
हरियाणा में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका: HSSC CET ग्रुप-D आवेदन शुरू...
हरियाणा में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर। कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने ग्रुप-D के पदों के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग्य उम्मीदवार अब आधिकारिक पोर्टल के जरिए अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। यह परीक्षा राज्य में विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेगी।
हरियाणा में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर। कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने ग्रुप-D के पदों के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग्य उम्मीदवार अब आधिकारिक पोर्टल के जरिए अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। यह परीक्षा राज्य में विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेगी।
सरकारी नौकरी पाने का सीधा रास्ता
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने ग्रुप-D के लिए होने वाली कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी सीईटी 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। राज्य के सरकारी विभागों में भर्ती की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए प्रदेश के सरकारी तंत्र में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों को भरा जाएगा। जो भी उम्मीदवार अपनी योग्यता सिद्ध करना चाहते हैं, उनके लिए ऑनलाइन आवेदन करने का दरवाजा खुल चुका है।
आवेदन की प्रक्रिया और समय-सीमा
आवेदन की प्रक्रिया 19 जून 2026 से शुरू हो चुकी है। सभी इच्छुक अभ्यर्थी बिना किसी देरी के अपना आवेदन ऑनलाइन माध्यम से जमा कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 3 जुलाई 2026 तय की गई है। इस दौरान उम्मीदवारों को अपनी पूरी जानकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों का विवरण सावधानीपूर्वक भरना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद किसी भी स्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए अभ्यर्थियों को समय रहते अपनी प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।
परीक्षा की तैयारी और पात्रता
ग्रुप-D स्तर के इस कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट में शामिल होने के लिए शैक्षणिक योग्यता 10+2 निर्धारित की गई है। आवेदन करने से पहले नोटिफिकेशन को ध्यानपूर्वक पढ़ना बेहद आवश्यक है, ताकि उम्मीदवार अपनी आयु सीमा, पात्रता और अन्य आवश्यक शर्तों को पूरी तरह समझ सकें। सीईटी केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि राज्य सरकार की भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का पहला और अनिवार्य चरण है। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करेंगे, वही आगामी ग्रुप-D की भर्ती प्रक्रिया के लिए योग्य माने जाएंगे।
पारदर्शिता और चयन का आधार
एचएसएससी की ओर से आयोजित होने वाली यह परीक्षा पूरी तरह से मेरिट और पारदर्शिता पर आधारित होगी। आयोग ने परीक्षा के आयोजन, चयन प्रक्रिया और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर विस्तृत जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक अधिसूचना को पूरी तरह से पढ़ें और अपनी तैयारी को दिशा दें। हरियाणा सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से सीईटी का यह ढांचा तैयार किया गया है, जिससे योग्य उम्मीदवारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिल सके।

IOCL में 335 पदों पर भर्ती, बिना परीक्षा मिलेगी एंट्री
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने वेस्टर्न रीजन में टेक्नीशियन, ट्रेड और ग्रेजुएट अप्रेंटिस के 335 पदों पर आवेदन मंगाए हैं। उम्मीदवारों का चयन बिना किसी परीक्षा के, केवल मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा। इसके लिए 5 अक्टूबर से 4 नवंबर तक नि:शुल्क आवेदन किया जा सकता है।
खबर का निचोड़
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने वेस्टर्न रीजन में टेक्नीशियन, ट्रेड और ग्रेजुएट अप्रेंटिस के 335 पदों पर आवेदन मंगाए हैं। उम्मीदवारों का चयन बिना किसी परीक्षा के, केवल मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा। इसके लिए 5 अक्टूबर से 4 नवंबर तक नि:शुल्क आवेदन किया जा सकता है।
इंडियन ऑयल में करियर बनाने का सुनहरा मौका
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं और तकनीकी क्षेत्र में ट्रेनिंग की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। महारत्न कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के मार्केटिंग डिवीज़न ने वेस्टर्न रीजन के तहत 335 अप्रेंटिस पदों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत चुने गए उम्मीदवारों को 12 महीने की अवधि के लिए स्टाइपेंड के साथ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी।
पदों का विवरण और श्रेणियां
इस भर्ती अभियान के माध्यम से अलग-अलग योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। कुल 335 पदों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
टेक्नीशियन अप्रेंटिस
ट्रेड अप्रेंटिस
ग्रेजुएट अप्रेंटिस
अलग-अलग स्ट्रीम्स और ट्रेड्स के लिए पदों की संख्या निर्धारित की गई है, जिससे डिप्लोमा, आईटीआई और डिग्री धारक उम्मीदवार अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
बिना लिखित परीक्षा के चयन, मेरिट से बनेगी बात
इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि उम्मीदवारों को किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा या कठिन इंटरव्यू दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और मेरिट आधारित रखी गई है। अभ्यर्थियों द्वारा उनकी शैक्षणिक योग्यता (क्वालिफाइंग परीक्षा) में प्राप्त अंकों के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसी मेरिट लिस्ट के जरिए योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करके सीधे ट्रेनिंग के लिए चुना जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
