
मौर्य साम्राज्य: भारतीय इतिहास का पहला अखिल भारतीय साम्राज्य और उसका प्रशासनिक मॉडल
मौर्य साम्राज्य भारतीय इतिहास का पहला ऐसा साम्राज्य था जिसने अखंड भारत की नींव रखी। चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा संस्थापित और सम्राट अशोक द्वारा वैश्विक स्तर पर प्रचारित यह साम्राज्य अपनी केंद्रीयकृत प्रशासनिक व्यवस्था, सुदृढ़ अर्थव्यवस्था, कूटनीति और कला-संस्कृति के लिए जाना जाता है, जो आज भी प्रशासनिक परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मौर्य साम्राज्य भारतीय इतिहास का पहला ऐसा साम्राज्य था जिसने अखंड भारत की नींव रखी। चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा संस्थापित और सम्राट अशोक द्वारा वैश्विक स्तर पर प्रचारित यह साम्राज्य अपनी केंद्रीयकृत प्रशासनिक व्यवस्था, सुदृढ़ अर्थव्यवस्था, कूटनीति और कला-संस्कृति के लिए जाना जाता है, जो आज भी प्रशासनिक परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और साम्राज्य की स्थापना
मौर्य साम्राज्य की स्थापना 322 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से नंद वंश के अंतिम शासक घनानंद को पराजित करके की थी। चाणक्य का 'अर्थशास्त्र' और मेगास्थनीज की 'इंडिका' इस काल के सबसे प्रामाणिक साहित्यिक स्रोत हैं। सरकारी अभिलेखों और पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, मौर्यों ने पहली बार भारतीय उपमहाद्वीप के एक बड़े हिस्से को एक केंद्रीय नियंत्रण में लाकर राजनीतिक अखंडता स्थापित की थी।
प्रशासनिक व्यवस्था और केंद्रीयकरण
मौर्य प्रशासन अत्यधिक केंद्रीयकृत और नौकरशाही पर आधारित था। राजा सर्वोपरि था, जिसकी सहायता के लिए एक 'मंत्रिपरिषद' होती थी। साम्राज्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे प्रांतों (चक्र) में विभाजित किया गया था, जिनका नियंत्रण राजकुमारों (कुमार या आर्यपुत्र) के हाथों में होता था।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से, कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत (राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड और मित्र) ने राज्य के स्थायित्व में मुख्य भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, साम्राज्य में एक विस्तृत खुफिया विभाग (गूढ़पुरुष) और सुसंगठित सैन्य व्यवस्था मौजूद थी, जो आंतरिक सुरक्षा और बाहरी आक्रमणों से रक्षा करती थी।
अशोक का धम्म और सांस्कृतिक योगदान
कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व) के बाद सम्राट अशोक ने 'भेरीघोष' (युद्ध नीति) को त्यागकर 'धम्मघोष' (सांस्कृतिक विजय) की नीति अपनाई। अशोक का धम्म कोई नया धर्म नहीं, बल्कि एक नैतिक आचार संहिता थी, जिसका उद्देश्य समाज में शांति, सहिष्णुता और सद्भाव बढ़ाना था।
अशोक ने अपने संदेशों को आम जनमानस तक पहुँचाने के लिए प्राकृत, ब्राह्मी, खरोष्ठी, आरामी और ग्रीक लिपियों में शिलालेखों और स्तंभ लेखों का निर्माण करवाया। भारतीय कला के इतिहास में मौर्य काल को पाषाण वास्तुकला की शुरुआत का मील का पत्थर माना जाता है, जिसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण सारनाथ का सिंह चतुर्मुख स्तंभ है, जो वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य (Key Facts)
संस्थापक: चंद्रगुप्त मौर्य (322 ईसा पूर्व), जिन्होंने सेल्यूकस निकेटर को पराजित कर हेरात, कंधार और मकरान के क्षेत्रों को साम्राज्य में मिलाया।
प्रमुख साहित्यिक स्रोत: कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र' (राजनीति और लोक प्रशासन पर आधारित) और मेगास्थनीज की 'इंडिका' (मौर्यकालीन समाज और पाटलिपुत्र प्रशासन का विवरण)।
प्रशासनिक विभाजन: साम्राज्य प्रांतों में विभाजित था, प्रांतों को 'आहार' या 'विषय' (जिला) में और जिलों को 'ग्राम' में बांटा गया था। 'स्थानिक' और 'गोप' मध्यवर्ती स्तर के अधिकारी थे।
नगर प्रशासन: मेगास्थनीज के अनुसार, पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन 30 सदस्यों के एक बोर्ड द्वारा चलाया जाता था, जो 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) में विभाजित था।
अशोक के शिलालेख: अशोक के इतिहास की मुख्य जानकारी उसके 14 वृहद शिलालेखों, लघु शिलालेखों और स्तंभ लेखों से मिलती है। शिलालेखों को सर्वप्रथम 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ा था।
मौर्यकालीन कला: राजकीय कला के अंतर्गत एकाश्मक स्तंभ (Monolithic Pillars), स्तूप (जैसे सांची का स्तूप) और बराबर की पहाड़ियों में निर्मित गुफाएं (जैसे सुदामा और लोमस ऋषि गुफा) शामिल हैं।

SBI Clerk Recruitment 2026: 1538 पदों पर शानदार मौका
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने जूनियर एसोसिएट्स क्लर्क के 1538 बैकलॉग पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। योग्य उम्मीदवार 27 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर है।
खबर का निचोड़
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने जूनियर एसोसिएट्स क्लर्क के 1538 बैकलॉग पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। योग्य उम्मीदवार 27 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह बेहद रोमांचक खबर है। बैंक ने क्लर्क के 1538 बैकलॉग पदों के लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 07 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है।
इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों के पास आवेदन करने के लिए 27 अगस्त 2026 तक का समय है। इस तय सीमा के भीतर ही उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन पत्र सफलतापूर्वक जमा करना होगा। समय रहते आवेदन करने से अंतिम समय में आने वाली तकनीकी बाधाओं से बचा जा सकता है।
योग्यता और चयन प्रक्रिया
इस भर्ती अभियान के तहत कुल 1538 बैकलॉग पदों को भरा जाएगा। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वे बैंक द्वारा निर्धारित सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं। इसमें शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य आवश्यक शर्तें शामिल हैं।
चयन प्रक्रिया की बात करें तो एसबीआई की यह परीक्षा बैंकिंग क्षेत्र की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसमें उम्मीदवारों को ऑनलाइन लिखित परीक्षा और अन्य निर्धारित चरणों से गुजरना होगा। विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ना बेहद जरूरी है ताकि आवेदन में किसी प्रकार की गलती न हो।

NEET विवाद के बाद CJP की हुंकार: अब देशव्यापी बनेगा बेरोजगारी का मुद्दा *
NEET पेपर लीक विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बेरोजगारी को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का ऐलान किया है। जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के समर्थन के बाद, सीजेपी ने शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों और युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई है।
खबर का निचोड़
NEET पेपर लीक विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बेरोजगारी को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का ऐलान किया है। जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के समर्थन के बाद, सीजेपी ने शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों और युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी आंदोलन की रणनीति बनाई है।
NEET आंदोलन से उठी नई क्रांति की आवाज
NEET पेपर लीक मामले ने देशभर के लाखों परीक्षार्थियों और उनके परिवारों को हिलाकर रख दिया है। सड़कों पर उतरे छात्रों का आक्रोश अब सिर्फ एक परीक्षा में हुई गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कमियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों ने इस गुस्से को एक नया मंच दिया, जहां छात्रों के साथ-साथ बड़ी संख्या में देश का बेरोजगार युवा भी एकजुट हुआ।
जंतर-मंतर से देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
इस जन-आक्रोश के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने युवाओं की आवाज को और बुलंद करने का फैसला किया है। प्रदर्शन के दौरान दीपके ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर जुटा जनसैलाब केवल एक परीक्षा के नतीजों से असंतुष्ट नहीं था, बल्कि यह उस हताशा का प्रतीक था जो देश का हर दूसरा शिक्षित युवा झेल रहा है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी आज के समय की सबसे विकराल समस्याओं में से एक बन चुकी है और अब वक्त आ गया है कि इसे एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाए।
शिक्षा प्रणाली में सुधार की सख्त जरूरत
अभिजीत दीपके ने जोर देकर कहा कि सीजेपी का मुख्य उद्देश्य केवल राजनीतिक बयानबाजी करना नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। देश में बार-बार होते पेपर लीक, परीक्षाओं में देरी और उसके बाद रोजगार के अवसरों की कमी ने युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। पार्टी अब इस पूरे तंत्र को बदलने की दिशा में काम करेगी ताकि किसी भी होनहार छात्र का भविष्य चंद भ्रष्ट तत्वों की वजह से बर्बाद न हो।
युवाओं के भरोसे पर टिकी भावी रणनीति
सीजेपी आने वाले दिनों में बेरोजगारी और शिक्षा सुधार के मुद्दों को लेकर पूरे देश में अभियान चलाने की योजना बना रही है। दीपके का मानना है कि जब तक देश का युवा अपने अधिकारों के लिए जागरूक और एकजुट नहीं होगा, तब तक इस सड़े-गले सिस्टम को बदलना मुमकिन नहीं है। युवाओं के बढ़ते समर्थन को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले समय में यह मुद्दा देश की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है।

एयरबैग खुला फिर भी नहीं बची जान, अतीक के बेटे की मौत का सच आया सामने
अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत की वजह सीटबेल्ट न लगाना बनी। तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराने पर एयरबैग तो खुला, लेकिन बिना सीटबेल्ट के शरीर तेज झटके से टकरा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 23 गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है।
खबर का निचोड़
अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत की वजह सीटबेल्ट न लगाना बनी। तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराने पर एयरबैग तो खुला, लेकिन बिना सीटबेल्ट के शरीर तेज झटके से टकरा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 23 गंभीर चोटों की पुष्टि हुई है।
एयरबैग खुलने के बाद भी क्यों नहीं बची जान?
अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की दर्दनाक सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के वक्त कार का एयरबैग पूरी तरह खुला था, लेकिन इसके बावजूद अबान की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गाड़ियों में सुरक्षा के आधुनिक फीचर्स भले ही मौजूद हों, लेकिन लापरवाही के आगे वे बेअसर साबित हो जाते हैं।
तेज रफ्तार और डिवाइडर से जोरदार टक्कर
यह हादसा बेहद भयावह था। तेज रफ्तार से दौड़ रही कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क के बीच बने डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के आगे के हिस्से के परखच्चे उड़ गए। हादसों के दौरान कार में लगे सुरक्षा सिस्टम ने काम किया और ड्राइवर साइड का एयरबैग तुरंत खुल गया। हालांकि, इस तकनीकी सुरक्षा का अबान को कोई फायदा नहीं मिल सका क्योंकि उन्होंने कार चलाते समय सीटबेल्ट नहीं पहनी हुई थी।
सीटबेल्ट न लगाने का खौफनाक अंजाम
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और पुलिस जांच के मुताबिक, जब कोई कार तेज रफ्तार में टकराती है, तो बिना सीटबेल्ट के बैठा व्यक्ति जड़त्व (Inertia) के नियम के कारण बेहद तेज गति से आगे की तरफ फेंकता है। एयरबैग का काम इंसान और स्टेयरिंग या डैशबोर्ड के बीच एक कुशन बनाना होता है, लेकिन इसका सही फायदा तभी मिलता है जब सीटबेल्ट व्यक्ति को उसकी जगह पर रोके रखे। सीटबेल्ट न होने की वजह से अबान का शरीर एयरबैग के खुलने की गति और टक्कर के प्रभाव से सीधे स्टेयरिंग और कार के अंदरूनी हिस्से से टकरा गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 23 गंभीर चोटों का खुलासा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस हादसे की भयावहता को पूरी तरह साफ कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अबान के शरीर पर कुल 23 गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। शरीर के अंदरूनी हिस्सों और सिर में आई गंभीर चोटें ही उनकी मौत का मुख्य कारण बनीं। कार का ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने और सीटबेल्ट का सहारा न मिलने की वजह से शरीर को संभलने का एक मौका भी नहीं मिला। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सिर्फ एयरबैग के भरोसे रहना जानलेवा साबित हो सकता है।

सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके की पुलिस अफसर से तीखी बहस, वीडियो वायरल
सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके का एक सीनियर पुलिस अधिकारी के साथ तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दीपके का आरोप है कि पुलिस उनके घर आने वाले मेहमानों को रोक रही थी। भड़के दीपके ने अफसर से साफ कहा, "मैं किससे मिलूंगा, यह तय करने वाले आप कौन होते हैं?"
खबर का निचोड़
सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके का एक सीनियर पुलिस अधिकारी के साथ तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दीपके का आरोप है कि पुलिस उनके घर आने वाले मेहमानों को रोक रही थी। भड़के दीपके ने अफसर से साफ कहा, "मैं किससे मिलूंगा, यह तय करने वाले आप कौन होते हैं?"
घर के बाहर हंगामा
नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के आवास के बाहर उस वक्त माहौल गरमा गया जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ उनकी तीखी झड़प हो गई। इस पूरी घटना का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है। वीडियो में अभिजीत दीपके बेहद गुस्से में नजर आ रहे हैं और पुलिस अधिकारी के रवैये पर कड़ा एतराज जता रहे हैं।
'आप तय करने वाले कौन होते हैं?'
