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ICC रैंकिंग: बुमराह की बादशाहत खत्म, शुभमन गिल की लंबी छलांग

ICC रैंकिंग: बुमराह की बादशाहत खत्म, शुभमन गिल की लंबी छलांग

Delight News
📅 25 Jun2026

आईसीसी की ताज़ा टेस्ट और वनडे रैंकिंग में बड़ा उलटफेर हुआ है। भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह से टेस्ट में नंबर-1 का ताज छिन गया है और अब न्यूजीलैंड के मैट हेनरी शीर्ष पर काबिज हो गए हैं। वहीं, वनडे बल्लेबाजों में शुभमन गिल को जबरदस्त फायदा हुआ है और वे दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।

ICC रैंकिंग: बुमराह की बादशाहत खत्म, शुभमन गिल की लंबी छलांग
खबर का निचोड़
आईसीसी की ताज़ा टेस्ट और वनडे रैंकिंग में बड़ा उलटफेर हुआ है। भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह से टेस्ट में नंबर-1 का ताज छिन गया है और अब न्यूजीलैंड के मैट हेनरी शीर्ष पर काबिज हो गए हैं। वहीं, वनडे बल्लेबाजों में शुभमन गिल को जबरदस्त फायदा हुआ है और वे दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।
जसप्रीत बुमराह को झटका, मैट हेनरी बने नए सरताज
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की ओर से जारी ताजा रैंकिंग ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। टेस्ट गेंदबाजी की दुनिया में लंबे समय से अपना दबदबा बनाए रखने वाले भारतीय यॉर्कर किंग जसप्रीत बुमराह को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। बुमराह अपने नंबर एक पायदान से फिसलकर अब दूसरे स्थान पर आ गए हैं। उनकी जगह न्यूजीलैंड के घातक तेज गेंदबाज मैट हेनरी ने टेस्ट क्रिकेट में गेंदबाजी की सल्तनत पर कब्जा कर लिया है। हेनरी के शानदार हालिया प्रदर्शन का इनाम उन्हें आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष स्थान के रूप में मिला है।
वनडे में शुभमन गिल की धाक, विराट कोहली पिछड़े
एक तरफ जहां टेस्ट गेंदबाजी में भारत के लिए मायूसी हाथ लगी, वहीं वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग से भारतीय फैंस के लिए बेहद सुखद खबर आई है। युवा सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल ने रैंकिंग में जबरदस्त लंबी छलांग लगाई है। गिल तीन पायदान ऊपर चढ़कर अब दुनिया के दूसरे नंबर के वनडे बल्लेबाज बन गए हैं। गिल की इस छलांग का असर अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली पर पड़ा है। किंग कोहली एक पायदान नीचे खिसक कर अब तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। हालांकि, टॉप तीन में दो भारतीय बल्लेबाजों का होना टीम इंडिया के वनडे क्रिकेट में दबदबे को साफ दर्शाता है।
दिलचस्प मोड़ पर पहुंची रैंकिंग की जंग
आईसीसी की यह नई रैंकिंग बताती है कि वैश्विक क्रिकेट में इस समय मुकाबला कितना कड़ा हो चुका है। किसी भी खिलाड़ी के लिए लंबे समय तक शीर्ष पर बने रहना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। मैट हेनरी का नंबर एक बनना जहां कीवी टीम के लिए गौरव का क्षण है, वहीं जसप्रीत बुमराह की नजरें आगामी मैचों में दमदार वापसी कर अपना ताज वापस हासिल करने पर होंगी। दूसरी ओर, शुभमन गिल की नजरें अब वनडे में नंबर वन की कुर्सी पर टिकी हैं, जिसके लिए उन्हें अपनी इस बेहतरीन फॉर्म को लगातार जारी रखना होगा।
NEET और अपराधों पर भड़कीं देवोलीना: 'ऐसी सरकार का क्या मतलब?'

NEET और अपराधों पर भड़कीं देवोलीना: 'ऐसी सरकार का क्या मतलब?'

