
लाल सागर तट का सामरिक और ऐतिहासिक केंद्र: मोचा बंदरगाह
मोचा बंदरगाह भू-राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा इस बंदरगाह पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद, लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्षेत्र में वैश्विक व्यापार तथा सुरक्षा के लिए एक नया भू-रणनीतिक संकट उत्पन्न हो गया है।
मोचा बंदरगाह भू-राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा इस बंदरगाह पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद, लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्षेत्र में वैश्विक व्यापार तथा सुरक्षा के लिए एक नया भू-रणनीतिक संकट उत्पन्न हो गया है।
भौगोलिक और सामरिक अवस्थिति
मोखा या मोचा दक्षिण-पश्चिमी यमन में लाल सागर के तट पर स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। यह बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के उत्तरी दृष्टिकोण का प्रमुख बंदरगाह है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह जलडमरूमध्य भूमध्य सागर और लाल सागर के रास्ते हिंद महासागर को जोड़ने वाला एक अत्यंत संकरा और संवेदनशील समुद्री मार्ग है, जिसके माध्यम से एशिया और यूरोप के बीच का अधिकांश तेल और वस्तु परिवहन होता है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक संघर्षों का केंद्र बिंदु बनाती है।
ऐतिहासिक महत्व और कॉफी व्यापार का उद्गम
ऐतिहासिक रूप से, यह नगर विश्वभर में अरेबिया के प्रमुख कॉफी-निर्यात केंद्र के रूप में प्रसिद्ध रहा है और यहीं से 'मोचा' कॉफी शब्द की उत्पत्ति हुई थी। परंपरा के अनुसार, चौदहवीं शताब्दी में सूफी संत शेख अली बिन उमर अल-शाधिली ने इथियोपिया से कॉफी पीने की परंपरा को यहाँ प्रचलित किया था। सत्रहवीं शताब्दी तक यह एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन चुका था, जहाँ ब्रिटिश, डच, फ्रांसीसी और डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनियों के व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थापित थे। भारतीय और मिस्र के व्यापारी यहाँ आकर धातु उत्पादों के बदले यमन की कॉफी और लोबान का व्यापार करते थे।
पतन के कारण और आधुनिक स्थिति
इस बंदरगाह के पतन के पीछे मुख्य रूप से औपनिवेशिक शक्तियाँ और ओटोमन साम्राज्य के बीच संघर्ष तथा यमन के स्थानीय इमामों के आपसी विवाद रहे हैं। डचों द्वारा जावा द्वीप और दक्षिण अमेरिका में कॉफी बागानों के विकास ने वैश्विक बाजार में यमन के एकाधिकार को समाप्त कर दिया। बीसवीं शताब्दी के मध्य में, वर्ष 1955 में यहाँ एक आधुनिक बंदरगाह की स्थापना की गई, जो अदन और होदेइदाह जैसे बड़े वाणिज्यिक बंदरगाहों के बीच एक लघु सामरिक, रसद और सैन्य केंद्र के रूप में कार्य करता आ रहा है।

पिता ने फिल्मों में काम दिलाने के लिए नहीं फैलाए हाथ: सारा अली खान
अभिनेत्री सारा अली खान ने एक इंटरव्यू में कहा है कि उनके पिता सैफ अली खान ने कभी किसी से उन्हें फिल्मों में काम दिलाने की गुजारिश नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने प्रिविलेज की सफाई देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे सिंगल मदर के साथ रही हैं और उनके पास ऐसा कोई पिता नहीं था जो ऑफिस के चक्कर लगाता हो。
प्रिविलेज पर बेबाक राय
नेपोटिज्म और प्रिविलेज की बहस पर बात करते हुए सारा अली खान ने यह साफ कर दिया कि उन्हें अपने प्रिविलेज की सफाई देने की कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती。 उनका मानना है कि हर किसी का सफर अलग होता है और उनकी परवरिश का तरीका काफी अलग रहा है。
सिंगल मदर के साथ बीता बचपन
अपने बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताते हुए सारा ने साझा किया कि वह मुख्य रूप से अपनी सिंगल मदर के साथ रही हैं。 उनके पास ऐसा कोई पिता नहीं था जो फिल्म निर्माताओं के ऑफिस के चक्कर लगाता हो या उनके लिए काम मांगता हो。 उन्होंने अपने दम पर और अपनी मेहनत के बल पर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है。

