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झारखंड के डैम्स पर मंडरा रहा खतरा, एनडीएसए ने मांगी सख्त कार्रवाई

झारखंड के डैम्स पर मंडरा रहा खतरा, एनडीएसए ने मांगी सख्त कार्रवाई

Delight News
📅 17 Sep2026

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) ने झारखंड सरकार से श्रेणी-द्वितीय के बांधों की सुरक्षा और मरम्मत के लिए समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। यह वैधानिक निकाय देश भर के बांधों की निगरानी, नियमन और उनके रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

झारखंड के डैम्स पर मंडरा रहा खतरा, एनडीएसए ने मांगी सख्त कार्रवाई
खबर का निचोड़:
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) ने झारखंड सरकार से श्रेणी-द्वितीय के बांधों की सुरक्षा और मरम्मत के लिए समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। यह वैधानिक निकाय देश भर के बांधों की निगरानी, नियमन और उनके रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
झारखंड में बांधों की सुरक्षा पर बड़ा संकट
देश के बुनियादी ढांचे और आम जनता की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण यानी एनडीएसए ने झारखंड राज्य में बांधों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के श्रेणी-द्वितीय (Category-II) के बांधों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिसके चलते प्राधिकरण ने इनकी व्यापक सुरक्षा जांच और समयबद्ध पुनर्वास के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
क्या है राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण?
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण कोई आम निकाय नहीं है, बल्कि इसे केंद्र सरकार द्वारा 'बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021' के तहत एक शक्तिशाली वैधानिक निकाय के रूप में स्थापित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के विशाल और संवेदनशील बांधों का नियमन करना, उन पर पैनी नजर रखना और समय-समय पर उनका निरीक्षण करना है। नई दिल्ली में इसका मुख्यालय स्थित है, जहां से पूरे देश की बांध प्रणालियों पर नियंत्रण रखा जाता है।
नेतृत्व और पांच मजबूत विंग
इस महत्वपूर्ण प्राधिकरण की कमान एक अनुभवी चेयरमैन के हाथों में होती है। उनके कार्यों को सुचारू रूप से चलाने और देश के बांध नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए पांच विशेषज्ञ सदस्यों की नियुक्ति की गई है। ये सदस्य प्राधिकरण के पांच प्रमुख विंगों की कमान संभालते हैं, जिनमें नीति और अनुसंधान, तकनीकी, नियमन, आपदा और लचीलापन, तथा प्रशासन और वित्त विंग शामिल हैं। यह ढांचा इसे किसी भी आपदा से निपटने में सक्षम बनाता है।
एनडीएसए की कार्यप्रणाली और अधिकार
इस प्राधिकरण की कार्यशैली बेहद स्पष्ट और दूरदर्शी है। यह 'राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति' द्वारा बनाई गई नीतियों को धरातल पर उतारने का काम करता है। इसके अलावा, यह राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (SDSOs) और बांध मालिकों के बीच आने वाले जटिल विवादों को सुलझाने का काम भी करता है। बांधों की मजबूती की जांच और उनके रखरखाव के लिए कड़े नियम बनाना भी इसी के अधिकार क्षेत्र में आता है।
निर्माण एजेंसियों के लिए कड़े मानक
बांधों के डिजाइन, निर्माण और उनमें किसी भी तरह के बदलाव के लिए एनडीएसए देश की विभिन्न एजेंसियों को आधिकारिक मान्यता प्रदान करता है। इसके द्वारा तय किए गए मानकों में संरचनात्मक मजबूती, पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और किसी भी आपदा से निपटने के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल शामिल हैं। देश भर में जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ यह संस्था किसी भी प्राकृतिक आपदा या अनहोनी की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया योजनाओं को भी सुनिश्चित करती है।
डिजिटल गोल्ड पर कसेगा शिकंजा, हर यूनिट के बदले रखना होगा असली सोना

डिजिटल गोल्ड पर कसेगा शिकंजा, हर यूनिट के बदले रखना होगा असली सोना

Delight News
📅 18 Sep2026

देश के लगभग 3 अरब डॉलर वाले डिजिटल गोल्ड बाजार पर सरकार कड़े नियम लागू करने की तैयारी में है। नए प्रस्तावों के तहत RBI और SEBI मिलकर इस क्षेत्र की निगरानी करेंगे। अब कंपनियों को बेचे गए हर डिजिटल गोल्ड यूनिट के बदले 100 प्रतिशत असली सोना तिजोरी में रखना अनिवार्य होगा।

