
इसरो में साइंटिस्ट बनने का बड़ा मौका, 175 पदों पर निकली भर्ती
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने वैज्ञानिक/इंजीनियर 'एससी' के 175 पदों पर सीधी भर्ती निकाली है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस के योग्य अभ्यर्थी 27 अगस्त से 16 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 16 सितंबर रात 11:55 बजे तय की गई है।
खबर का निचोड़
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने वैज्ञानिक/इंजीनियर 'एससी' के 175 पदों पर सीधी भर्ती निकाली है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस के योग्य अभ्यर्थी 27 अगस्त से 16 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 16 सितंबर रात 11:55 बजे तय की गई है।
अंतरिक्ष में करियर बनाने की शानदार राह
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में काम करने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। इसरो ने वैज्ञानिक/इंजीनियर 'एससी' के 175 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह भर्ती इसरो केंद्रीयकृत भर्ती बोर्ड (ICRB) के माध्यम से की जा रही है। देश के प्रमुख अंतरिक्ष संस्थान का हिस्सा बनने की चाह रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक बड़ा मौका है।
किन विषयों के उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत तीन मुख्य तकनीकी क्षेत्रों में नियुक्तियां की जाएंगी। इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के अभ्यर्थी इन पदों के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। संबंधित ट्रेड में आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और न्यूनतम अंकों की शर्त पूरी करने वाले उम्मीदवार इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 27 अगस्त से शुरू हो चुकी है।
आवेदन की अंतिम तिथि और समय
इच्छुक उम्मीदवारों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर 2026 है। उम्मीदवार 16 सितंबर की रात 11:55 बजे तक ही अपना फॉर्म जमा कर सकेंगे। अंतिम समय की तकनीकी अड़चनों और सर्वर की समस्याओं से बचने के लिए अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें।
चयन और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और इसरो केंद्रीयकृत भर्ती बोर्ड के मानकों के अनुरूप संचालित होगी। पात्र अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन मोड में ही आवेदन करना होगा। किसी भी अन्य माध्यम से भेजे गए आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। फॉर्म भरते समय अपने सभी शैक्षणिक दस्तावेजों, फोटोग्राफ और हस्ताक्षर को तय प्रारूप में ही अपलोड करना अनिवार्य है।

लद्दाख के वकीलों को SC में बहस के लिए दिल्ली आना नहीं पड़ेगा: CJI सूर्यकांत
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की लद्दाख बेंच के उद्घाटन पर बड़ा ऐलान किया है। अब लद्दाख के अधिवक्ताओं को सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के लिए दिल्ली नहीं आना पड़ेगा। डिजिटल तकनीक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामलों की सुनवाई सीधे संभव होगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की लद्दाख बेंच के उद्घाटन पर बड़ा ऐलान किया है। अब लद्दाख के अधिवक्ताओं को सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के लिए दिल्ली नहीं आना पड़ेगा। डिजिटल तकनीक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामलों की सुनवाई सीधे संभव होगी।
भारत की न्यायिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने दूरदराज क्षेत्रों के नागरिकों और कानून विशेषज्ञों के लिए न्याय तक पहुंच को बेहद आसान बना दिया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की नई लद्दाख बेंच के उद्घाटन समारोह में CJI ने महत्वपूर्ण घोषणा की।
तकनीक से सुगम होगा न्याय का रास्ता
अब लद्दाख के अधिवक्ताओं को अपने मुकदमों की पैरवी और सुप्रीम कोर्ट में बहस करने के लिए देश की राजधानी दिल्ली की लंबी यात्रा करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। आधुनिक तकनीक का सही उपयोग करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की स्थाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस पहल से लद्दाख से जुड़े सभी कानूनी मामलों की सुनवाई अब सीधे वर्चुअल माध्यम से की जाएगी।
समय और धन की होगी भारी बचत
लद्दाख जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र के लोगों और अधिवक्ताओं के लिए दिल्ली आकर शीर्ष अदालत में सुनवाई में शामिल होना एक बड़ी चुनौती रहा है। दूरी, खराब मौसम और भारी यात्रा खर्च के कारण आम नागरिकों को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली लागू होने से समय और धन दोनों की व्यापक बचत होगी।
डिजिटल न्याय व्यवस्था की ओर एक मजबूत कदम
सर्वोच्च न्यायालय का यह ऐतिहासिक निर्णय देश के अंतिम छोर पर बैठे नागरिक तक त्वरित और सुलभ न्याय पहुंचाने की दिशा में अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है। डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी व्यक्ति केवल भौगोलिक दूरी के कारण अपने अधिकारों की रक्षा करने से वंचित न रह जाए।
उद्घाटन समारोह के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत ने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक से न्यायपालिका की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, त्वरित और जन-केंद्रित बन रही है। लद्दाख बेंच की शुरुआत और ऑनलाइन कनेक्टिविटी से स्थानीय कानूनी समुदाय में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है।

तिरंगे की आड़ में उत्पात का इरादा: संजय निरुपम
शिवसेना (शिंदे गुट) नेता संजय निरुपम ने आरोप लगाया है कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपेके की दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा रैली आयोजित करने के पीछे मुख्य मकसद तिरंगे की आड़ में उत्पात मचाना था। उन्होंने कहा कि झंडा फहराने की अपील केवल एक बहाना मात्र थी, जिसका असल उद्देश्य कुछ और ही था।
शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपेके को लेकर एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि दिल्ली के कनॉट प्लेस में तिरंगा रैली निकालने के पीछे कोई नेक इरादा नहीं था, बल्कि इसके जरिए शहर की शांति और व्यवस्था को प्रभावित करने की योजना थी।
तिरंगा रैली को बताया महज एक बहाना
संजय निरुपम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिल्ली के कनॉट प्लेस में जिस तरह से लोगों से झंडा फहराने की अपील की गई थी, वह केवल एक ढाल थी। उनके मुताबिक असली मकसद तिरंगे की आड़ में सार्वजनिक स्थल पर उत्पात मचाना और अराजकता फैलाना था।
राजनीतिक गलियारों में गरमाई सियासत
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। इस प्रकार के आयोजनों और उनके पीछे छिपे इरादों को लेकर विभिन्न नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी इस तरह की गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।

