
हवाई सफर फिर होगा महंगा, इंडिगो ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज
इंडिगो एयरलाइंस ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ा दिया है। नए नियम 6 अक्टूबर को रात 12:01 बजे से लागू होंगे। इसके बाद एयरलाइन टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को ₹375 से लेकर ₹10,000 तक अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
इंडिगो एयरलाइंस ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ा दिया है। नए नियम 6 अक्टूबर को रात 12:01 बजे से लागू होंगे। इसके बाद एयरलाइन टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को ₹375 से लेकर ₹10,000 तक अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
एटीएफ की कीमतों का सीधा असर
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने एयरलाइंस कंपनियों का बजट बिगाड़ दिया है। किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च में लगभग 40% हिस्सा ईंधन का होता है। इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि जेट ईंधन की वैश्विक और घरेलू दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा था। इसी लागत की भरपाई करने के लिए फ्यूल चार्ज में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है।
जानिए किस रूट पर कितना बढ़ेगा किराया
इस फैसले का सीधा असर हर वर्ग के हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है। नई दरों के तहत घरेलू रूटों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रति टिकट ₹375 से लेकर ₹1,300 तक का अतिरिक्त फ्यूल चार्ज देना होगा। यह शुल्क दूरी और रूट के आधार पर तय किया जाएगा।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यह बढ़ोतरी और भी भारी पड़ने वाली है। विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रति टिकट ₹1,000 से लेकर ₹10,000 तक अतिरिक्त भुगतान करना होगा। लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूटों पर यात्रा करने वालों के लिए यह एक बड़ा झटका है।
6 अक्टूबर से लागू होंगी नई दरें
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये नए और संशोधित फ्यूल चार्ज 6 अक्टूबर को रात 12:01 बजे के बाद की जाने वाली सभी नई बुकिंग पर प्रभावी होंगे। इसका मतलब है कि जिन यात्रियों ने 6 अक्टूबर से पहले अपनी टिकट बुक करा ली है, उन पर इस बढ़ी हुई दर का कोई असर नहीं पड़ेगा और उन्हें पुराने किराए पर ही यात्रा करने की सुविधा मिलेगी।
त्योहारी सीजन में यात्रियों की जेब पर बढ़ा बोझ
देश में भारत के सबसे बड़े एयरलाइन ऑपरेटर इंडिगो के इस कदम के बाद एविएशन सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए लोग पहले से ही अपनी छुट्टियों और यात्राओं की योजना बना रहे हैं। ऐसे समय में किराए में हुई इस बढ़ोतरी से उन परिवारों और यात्रियों का बजट बिगड़ सकता है जो आने वाले दिनों में हवाई सफर की तैयारी में थे।

मुंबई के शिवाजी पार्क विवाद में क्यों घिरे अभिजीत दीपके?
मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद 'शिवाजी पार्क सिटीज़न्स फोरम' ने प्रदर्शन के आयोजक और CJP फाउंडर अभिजीत दीपके के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की जोरदार मांग उठाई है।
खबर का निचोड़
मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद 'शिवाजी पार्क सिटीज़न्स फोरम' ने प्रदर्शन के आयोजक और CJP फाउंडर अभिजीत दीपके के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की जोरदार मांग उठाई है।
शिवाजी पार्क में प्रदर्शन और एक बुजुर्ग की मौत
गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस भीड़भाड़ वाले आयोजन में 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा और वे बेहोश होकर गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों और आयोजकों की मदद से उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
हत्या का केस दर्ज करने की मांग क्यों उठी?