डिजिटल गोल्ड पर कसेगा शिकंजा, हर यूनिट के बदले रखना होगा असली सोना
खबर का निचोड़
देश के लगभग 3 अरब डॉलर वाले डिजिटल गोल्ड बाजार पर सरकार कड़े नियम लागू करने की तैयारी में है। नए प्रस्तावों के तहत RBI और SEBI मिलकर इस क्षेत्र की निगरानी करेंगे। अब कंपनियों को बेचे गए हर डिजिटल गोल्ड यूनिट के बदले 100 प्रतिशत असली सोना तिजोरी में रखना अनिवार्य होगा।
अनियंत्रित बाजार पर नकेल कसने की तैयारी
भारत में डिजिटल गोल्ड का क्रेज तेजी से बढ़ा है। महज कुछ रुपयों से निवेश की शुरुआत करने की सुविधा ने करोड़ों युवा निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया। हालांकि, अब तक इस पूरे बाजार के लिए कोई स्पष्ट और सख्त नियामकीय ढांचा मौजूद नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ मिलकर एक व्यापक रूपरेखा तैयार कर रही है। इस नए कदम का प्राथमिक उद्देश्य निवेशकों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखना और बाजार में पारदर्शिता लाना है।
100 फीसदी बैकअप बनाना होगा अनिवार्य
प्रस्तावित नियमों के तहत डिजिटल गोल्ड बेचने वाली प्लेटफॉर्म्स और कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव उनके 'बैकअप रिज़र्व' को लेकर होगा। कंपनियों को ग्राहकों द्वारा खरीदे गए हर एक डिजिटल गोल्ड यूनिट के बदले उतना ही भौतिक सोना (100% फिजीकल गोल्ड) अपनी सुरक्षित तिजोरियों में रखना होगा। इससे कागजी या आभासी बिक्री की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी। यदि कोई निवेशक अपना डिजिटल गोल्ड भुनाना चाहता है या उसे भौतिक सोने में बदलना चाहता है, तो उसे बिना किसी देरी या जोखिम के तुरंत सोना उपलब्ध कराया जा सकेगा।
RBI और SEBI संभालेंगे निगरानी की कमान
अब तक फिनटेक ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेचा जा रहा डिजिटल गोल्ड एक तरह से ग्रे-एरिया में काम कर रहा था। नए दिशानिर्देशों के लागू होते ही यह सीधे देश के दो सबसे बड़े नियामकों के दायरे में आ जाएगा। वित्तीय लेन-देन, तरलता और बैंकिंग पहलुओं पर जहां RBI अपनी पैनी नजर रखेगा, वहीं निवेशकों के हितों की सुरक्षा, बाजार आचरण और धोखाधड़ी रोकने का जिम्मा SEBI के पास होगा। इन दोनों संस्थाओं की संयुक्त निगरानी से लगभग $3 बिलियन (करीब 25,000 करोड़ रुपये) के इस विशाल उद्योग में संस्थागत मजबूती आएगी।
निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता में होगा सुधार
इस कड़े कदम से आम निवेशकों का भरोसा डिजिटल माध्यमों पर और मजबूत होगा। अक्सर डिजिटल गोल्ड में तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी वॉलेट या कस्टोडियन) के पास रखे सोने की सत्यता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। नियमित ऑडिट, सख्त इन्वेंट्री मैनेजमेंट और सरकारी निगरानी के चलते फर्जीवाड़े की आशंका न के बराबर रह जाएगी। आने वाले समय में ये नए नियम न केवल छोटी बचत करने वालों को सुरक्षा का अहसास कराएंगे, बल्कि भारतीय सर्राफा बाजार को भी ज्यादा डिजिटल, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली में कटेंगे 13 हजार पेड़, जानिए वजह

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली में कटेंगे 13 हजार पेड़, जानिए वजह