मैदान पर आक्रामक, मैदान के बाहर मां जैसा दुलार
न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार पारी खेलने वाले पंद्रह वर्षीय भारतीय ओपनर वैभव सूर्यवंशी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मैच के बाद दर्शक दीर्घा में मौजूद एक महिला फैन ने उन्हें गर्म पानी पीने की सलाह दी, जिस पर युवा बल्लेबाज मुस्कुरा उठे। यह वाकया इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
मैदान के बाहर का अनमोल पल
मैच खत्म होने के बाद जब वैभव सूर्यवंशी दर्शक दीर्घा के पास पहुंचे और वहां मौजूद फैंस को ऑटोग्राफ देने लगे, तब एक ऐसा वाकया हुआ जिसने सबका दिल जीत लिया। भीड़ में मौजूद एक महिला ने स्नेह भरे लहजे में उन्हें आवाज दी और कहा कि वे बलिया से हैं। इसके बाद महिला ने प्यार से सलाह दी कि बेटा, गर्म पानी पीना, ठंडा मत पीना। इतनी बड़ी पारी खेलने के बाद भी एक आम भारतीय मां की तरह मिलने वाली यह सलाह सुनकर वैभव अपनी हंसी नहीं रोक पाए और मुस्कुरा उठे।
सोशल मीडिया पर छाया वीडियो
यह पूरा पल कैमरे में कैद हो गया और अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। खेल प्रेमियों को वैभव की यह सादगी और एक फैन का यह अपनापन बेहद पसंद आ रहा है। लोग इस वीडियो पर जमकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और युवा खिलाड़ी की जमकर सराहना कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि यह लोगों को भावनाओं के एक सूत्र में पिरोने का काम करता है, जहां मैदान की जंग के बाहर भी अपनों सा रिश्ता हमेशा जिंदा रहता है।

अभिषेक शर्मा ने तोड़ा क्रिस गेल का छक्कों वाला रिकॉर्ड
अभिषेक शर्मा ने वेलिंगटन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 35 गेंदों पर शतक जड़ते हुए 11 छक्के लगाए हैं। इसके साथ ही वे टी20 इंटरनेशनल में तीन बार 10 या उससे अधिक छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं और उन्होंने क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
क्रिस गेल का रिकॉर्ड पीछे छूटा
अभिषेक शर्मा ने इस मुकाबले में महज 35 गेंदों का सामना करते हुए शानदार शतक जड़ दिया। इस शतकीय पारी के दौरान उन्होंने कुल 11 गगनचुंबी छक्के लगाए। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ ही वे टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में तीन बार 10 या उससे अधिक छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले क्रिकेटर बन गए हैं। उन्होंने इस मामले में विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने अपने करियर में दो बार यह कारनामा किया था।
नया विश्व कीर्तिमान स्थापित
अपनी इस शानदार फॉर्म को जारी रखते हुए अभिषेक शर्मा ने एक और बड़ा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है। उन्होंने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 37 या उससे कम गेंदों में तीन बार शतक जड़ने का अनूठा वर्ल्ड रिकॉर्ड बना लिया है, जो उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी शैली को पूरी दुनिया के सामने साबित करता है।

ईशा अंबानी ने शेयर किया पिता मुकेश अंबानी का पुराना किस्सा
जियो आईपीओ की बंपर लिस्टिंग के बाद आयोजित समारोह में ईशा अंबानी ने अपने पिता और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी से जुड़ा एक यादगार किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे 1977 में 10 करोड़ के वैल्युएशन पर 2.82 करोड़ जुटाए गए थे और आज का सफर कितना अद्भुत है।
1977 के दिनों की यादें
ईशा अंबानी ने अपने संबोधन में बताया कि कुछ दिन पहले उनके पिता मुकेश अंबानी साल 1977 के शुरुआती दिनों को याद कर रहे थे। उस दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि तब महज 10 करोड़ रुपये के वैल्युएशन पर 2.82 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, जो उस समय के हिसाब से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
सफर पर हैरानी और गर्व
मुकेश अंबानी के पुराने दिनों के संघर्ष और आज की सफलता को याद करते हुए ईशा ने बताया कि उनके पिता ने कहा था कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इतनी दूर आ पाएंगे। यह किस्सा रिलायंस समूह की लंबी और ऐतिहासिक विकास यात्रा को बयां करता है।

टाटा को 'आपराधिक तरीके से बर्बाद' किया जा रहा: राहुल गांधी
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि टाटा समूह को 'आपराधिक तरीके से बर्बाद' किया जा रहा है और देश का कोई भी प्रमुख कारोबारी इसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर रहा है。 उन्होंने कारोबारियों से सवाल किया कि वे तब तक चुप रहेंगे जब तक उन पर कब्जा नहीं कर लिया जाता。
कारोबारी जगत की चुप्पी पर सवाल
राहुल गांधी ने देश के प्रमुख कारोबारियों की खामोशी पर भी बड़ा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इस स्थिति के बावजूद देश का कोई भी बड़ा व्यवसायी इसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। उन्होंने कारोबारियों को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में पूछा कि वे आखिर कब तक चुप रहेंगे।
चेतावनी और तीखा कटाक्ष
अपने बयानों में राहुल गांधी ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या कारोबारी तब तक चुप बैठे रहेंगे जब तक वे लोग आकर आप पर पूरी तरह कब्जा नहीं कर लेते? उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ व्यावसायिक जगत में भी हलचल पैदा कर दी है।
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