पिल्लई के निधन की खबर फैलते ही स्थानीय निवासियों और 'शिवाजी पार्क सिटीज़न्स फोरम' का गुस्सा भड़क उठा। फोरम का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाने से पहले जरूरी सुरक्षा मापदंडों, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं और एम्बुलेंस का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया था। नागरिकों का कहना है कि आयोजकों की लापरवाही और कुप्रबंधन के कारण ही पिल्लई को समय पर सही डॉक्टरी इलाज मिलने में देरी हुई। इसी आधार पर फोरम ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस घटना को महज एक प्राकृतिक मौत न मानकर अभिजीत दीपके पर हत्या का केस दर्ज किया जाए।
आयोजकों की सफाई और प्रशासनिक रुख
दूसरी तरफ, अभिजीत दीपके और उनके समर्थकों का दावा है कि पिल्लई की मौत एक बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण मेडिकल इमरजेंसी थी, जिसे आयोजन की व्यवस्था से जोड़कर देखना गलत है। आयोजकों का कहना है कि तबीयत बिगड़ते ही मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की हर संभव कोशिश की गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। पार्क में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत की वास्तविक वजह और आयोजकों की वैधानिक जवाबदेही स्पष्ट हो सके।

वैभव सूर्यवंशी को क्यों नहीं मिल रहा मौका? गंभीर ने तोड़ी चुप्पी
टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल न करने की वजह साफ कर दी है। गंभीर के मुताबिक, किसी भी खिलाड़ी का चयन सोशल मीडिया के दबाव में नहीं, बल्कि टीम की जरूरतों और खिलाड़ियों के मौजूदा प्रदर्शन के आधार पर तय होता है।
टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल न करने की वजह साफ कर दी है। गंभीर के मुताबिक, किसी भी खिलाड़ी का चयन सोशल मीडिया के दबाव में नहीं, बल्कि टीम की जरूरतों और खिलाड़ियों के मौजूदा प्रदर्शन के आधार पर तय होता है।
सोशल मीडिया नहीं, टीम की जरूरत तय करेगी प्लेइंग XI
भारतीय क्रिकेट टीम में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब बात देश के लिए खेलने की आती है तो अनुभव और टीम संतुलन सबसे ऊपर रखे जाते हैं। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच काफी उत्सुकता है, लेकिन हेड कोच गौतम गंभीर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी खिलाड़ी की एंट्री सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के आधार पर नहीं हो सकती।
गंभीर ने साफ तौर पर कहा कि वैभव सूर्यवंशी में असाधारण प्रतिभा है और वे भारतीय क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें सही समय पर ही मौका दिया जाएगा। इस समय टीम प्रबंधन का पूरा ध्यान अनुभवी और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को बैक करने पर है।
अभिषेक और संजू के अनुभव पर भरोसा
मुख्य कोच ने अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित किया है। किसी भी नए खिलाड़ी को जगह देने के लिए अचानक इन स्थापित खिलाड़ियों को बाहर नहीं किया जा सकता।
गंभीर के अनुसार, "अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों के पास लंबा अनुभव है और वे टीम की योजनाओं का अहम हिस्सा हैं। जब आपके पास टॉप ऑर्डर में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी मौजूद हों, तो नए खिलाड़ियों को थोड़ा इंतजार करना पड़ता है। हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना होता है और वैभव को भी अपनी प्रतिभा साबित करने के पर्याप्त मौके सही समय पर मिलेंगे।"
ड्रेसिंग रूम का माहौल और लंबा सफर
भारतीय टीम प्रबंधन का मानना है कि किसी भी युवा खिलाड़ी को सीधे बड़े मुकाबलों में उतारने के बजाय उसे ड्रेसिंग रूम का हिस्सा बनाकर अंतरराष्ट्रीय माहौल में ढलने का मौका देना ज्यादा बेहतर होता है। वैभव सूर्यवंशी को टीम के साथ रखने का मुख्य मकसद उन्हें वरिष्ठ खिलाड़ियों से सीखने और दबाव से निपटने की कला सिखाना है।
गंभीर का यह बयान उन प्रशंसकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो हर मैच के बाद प्लेइंग इलेवन में बड़े बदलावों की मांग करते हैं। कोच ने यह संदेश दिया है कि टीम का चयन एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत होता है, न कि किसी ट्रेंड के आधार पर।

एमपी में शिक्षक भर्ती पर बवाल: राहुल गांधी ने सीएम मोहन यादव को घेरा
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2025 को लेकर सियासत गर्मा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर खाली पदों के मुकाबले कम भर्तियों पर सवाल उठाए हैं। राहुल ने 1 लाख से अधिक रिक्तियों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांगें पूरी करने का आग्रह किया है।
खबर का निचोड़