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📅 18 Sep2026

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सेंट्रल रिज का प्राकृतिक संतुलन बहाल करने के लिए 13,000 पेड़ हटाने की मंजूरी दी है। यह कदम विदेशी और हानिकारक प्रजातियों को हटाकर स्थानीय देशज पौधे लगाने के लिए उठाया गया है। दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड की देखरेख में यह पूरा इको-लॉजिकल रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट चलाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली में कटेंगे 13 हजार पेड़, जानिए वजह
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सेंट्रल रिज का प्राकृतिक संतुलन बहाल करने के लिए 13,000 पेड़ हटाने की मंजूरी दी है। यह कदम विदेशी और हानिकारक प्रजातियों को हटाकर स्थानीय देशज पौधे लगाने के लिए उठाया गया है। दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड की देखरेख में यह पूरा इको-लॉजिकल रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट चलाया जाएगा।
विदेशी पेड़ों से मुक्ति और रिज का नया जीवन
राजधानी दिल्ली के पर्यावरण को नया जीवन देने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली के सेंट्रल रिज क्षेत्र से 13,000 पेड़ों को काटने और हटाने की अनुमति दे दी है। पहली नजर में यह फैसला हरियाली को नुकसान पहुंचाने वाला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की वजह दिल्ली के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को बचाना है। दरअसल, जिन पेड़ों को हटाने का आदेश दिया गया है, वे सभी आक्रामक और विदेशी प्रजाति के हैं, जो स्थानीय पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुके थे।
कीकर और यूकेलिप्टस का कहर
दशकों पहले दिल्ली के जंगलों में कीकर (विलायती बबूल), साधारण बबूल और यूकेलिप्टस जैसी विदेशी प्रजातियों के पौधे बड़े पैमाने पर लगाए गए थे। इन पेड़ों ने तेजी से फैलकर दिल्ली की मूल वनस्पति को नष्ट कर दिया। ये आक्रामक प्रजातियां जमीन से अत्यधिक पानी सोखती हैं, जिससे भूजल स्तर तेजी से गिरता है। इसके अलावा, इन पेड़ों के आसपास अन्य पौधों और जड़ी-बूटियों का पनपना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे स्थानीय जैव विविधता पूरी तरह से ठप पड़ गई थी।
देशी प्रजातियों से सजेगी राजधानी
पारिस्थितिक बहाली (इको-लॉजिकल रेस्टोरेशन) की इस योजना के तहत हटाए जा रहे पेड़ों की जगह पूरी तरह से भारतीय और देशज प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। इस अभियान में नीम, बरगद, पीपल, जामुन और अमलतास जैसी पारंपरिक और उपयोगी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। ये पेड़ न केवल दिल्ली के गिरते भूजल स्तर को सुधारने में मदद करेंगे, बल्कि पक्षियों और स्थानीय जीवों के लिए एक प्राकृतिक और सुरक्षित आवास भी तैयार करेंगे।
कड़े नियंत्रण में होगा रेस्टोरेशन का काम
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अंधाधुंध कटाई का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इस पूरे प्रोजेक्ट को दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड की सख्त देखरेख में अंजाम दिया जाएगा। बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि आक्रामक पेड़ों को हटाने के तुरंत बाद तय योजना के मुताबिक देशज पौधों का रोपण शुरू हो, ताकि सेंट्रल रिज का हरित दायरा किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।
FDA का बड़ा एक्शन: त्यौहारों से पहले मिलावटी और गंदे मावे पर शिकंजा

FDA का बड़ा एक्शन: त्यौहारों से पहले मिलावटी और गंदे मावे पर शिकंजा

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📅 18 Sep2026

महाराष्ट्र में FDA ने अस्वच्छ परिस्थितियों और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने पर सख्त रुख अपनाया है। कोंकण और मीरा रोड सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर अधिकारियों ने 2,813 किलो से अधिक असुरक्षित खोया और मावा ज़ब्त किया। इस ज़ब्त किए गए डेयरी उत्पाद की कुल कीमत ₹7.38 लाख से अधिक बताई जा रही है।

