
कॉर्पोरेट मित्र योजना: कॉर्पोरेट गवर्नेंस और कौशल विकास हेतु पहल
कॉर्पोरेट मित्र योजना भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA) की एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य युवाओं, छात्रों और MSMEs को कॉर्पोरेट गवर्नेंस, अनुपालन मानकों और उद्यमिता कौशल से सुसज्जित करना है। यह योजना उद्योग और अकादमिक जगत के बीच की दूरी को पाटकर एक कुशल और जागरूक कार्यबल तैयार करने पर केंद्रित है।
सारांश
कॉर्पोरेट मित्र योजना भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA) की एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य युवाओं, छात्रों और MSMEs को कॉर्पोरेट गवर्नेंस, अनुपालन मानकों और उद्यमिता कौशल से सुसज्जित करना है। यह योजना उद्योग और अकादमिक जगत के बीच की दूरी को पाटकर एक कुशल और जागरूक कार्यबल तैयार करने पर केंद्रित है।
योजना का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र
कॉर्पोरेट मित्र योजना का प्राथमिक लक्ष्य भारत के सुदूर और उभरते क्षेत्रों में कॉर्पोरेट साक्षरता का प्रसार करना है। यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती है जहाँ कॉर्पोरेट जगत के मानक और विनियामक ढांचे की जानकारी सीमित है। यह योजना प्रतिभागियों को कंपनियों अधिनियम, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), और व्यावसायिक नैतिकता के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराती है।
प्रमुख घटक और रणनीतिक महत्व
यह कार्यक्रम विभिन्न कार्यशालाओं, वेबिनार और प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से संचालित होता है। इसके मुख्य घटकों में कौशल संवर्धन, नियामक अनुपालन की समझ और व्यावसायिक जोखिम प्रबंधन शामिल हैं। MSMEs के लिए, यह योजना उन्हें सरकारी नियमों के अनुकूल बनने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए एक मार्गदर्शक तंत्र प्रदान करती है। छात्रों के लिए, यह कॉर्पोरेट जगत की कार्यप्रणाली को समझने और रोजगार क्षमता में सुधार लाने हेतु एक महत्वपूर्ण अवसर है।
IICA की भूमिका और प्रभाव
भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA), जो कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत एक थिंक-टैंक है, इस योजना के माध्यम से क्षमता निर्माण (Capacity Building) का कार्य कर रहा है। उत्तर-पूर्व भारत जैसे क्षेत्रों में इसका विस्तार स्थानीय उद्यमिता को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का एक प्रयास है। यह पहल न केवल अनुपालन संस्कृति को बढ़ावा देती है, बल्कि देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) के परिवेश को भी सुदृढ़ करती है।
प्रतियोगी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता
यूपीएससी और अन्य सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए, यह विषय सुशासन (Good Governance), समावेशी विकास, और कौशल भारत मिशन के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह योजना कॉर्पोरेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तीकरण सुनिश्चित करने की सरकारी नीति का प्रतिनिधित्व करती है। सांवैधानिक और वैधानिक निकायों के कार्यों के साथ-साथ, नीतिगत नवाचारों के अंतर्गत इस प्रकार की योजनाओं का अध्ययन आवश्यक है।

उत्तराखंड: पूर्व सीएम के पीए पर ईडी का शिकंजा, कैश और घड़ियां बरामद
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व पीए चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस छापेमारी में 32 लाख रुपये नकद, भारी मात्रा में सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद हुई हैं।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व पीए चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस छापेमारी में 32 लाख रुपये नकद, भारी मात्रा में सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद हुई हैं।
ईडी की बड़ी कार्रवाई और बरामदगी
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए ताबड़तोड़ छापे मारे हैं। यह कार्रवाई राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व निजी सचिव चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर की गई है। जांच एजेंसी को छापेमारी के दौरान मौके से करीब 32 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। इसके अलावा अकूत संपत्ति का खुलासा करते हुए भारी मात्रा में सोने के सिक्के और आभूषण भी हाथ लगे हैं।
सोने के सिक्के और लग्जरी घड़ियों का जखीरा
छापेमारी के दौरान ईडी की टीम को चंदन सिंह जीना के घर से सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि बेशकीमती सामान भी मिला है। अधिकारियों ने मौके से 13 गोल्ड कॉइन यानी सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन अपने कब्जे में ली हैं। शौक और रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां से रोलेक्स और राडो जैसे बड़े ब्रांड्स की कुल 12 लग्जरी घड़ियां भी बरामद हुई हैं। इन सभी की कीमत बाजार में काफी अधिक आंकी जा रही है।
परीक्षा घोटाले से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरी कार्रवाई उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा-2016 में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधलियों के मामले से जुड़ी हुई है। इसी मामले की गहराई से जांच करने के लिए ईडी ने यह कदम उठाया है। शुरुआती जांच और दस्तावेजों की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि जीना के परिवारवालों के बैंक खातों में 52.16 लाख रुपये की संदिग्ध रकम मिली है। जांच एजेंसियां अब इन खातों और संपत्तियों के स्रोतों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई हैं।