दिल्ली में प्रदर्शनों के बीच युवाओं ने बनाए अनोखे ऑनलाइन गेम्स
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शनों के बीच युवाओं ने 'भाग नेहा भाग', 'जंतर-मंतर चलो' और 'जंतर-मंतर टू जेल' जैसे मुफ्त ऑनलाइन गेम्स तैयार किए हैं। इन गेम्स में खिलाड़ियों को पुलिस, बैरिकेड्स और आंसू गैस से बचते हुए 'लोकतंत्र' के सिक्के जुटाने होते हैं।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विभिन्न प्रदर्शनों के बीच युवाओं ने विरोध जताने और अपनी बात रखने का अनोखा तरीका खोज निकाला है। युवाओं द्वारा 'भाग नेहा भाग', 'जंतर-मंतर चलो' और 'जंतर-मंतर टू जेल' नाम से मुफ्त ऑनलाइन गेम्स विकसित किए गए हैं। ये गेम्स सोशल मीडिया और युवाओं के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन रहे हैं।
बैरिकेड्स और आंसू गैस से बचने की चुनौती
इन गेम्स की थीम पूरी तरह से मैदानी प्रदर्शनों पर आधारित है। गेम में खिलाड़ियों के पास प्रदर्शनकारी या पुलिसकर्मी बनने का विकल्प रहता है। बतौर प्रदर्शनकारी खेलते हुए खिलाड़ियों को रास्ते में आने वाले पुलिस बैरिकेड्स और दागे जाने वाले आंसू गैस के गोलों से खुद को बचाते हुए आगे बढ़ना होता है।
लोकतंत्र के सिक्के और डिटेंशन सेंटर का सफर
गेमिंग कांसेप्ट को रोचक बनाने के लिए इसमें खास टास्क जोड़े गए हैं। एक गेम में खिलाड़ी को आगे बढ़ते हुए 'लोकतंत्र' और 'जवाबदेही' के सिक्के जमा करने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं दूसरे गेम में यदि खिलाड़ी पुलिस की पकड़ में आ जाता है, तो उसे पकड़कर डिटेंशन सेंटर ले जाया जाता है।

सिंगर नेहा सिंह राठौर विवाद पर कंगना रनौत की प्रतिक्रिया
एक निजी न्यूज़ चैनल द्वारा सिंगर नेहा सिंह राठौर को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद माफी मांगने का मामला सामने आया है। इस पर नेहा ने अभिनेत्री कंगना रनौत को टैग करते हुए सवाल पूछा था, जिसके जवाब में कंगना ने कहा कि टीआरपी के लिए किसी भी महिला को बदनाम करना बेहद घटिया बात है।
एक निजी न्यूज़ चैनल ने अपनी एक रिपोर्ट के दौरान सिंगर नेहा सिंह राठौर को लेकर बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस खबर के सामने आने और विवाद बढ़ने के बाद संबंधित चैनल ने उनसे माफी मांग ली थी। इसके बाद नेहा सिंह राठौर ने अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत को सोशल मीडिया पर टैग करते हुए लिखा कि क्या आपको डर नहीं लगता?
कंगना रनौत ने की निंदा और दी तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके और नेहा सिंह राठौर के राजनीतिक विचार एक-दूसरे के विपरीत हैं और वे उनके विचारों को अस्वीकार करती हैं। इसके बावजूद कंगना ने कड़े शब्दों में कहा कि सिर्फ टीआरपी या लोकप्रियता हासिल करने के लिए किसी भी महिला को इस तरह से बदनाम करना बेहद घटिया हरकत है।
चैनल के प्रमुख पर जिम्मेदारी लेने की मांग
कंगना रनौत ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के मामलों की जिम्मेदारी चैनल के शीर्ष अधिकारियों को लेनी चाहिए। मीडिया घरानों द्वारा इस प्रकार की भाषा का प्रयोग और महिलाओं के प्रति ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं, जिन पर लगाम लगनी चाहिए।

आचार संहिता उल्लंघन केस: सपा विधायक रागिनी सोनकर पर गैर जमानती वारंट
जौनपुर (यूपी) में एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर सहित 3 लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता और कोविड-19 गाइडलाइन के उल्लंघन के मामले में कोर्ट के आदेश के बावजूद लगातार अनुपस्थित रहने पर की गई है। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर समेत कुल तीन लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। अदालत का यह सख्त रुख उस स्थिति में सामने आया है जब आरोपियों की तरफ से लगातार कोर्ट के आदेशों की अनदेखी की जा रही थी।
2022 विधानसभा चुनाव से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान का है। चुनाव प्रचार के वक्त आचार संहिता और कोविड-19 महामारी से जुड़ी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने का आरोप इन पर लगा था। इसी मामले की सुनवाई के सिलसिले में अदालत द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद आरोपी कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे थे।
अगली सुनवाई की तारीख तय
न्यायालय द्वारा निर्देशों की लगातार अवहेलना और अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए यह कानूनी कार्रवाई की गई है। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई आगामी 22 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
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