FDA का बड़ा एक्शन: त्यौहारों से पहले मिलावटी और गंदे मावे पर शिकंजा
महाराष्ट्र में FDA ने अस्वच्छ परिस्थितियों और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने पर सख्त रुख अपनाया है। कोंकण और मीरा रोड सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर अधिकारियों ने 2,813 किलो से अधिक असुरक्षित खोया और मावा ज़ब्त किया। इस ज़ब्त किए गए डेयरी उत्पाद की कुल कीमत ₹7.38 लाख से अधिक बताई जा रही है।
त्योहारी सीजन में सेहत से खिलवाड़ पर कसता शिकंजा
आगामी त्यौहारों के मद्देनज़र बाज़ार में मावे और खोये की मांग काफी बढ़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी घटिया और अस्वच्छ तरीके से तैयार डेयरी उत्पाद बेचने से बाज़ नहीं आते। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इसी तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए पूरे राज्य में एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री पहुंचाना है।
मीरा रोड में मिली भारी अनियमितताएं
कार्रवाई के दौरान सबसे चिंताजनक स्थिति मीरा रोड इलाके में सामने आई। यहां अधिकारियों ने छापेमारी कर ₹3.16 लाख की कीमत का 1,437 किलोग्राम खोया और मावा बरामद किया। जिस जगह पर इस मावे को रखा गया था, वहां साफ-सफाई के मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। गंदे माहौल में रखे इस मावे का सीधा इस्तेमाल मिठाइयां बनाने में होना था, जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता था।
कोंकण रीजन में FDA का बड़ा छापा
मीरा रोड के अलावा FDA की टीमों ने कोंकण इलाके में भी व्यापक जांच अभियान चलाया। यहां विभिन्न डेयरी इकाइयों और गोदामों का निरीक्षण किया गया। इस कार्रवाई में अधिकारियों ने लगभग 2.5 टन खोया और मीठा मावा जब्त किया। नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों पर सख्त धाराएं लगाई गई हैं और सैंपल को जांच के लिए लैब भेज दिया गया है।
राज्यभर में ₹7.38 लाख का माल जब्त
कुल मिलाकर, FDA अधिकारियों ने पूरे महाराष्ट्र में समन्वित छापेमारी कर 2,813 किलोग्राम असुरक्षित डेयरी प्रोडक्ट्स को अपने कब्ज़े में लिया है। जब्त किए गए इस माल का कुल बाज़ार मूल्य ₹7.38 लाख है। FDA के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि मिलावटखोरी और गंदगी के बीच खाद्य उत्पाद बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्यभर में यह सघन जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो।
TMC ने चुनाव आयोग को भेजे नए नाम-चुनाव चिह्न के विकल्प, दर्ज कराया कड़ा विरोध

TMC ने चुनाव आयोग को भेजे नए नाम-चुनाव चिह्न के विकल्प, दर्ज कराया कड़ा विरोध

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📅 18 Sep2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा उप-चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारी विरोध दर्ज कराते हुए चुनाव आयोग को नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प सौंपे हैं। विवाद के चलते आयोग द्वारा पार्टी के नाम और प्रतीक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के बाद ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी को यह कदम उठाना पड़ा।

TMC ने चुनाव आयोग को भेजे नए नाम-चुनाव चिह्न के विकल्प, दर्ज कराया कड़ा विरोध
खबर का निचोड़
पश्चिम बंगाल विधानसभा उप-चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारी विरोध दर्ज कराते हुए चुनाव आयोग को नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प सौंपे हैं। विवाद के चलते आयोग द्वारा पार्टी के नाम और प्रतीक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के बाद ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी को यह कदम उठाना पड़ा।
बंगाल की राजनीति में नया मोड़
पश्चिम बंगाल का सियासी पारा एक बार फिर चरम पर है। राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा उप-चुनावों से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस को एक अप्रत्याशित और कड़े फैसले का सामना करना पड़ा है। चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने नए विकल्पों की सूची चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर दी है। हालांकि, पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया पर अपना कड़ा ऐतराज जताया है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया है।
कड़े ऐतराज के साथ सौंपे गए विकल्प
रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी ने चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन तो किया है, लेकिन इसके साथ एक तीखा विरोध पत्र भी सौंपा है। पार्टी नेतृत्व का स्पष्ट मानना है कि नाम और प्रतीक फ्रीज करने का आयोग का यह फैसला एकतरफा है। टीएमसी ने आयोग से निष्पक्षता बनाए रखने की अपील करते हुए अपनी प्राथमिकता वाले नए नामों और चुनाव चिन्हों के विकल्प जमा कराए हैं, ताकि उप-चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार बिना किसी तकनीकी बाधा के अपनी दावेदारी पेश कर सकें।
चुनाव चिह्न फ्रीज होने की वजह
पार्टी के भीतर उभरे दो गुटों के बीच जारी खींचतान और सिंबल पर दावेदारी के चलते चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत यह सख्त कदम उठाया है। आयोग का तर्क है कि जब तक विवाद का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी गुट को मूल नाम और चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किया जा सकता। आयोग का यह फैसला उप-चुनाव में पार्टी की चुनावी रणनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
उप-चुनाव पर असर और आगे की रणनीति
तृणमूल कांग्रेस के लिए नया नाम और नया चुनाव चिह्न अचानक से मतदाताओं के बीच ले जाना एक बड़ी चुनौती होगी। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता और समर्थक दशकों पुराने प्रतीक से जुड़े रहे हैं, ऐसे में नए चिह्न के साथ मतदाताओं को बहुत कम समय में जागरूक करना आसान नहीं होगा। फिलहाल, सभी की निगाहें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह टीएमसी द्वारा भेजे गए विकल्पों में से किसे हरी झंडी दिखाता है।
सलमान खान की कार से फैन को लगी चोट, ड्राइवर पर भड़के भाईजान

