
'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले सीजीपी फाउंडर अभिजीत दीपके हिरासत में
दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से ठीक पहले सीजीपी (CGP) के फाउंडर अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस कार्रवाई का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दीपके पुलिस के सामने विरोध जताते हुए अपना सवाल पूछ रहे हैं। हिरासत में लेने से पहले पुलिस ने उन्हें नोटिस दिया था।
पुलिस और दीपके के बीच तीखी बहस
सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि मीडियाकर्मियों के कैमरों के सामने पुलिस टीम अभिजीत दीपके को ले जाने की कोशिश कर रही है। इस दौरान दीपके लगातार पुलिसकर्मियों से सवाल पूछते नजर आ रहे हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे अकेले हैं, तो उन्होंने किस नियम का उल्लंघन किया है। हालांकि, पुलिसकर्मियों ने उनकी बात का जवाब देते हुए उन्हें खींचकर गाड़ी की ओर ले जाना शुरू कर दिया।
एहतियातन हिरासत में लेने का दावा
वीडियो में एक पुलिस अधिकारी स्पष्ट रूप से अभिजीत दीपके से यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि उन्हें "एहतियातन हिरासत में लिया जा रहा है"। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई से ठीक पहले दिल्ली पुलिस ने उन्हें एक आधिकारिक नोटिस भी थमाया था। कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और किसी भी अनहोनी से बचने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा यह कदम उठाया गया है।
संगठन के अन्य नेताओं पर भी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब इस कार्यक्रम से जुड़े लोगों पर गाज गिरी है। इससे पहले भी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सीजीपी से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को गिरफ्तार किया था। मार्च को लेकर पुलिस पूरी तरह से सतर्क रवैया अपना रही है और जगह-जगह सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
राजधानी में गर्माया सियासी माहौल
मार्च से पहले हुई इस धरपकड़ के बाद से माहौल में तनाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था का हवाला देकर कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, वहीं संगठन से जुड़े लोग और समर्थक पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। घटना का वीडियो तेजी से साझा किया जा रहा है और इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

"न झुकूंगा, न रुकूंगा": अनुष्का यादव के बयान के बाद तेज प्रताप का पलटवार
अनुष्का यादव द्वारा जेजेडी अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की बातों पर ध्यान न देने का बयान दिए जाने के बाद तेज प्रताप का तीखा हमला सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "न झुकूंगा... न रुकूंगा"। तेज प्रताप ने दावा किया कि उनका लक्ष्य तय है और वे जीत हासिल करके ही रहेंगे।
अनुष्का यादव का बयान
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एक डांडिया नाइट कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान अनुष्का यादव ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान जब उनसे तेज प्रताप को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उनके पास तेज प्रताप यादव की बातों पर ध्यान देने या नोटिस करने का बिल्कुल भी समय नहीं है। अनुष्का का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
तेज प्रताप का जोरदार पलटवार
अनुष्का यादव की इस टिप्पणी के तुरंत बाद तेज प्रताप यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी। अपनी परिचित शैली में तीखा रुख अपनाते हुए उन्होंने साफ कहा, "न झुकूंगा... न रुकूंगा"। उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनका लक्ष्य बिल्कुल तय है और वे रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटेंगे और जीत हासिल करके ही रहेंगे।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
दोनों नेताओं के बीच आए इन बयानों के बाद से राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। एक तरफ जहां अनुष्का यादव के बयान को तेज प्रताप को नजरअंदाज करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ तेज प्रताप के आक्रामक रुख से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह जुबानी लड़ाई और जोर पकड़ सकती है।

'तिरंगा मार्च' से ठीक पहले सीजीपी फाउंडर अभिजीत दीपके फिर हिरासत में
शुक्रवार को 'तिरंगा मार्च' में शामिल होने के लिए घर से निकलते ही सीजीपी के फाउंडर अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है。 एक सप्ताह के भीतर उन्हें दूसरी बार हिरासत में लिया गया है。 इससे पहले 10 अक्टूबर को उन्हें प्लेन से डिटेन किया गया था。 पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में लिए जाने की बात कही है。
एक सप्ताह में दूसरी बार कार्रवाई
अभिजीत दीपके के खिलाफ पिछले कुछ दिनों में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा मौका है जब उन्हें इस तरह हिरासत में लिया गया है। इससे पहले ठीक एक हफ्ता पहले यानी 10 अक्टूबर को भी उन्हें प्लेन से डिटेन किए जाने का मामला सामने आया था।
पुलिस का एहतियातन कदम
सामने आई जानकारी के मुताबिक, जब पुलिस ने अभिजीत दीपके को रोका, तो उन्होंने इसका कारण जानना चाहा। इस पर पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी विशेष पूछताछ के लिए नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए "एहतियातन हिरासत में लिया जा रहा है"। मार्च के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने यह सख्त कदम उठाया है।
सरकार और व्यवस्था पर सवाल
इस पूरी घटना के दौरान अभिजीत दीपके का एक बयान भी सामने आया है। उन्होंने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार द्वारा इस तरह शहर बंद किए जाने से आम लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। बार-बार हो रही इस प्रकार की नजरबंदी और हिरासत को लेकर संगठन और समर्थकों में गहरा रोष देखा जा रहा है।

