
IPL क्रिकेटर अभिषेक पोरेल रेप केस में गिरफ्तार, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
दिल्ली कैपिटल्स के क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को मेडिकल छात्रा से कथित रेप और प्रताड़ना के आरोप में हुगली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता का आरोप है कि पोरेल ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण किया, निजी पलों को रिकॉर्ड किया और धमकाया। कलकत्ता हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
खबर का निचोड़
दिल्ली कैपिटल्स के क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को मेडिकल छात्रा से कथित रेप और प्रताड़ना के आरोप में हुगली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता का आरोप है कि पोरेल ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण किया, निजी पलों को रिकॉर्ड किया और धमकाया। कलकत्ता हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना का गंभीर आरोप
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में दिल्ली कैपिटल्स के विकेटकीपर-बल्लेबाज और बंगाल के उभरते क्रिकेटर अभिषेक पोरेल कानूनी शिंकजे में पूरी तरह फंस चुके हैं। कर्नाटक की एक मेडिकल छात्रा की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए हुगली जिले की मोगरा थाना पुलिस ने देर रात पोरेल को गिरफ्तार कर लिया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि दोनों पिछले साढ़े तीन सालों से रिश्ते में थे। आरोप के मुताबिक पोरेल ने शादी का वादा करके पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए और फिर मुकर गए। इसके साथ ही छात्रा ने पोरेल पर अवैध रूप से बंधक बनाने, भोजन न देने, शारीरिक प्रताड़ना और निजी पलों को कैमरे में कैद कर ब्लैकमेल करने जैसे कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद कार्रवाई
मामले में मोड़ तब आया जब पीड़िता ने पुलिस की सुस्त कार्रवाई से परेशान होकर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि आरोपी क्रिकेटर को अविलंब गिरफ्तार किया जाए और उनके सभी डिजिटल डिवाइसेज जब्त किए जाएं, ताकि किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट या तस्वीरों को सार्वजनिक होने से रोका जा सके।
हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद हरकत में आई पुलिस टीम ने चंदननगर स्थित आवास और अन्य ठिकानों पर दबिश दी और लंबी पूछताछ के बाद पोरेल को औपचारिक रूप से कस्टडी में ले लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 समेत कुल 19 गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
इंकार से लेकर सलाखों के पीछे तक का सफर
गिरफ्तारी से पहले अभिषेक पोरेल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को बेकसूर बताया था। हालांकि, फोरेंसिक सबूतों, पेन ड्राइव और पीड़िता के बयानों के आधार पर पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
23 वर्षीय अभिषेक पोरेल ने आईपीएल 2023 में ऋषभ पंत के विकल्प के रूप में दिल्ली कैपिटल्स में प्रवेश किया था। अपनी तूफानी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग के दम पर उन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में बड़ी पहचान बनाई थी। हालांकि, इस बड़े कानूनी विवाद और गिरफ्तारी के बाद उनके क्रिकेट करियर और छवि पर गहरा संकट मंडराने लगा है।

शाह के बयान पर घिरे राहुल गांधी, धर्मेंद्र प्रधान बोले- आदतन झूठे हैं नेता प्रतिपक्ष
संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान देने पर सहमति के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व शिक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। प्रधान ने कहा कि राहुल गांधी बिना तथ्यों के राजनीति करते हैं और वे आदतन झूठ बोलने वाले नेता हैं।
संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान देने पर सहमति के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व शिक्षा मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। प्रधान ने कहा कि राहुल गांधी बिना तथ्यों के राजनीति करते हैं और वे आदतन झूठ बोलने वाले नेता हैं।
राहुल गांधी पर धर्मेंद्र प्रधान का जोरदार हमला
संसद के भीतर जारी गहमागहमी के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बयान देने की सहमति जताए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कार्यशैली और उनकी नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रधान ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के पास न तो कोई ठोस तथ्य हैं और न ही वे देश के सामने सच आने देना चाहते हैं।
'संसद आने और जवाब सुनने से भागते हैं नेता प्रतिपक्ष'
धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष की भूमिका जवाबदेही तय करने की होती है, लेकिन राहुल गांधी इससे लगातार बचते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भी सरकार किसी मुद्दे पर तथ्य पेश करने के लिए तैयार होती है, राहुल गांधी और उनकी पार्टी संसद से दूरी बना लेती है। प्रधान के अनुसार, राहुल गांधी केवल हंगामा खड़ा करना चाहते हैं, उनका उद्देश्य किसी विषय की गहराई तक जाना या उस पर रचनात्मक बहस करना बिल्कुल नहीं है।
तथ्यों से दूरी और आदतन बयानबाजी का आरोप
भारतीय जनता पार्टी के नेता ने कहा कि राहुल गांधी आदतन झूठे बयान देने के शिकार हो चुके हैं। वे बिना किसी आधिकारिक प्रमाण के देश के सामने दावे करते हैं और जब गृह मंत्री खुद संसद में उनका जवाब देने के लिए तैयार होते हैं, तो वे चर्चा से भाग खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब इस राजनीति को समझ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्ष के पास रचनात्मक सुझावों का पूरी तरह से अभाव है।
संसद में शाह के बयान से क्यों बढ़ी सरगर्मी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संसद में खुद स्थिति स्पष्ट करने और आधिकारिक बयान देने पर सहमति जताने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव और बढ़ गया है। सरकार का तर्क है कि वह हर सवाल का नियमनुसार जवाब देने को तत्पर है, जबकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए बिना तथ्यों के अनर्गल आरोप लगा रहा है।

संसद में प्रियंका और भाजपा सांसद की तीखी झड़प
संसद भवन परिसर में एनडीए के 'पार्लियामेंट मार्च' के दौरान भाजपा सांसद मुकेश दलाल और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच तीखी बहस हो गई। मुकेश दलाल द्वारा झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर उठाए गए सवाल का प्रियंका गांधी ने करारा जवाब देते हुए कहा कि राहुल पहले ही पीड़ित छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं।
संक्षिप्त सार (Summary):
संसद भवन परिसर में एनडीए के 'पार्लियामेंट मार्च' के दौरान भाजपा सांसद मुकेश दलाल और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच तीखी बहस हो गई। मुकेश दलाल द्वारा झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर राहुल गांधी की चुप्पी को लेकर उठाए गए सवाल का प्रियंका गांधी ने करारा जवाब देते हुए कहा कि राहुल पहले ही पीड़ित छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं।
संसद में फिर गरमाया माहौल
संसद परिसर का तापमान मंगलवार को उस वक्त अचानक बढ़ गया, जब एनडीए और विपक्ष के सांसद आमने-सामने आ गए। संसद में जारी गतिरोध के खिलाफ एनडीए सांसदों ने एकजुट होकर 'पार्लियामेंट मार्च' निकाला था। मार्च के दौरान राजनीतिक बयानबाजी चरम पर थी, लेकिन माहौल तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब भाजपा सांसद मुकेश दलाल और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच सीधी बहस छिड़ गई।
झारखंड विवाद पर तीखा वार-पलटवार
बीजेपी सांसद मुकेश दलाल ने कांग्रेस नेतृत्व को घेरने की नीयत से झारखंड में छात्रों पर हुई हालिया पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी की नीतियों और इस मामले पर उनकी चुप्पी पर सवाल खड़े कर दिए। मुकेश दलाल ने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी युवाओं और न्याय की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज हो रहा है और इस पर शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व मौन साधे बैठा है।
प्रियंका गांधी का करारा जवाब
मुकेश दलाल के आरोपों का प्रियंका गांधी वाड्रा ने बेहद आक्रामक और त्वरित अंदाज में जवाब दिया। प्रियंका ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे से पीछे नहीं हटी है और न ही राहुल गांधी शांत हैं। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि राहुल गांधी पहले ही झारखंड के प्रभावित बच्चों और छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं और उनकी समस्याओं को गहराई से सुन चुके हैं। प्रियंका के इस त्वरित और तीखे जवाब के बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई, जिससे वहां मौजूद अन्य सांसदों और मीडिया का ध्यान तुरंत इस घटनाक्रम की ओर खिंच गया।
राजनीतिक गतिरोध की नई पटकथा
संसद में जारी यह नया विवाद सिर्फ दो नेताओं के बीच की जुबानी जंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्र और विपक्ष के बीच गहराते राजनीतिक टकराव को भी दर्शाता है। एनडीए जहां विपक्ष पर संसद न चलने देने का आरोप लगाते हुए आक्रामक है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार की नीतियों और राज्य स्तर के मुद्दों को उठाकर पलटवार करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक घमासान और अधिक तीव्र रूप ले सकता है।

छात्रों की 98% मांगें मंजूर, CGL रद्द करना अन्याय: JMM