पुतिन ने की महिंद्रा की तारीफ, ब्रिक्स मंच पर बजा भारत का डंका
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की जमकर सराहना की है। पुतिन ने आईटी-आई सेक्टर में महिंद्रा के शानदार योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों की कंपनियां अब पश्चिमी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की जमकर सराहना की है। पुतिन ने आईटी-आई सेक्टर में महिंद्रा के शानदार योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों की कंपनियां अब पश्चिमी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं।
ब्रिक्स मंच पर महिंद्रा की बड़ी सफलता
ब्रिक्स सम्मेलन के वैश्विक मंच पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा भारतीय कॉरपोरेट जगत की दिग्गज कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की प्रशंसा करना एक ऐतिहासिक पल है। पुतिन ने विशेष रूप से आईटी-आई सेक्टर में महिंद्रा के उत्कृष्ट कार्यों और योगदान की सराहना की। इस मंच से उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि अब उभरती हुई भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमाने लगी हैं।
पश्चिमी कंपनियों को कड़ी टक्कर देते भारतीय ब्रांड
रूसी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स देशों की कंपनियां अब तकनीकी और व्यावसायिक क्षमताओं के मामले में पश्चिमी कंपनियों से किसी भी तरह पीछे नहीं हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा का उदाहरण देते हुए उन्होंने यह साबित किया कि कैसे ये कंपनियां ग्लोबल मार्केट में उतनी ही सक्षम और मजबूत हो चुकी हैं जितनी पारंपरिक पश्चिमी दिग्गज कंपनियां हैं।
वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता हुआ दबदबा
महिंद्रा ने खुद को ब्रिक्स देशों के भीतर एक अत्यंत तेजी से बढ़ने वाली और प्रभावशाली कंपनी के रूप में सफलतापूर्वक स्थापित किया है। पुतिन की ओर से मिली इस सराहना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय व्यापारिक क्षमता का लोहा मनवा दिया है। यह बयान न केवल महिंद्रा समूह के लिए बल्कि पूरे भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जो दुनिया भर में भारत के मजबूत होते आर्थिक भविष्य की ओर इशारा करती है।

पीएम मोदी संग फोटो के लिए मची होड़, ब्रिक्स में दिखा क्रेज
दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए महिला प्रतिनिधियों में जबरदस्त होड़ मच गई। एक महिला डेलीगेट के अनुरोध पर शुरू हुआ यह सिलसिला देखते ही देखते भीड़ में बदल गया, जहां सभी खुद को बेहद लकी मान रहे थे।
दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए महिला प्रतिनिधियों में जबरदस्त होड़ मच गई। एक महिला डेलीगेट के अनुरोध पर शुरू हुआ यह सिलसिला देखते ही देखते भीड़ में बदल गया, जहां सभी खुद को बेहद लकी मान रहे थे।
ब्रिक्स फोरम में पीएम मोदी की लोकप्रियता
राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम का माहौल उस वक्त पूरी तरह बदल गया जब मुख्य संबोधन के बाद एक अनूठा नज़रा देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है, लेकिन इस बार इसका सीधा असर बिजनेस फोरम के भीतर मौजूद महिला डेलीगेट्स के उत्साह में साफ तौर पर देखा गया। उनके संबोधन के तुरंत बाद वहां मौजूद एक महिला प्रतिनिधि ने खुद आगे बढ़कर उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई।
फोटो खिंचवाने की मची होड़
जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्कुराते हुए उस महिला डेलीगेट के साथ फोटो खिंचवाई, वैसे ही वहां मौजूद अन्य महिला प्रतिनिधियों में भी उनके साथ तस्वीर लेने की होड़ सी मच गई। एक के बाद एक कई डेलिगेट्स प्रधानमंत्री के पास पहुंच गईं और हर कोई इस पल को अपने कैमरे में कैद करने के लिए उत्सुक दिखाई दिया। इस दौरान पूरा माहौल बेहद उत्साहपूर्ण और खुशनुमा हो गया, जहां वैश्विक स्तर के नेता के प्रति निवेशकों और प्रतिनिधियों का सहज लगाव स्पष्ट झलक रहा था।
हम बहुत लकी हैं - डेलीगेट्स
प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर मिलने के बाद महिला प्रतिनिधियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस खास पल का आनंद लेते हुए एक डेलीगेट ने बेहद उत्साहित होकर कहा कि वे सब खुद को बहुत लकी मानती हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यह यादगार लम्हा साझा करने का अवसर मिला। यह वाकया एक बार फिर साबित कर गया कि कूटनीतिक और व्यावसायिक बैठकों से इतर वैश्विक मंचों पर पीएम मोदी का व्यक्तिगत करिश्मा लोगों के दिलों पर किस कदर असर छोड़ता है।