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📅 25 Jun2026

मशहूर अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने देश में बढ़ते अपराधों और NEET परीक्षा लीक मामले को लेकर व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केतन-सिया, भरत तिवारी और पेपर लीक जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया।

NEET और अपराधों पर भड़कीं देवोलीना: 'ऐसी सरकार का क्या मतलब?'
खबर का निचोड़
मशहूर अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने देश में बढ़ते अपराधों और NEET परीक्षा लीक मामले को लेकर व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केतन-सिया, भरत तिवारी और पेपर लीक जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया।
देवोलीना का फूटा गुस्सा, व्यवस्था को घेरा
टेलीविजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी अपनी बेबाक राय के लिए जानी जाती हैं। देश के समसामयिक मुद्दों और संवेदनशील मामलों पर वे अक्सर अपनी आवाज बुलंद करती रही हैं। इस बार देवोलीना का गुस्सा देश की मौजूदा कानून-व्यवस्था और हाल ही में हुए परीक्षा घोटालों पर फूटा है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक उनके इस बयान की जमकर चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर शासन की जवाबदेही पर उंगली उठाई है।
केतन-सिया, भरत तिवारी और NEET का जिक्र
हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आई झकझोर देने वाली घटनाओं ने हर नागरिक को सोचने पर मजबूर कर दिया है। केतन-सिया और भरत तिवारी से जुड़े मामलों ने जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े किए, वहीं NEET परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले ने लाखों छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। देवोलीना ने इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर बिना किसी का नाम लिए सत्ता और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उनका यह बयान उन आम नागरिकों के दर्द को बयां करता है जो न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
'तो फिर सरकार का मतलब क्या है?'
देवोलीना भट्टाचार्जी ने बेहद तीखे और सीधे शब्दों में सरकार के अस्तित्व और उसके कर्तव्यों को लेकर कुछ बुनियादी सवाल दागे हैं। उन्होंने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर कोई सरकार अपने ही नागरिकों को सुरक्षित महसूस नहीं करा सकती, तो उसकी सार्थकता पर सवाल उठना लाजिमी है। उन्होंने पूछा कि जब बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाना मुश्किल साबित हो रहा हो, पीड़ितों को समय पर न्याय न मिल रहा हो और कानून का शासन सभी के लिए समान रूप से लागू न हो पा रहा हो, तो फिर जनता ऐसी व्यवस्था से क्या उम्मीद रखे? ऐसी स्थिति में सरकार होने का आखिर क्या मतलब रह जाता है?
जनता के हक और सुरक्षा की मांग
अभिनेत्री का यह रुख साफ करता है कि देश में महिलाओं, युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अब सिर्फ लीपापोती से काम नहीं चलने वाला। परीक्षा लीक जैसी घटनाएं न केवल युवाओं का भरोसा तोड़ती हैं, बल्कि उनके सालों की मेहनत पर भी पानी फेर देती हैं। वहीं दूसरी ओर, गंभीर अपराधों के मामलों में त्वरित कार्रवाई न होना अपराधियों के हौसले बुलंद करता है। देवोलीना का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अपनी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। आम जनता भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए जवाबदेही की मांग कर रही है।
वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार: संपूर्ण विवरण एवं विश्लेषण

वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार: संपूर्ण विवरण एवं विश्लेषण

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📅 25 Jun2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में वर्ष 2026 के लिए 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस वर्ष कुल 131 पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस पर की गई थी, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। यह आयोजन राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।

वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार: संपूर्ण विवरण एवं विश्लेषण
खबर का निचोड़
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में वर्ष 2026 के लिए 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस वर्ष कुल 131 पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस पर की गई थी, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। यह आयोजन राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।
विस्तृत विश्लेषण
पद्म पुरस्कारों की पृष्ठभूमि और महत्व
भारत सरकार द्वारा वर्ष 1954 में स्थापित पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं। ये पुरस्कार कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, खेल और सार्वजनिक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण और विशिष्ट सेवा प्रदान करने वाले व्यक्तियों को प्रदान किए जाते हैं। ये सम्मान किसी भी भेदभाव के बिना, योग्यता आधारित सार्वजनिक पहचान के प्रतीक हैं।
पुरस्कारों का श्रेणीकरण
पद्म पुरस्कारों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
पद्म विभूषण: यह भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, जो किसी भी क्षेत्र में असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।
पद्म भूषण: यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
पद्म श्री: यह चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।
सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' है, जो कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्रों में अद्वितीय प्रदर्शन के लिए दिया जाता है।
चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता
इन पुरस्कारों के लिए नामांकन प्रक्रिया अत्यंत व्यापक है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेश, विभिन्न मंत्रालय और प्रबुद्ध नागरिक किसी भी योग्य व्यक्ति का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं। नामांकन प्राप्त होने के बाद, प्रधानमंत्री द्वारा गठित 'पद्म पुरस्कार समिति' इन नामों की गहन समीक्षा करती है। समिति की अनुशंसाओं पर अंतिम अनुमोदन के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले 'गुमनाम नायकों' (Unsung Heroes) को भी राष्ट्रीय मंच पर सम्मान प्राप्त हो सके।
महत्वपूर्ण तथ्य और परीक्षा उपयोगी बिंदु
पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है।
पद्म पुरस्कार मरणोपरांत (Posthumously) भी दिए जा सकते हैं।
एक वर्ष में दिए जाने वाले कुल पुरस्कारों की संख्या (मरणोपरांत और विदेशियों को छोड़कर) 120 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
यह सम्मान कोई उपाधि नहीं है और प्राप्तकर्ता इसे अपने नाम के साथ प्रत्यय या उपसर्ग के रूप में उपयोग नहीं कर सकते।
पुरस्कार समारोह सामान्यतः मार्च या अप्रैल के महीने में राष्ट्रपति भवन में आयोजित किए जाते हैं।
हॉलीवुड में संघर्ष, बॉलीवुड में राज: प्रियंका चोपड़ा का बड़ा कबूलनामा