वायरल क्लिप में देखा जा सकता है कि दीपके पुलिस अफसर पर चिल्लाते हुए उनसे सवाल कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारी की कार्यशैली पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, "मैं अपने घर में किससे मिलूंगा और किससे नहीं, यह तय करने का अधिकार आपको किसने दिया? आप यह तय करने वाले कौन होते हैं?" दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस अफसर उनके घर आने वाले लोगों और मेहमानों के साथ बदतमीजी कर रहे थे और उन्हें जबरन अंदर दाखिल होने से रोक रहे थे।
निजता और अधिकारों पर उठाया सवाल
अभिजीत दीपके ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने व्यक्तिगत अधिकारों और निजता का हनन बताया है। उनका कहना है कि किसी भी नागरिक को अपने घर पर मेहमानों से मिलने का लोकतांत्रिक अधिकार है। पुलिस द्वारा घर के दरवाजे पर पहरा देकर आने-जाने वालों को रोकना और उनके साथ दुर्व्यवहार करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और तानाशाही रवैया है। दीपके के इस आक्रामक रुख के सामने पुलिस अधिकारी बैकफुट पर नजर आए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। बड़ी संख्या में लोग अभिजीत दीपके के समर्थन में उतर आए हैं और पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। यूज़र्स का मानना है कि पुलिस को किसी नागरिक के निजी जीवन और उसके मेहमानों पर इस तरह की पाबंदी लगाने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। वहीं, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

जनरेशन गटर से 'हमारी ताकत' तक: कंगना रनौत का यू-टर्न *
बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने चर्चित बयान 'जनरेशन गटर' पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है। अब उन्होंने जेन ज़ी (Gen Z) की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत और सरकार का अहम हिस्सा बताया है। कंगना के इस रुख से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।
खबर का निचोड़
बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने चर्चित बयान 'जनरेशन गटर' पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है। अब उन्होंने जेन ज़ी (Gen Z) की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत और सरकार का अहम हिस्सा बताया है। कंगना के इस रुख से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।
बयानों की राजनीति और कंगना का नया रुख
बॉलीवुड में अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर और अब राजनीतिक पारी खेल रहीं कंगना रनौत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में युवा पीढ़ी को लेकर 'जनरेशन गटर' जैसी तीखी टिप्पणी करने के बाद उठे विवाद के बीच अब उनके सुर पूरी तरह बदल चुके हैं। अपने पिछले बयान से कदम पीछे खींचते हुए कंगना ने देश के युवाओं, विशेषकर 'जेन ज़ी' की खुलकर वकालत की है और उन्हें भारत का भविष्य करार दिया है।
जेन ज़ी को बताया देश की सबसे बड़ी ताकत
कंगना रनौत ने अपने ताजा बयान में युवा पीढ़ी की ऊर्जा और देश के विकास में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा न सिर्फ जागरूक है बल्कि देश की प्रगति में सीधा योगदान दे रहा है। कंगना के अनुसार, जेन ज़ी आज की सरकार का एक अभिन्न हिस्सा है। जो युवा झारखंड में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं या जो देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मेडल जीतकर ला रहे हैं, वे सभी इसी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जेन ज़ी हमारी सबसे बड़ी ताकत है और पूरे देश को अपनी इस युवा पीढ़ी पर गर्व है।
विवाद से तारीफ तक का सफर
कंगना का यह बयान उनके पिछले रुख के ठीक विपरीत माना जा रहा है। इससे पहले जब उन्होंने युवाओं के एक वर्ग के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था, तब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों में उनकी व्यापक आलोचना हुई थी। विपक्ष ने भी उनके उस बयान को देश के युवाओं का अपमान बताया था। हालांकि, अब कंगना द्वारा की गई इस तारीफ को एक रणनीतिक बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सांसद बनने के बाद कंगना अब अपने सार्वजनिक बयानों को लेकर अधिक सतर्क हो रही हैं और जनभावनाओं को संतुलित करने का प्रयास कर रही हैं।
युवाओं को साधने की राजनीतिक कोशिश
भारत एक ऐसा देश है जहां की अधिकांश आबादी युवा है। किसी भी राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि के लिए युवाओं की आकांक्षाओं को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। कंगना का यह बदला हुआ अंदाज इसी बात का संकेत है कि वह अपनी राजनीतिक छवि को एक परिपक्व और समावेशी नेता के रूप में ढालना चाहती हैं। जनरेशन गटर से लेकर 'देश की सबसे बड़ी ताकत' तक का यह सफर दिखाता है कि राजनीति में बयानों के मायने कितनी तेजी से बदलते हैं।
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