
क्रिकेट इतिहास के दो ध्रुव: जब एक ने रचा इतिहास, तो दूसरे का सफर थमा
14 अगस्त का दिन क्रिकेट के इतिहास में बेहद खास है। साल 1990 में इसी दिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक जड़ा था, जिसने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी। वहीं, महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने 1948 में इसी तारीख को अपने ऐतिहासिक टेस्ट करियर की आखिरी पारी खेली थी।
> संक्षेप:
> 14 अगस्त का दिन क्रिकेट के इतिहास में बेहद खास है। साल 1990 में इसी दिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक जड़ा था, जिसने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी। वहीं, महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने 1948 में इसी तारीख को अपने ऐतिहासिक टेस्ट करियर की आखिरी पारी खेली थी।
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क्रिकेट का स्वर्णिम 14 अगस्त
क्रिकेट की दुनिया में कई तारीखें रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज हैं, लेकिन 14 अगस्त का दिन खेल प्रेमियों के लिए एक अलग ही भावुक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह तारीख एक ओर जहां भारतीय क्रिकेट के सबसे चमकीले सितारे के उदय की गवाही देती है, वहीं दूसरी ओर खेल के सबसे महान लीजेंड के विदाई की कहानी भी कहती है। इतिहास के पन्नों में दर्ज इन दो पलों ने खेल जगत की तकदीर और तस्वीर दोनों पर अमिट छाप छोड़ी है।
सचिन का वह ऐतिहासिक पहला शतक
साल 1990 का इंग्लैंड दौरा भारतीय क्रिकेट के लिए संघर्ष भरा था, लेकिन मैनचेस्टर टेस्ट ने इतिहास रच दिया। भारतीय टीम मुश्किल परिस्थिति में थी और मैच बचाने की चुनौती सामने थी। ऐसे में महज 17 साल और 112 दिन की उम्र में क्रीज पर उतरे सचिन तेंदुलकर ने अपने बल्ले से वह कारनामा कर दिखाया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सचिन ने दबाव से भरी परिस्थितियों में नाबाद 119 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली। इस जादुई पारी की बदौलत भारत ने हारी हुई बाजी पलटते हुए टेस्ट मैच को ड्रॉ करा लिया। यह सिर्फ एक शतक नहीं था, बल्कि उस युग की शुरुआत थी जिसने आने वाले दो दशकों तक विश्व क्रिकेट पर राज करना था।
डॉन ब्रैडमैन की आखिरी पारी का अंत
ठीक इसके उलट, ठीक इसी तारीख यानी 14 अगस्त 1948 को ओवल के मैदान पर खेल के सबसे महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन अपने करियर की आखिरी पारी खेलने उतरे। क्रिकेट इतिहास के निर्विवाद सम्राट ब्रैडमैन का टेस्ट औसत 99.94 का था, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है। उनके इस आखिरी मैच को लेकर क्रिकेट जगत में जबरदस्त उत्साह था क्योंकि उनके करियर का औसत 100 तक पहुंचने के लिए केवल चार रनों की दरकार थी। लेकिन क्रिकेट की अनिश्चितता ने यहां एक क्रूर मजाक किया। इंग्लैंड के एरिक हॉलिड्स की गेंद पर ब्रैडमैन बिना खाता खोले यानी शून्य पर बोल्ड हो गए। उस एक डक ने उनके जादुई औसत को 99.94 पर हमेशा के लिए थाम दिया।
दो अलग छोर और अनमोल विरासत
क्रिकेट के पन्नों को पलटें तो 14 अगस्त का यह संयोग बेहद दिलचस्प नजर आता है। एक तरफ जहां एक युवा खिलाड़ी अपने करियर के शिखर की पहली सीढ़ी पर पैर रख रहा था, वहीं दूसरी तरफ खेल का सबसे बड़ा उस्ताद अपने सुनहरे सफर को अलविदा कह रहा था। सचिन के उस पहले शतक ने भारत को एक नया भविष्य दिया, जबकि ब्रैडमैन के शून्य ने दुनिया को यह अहसास कराया कि खेल में हर कहानी का एक अंतिम मुकाम होता है। ये दोनों घटनाएं मिलकर क्रिकेट के उस फलक को पूरा करती हैं जहां हर विदाई एक नई शुरुआत की नींव रखती है।

वंदे मातरम विवाद: बीजेपी का राहुल-सोनिया पर बड़ा आरोप, कांग्रेस की सफाई
स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने पूरा वंदे मातरम गाने से रोका। वहीं, कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज करते हुए इसे गलतफहमी करार दिया है।
स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने पूरा वंदे मातरम गाने से रोका। वहीं, कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज करते हुए इसे गलतफहमी करार दिया है।
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत पर सियासी घमासान
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि ध्वजारोहण के समय जब वंदे मातरम गाया जा रहा था, तब राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने उसे पूरा गाने से रोकने का इशारा किया। बीजेपी का कहना है कि यह राष्ट्रगीत का अनादर है और कांग्रेस नेतृत्व की मानसिकता को उजागर करता है।
बीजेपी का तीखा हमला
बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस हमेशा से राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रगीत के प्रति उदासीन रही है। पार्टी के अनुसार, वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि वंदे मातरम के दौरान बीच में ही रोकने का प्रयास किया गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और देश भावना के खिलाफ है।
कांग्रेस की ओर से आई सफाई
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बीजेपी के दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और भ्रामक बताया। जयराम रमेश के अनुसार, वीडियो में दिख रहा सोनिया गांधी का इशारा राष्ट्रगीत को रोकने के लिए नहीं था, बल्कि वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बैठने के लिए सही स्थान या कुर्सी का प्रबंध करने का आग्रह कर रही थीं।
वीडियो क्लिप पर बढ़ा विवाद
घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बीजेपी समर्थक इसे कांग्रेस की संकीर्ण सोच का सबूत बताकर प्रसारित कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी मामले को राजनीतिक रूप देने के लिए एक सामान्य से दृश्य को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। दोनों ही पार्टियां इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्कों के साथ डटी हुई हैं।

लाल किले के जश्न से फिर दूर रहे राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दूसरे साल लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। साल 2024 में राहुल गांधी को पांचवीं पंक्ति में बैठाए जाने पर भारी विवाद हुआ था, जिसके बाद से दोनों शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
खबर का निचोड़
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दूसरे साल लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। साल 2024 में राहुल गांधी को पांचवीं पंक्ति में बैठाए जाने पर भारी विवाद हुआ था, जिसके बाद से दोनों शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
लाल किले पर विपक्ष की गैरमौजूदगी और सियासी गरमाहट
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से जब तिरंगा फहराया जा रहा था, तब दर्शक दीर्घा में विपक्ष की दो सबसे प्रमुख आवाजों की अनुपस्थिति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार दूसरे साल इस राष्ट्रीय उत्सव से दूर रहे। स्वतंत्रता दिवस जैसे ऐतिहासिक और औपचारिक मौके पर देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं का शामिल न होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
2024 का 'सीटिंग प्रोटोकॉल' विवाद
इस पूरी दूरी की जड़ें साल 2024 के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ी मानी जा रही हैं। 2024 में जब राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद पहली बार लाल किले पहुंचे थे, तब उन्हें मुख्य मंच के सामने पांचवीं पंक्ति में सीट आवंटित की गई थी। आमतौर पर नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्रियों के समकक्ष अगली पंक्तियों में जगह दी जाती है। इस व्यवस्था पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया था और इसे लोकतंत्र व विपक्ष के पद का अपमान करार दिया था।
सरकार की सफाई और कांग्रेस का पलटवार
तत्कालीन विवाद पर रक्षा मंत्रालय और सरकारी अधिकारियों की तरफ से सफाई दी गई थी कि ओलंपिक पदक विजेताओं को अग्रिम पंक्तियों में सम्मान देने के लिए सीटिंग प्लान में बदलाव किया गया था। हालांकि, कांग्रेस ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया था। पार्टी नेताओं का कहना था कि राष्ट्रीय आयोजनों में प्रोटोकॉल का पालन करना सरकार की जिम्मेदारी होती है और विपक्ष के संवैधानिक पद की गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
लगातार दूसरी बार दूरी के मायने
2024 के इस बड़े विवाद के बाद, 2025 में भी दोनों नेताओं ने समारोह से दूरी बनाए रखी थी और अब 2026 में भी यह सिलसिला जारी रहा। इस बार भी लाल किले की प्राचीर के सामने विपक्षी खेमे की अग्रिम कुर्सियां खाली नजर आईं। रक्षा मंत्रालय द्वारा तय प्रोटोकॉल और विपक्षी नेताओं के आत्मसम्मान के बीच खींचतान ने यह साफ कर दिया है कि दो साल पहले शुरू हुआ यह विवाद अब एक बड़ी सियासी खाई का रूप ले चुका है।

लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: 75 मिनट में समेटा 80वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन
80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 75 मिनट का देश के नाम संबोधन दिया। यह पिछले 4 वर्षों में उनका सबसे छोटा भाषण रहा। पिछले वर्ष 103 मिनट के रिकॉर्ड भाषण के बाद, इस बार उन्होंने कम समय में अपनी बात रखते हुए देश के प्राथमिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