हॉलीवुड में संघर्ष, बॉलीवुड में राज: प्रियंका चोपड़ा का बड़ा कबूलनामा

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📅 25 Jun2026

ग्लोबल आइकॉन प्रियंका चोपड़ा ने कान लायंस कॉन्फ्रेंस में अपने करियर को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। प्रियंका का मानना है कि हॉलीवुड के मुकाबले उनका बॉलीवुड सफर कहीं अधिक सफल और शानदार रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह अभी भी खुद को साबित करने के संघर्ष से गुजर रही हैं।

हॉलीवुड में संघर्ष, बॉलीवुड में राज: प्रियंका चोपड़ा का बड़ा कबूलनामा
खबर का निचोड़
ग्लोबल आइकॉन प्रियंका चोपड़ा ने कान लायंस कॉन्फ्रेंस में अपने करियर को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। प्रियंका का मानना है कि हॉलीवुड के मुकाबले उनका बॉलीवुड सफर कहीं अधिक सफल और शानदार रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह अभी भी खुद को साबित करने के संघर्ष से गुजर रही हैं।
बॉलीवुड की 'क्वीन' का हॉलीवुड में संघर्ष
ग्लोबल मंचों पर भारत का परचम लहराने वाली प्रियंका चोपड़ा जोनास ने एक बार फिर अपनी बेबाकी से सबको हैरान कर दिया है। हाल ही में कान लायंस इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ क्रिएटिविटी में शामिल हुईं प्रियंका ने अपने फिल्मी सफर पर खुलकर बात की। उन्होंने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि जब काम की संतुष्टि और सफलता की बात आती है, तो उनका बॉलीवुड करियर हॉलीवुड की तुलना में मीलों आगे है।
अक्सर माना जाता है कि पश्चिम का रुख करने के बाद कलाकार अपने पुराने दिनों को पीछे छोड़ देते हैं, लेकिन प्रियंका ने इसके उलट जाकर हिंदी सिनेमा के प्रति अपना आभार और सम्मान जताया है।
"अभी तक कुछ खास नहीं किया"
कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रियंका ने एक ऐसा बयान दिया जिसने उनके फैंस को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि एक ग्लोबल स्टार के रूप में देखे जाने के बावजूद, उन्हें व्यक्तिगत तौर पर ऐसा महसूस होता है कि उन्होंने अभी तक अपने करियर में कुछ खास नहीं किया है। यह आत्ममंथन उस अभिनेत्री की तरफ से आया है जिसने 'क्वांटिको' और 'सिटाडेल' जैसे बड़े अमेरिकी प्रोजेक्ट्स में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। प्रियंका का यह बयान दिखाता है कि वह हॉलीवुड में मिलने वाले किरदारों और अपनी मौजूदा स्थिति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
पहचान बनाने की वैश्विक चुनौतियां
प्रियंका चोपड़ा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हॉलीवुड में एक दक्षिण एशियाई कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाना आज भी एक बेहद कठिन काम है। बॉलीवुड में 'बर्फी', 'मैरी कॉम' और 'बाजीराव मस्तानी' जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने के बाद, हॉलीवुड में उन्हें दोबारा जमीन से शुरुआत करनी पड़ी। प्रियंका के मुताबिक, पश्चिम के बाजार में पैर जमाने और वहां के मेकर्स को अपनी काबिलियत का अहसास कराने के लिए उन्हें आज भी लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
दोनों कश्तियों की सवारी और अनुभवों का अंतर
प्रियंका ने दोनों फिल्म इंडस्ट्रीज के काम करने के तरीके और वहां मिले सम्मान के अंतर को साफ रेखांकित किया। जहां भारत में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता के दम पर एक दशक से ज्यादा समय तक राज किया और हर तरह के कल्ट किरदार निभाए, वहीं हॉलीवुड में उन्हें अभी भी वैसी विविधता और गहराई वाले किरदारों की तलाश है। उनका यह बयान फिल्म इंडस्ट्री में चल रहे नेपोटिज्म, आउटसाइडर्स के संघर्ष और ग्लोबल सिनेमा में डायवर्सिटी (विविधता) की असल सच्चाई को भी बयां करता है।
BHARATI कार्यक्रम: भारतीय कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल

BHARATI कार्यक्रम: भारतीय कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल

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📅 25 Jun2026

एपीडा (APEDA) द्वारा शुरू किया गया 'BHARATI' (भारत का हब फॉर एग्रीटेक, रेजिलिएंस, एडवांसमेंट एंड इनक्यूबेशन फॉर एक्सपोर्ट इनोवेशन) कार्यक्रम एक महत्वाकांक्षी एक्सपोर्ट एक्सीलरेसन पहल है। इसका उद्देश्य कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स और एफपीसी (FPCs) को वैश्विक मानक के अनुरूप ढालकर भारत के 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना है।

BHARATI कार्यक्रम: भारतीय कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल
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एपीडा (APEDA) द्वारा शुरू किया गया 'BHARATI' (भारत का हब फॉर एग्रीटेक, रेजिलिएंस, एडवांसमेंट एंड इनक्यूबेशन फॉर एक्सपोर्ट इनोवेशन) कार्यक्रम एक महत्वाकांक्षी एक्सपोर्ट एक्सीलरेसन पहल है। इसका उद्देश्य कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स और एफपीसी (FPCs) को वैश्विक मानक के अनुरूप ढालकर भारत के 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना है।
विस्तृत विश्लेषण
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत एपीडा ने भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिए 'BHARATI' का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवाचार (Innovation) और निर्यात-उन्मुख उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है। यह पहल न केवल स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और स्वच्छता प्रोटोकॉल (SPS) से भी परिचित कराती है।
निर्यात क्षमता का विस्तार और रणनीतिक लक्ष्य
भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक एपीडा-अनुसूचित उत्पादों के निर्यात को 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। BHARATI कार्यक्रम इसी लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो एक मजबूत 'एक्सपोर्ट-रेडी' एंटरप्राइज पाइपलाइन तैयार कर रहा है। यह पहल विशेष रूप से उन चुनौतियों का समाधान करती है जो लघु और मध्यम उद्यमों को वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने से रोकती हैं, जैसे कि जटिल अनुपालन प्रक्रियाएं, लॉजिस्टिक्स बाधाएं और ब्रांडिंग की कमी।
पात्रता और समावेशी विकास
इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता इसकी समावेशी प्रकृति है। इसके माध्यम से केवल तकनीकी स्टार्टअप्स ही नहीं, बल्कि किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) और अनुसंधानकर्ताओं को भी एक साझा मंच मिला है। पात्रता के लिए स्टार्टअप का पांच वर्ष से कम पुराना होना और वार्षिक टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना अनिवार्य है। साथ ही, 17 से 75 वर्ष तक के उद्यमियों की भागीदारी यह प्रदर्शित करती है कि कृषि निर्यात में नवाचार किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है।
कार्यक्रम की कार्यप्रणाली और वैश्विक एक्सपोजर
BHARATI के तहत चयनित स्टार्टअप्स को 120 घंटे का सघन प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें निर्यात तत्परता, नियामक अनुपालन, बिजनेस स्केलिंग और निवेशक जुड़ाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। इसके अतिरिक्त, टॉप-परफॉर्मिंग स्टार्टअप्स को गल्फूड 2026 जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है, जो उन्हें सीधे वैश्विक खरीदारों और वितरकों के संपर्क में लाता है। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांड के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
नोडल एजेंसी: कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA)।
लक्ष्य: 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कृषि निर्यात।
प्रमुख फोकस: स्वच्छता और पादप स्वच्छता (SPS) समाधान और निर्यात-प्रथम दृष्टिकोण।
चयन प्रक्रिया: 700 से अधिक आवेदनों में से प्रथम चरण में 100 स्टार्टअप्स का चयन किया गया।
वैश्विक भागीदारी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए दुबई स्थित 'गल्फूड' जैसे आयोजनों को मंच के रूप में चुना गया है।
युवराज संग रणजी खेलने वाला पार्षद कैसे बना खूंखार सीरियल रेपिस्ट? एनकाउंटर में ढेर