प्रियांक खरगे के बयान पर घमासान: बीजेपी ने साधा कांग्रेस पर निशाना
कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री प्रियांक खरगे के एक बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। खरगे ने युवाओं की सभा में कहा कि कांग्रेस और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) एक ही हैं। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस और सीजीपी (CGP) के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया है।
प्रियांक खरगे का विवादित बयान
युवाओं के एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान प्रियांक खरगे ने बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) एक ही हैं। उनके इस बयान के सामने आते ही सियासी हलकों में खलबली मच गई है। इस टिप्पणी को लेकर विपक्षी दलों ने तुरंत पलटवार करना शुरू कर दिया और बयान की कड़ी आलोचना की।
बीजेपी ने लगाया मिलीभगत का आरोप
प्रियांक खरगे के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी का कहना है कि खरगे की इस टिप्पणी से स्पष्ट संकेत मिलता है कि कांग्रेस और सीजीपी (CGP) आपस में मिले हुए हैं। बीजेपी ने आरोप लगाया कि दोनों दलों के बीच भीतर ही भीतर मिलीभगत चल रही है और यह बयान उसी गठजोड़ का नतीजा है।
सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन के बीच दिया बयान
प्रियांक खरगे का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि सीजीपी और कांग्रेस दोनों ही दल सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की लगातार मांग कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन के बीच आए बयान ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा है।
गर्माया राजनीतिक माहौल
इस बयानबाज़ी के बाद से कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गई हैं। एक तरफ जहां विपक्षी दल इसे दोनों पार्टियों के गुप्त समझौते का प्रमाण बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इस बयान पर जुबानी जंग और तीखी होने के आसार हैं।

गरबा इवेंट में अंडरकवर महिला इंस्पेक्टर का खुलासा: चेहरा न छिपाने की बताई वजह
गुजरात में गरबा कार्यक्रम के दौरान अंडरकवर ड्यूटी पर तैनात महिला इंस्पेक्टर निधि कलसरिया ने वायरल वीडियो पर उठे सवालों का जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि नवरात्रि से पहले टीम के चेहरे मीडिया को दिखाए गए थे। इसका मकसद लोगों और महिलाओं को सुरक्षा का अहसास कराना था।
सवालों का मिला जवाब
वायरल वीडियो और लोगों के मन में उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए इंस्पेक्टर निधि कलसरिया ने अपनी बात रखी है। उन्होंने चेहरा न छिपाने और सार्वजनिक रूप से पहचान सामने आने की असली वजह का खुलासा किया है। निधि ने बताया कि यह कोई अनजाने में हुई चूक नहीं थी, बल्कि योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
पुलिस की रणनीति और मकसद
निधि कलसरिया के अनुसार, नवरात्रि का त्योहार शुरू होने से ठीक पहले ही अंडरकवर ड्यूटी में शामिल पुलिस टीम के सदस्यों के चेहरे मीडिया के सामने ला दिए गए थे। पुलिस विभाग का यह कदम एक सोची-समझी रणनीति के तहत उठाया गया था। अंडरकवर पुलिसकर्मियों की तस्वीरें और वीडियो शेयर करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना था कि पुलिस हर जगह मौजूद है और हर गतिविधि पर नजर रख रही है।
महिलाओं में भरोसा जगाने की कोशिश
इवेंट्स में तैनात महिला अधिकारियों का मकसद केवल असामाजिक तत्वों में डर पैदा करना नहीं था, बल्कि वहां आने वाली महिलाओं को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कराना भी था। निधि ने जोर देकर कहा कि पुलिस प्रशासन का मुख्य ध्येय महिलाओं को यह भरोसा दिलाना है कि वे उत्सव के दौरान पूरी तरह सुरक्षित हैं और पुलिस हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
पारंपरिक गुजराती परिधान में पुलिस अफसर का यह अंदाज लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। जहां शुरुआत में लोग अंडरकवर पुलिसिंग के तरीकों पर सवाल उठा रहे थे, वहीं अधिकारियों द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद पुलिस की इस पहल और तत्परता की सराहना भी की जा रही है।

चुप रहने से इनकार करने पर कहा जाता है अराजकतावादी
सीजेपी के अभिजीत दीपके ने कहा है कि सत्ता से जवाबदेही मांगना लोकतंत्र है, अराजकता नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ इसलिए उन्हें अराजकतावादी के रूप में पेश किया जाता है क्योंकि वे चुप रहने से इनकार करते हैं। दीपके ने स्पष्ट किया कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना अराजकता नहीं है।
चुप रहने से इनकार करने पर लगते हैं आरोप
अभिजीत दीपके ने बयान देते हुए कहा कि उन्हें और उनके साथियों को अक्सर समाज में अराजकतावादी के रूप में पेश करने की साजिश रची जाती है। उन्होंने इसके पीछे की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि ऐसा सिर्फ इसलिए किया जाता है क्योंकि वे हर बात पर चुप रहने से साफ इनकार कर देते हैं। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और गलत के सामने घुटने न टेकना उनका मूल स्वभाव है।
सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों से सवाल पूछना लोकतंत्र
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दीपके ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों से सवाल पूछना पूरी तरह से वैध है और यह बिल्कुल भी अराजकता के दायरे में नहीं आता। लोकतंत्र में जनता को यह अधिकार है कि वह सत्ताधीशों से उनके कामों का हिसाब मांगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह संदेश दिया कि न्याय और अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी तरह के आरोपों का सामना क्यों न करना पड़े।
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