खबर का निचोड़
80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 75 मिनट का देश के नाम संबोधन दिया। यह पिछले 4 वर्षों में उनका सबसे छोटा भाषण रहा। पिछले वर्ष 103 मिनट के रिकॉर्ड भाषण के बाद, इस बार उन्होंने कम समय में अपनी बात रखते हुए देश के प्राथमिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
ऐतिहासिक संबोधन और समय का गणित
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया। इस वर्ष उनका भाषण 75 मिनट तक चला, जो पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन दर्ज किया गया है।
समय के इस बदलाव ने राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में ध्यान आकर्षित किया है। यह भाषण उनके पूरे कार्यकाल का चौथा सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस भाषण भी बन गया है।
भाषणों का इतिहास: 2017 से 2025 तक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की अवधि में हमेशा विविधता देखने को मिली है। उनके कार्यकाल का सबसे छोटा भाषण वर्ष 2017 में आया था, जब उन्होंने मात्र 56 मिनट में अपना संबोधन समाप्त किया था।
इसके ठीक विपरीत, पिछले वर्ष यानी 2025 में उन्होंने लाल किले से 103 मिनट का ऐतिहासिक और अपना सबसे लंबा भाषण दिया था। 2025 के लंबे और विस्तृत संबोधन के बाद इस साल 75 मिनट का भाषण एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जहां उन्होंने बात को अधिक सटीक और केंद्रित रखा।
संक्षिप्त संबोधन के मायने
लाल किले से अपने भाषणों में प्रधानमंत्री अक्सर अपनी सरकार की उपलब्धियों, भावी योजनाओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का खाका पेश करते हैं। इस बार 75 मिनट के दायरे में उन्होंने देश के मुख्य विकास लक्ष्यों, सुरक्षा और आम नागरिकों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से शामिल किया।
अवधि भले ही पिछले साल की तुलना में कम रही हो, लेकिन संबोधन का प्रभाव और संदेश की गंभीरता पूरी तरह से कायम रही। यह बदलाव दिखाता है कि रणनीतिक संदेश देने के लिए समय की लंबाई नहीं, बल्कि विषय-वस्तु की स्पष्टता मायने रखती है।

सोशल मीडिया पर भिड़े 'कॉकरोच', CJP का इंस्टा हैंडल डिलीट होने पर मचा बवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने CJP का ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक होने पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विरोधियों को 'डरपोक' बताते हुए X पर स्क्रीनशॉट शेयर किया। हालांकि, बाद में टेक टीम की मदद से CJP ने अपने अकाउंट को सफलतापूर्वक रिकवर कर लेने का दावा भी किया।
खबर का निचोड़
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने CJP का ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक होने पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विरोधियों को 'डरपोक' बताते हुए X पर स्क्रीनशॉट शेयर किया। हालांकि, बाद में टेक टीम की मदद से CJP ने अपने अकाउंट को सफलतापूर्वक रिकवर कर लेने का दावा भी किया।
CJP का इंस्टाग्राम हैंडल गायब, सोशल मीडिया पर छिड़ी जुबानी जंग
डिजिटल स्पेस में राजनीतिक और व्यंग्यात्मक कंटेंट को लेकर अक्सर खींचतान देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल के अचानक गायब हो जाने से गरमा गया है। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को निशाना बनाकर ब्लॉक कराया गया है।
अकाउंट हटने की खबर सामने आते ही अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) का रुख किया। उन्होंने ब्लॉक किए गए अकाउंट का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए विरोधियों पर सीधे तीर चलाए। दीपके ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी का ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल हटा दिया है और सवाल उठाया कि आखिर लोग इतने बड़े डरपोक क्यों हैं। उनकी यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और समर्थकों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं।
डर या टेक्निकल ग्लिच? स्क्रीनशॉट शेयर कर उठाए गंभीर सवाल
अभिजीत दीपके का सीधा आरोप था कि पार्टी के बढ़ते प्रभाव और तीखे कंटेंट से घबराकर यह कार्रवाई करवाई गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अक्सर मास रिपोर्टिंग या कम्युनिटी गाइडलाइन्स के उल्लंघन के नाम पर अकाउंट्स को सस्पेंड या डिलीट कर दिया जाता है। दीपके के तेवरों से साफ था कि वह इसे महज एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति मान रहे थे।