युवराज संग रणजी खेलने वाला पार्षद कैसे बना खूंखार सीरियल रेपिस्ट? एनकाउंटर में ढेर

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📅 25 Jun2026

क्रिकेट के मैदान पर युवराज सिंह जैसे दिग्गजों के साथ रणजी खेलने वाला और बाद में चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद बना सतिंदर सिंह उर्फ 'सत्तू' अपराध के दलदल में ऐसा धंसा कि उसका अंत बेहद खौफनाक रहा। जेल से फरार होकर 6 लड़कियों के अपहरण और बलात्कार को अंजाम देने वाले इस सीरियल रेपिस्ट को मुजफ्फरनगर में पुलिस ने एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया है।

युवराज संग रणजी खेलने वाला पार्षद कैसे बना खूंखार सीरियल रेपिस्ट? एनकाउंटर में ढेर
खबर का निचोड़:
क्रिकेट के मैदान पर युवराज सिंह जैसे दिग्गजों के साथ रणजी खेलने वाला और बाद में चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद बना सतिंदर सिंह उर्फ 'सत्तू' अपराध के दलदल में ऐसा धंसा कि उसका अंत बेहद खौफनाक रहा। जेल से फरार होकर 6 लड़कियों के अपहरण और बलात्कार को अंजाम देने वाले इस सीरियल रेपिस्ट को मुजफ्फरनगर में पुलिस ने एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया है।
खेल के मैदान से जरायम की दुनिया तक
एक वक्त था जब सतिंदर सिंह उर्फ सत्तू के हाथों में क्रिकेट का बल्ला हुआ करता था। वह खेल के मैदान पर अपनी किस्मत आजमा रहा था और उसने प्रथम श्रेणी क्रिकेट यानी रणजी ट्रॉफी में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। इस दौरान उसने भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी युवराज सिंह के साथ भी मैदान साझा किया। खेल में नाम कमाने के बाद उसने राजनीति का रुख किया और साल 2007 में चंडीगढ़ नगर निगम का पार्षद चुनकर सत्ता के गलियारों में कदम रखा। लेकिन किसे पता था कि सफेदपोश और खिलाड़ी की छवि के पीछे एक खूंखार अपराधी छिपा है।
जेल से फरारी और दहशत का नया दौर
सत्तू का अतीत जितना चमकदार नजर आता था, उसका वर्तमान उतना ही स्याह हो चुका था। गंभीर अपराधों के आरोप में वह सलाखों के पीछे दिन काट रहा था, लेकिन इसी साल फरवरी के महीने में वह पुलिस को चकमा देकर जेल से फरार हो गया। जेल की चहारदीवारी से बाहर आते ही उसने मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में खौफ का दूसरा नाम बनने की ठान ली। उसने एक के बाद एक कई संगीन वारदातों को अंजाम देकर कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दी।
6 मासूमों का अपहरण और अस्मत पर डाका
जेल से भागने के बाद सत्तू ने अपनी हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। वह एक सीरियल रेपिस्ट के रूप में तब्दील हो चुका था। उसने कथित तौर पर 6 लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाया। वारदात का तरीका इतना खौफनाक था कि वह पहले लड़कियों का अपहरण करता और फिर बंदूक की नोंक पर उनके साथ बलात्कार करता था। इन वारदातों के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था और पुलिस लगातार उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी।
मुजफ्फरनगर में खाकी का एक्शन, एनकाउंटर में अंत
सत्तू की तलाश में जुटी मुजफ्फरनगर पुलिस को आखिरकार उसकी सटीक लोकेशन हाथ लगी। पुलिस की विशेष टीम ने उसे चारों तरफ से घेरकर आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन खुद को फंसता देख इस शातिर अपराधी ने पुलिस टीम पर ही फायरिंग झोंक दी। आत्मरक्षार्थ में पुलिस की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की गई। दोनों ओर से हुई इस मुठभेड़ में गोलियां लगने के कारण सीरियल रेपिस्ट सत्तू गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस एनकाउंटर के साथ ही खेल और राजनीति से शुरू होकर अपराध के खूनी रास्ते पर खत्म होने वाली एक खौफनाक दास्तान का अंत हो गया।

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