झारखंड में छात्र आंदोलनों के बीच JMM सांसद महुआ माजी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने छात्रों की 98% मांगें स्वीकार कर ली हैं। बाकी 2% मांगें कोर्ट में लंबित होने के कारण सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं। उन्होंने CGL परीक्षा रद्द करने से स्पष्ट इंकार किया।
खबर का निचोड़
झारखंड में छात्र आंदोलनों के बीच JMM सांसद महुआ माजी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने छात्रों की 98% मांगें स्वीकार कर ली हैं। बाकी 2% मांगें कोर्ट में लंबित होने के कारण सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं। उन्होंने CGL परीक्षा रद्द करने से स्पष्ट इंकार किया।
विरोध प्रदर्शन के बीच JMM का बड़ा दावा
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे युवाओं के गुस्से के बीच सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपना रुख साफ कर दिया है। JMM की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि हेमंत सोरेन सरकार युवाओं के हितों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलनरत छात्रों की 98 प्रतिशत मांगों को सरकार ने पहले ही मान लिया है, जिससे यह साबित होता है कि प्रशासन युवाओं की आवाज सुन रहा है।
2 प्रतिशत मांगों पर क्यों अटका पेंच
सांसद महुआ माजी ने आंदोलनकारी छात्रों को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि जो 2 प्रतिशत मांगें अभी पूरी नहीं हो सकी हैं, वे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती ही नहीं हैं। दरअसल, छात्र CGL (कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल) परीक्षा को रद्द करने की जिद पर अड़े हुए हैं। महुआ माजी ने स्पष्ट किया कि CGL से जुड़ा मामला फिलहाल अदालत के विचाराधीन है। कानूनन जब तक न्यायालय किसी मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक सरकार अपनी मर्जी से कोई कदम नहीं उठा सकती।
CGL रद्द करना क्यों होगा अन्याय
CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग को खारिज करते हुए JMM सांसद ने तर्क दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और समय लगा होता है। यदि सरकार बिना कानूनी प्रक्रिया के इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर देती है, तो यह उन हजारों ईमानदार और योग्य युवाओं के साथ घोर अन्याय होगा जिन्होंने दिन-रात एक करके परीक्षा दी है। उन्होंने कहा कि न्याय की मंशा सभी के साथ संतुलन बनाने में है, न कि किसी एक वर्ग के दबाव में आकर जल्दबाजी में फैसला लेने में।
कोर्ट के फैसले का इंतजार ही एकमात्र रास्ता
झारखंड के भावी भविष्य को आश्वस्त करते हुए महुआ माजी ने अपील की कि युवाओं को थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। सरकार न्यायालय के हर निर्देश का सम्मान करेगी और न्यायपालिका का फैसला आते ही उसके अनुसार आगे कदम उठाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि सरकार नियम-कानून के दायरे में रहकर ही कोई ठोस फैसला ले सकती है और छात्रों को भी न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।

83 की उम्र में 24 घंटे काम: अमिताभ बच्चन ने बयां किया दर्द
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने 83 साल की उम्र में अपनी व्यस्त कार्यशैली और काम के भारी दबाव को लेकर बड़ा खुलासा किया है। लगातार 24 घंटे तक चलने वाले शूटिंग शेड्यूल के कारण उनका खान-पान और नींद का रूटीन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे उन्हें आराम का वक्त नहीं मिल पा रहा।
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बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने 83 साल की उम्र में अपनी व्यस्त कार्यशैली और काम के भारी दबाव को लेकर बड़ा खुलासा किया है। लगातार 24 घंटे तक चलने वाले शूटिंग शेड्यूल के कारण उनका खान-पान और नींद का रूटीन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे उन्हें आराम का वक्त नहीं मिल पा रहा।
काम का दबाव और सेहत की चुनौती
सफलता के शिखर पर बैठकर भी काम के प्रति निष्ठा क्या होती है, यह अमिताभ बच्चन से बेहतर भला कौन समझा सकता है। जीवन के नौवें दशक में कदम रख चुके बिग बी आज भी युवाओं को मात देने वाला वर्क शेड्यूल फॉलो कर रहे हैं। हालांकि, इस अनवरत व्यस्तता का सीधा असर अब उनके स्वास्थ्य और दैनिक दिनचर्या पर दिखाई देने लगा है। बच्चन ने खुद स्वीकार किया है कि नॉन-स्टॉप शूटिंग और काम की आपाधापी के कारण उनका सही समय पर खाना खाना और गहरी नींद लेना लगभग असंभव सा हो गया है।
24 घंटे का वर्क मोड और आराम की कमी