सोशल मीडिया पर इस दावों के बाद बहस छिड़ गई कि क्या वाकई किसी व्यंग्यात्मक या राजनीतिक पेज को इस तरह सेंसर किया जाना चाहिए। देखते ही देखते X पर CJP के समर्थकों ने इस कदम का विरोध करना शुरू कर दिया।
अकाउंट वापस मिलते ही राहत, CJP ने किया रिकवरी का दावा
अकाउंट डिलीट होने के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के कुछ समय बाद ही स्थिति बदल गई। कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से यह जानकारी दी गई कि उनके इंस्टाग्राम हैंडल को फिर से रिकवर कर लिया गया है। तकनीकी प्रक्रियाओं और अपील के बाद अकाउंट की सफल बहाली हो गई।
अकाउंट रिकवर होने के बाद CJP ने राहत की सांस ली, लेकिन इस पूरी घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर डिजिटल सेंसरशिप, मास रिपोर्टिंग और अकाउंट सिक्योरिटी के मुद्दों को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। दीपके और उनकी टीम का मानना है कि डिजिटल मंचों पर आवाज दबाने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं, लेकिन सही समय पर उठाए गए कदमों से अकाउंट वापस हासिल कर लिया गया।

अमित शाह पर टिप्पणी: राहुल गांधी को नोटिस, 28 अगस्त तक जवाब तय
लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को नोटिस जारी कर गृह मंत्री अमित शाह पर की गई असंसदीय टिप्पणी पर 28 अगस्त तक जवाब मांगा है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर और संजय जायसवाल की शिकायत पर यह कदम उठाया गया है। इससे संसद और सियासत में नया सियासी घमासान तेज हो गया है।
लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को नोटिस जारी कर गृह मंत्री अमित शाह पर की गई असंसदीय टिप्पणी पर 28 अगस्त तक जवाब मांगा है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर और संजय जायसवाल की शिकायत पर यह कदम उठाया गया है। इससे संसद और सियासत में नया सियासी घमासान तेज हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में बयानों का दौर कभी थमता नहीं, लेकिन जब मामला संसद की विशेषाधिकार समिति तक पहुंच जाए, तो उसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपनी टिप्पणियों को लेकर कानूनी और प्रक्रियात्मक विवाद के केंद्र में हैं। गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए एक बयान को लेकर विशेषाधिकार समिति ने उन्हें नोटिस भेजकर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
बीजेपी सांसदों की शिकायत पर बड़ा कदम
यह पूरी कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी के दो वरिष्ठ सांसदों, अनुराग ठाकुर और संजय जायसवाल की लिखित शिकायतों के बाद शुरू हुई है। बीजेपी सांसदों का आरोप है कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ असंसदीय और भ्रामक भाषा का इस्तेमाल किया, जो संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन है। शिकायत में तर्क दिया गया कि सदन के पटल पर या सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के बयानों से संवैधानिक पदों की गरिमा प्रभावित होती है।
28 अगस्त तक देना होगा लिखित जवाब
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी इस नोटिस में राहुल गांधी को 28 अगस्त की तारीख तक अपनी सफाई पेश करने को कहा गया है। विशेषाधिकार समिति अब राहुल गांधी के जवाब का इंतजार करेगी। यदि समिति उनके जवाब से संतुष्ट नहीं होती है, तो वह उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन भेज सकती है या फिर अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सदन के सामने प्रस्तुत कर सकती है।
बयानों पर गरमाई देश की सियासत
संसदीय विशेषाधिकार का यह मामला सिर्फ कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने देश का राजनीतिक पारा भी चढ़ा दिया है। सत्ता पक्ष जहां इसे संसदीय गरिमा और अनुशासन का सवाल बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देने में जुटा है। विपक्षी खेमे का मानना है कि सरकार इस तरह के नोटिस के जरिए अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर सवाल उठाने वाले नेताओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
क्या होती है विशेषाधिकार समिति की भूमिका
संसद में विशेषाधिकार समिति का काम सांसदों के अधिकारों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी सदस्य संसद की मर्यादा या किसी अन्य सदस्य के विशेषाधिकारों का हनन न करे। यदि किसी बयान या आचरण से संसद की अवमानना पाई जाती है, तो समिति चेतावनी देने से लेकर निलंबन जैसी कड़ी सिफारिशें भी कर सकती है। अब सभी की निगाहें 28 अगस्त पर टिकी हैं कि राहुल गांधी इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं।
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