फोल्डेबल आईफोन से पहले ही कैसे जीत गई सैमसंग?
एप्पल के पहले फोल्डेबल आईफोन के बाजार में आने से पहले ही सैमसंग ने एक बड़ी व्यावसायिक बाजी मार ली है। आईफोन के हर फोल्डेबल डिस्प्ले पैनल के लिए एप्पल को सैमसंग को भारी रकम चुकानी होगी, जिससे दक्षिण कोरियाई दिग्गज को तगड़ा मुनाफा होना तय है।
एप्पल के पहले फोल्डेबल आईफोन के बाजार में आने से पहले ही सैमसंग ने एक बड़ी व्यावसायिक बाजी मार ली है। आईफोन के हर फोल्डेबल डिस्प्ले पैनल के लिए एप्पल को सैमसंग को भारी रकम चुकानी होगी, जिससे दक्षिण कोरियाई दिग्गज को तगड़ा मुनाफा होना तय है।
फोल्डेबल बाजार में सैमसंग की बड़ी बढ़त
स्मार्टफोन बाजार की बादशाहत की जंग में हर कोई आगे रहना चाहता है, लेकिन तकनीकी साझेदारी कई बार खेल को पूरी तरह बदल देती है। एप्पल अपने पहले फोल्डेबल आईफोन को उतारने की तैयारी में जुटा है, लेकिन इस डिवाइस के सबसे अहम और महंगे हिस्से के लिए उसे अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी सैमसंग पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ेगा। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे हार्डवेयर निर्माण के मामले में सैमसंग अभी भी बाजार में सबसे मजबूत स्थिति पर काबिज है।
तीन साल का एक्सक्लूसिव सप्लाई समझौता
न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल अपने आगामी 'आईफोन डुओ' में इस्तेमाल होने वाले प्रत्येक फोल्डेबल डिस्प्ले पैनल के एवज में सैमसंग को करीब 250 डॉलर यानी लगभग 24,000 रुपये का भुगतान करेगा। यह डिस्प्ले पैनल इस प्रीमियम फोन के सबसे महंगे घटकों में से एक है। इस बड़े व्यावसायिक सौदे को सुनिश्चित करने के लिए दोनों कंपनियों के बीच तीन साल का एक एक्सक्लूसिव सप्लाई समझौता हुआ है।
एप्पल की मजबूरी और सैमसंग का मुनाफा
नवाचार और डिजाइन के मामले में एप्पल भले ही अपनी अलग पहचान रखता हो, लेकिन फोल्डेबल स्क्रीन जैसी अत्याधुनिक डिस्प्ले तकनीक के उत्पादन में सैमसंग की महारत का मुकाबला करना फिलहाल आसान नहीं है। यही वजह है कि आईफोन की हर यूनिट बिकने पर भी उसका एक बड़ा हिस्सा मुनाफे के रूप में सैमसंग की झोली में जाएगा। एप्पल की इस मजबूरी ने सैमसंग को बिना फोन बेचे ही पहले से ही इस तकनीकी मुकाबले का विजेता बना दिया है।

संत तिरुवल्लुवर और तिरुकुरल: यूपीएससी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को संत तिरुवल्लुवर की प्राचीन तमिल कृति 'तिरुकुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया गया है। यह कृति सदाचार, शासन, और नैतिकता पर आधारित है, जो भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति और दक्षिण भारतीय साहित्य के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करती है।
सारांश (Summary): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को संत तिरुवल्लुवर की प्राचीन तमिल कृति 'तिरुकुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया गया है। यह कृति सदाचार, शासन, और नैतिकता पर आधारित है, जो भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति और दक्षिण भारतीय साहित्य के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करती है।
संत तिरुवल्लुवर का परिचय
संत तिरुवल्लुवर तमिल संस्कृति के महान कवि और दार्शनिक माने जाते हैं। उनका जीवनकाल और सटीक जन्मतिथि को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है, परंतु तमिल साहित्य और समाज पर उनका प्रभाव अत्यंत गहरा और अकाट्य रहा है। उन्हें दक्षिण भारत के सबसे सम्मानित मनीषियों में गिना जाता है।
तिरुकुरल की विषयवस्तु और महत्व
उनकी प्रसिद्ध रचना 'तिरुकुरल' में कुल 1330 दोहे संकलित हैं। यह ग्रंथ मुख्य रूप से सदाचार, सुशासन, धन, सामाजिक ज़िम्मेदारी और प्रेम जैसे सार्वभौमिक विषयों पर आधारित है। इस साहित्यिक कृति को 'तमिल वेद' या 'पांचवां वेद' भी कहा जाता है, जो मानव जीवन के हर पहलू का मार्गदर्शन करती है।
सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रसार
ब्रिक्स समिट से पहले भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा इस ग्रंथ का रूसी अनुवाद रूस के राष्ट्रपति को भेंट किया जाना सांस्कृतिक कूटनीति का एक अनूठा उदाहरण है। इसके माध्यम से प्राचीन भारतीय दर्शन, तमिल साहित्य और वैश्विक मंच पर भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूती मिलती है।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App