अमिताभ बच्चन के मुताबिक, कई बार प्रोजेक्ट्स की प्रतिबद्धताओं के कारण उन्हें लगातार 24 घंटे तक काम मोड में रहना पड़ता है। मनोरंजन उद्योग की अपनी चुनौतियां हैं, जहां शिफ्ट्स का कोई तय वक्त नहीं होता। जब शूटिंग का पहिया घूमना शुरू होता है, तो दिन और रात का फर्क खत्म हो जाता है। महानायक ने बयां किया कि जब काम का चक्रव्यूह 24 घंटे तक खिंच जाता है, तो शरीर को रीचार्ज होने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। यही वजह है कि उनकी नींद के घंटे लगातार कम हो रहे हैं और भोजन का समय अनियमित हो चुका है।
उम्र को दरकिनार कर काम के प्रति समर्पण
83 वर्ष की आयु में जहां अधिकांश लोग शांत और तनावमुक्त जीवन बिताना पसंद करते हैं, वहीं अमिताभ बच्चन आज भी टीवी शोज़, फिल्मों और विज्ञापनों की दुनिया में सबसे चर्चित और व्यस्त चेहरा हैं। उनका यह जज्बा निसंदेह काबिले तारीफ है, लेकिन काम के इस जबर्दस्त बोझ ने उनके निजी लाइफस्टाइल के संतुलन को बिगाड़ दिया है। सेट पर घंटों खड़े रहना, संवादों को याद करना और कैमरे के सामने वही पुरानी ऊर्जा बनाए रखना किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं है।
प्रशंसकों के बीच चिंता का माहौल
अमिताभ बच्चन द्वारा अपनी सेहत और कार्यशैली को लेकर साझा किए गए इस अनुभव के बाद उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है। सिनेमा जगत के इस सबसे बड़े चमकते सितारे का दिन-रात मेहनत करना उनकी लगन को तो दर्शाता ही है, साथ ही यह इस बात का भी प्रमाण है कि स्टारडम की चमक के पीछे कितना कड़ा शारीरिक और मानसिक श्रम छुपा होता है।

गोविंदा ने पत्नी सुनीता के आरोपों पर तोड़ी चुप्पी, दिया करारा जवाब
बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा ने पत्नी सुनीता आहूजा के साथ रिश्ते और झगड़ों पर खुलकर बात की है। अपने खास अंदाज में चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने कहा कि सुनीता उन्हें प्यार से गालियां देती हैं और वह मुस्कुराकर सुन लेते हैं। गोविंदा ने पारिवारिक रिश्तों की मजबूती और सुनीता के अधिकारों की खुलकर तारीफ की।
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बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा ने पत्नी सुनीता आहूजा के साथ रिश्ते और झगड़ों पर खुलकर बात की है। अपने खास अंदाज में चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने कहा कि सुनीता उन्हें प्यार से गालियां देती हैं और वह मुस्कुराकर सुन लेते हैं। गोविंदा ने पारिवारिक रिश्तों की मजबूती और सुनीता के अधिकारों की खुलकर तारीफ की।
जब गोविंदा ने बेबाकी से बयां किया रिश्तों का सच
बॉलीवुड के 'हीरो नंबर-1' गोविंदा अपनी अदाकारी के साथ-साथ अपने बेबाक बयानों के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में अपनी शादीशुदा जिंदगी और पत्नी सुनीता आहूजा के आरोपों को लेकर उन्होंने जो चुप्पी तोड़ी है, उसने फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आमतौर पर बॉलीवुड में सितारों के निजी झगड़े मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन गोविंदा ने इस पूरे मुद्दे को बेहद आत्मीय और हल्के-फुल्के अंदाज में संभाल लिया।
'वह गालियां देती हैं और मैं खुशी-खुशी सुनता हूं'
अपनी शादीशुदा जिंदगी के खट्टे-मीठे पलों पर बात करते हुए गोविंदा ने कहा कि सुनीता का अंदाज़ थोड़ा अलग है, लेकिन उसमें बेइंतहा प्यार छिपा है। उन्होंने कहा, "वो मुझे प्यार से गालियां देती हैं और मैं खुशी-खुशी सुन लेता हूं।" गोविंदा के इस बयान से साफ झलक रहा है कि उनके बीच का यह नोक-झोंक भरा रिश्ता आपसी समझ और प्यार की मजबूत नींव पर टिका हुआ है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि सुनीता के इस अंदाज में भी एक तरह का अधिकार और अपनापन महसूस होता है।
परिवार और बच्चों पर सुनीता का पूरा हक
बातचीत के दौरान गोविंदा ने सिर्फ अपने रिश्ते पर ही बात नहीं की, बल्कि परिवार में सुनीता के योगदान और उनके दबदबे को भी पूरी शिद्दत से स्वीकार किया। उन्होंने आगे कहा, "हमारे परिवार में जितने बच्चे हैं, जो आज बड़े हो चुके हैं, उन सभी पर सुनीता का पूरा हक है।" गोविंदा के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भले ही बाहर की दुनिया के लिए वह एक बड़े सुपरस्टार हों, लेकिन घर के भीतर सुनीता ही मुख्य आधार हैं और उनका निर्णय सर्वोपरि माना जाता है।
गॉसिप पर विराम और नए आयाम
अक्सर सोशल मीडिया और गॉसिप गलियारों में सितारों की निजी जिंदगी को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ती रहती हैं। गोविंदा के इस सीधे और स्पष्ट जवाब ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। अपनी सहज मुस्कान और सादगी से उन्होंने यह साबित कर दिया कि पारिवारिक रिश्ते किसी मीडिया ट्रायल या अफवाहों से प्रभावित नहीं होते। सुनीता के साथ उनके रिश्ते का यह अंदाज उनके फैंस को काफी पसंद आ रहा है।
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