सलमान खान की कार से फैन को लगी चोट, ड्राइवर पर भड़के भाईजान

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📅 18 Sep2026

मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान अभिनेता सलमान खान की कार के नीचे एक फैन का पैर आ गया। इस हादसे के तुरंत बाद फ्रंट सीट पर बैठे सलमान ने अपनी तत्परता दिखाई। उन्होंने गाड़ी चला रहे ड्राइवर को हाथ मारकर रोका और लापरवाही के लिए उसे जमकर फटकार लगाई।

सलमान खान की कार से फैन को लगी चोट, ड्राइवर पर भड़के भाईजान
खबर का निचोड़
मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान अभिनेता सलमान खान की कार के नीचे एक फैन का पैर आ गया। इस हादसे के तुरंत बाद फ्रंट सीट पर बैठे सलमान ने अपनी तत्परता दिखाई। उन्होंने गाड़ी चला रहे ड्राइवर को हाथ मारकर रोका और लापरवाही के लिए उसे जमकर फटकार लगाई।
कैसे घटा मुंबई में यह हादसा
बॉलीवुड के 'दबंग' अभिनेता सलमान खान एक बार फिर खबरों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई फिल्म नहीं बल्कि मुंबई की सड़कों पर हुई एक अचानक घटना है। गुरुवार को सलमान खान मुंबई में आयोजित गणपति उत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। बप्पा के दर्शन और अपने पसंदीदा स्टार की एक झलक पाने के लिए मौके पर फैंस का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।
भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि सुरक्षाकर्मियों के लिए स्थिति को संभालना मुश्किल हो रहा था। इसी आपाधापी में जब सलमान खान की कार आगे बढ़ रही थी, तभी एक अति-उत्साही फैन का पैर उनकी गाड़ी के टायर के नीचे आ गया।
सलमान खान का त्वरित एक्शन
हादसा होते ही गाड़ी की पैसेंजर सीट पर बैठे सलमान खान की नजर तुरंत उस फैन पर पड़ी। बिना एक सेकंड गंवाए, सलमान ने अपनी संवेदनशीलता और सतर्कता का परिचय दिया। सामने आए वीडियो में साफ दिख रहा है कि उन्होंने तुरंत अपने ड्राइवर की ओर हाथ बढ़ाया, उसे हाथ से थपथपाकर रोका और गाड़ी तुरंत संभालने का निर्देश दिया।
सलमान खान इस पूरी घटना से काफी असहज और गुस्से में नजर आए। गाड़ी रुकते ही उन्होंने ड्राइवर को सार्वजनिक रूप से डांटना शुरू कर दिया। उन्होंने लापरवाही से गाड़ी चलाने पर ड्राइवर की क्लास ली, जबकि ड्राइवर उन्हें स्थिति की सफाई देता हुआ दिखाई दिया।
भीड़ में सुरक्षा पर उठे सवाल
सलमान खान की सुरक्षा और उनके आसपास जुटने वाली फैंस की भीड़ हमेशा से चिंता का विषय रही है। त्योहारों के मौसम में यह भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सेलिब्रिटीज की गाड़ियों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भीड़ नियंत्रण कितना जरूरी है।
फैंस अपने चहेते सितारे को करीब से देखने के चक्कर में अक्सर अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं। गनीमत यह रही कि सलमान खान की नजर समय पर पड़ गई और उन्होंने तुरंत ड्राइवर को रोक दिया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। घटना के बाद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग सलमान के इस कदम और उनकी सतर्कता की तारीफ कर रहे हैं।

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