिए मशहूर करण जौहर इस बार पौराणिक और भक्ति पृष्ठभूमि पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। उनका अगला ड्रीम प्रोजेक्ट भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा के अलौकिक प्रेम और भक्ति पर आधारित होगा।
भक्ति सिनेमा में करण जौहर का बड़ा कदम
फिल्म जगत में लंबे समय से इस बात की चर्चा थी कि करण जौहर धार्मिक या पौराणिक कथाओं से जुड़ी किसी खास कहानी पर काम करना चाहते हैं। अब यह बात पक्की हो चुकी है कि वह भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के पवित्र संबंधों की दिव्यता को बड़े पर्दे पर उतारने जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्सुकता देखी जा रही है।
फिल्म का नाम फिलहाल अस्थाई रूप से 'राधा कृष्ण' तय किया गया है। यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण यानी डेवलपमेंट स्टेज में है, जहां इसकी पटकथा, विजुअल इफेक्ट्स और प्री-प्रोडक्शन की तैयारियों पर काम चल रहा है। धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले इस फिल्म को भव्य पैमाने पर निर्मित करने की योजना बनाई गई है।
सचिन रवि संभालेंगे निर्देशन की कमान
इस फिल्म का निर्देशन साउथ और हिंदी सिनेमा के चर्चित डायरेक्टर सचिन रवि करने वाले हैं। सचिन रवि अपनी बेहतरीन विजुअल स्टोरीटेलिंग और तकनीकी पकड़ के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी दूरदर्शिता और करण जौहर की भव्य निर्माण शैली के मेल से दर्शक एक अनूठे सिनेमाई अनुभव की उम्मीद कर रहे हैं।
सचिन रवि का इस प्रोजेक्ट से जुड़ना इस बात का साफ संकेत है कि फिल्म में आधुनिक तकनीक और वीएफएक्स (VFX) का बेहतरीन इस्तेमाल देखने को मिलेगा। पौराणिक कथा को आज की पीढ़ी के सामने एक नए और आकर्षक अंदाज में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
सालों पुराना सपना होगा साकार
करण जौहर लंबे समय से भगवान श्री कृष्ण और राधा के जीवन से प्रेरित कहानी को रूपहले पर्दे पर दिखाना चाहते थे। यह प्रोजेक्ट उनके दिल के बेहद करीब है और वह इस कहानी की संवेदनशीलता, भक्ति रस और दार्शनिक पहलुओं को बहुत ही सम्मानपूर्वक पर्दे पर उकेरना चाहते हैं।
फिलहाल फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर मेकर्स की तरफ से कोई ऐलान नहीं किया गया है। लेकिन बॉलीवुड के गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि मुख्य किरदारों के लिए इंडस्ट्री के शीर्ष कलाकारों से बातचीत की जा रही है। आने वाले दिनों में इस प्रोजेक्ट की आधिकारिक स्टारकास्ट और शूटिंग शेड्यूल से जुड़ी जानकारियां सामने आएंगी।

₹75 लाख का पैकेज छोड़ा, 30 दिन में गंवाए ग्राहक!
इंजीनियर ख्याति ठाकुर ने 75 लाख रुपये सालाना की शानदार नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप 'Fridayy AI' शुरू किया। हालांकि, शुरुआत में ही उन्हें करारा झटका लगा और महज 30 दिनों के भीतर उनके सभी ग्राहक चले गए। 16 महीनों की कड़ी मेहनत और सही रणनीति के बाद उन्होंने दोबारा अपने बिज़नेस को खड़ा किया।
₹75 लाख का पैकेज छोड़ा, 30 दिन में गंवाए ग्राहक!