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2025 को लेकर सियासत गर्मा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर खाली पदों के मुकाबले कम भर्तियों पर सवाल उठाए हैं। राहुल ने 1 लाख से अधिक रिक्तियों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांगें पूरी करने का आग्रह किया है।
राहुल गांधी की सीएम मोहन यादव को चिट्ठी
मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती 2025 को लेकर जारी अभ्यर्थियों के आंदोलन को अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक समर्थन मिल गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र भेजकर इस पूरे मुद्दे पर कड़ा ऐतराज जताया है। राहुल गांधी ने अपने पत्र के जरिए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भारी कमी और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
1 लाख पद खाली फिर भी ऊंट के मुंह में जीरा भर्ती
राहुल गांधी ने राज्य सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस समय 1 लाख से भी अधिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इसके बावजूद सरकार ने शिक्षक भर्ती-2025 में बहुत सीमित संख्या में पद निकाले हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि वर्ग-3 के लिए केवल 13,089 और वर्ग-2 के लिए महज 10,800 पदों पर ही भर्ती निकाली गई है। युवाओं की भारी संख्या और रिक्त पदों के विशाल आंकड़े को देखते हुए यह भर्ती 'ऊंट के मुंह में जीरा' के समान है।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के प्रति सहानुभूति की मांग
राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय से अभ्यर्थी पदों में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। राहुल गांधी ने पत्र में स्पष्ट किया कि इन अभ्यर्थियों की मांग पूरी तरह से जायज है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि सरकार अभ्यर्थियों के प्रति सख्त रवैया अपनाने के बजाय सहानुभूतिपूर्ण रुख दिखाए। उन्होंने मांग की कि खाली पड़े पदों के अनुपात में भर्ती की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए ताकि योग्य और शिक्षित युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके।
मध्य प्रदेश में शिक्षा संकट और युवाओं का आक्रोश
शिक्षकों की कमी का सीधा असर मध्य प्रदेश की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। हजारों स्कूल बिना पर्याप्त शिक्षकों के चल रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, वर्षों से तैयारी कर रहे लाखों युवा भर्ती की घोषणा का इंतजार कर रहे थे, लेकिन कम पदों ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया है। राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद अब यह मामला राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है।

कॉर्पोरेट इंडिया का बदला मूड, CA-CS बने पहली पसंद
भारतीय जॉब मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। AON कैंपस स्टडी रिपोर्ट 2026-27 के अनुसार, कंपनियों की पहली पसंद अब CA और CS बन रहे हैं। वित्तीय अनुशासन और रेगुलेटरी नियमों की सख्ती के कारण कॉर्पोरेट जगत में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है, जिसने पारंपरिक रूप से लोकप्रिय MBA और इंजीनियरिंग डिग्री धारकों को पीछे छोड़ दिया है।
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भारतीय जॉब मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। AON कैंपस स्टडी रिपोर्ट 2026-27 के अनुसार, कंपनियों की पहली पसंद अब CA और CS बन रहे हैं। वित्तीय अनुशासन और रेगुलेटरी नियमों की सख्ती के कारण कॉर्पोरेट जगत में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है, जिसने पारंपरिक रूप से लोकप्रिय MBA और इंजीनियरिंग डिग्री धारकों को पीछे छोड़ दिया है।
डिग्री के बाजार में नए दिग्गजों का कब्जा
देश के कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरियों की प्राथमिकताएं अब तेजी से बदल रही हैं। कभी जॉब मार्केट पर एकतरफा राज करने वाले MBA और इंजीनियरिंग स्नातकों का दबदबा अब घटता दिख रहा है। इसकी जगह चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) और कंपनी सेक्रेटरीज (CS) की मांग में अभूतपूर्व उछाल आया है। कंपनियां अब सिर्फ बिजनेस एक्सपेंशन पर ध्यान देने के बजाय वित्तीय मजबूती और सख्त अनुपालन को प्राथमिकता दे रही हैं।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
AON कैंपस स्टडी रिपोर्ट 2026-27 के आंकड़े कॉर्पोरेट जगत के इस नए रुझान की स्पष्ट गवाही देते हैं। अध्ययन के अनुसार, देश की 56% कंपनियां इस साल अपने यहां CA और CS की भर्ती बढ़ाने की योजना बना रही हैं। वहीं, 33% कंपनियों ने इनकी भर्ती में कोई बदलाव न करते हुए मौजूदा स्तर को बनाए रखने का फैसला किया है।