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इंजीनियर ख्याति ठाकुर ने 75 लाख रुपये सालाना की शानदार नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप 'Fridayy AI' शुरू किया। हालांकि, शुरुआत में ही उन्हें करारा झटका लगा और महज 30 दिनों के भीतर उनके सभी ग्राहक चले गए। 16 महीनों की कड़ी मेहनत और सही रणनीति के बाद उन्होंने दोबारा अपने बिज़नेस को खड़ा किया।
मुख्य आर्टिकल
कॉरपोरेट लाइफ को कहा अलविदा
ख्याति ठाकुर के पास 75 लाख रुपये सालाना के पैकेज वाली एक बेहतरीन नौकरी थी। कॉरपोरेट की सुरक्षित दुनिया में काम करते हुए सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा था। लेकिन उनके भीतर अपना खुद का बिज़नेस खड़ा करने का सपना सांस ले रहा था। इसी सपने को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया और अपना ₹75 लाख का पैकेज छोड़कर एंटरप्रेन्योरशिप के रास्ते पर कदम रखा।
ख्याति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में संभावनाएं देखीं और 'Fridayy AI' नाम से अपना एक टेक स्टार्टअप शुरू किया। एक हाई-पेइंग जॉब छोड़कर अनिश्चितता से भरे टेक सेक्टर में उतरना आसान नहीं था, लेकिन ख्याति को अपने विजन और काबिलियत पर पूरा भरोसा था।
30 दिनों में शून्य पर पहुंचा बिज़नेस
स्टार्टअप शुरू करने का शुरुआती उत्साह बहुत जल्द एक बड़े संकट में बदल गया। बिज़नेस शुरू होने के कुछ ही समय बाद एक ऐसी स्थिति आई जिसने कंपनी की पूरी नींव हिलाकर रख दी। महज 30 दिनों के भीतर उनके स्टार्टअप के सभी ग्राहक एक-एक करके उन्हें छोड़कर चले गए।
कंपनी का ग्राहक आधार पूरी तरह शून्य हो गया और जो बिज़नेस उम्मीदों से भरा दिख रहा था, वह अचानक बंद होने की कगार पर आ पहुंचा। किसी भी फाउंडर के लिए शुरुआती महीने में ही 100 फीसदी कस्टमर बेस खो देना बेहद तनावपूर्ण अनुभव होता है।
16 महीनों का कड़ा संघर्ष और बदलाव
सारे ग्राहक खोने के बाद ख्याति ने हार मानने के बजाय अपनी कमियों का विश्लेषण शुरू किया। उन्होंने समझा कि बिज़नेस में केवल विचार होना काफी नहीं है, बल्कि बाजार की जरूरत को समझना सबसे ज्यादा जरूरी है। कंपनी को सही दिशा में मोड़ने और सही रणनीति बनाने में उन्हें पूरे 7 महीने का समय लगा।
दिशा स्पष्ट होने के बाद, प्रोडक्ट को नए सिरे से तैयार करने और उसे बेहतर बनाने में 9 महीने और लगे। कुल मिलाकर 16 महीनों के कठिन परिश्रम और रिसर्च के बाद ख्याति अपने स्टार्टअप को एक मजबूत स्थिति में लाने में कामयाब हुईं।
असफलता से मिली नई शुरुआत
ख्याति ठाकुर का यह सफर स्टार्टअप दुनिया की वास्तविक चुनौतियों को बयां करता है। भारी भरकम पैकेज छोड़ना तो बस पहला कदम होता है, असली परीक्षा उसके बाद आने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में होती है। ख्याति का अनुभव दिखाता है कि कैसे 30 दिनों में पूरी तरह ग्राहक खोने के बाद भी 7 महीने की सही दिशा खोज और 9 महीने के प्रोडक्ट डेवलपमेंट के दम पर बिज़नेस को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है।

'मां गंगा ने आगोश में लिया', स्पैनिश महिला हुई भावुक
स्पैनिश कंटेंट क्रिएटर एंड्रिया पैस्पर ने वाराणसी यात्रा के दौरान मां गंगा के साथ अपने गहरे आध्यात्मिक अनुभव को साझा किया है। गंगा आरती, पवित्र डुबकी और पूजा-पाठ के दौरान वे भावुक हो गईं। उनका कहना है कि गंगा की दिव्य ऊर्जा किताबों से परे है और उन्हें महसूस हुआ कि मां गंगा ने उन्हें अपनी आगोश में ले लिया।
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स्पैनिश कंटेंट क्रिएटर एंड्रिया पैस्पर ने वाराणसी यात्रा के दौरान मां गंगा के साथ अपने गहरे आध्यात्मिक अनुभव को साझा किया है। गंगा आरती, पवित्र डुबकी और पूजा-पाठ के दौरान वे भावुक हो गईं। उनका कहना है कि गंगा की दिव्य ऊर्जा किताबों से परे है और उन्हें महसूस हुआ कि मां गंगा ने उन्हें अपनी आगोश में ले लिया।
वाराणसी के घाटों पर आध्यात्मिक यात्रा
भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी वाराणसी हमेशा से दुनियाभर के पर्यटकों और साधकों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। हाल ही में स्पैनिश कंटेंट क्रिएटर एंड्रिया पैस्पर वाराणसी की पावन धरा पर पहुंचीं। यहाँ की प्राचीन गलियों, गंगा के पावन तटों और घाटों पर गूंजते मंत्रोच्चार ने उनके मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। उनकी यह यात्रा महज एक आम पर्यटक की सैर न रहकर एक अलौकिक आध्यात्मिक सफर बन गई।
भक्ति और आस्था के पावन रंग