इस रिपोर्ट में सबसे आकर्षक पहलू नेट हायरिंग इंटेंट का है। CA और CS के लिए नेट हायरिंग इंटेंट +45% दर्ज किया गया है, जो इस अध्ययन में शामिल सभी प्रोफेशनल टैलेंट ग्रुप्स में सबसे अधिक है। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि वित्तीय विशेषज्ञों की मांग मार्केट में किस कदर हावी है।
MBA और इंजीनियरिंग की मांग में गिरावट
दूसरी तरफ, प्रबंधन और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े पारंपरिक पाठ्यक्रमों के लिए जॉब मार्केट थोड़ा सुस्त नजर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, MBA स्नातकों के लिए नेट हायरिंग इंटेंट घटकर -10% पर आ गया है। इसी तरह, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी गिरावट देखी गई है, जहां नेट हायरिंग इंटेंट -4% दर्ज किया गया।
मांग में इस बड़े बदलाव की वजह
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते रेगुलेटरी ढांचे ने कंपनियों को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। आज के दौर में कॉर्पोरेट गवर्नेंस, टैक्स अनुपालन, जोखिम प्रबंधन और पारदर्शी वित्तीय रिपोर्टिंग किसी भी कंपनी के अस्तित्व के लिए अनिवार्य हो गए हैं। CA और CS पेशेवर इन क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते हैं, जिससे कंपनियों के लिए इनकी उपयोगिता किसी भी अन्य मैनेजमेंट या टेक्निकल डिग्री से अधिक हो गई है।

बॉलीवुड में छिड़ी नई जंग: पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह पर दागे तीखे सवाल
मुंबई में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अभिनेता पीयूष मिश्रा ने उन पर तीखा हमला बोलते हुए 'चुनिंदा मुद्दों' पर बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि फ्लाईदुबई के जांबाज पायलट और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की घटना पर नसीर साहब खामोश क्यों रहे?
मुंबई में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अभिनेता पीयूष मिश्रा ने उन पर तीखा हमला बोलते हुए 'चुनिंदा मुद्दों' पर बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि फ्लाईदुबई के जांबाज पायलट और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की घटना पर नसीर साहब खामोश क्यों रहे?
पीयूष मिश्रा का तीखा प्रहार
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और रंगकर्मी पीयूष मिश्रा अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में मुंबई में सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में जब अभिनेता नसीरुद्दीन शाह पहुंचे, तो पीयूष मिश्रा ने उन पर सीधा निशाना साधा। पीयूष ने नसीरुद्दीन शाह की मंशा और उनके सामाजिक-राजनीतिक रुख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि सार्वजनिक हस्तियों को हर मुद्दे पर निष्पक्षता दिखानी चाहिए, न कि केवल अपनी सहूलियत के हिसाब से अपनी आवाज उठानी चाहिए।
पायलट स्मित मच्छार की अनदेखी पर सवाल
पीयूष मिश्रा ने फ्लाईदुबई की उस घटना का जिक्र किया जिसमें पायलट स्मित मच्छार ने अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस से 180 यात्रियों की जान बचाई थी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना और एक भारतीय पायलट की जांबाजी पर नसीरुद्दीन शाह जैसे वरिष्ठ अभिनेता ने एक शब्द भी नहीं कहा। पीयूष के अनुसार, जब कोई भारतीय वैश्विक मंच पर या संकट की घड़ी में ऐसा महान कार्य करता है, तो देश के जिम्मेदार नागरिकों और जानी-मानी हस्तियों को उसकी सराहना करनी चाहिए। ऐसी उपलब्धियों पर चुप्पी साधना समझ से परे है।
एलपीयू हादसे पर चुप्पी क्यों?
पायलट की तारीफ न करने के साथ-साथ पीयूष मिश्रा ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हुए दर्दनाक हादसे का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एलपीयू में हुई घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था और छात्रों के भविष्य तथा सुरक्षा से जुड़े कई सवाल खड़े किए थे। इसके बावजूद नसीरुद्दीन शाह ने उस समय पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। पीयूष ने सवाल किया कि जब देश के छात्र किसी संकट में होते हैं या किसी बड़े संस्थान में दुर्घटना होती है, तब इन हस्तियों की संवेदनशीलता कहां चली जाती है?
चुनिंदा मुद्दों पर बोलने का आरोप
पीयूष मिश्रा के इन बयानों ने सोशल मीडिया और बॉलीवुड के गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि किसी एक वर्ग या चुनिंदा राजनीतिक एजेंडे के तहत विरोध प्रदर्शनों में शामिल होना और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व सामाजिक घटनाओं को नजरअंदाज करना सही नहीं है। नसीरुद्दीन शाह पहले भी अपने राजनीतिक बयानों और सामाजिक रुख को लेकर चर्चा और विवादों में रहे हैं, लेकिन पीयूष मिश्रा के इन तीखे सवालों ने उन्हें एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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