वाराणसी प्रवास के दौरान एंड्रिया ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को बहुत करीब से देखा और महसूस किया। उन्होंने गंगा घाट पर होने वाली प्रसिद्ध गंगा आरती में श्रद्धापूर्वक भाग लिया। हाथों में जलते हुए दीये और फूल लेकर जब उन्होंने गंगा मैया को अर्पित किए, तो वे पूरी तरह भक्तिभाव में लीन हो गईं। इसके बाद उन्होंने गंगा जी के पवित्र जल में डुबकी लगाई और तट पर बैठकर विधिवत पूजा-पाठ भी संपन्न किया।
किताबों से परे एक अलौकिक ऊर्जा
अपनी इस यात्रा का एक विशेष वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए एंड्रिया ने अपने अनुभवों को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि गंगा आरती और पूजा के दौरान उन्होंने जो महसूस किया, वह शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। उनके अनुसार, "गंगा मैया के पास एक ऐसी अलौकिक और सकारात्मक ऊर्जा है, जिसे दुनिया की कोई भी किताब नहीं समझा सकती।" यह एक ऐसा अनुभव है जिसे केवल यहाँ आकर ही महसूस किया जा सकता है।
आंसुओं में झलका समर्पण का भाव
गंगा नदी के जल में बैठकर वे अपने आंसुओं को रोक न सकीं और भावुक हो उठीं। अपने दिल के उद्गार बयां करते हुए उन्होंने कहा, "वह सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि साक्षात गंगा मां हैं। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं अपना सब कुछ उन्हें समर्पित कर रही हूं। ऐसा लगा मानो मां गंगा ने मुझे अपनी आगोश में ले लिया हो।" स्पैनिश क्रिएटर का यह भावुक वीडियो अब इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

घोड़ों वाला स्टेरॉयड लगाकर दौड़े युवक, सीधे पहुंचे अस्पताल
आगरा के खेरागढ़ में आयोजित 6 किलोमीटर की मैराथन दौड़ में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए सेना भर्ती की तैयारी कर रहे दो युवकों ने कथित तौर पर घोड़ों को लगाया जाने वाला वेटर्नरी स्टेरॉयड इंजेक्शन लगा लिया। फिनिशिंग लाइन पार करते ही दोनों की तबीयत बिगड़ गई और वे मैदान पर ही अचेत होकर गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
खबर का निचोड़
आगरा के खेरागढ़ में आयोजित 6 किलोमीटर की मैराथन दौड़ में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए सेना भर्ती की तैयारी कर रहे दो युवकों ने कथित तौर पर घोड़ों को लगाया जाने वाला वेटर्नरी स्टेरॉयड इंजेक्शन लगा लिया। फिनिशिंग लाइन पार करते ही दोनों की तबीयत बिगड़ गई और वे मैदान पर ही अचेत होकर गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
स्टैमिना बढ़ाने के चक्कर में बिगड़ी तबीयत
सेना भर्ती की तैयारी में जुटे युवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा और शारीरिक क्षमता को लेकर बढ़ता दबाव कई बार बेहद जोखिम भरे कदम उठाने पर मजबूर कर देता है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिला अंतर्गत खेरागढ़ क्षेत्र में आयोजित 6 किलोमीटर की मैराथन प्रतियोगिता में ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे दो युवकों ने दौड़ में बाजी मारने और अपनी रफ्तार बढ़ाने के लिए अति-उत्साह में घोड़ों को दिए जाने वाले वेटर्नरी स्टेरॉयड इंजेक्शन का सहारा लिया।
फिनिशिंग लाइन पर अचेत होकर गिरे धावक
मैराथन की शुरुआत में दोनों युवकों ने असाधारण गति से दौड़ना शुरू किया और अन्य प्रतियोगियों से काफी आगे निकल गए। लेकिन जानवरों के लिए इस्तेमाल होने वाले इस खतरनाक रसायन का असर कुछ ही मिनटों में उनके शरीर पर घातक रूप से दिखने लगा। 6 किलोमीटर की लंबी और थकाऊ दूरी तय करने के दौरान उनका ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कनें अनियंत्रित स्तर पर पहुंच गईं। जैसे ही दोनों धावकों ने फिनिशिंग लाइन पार की, उनका शरीर पूरी तरह सुन्न पड़ गया और वे मैदान पर ही अचेत होकर गिर पड़े।
मेडिकल टीम के फूले हाथ-पांव
धावकों को फिनिशिंग लाइन पर तड़पता देखकर प्रतियोगिता स्थल पर मौजूद आयोजकों और दर्शकों के बीच हड़कंप मच गया। आयोजन स्थल पर मौजूद मेडिकल टीम ने तुरंत दोनों को प्राथमिक चिकित्सा देने का प्रयास किया, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति लगातार नाजुक होती जा रही थी। बिना किसी देरी के आयोजकों ने एम्बुलेंस के जरिए दोनों पीड़ितों को पास के अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया।
जांच में वेटर्नरी स्टेरॉयड का हुआ खुलासा
अस्पताल में डॉक्टरों ने जब युवकों की जांच की, तो उनके शरीर में अत्यधिक विषैले और इंसानों के लिए प्रतिबंधित हैवी वेटर्नरी ड्रग्स के अंश पाए गए। चिकित्सकों के मुताबिक घोड़ों के लिए बनाए गए स्टेरॉयड का इंसानी शरीर पर बहुत खतरनाक असर पड़ता है। यह अस्थाई रूप से मांसपेशियों को उत्तेजित तो कर देता है, लेकिन इसके तुरंत बाद कार्डियक अरेस्ट और नर्वस सिस्टम फेलियर का जोखिम बेहद बढ़ जाता है। फिलहाल दोनों युवक डॉक्टरों की गहन निगरानी में हैं और उनका इलाज जारी है।
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