इच्छुक और योग्य उम्मीदवार IOCL के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 5 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 4 नवंबर रखी गई है।
आवेदकों के लिए एक राहत की बात यह भी है कि इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं रखा गया है। सभी वर्गों के उम्मीदवार बिना किसी शुल्क के इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
12 महीने की ट्रेनिंग से संवरेगा भविष्य
चयनित उम्मीदवारों को 12 महीने की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग के दौरान कोर इंडस्ट्री का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। देश की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक में काम करने का यह अनुभव युवाओं के भविष्य के करियर के लिए बेहद मददगार साबित होगा। आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें।

वैध वीजा और भारत में प्रवेश के अधिकार पर दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय
दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वैध वीजा होने मात्र से किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश का कोई अंतर्निहित या कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार नहीं मिल जाता। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के आधार पर तुर्कमेनिस्तान की नागरिक की याचिका खारिज करते हुए दिया गया।
सारांश (Summary):
दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वैध वीजा होने मात्र से किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश का कोई अंतर्निहित या कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार नहीं मिल जाता। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के आधार पर तुर्कमेनिस्तान की नागरिक की याचिका खारिज करते हुए दिया गया।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
मामला एवं कानूनी पृष्ठभूमि
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब तुर्कमेनिस्तान की एक नागरिक को वैध बिजनेस वीजा होने के बावजूद नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रवेश से रोक दिया गया और उसे उसी दिन वापस लौटना पड़ा। याचिकाकर्ता ने अपने पति, जो समान श्रेणी के वीजा पर आए थे और जिन्हें प्रवेश की अनुमति दी गई थी, के साथ हुए कथित भेदभाव और बिना कारण बताए प्रवेश अस्वीकार किए जाने को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था।
न्यायालय का केंद्रीय तर्क और संप्रभु शक्ति
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वीजा जारी करना, प्रवेश से इनकार करना और आव्रजन (इमिग्रेशन) मंजूरी देना राज्य के संप्रभु कार्य हैं, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और प्रशासनिक विवेक जैसे गंभीर पहलू शामिल होते हैं। अदालत ने रेखांकित किया कि वीजा की आवश्यकताओं को पूरा करना और देश में वास्तविक प्रवेश पाना दोनों अलग-अलग विषय हैं। वैधानिक ढांचा यह मानता है कि केवल वीजा होने मात्र से भारत में प्रवेश का कोई पूर्ण और अशर्त अधिकार स्वतः सृजित नहीं होता।
समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) पर निर्णय
न्यायालय ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उसके पति को अनुमति मिलना और उसे रोका जाना अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। अदालत के अनुसार, चूंकि याचिकाकर्ता के संबंध में विशिष्ट 'प्रतिकूल इनपुट्स' (Adverse Inputs) प्राप्त हुए थे, इसलिए दोनों मामलों को एक समान नहीं माना जा सकता। राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में सक्षम प्राधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों के आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का तीसरा चरण और नवीकरणीय ऊर्जा निकासी की चुनौतियाँ
केंद्र सरकार ने 1.86 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) के तीसरे चरण को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सुगम बनाना है। इसमें पहली बार बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को शामिल किया गया है।
सारांश (Summary):
केंद्र सरकार ने 1.86 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) के तीसरे चरण को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सुगम बनाना है। इसमें पहली बार बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को शामिल किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और उसका महत्व
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बड़े पैमाने पर सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय पावर ग्रिड में एकीकृत करने के लिए समर्पित ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचा तैयार करने का एक प्रमुख सरकारी कार्यक्रम है। जैसे-जैसे भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेजी से विस्तार कर रही है, वैसे-वैसे ग्रिड में बिजली के संप्रेषण और संतुलन की चुनौती भी बढ़ रही है। 'ऊर्जा निकासी' (Evacuation) से तात्पर्य नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली को उन स्थानों तक स्थानांतरित करना है जहाँ इसकी वास्तव में खपत होती है।
तीसरे चरण की मुख्य विशेषताएँ और बैटरी स्टोरेज
जीईसी के तीसरे चरण में पहली बार एक समर्पित बैटरी ऊर्जा भंडारण घटक को शामिल किया गया है, जिसमें 50 गीगावाट-घंटे (GWh) के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की तैनाती का प्रावधान है। ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ उच्च उत्पादन अवधि के दौरान अतिरिक्त नवीकरणीय बिजली का भंडारण करती हैं और मांग बढ़ने तथा उत्पादन कम होने पर इसे डिस्चार्ज करती हैं। यह प्रणाली नवीकरणीय ऊर्जा को सुरक्षित रखने और ग्रिड की अस्थिरता को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ट्रांसमिशन बाधाएँ और वित्तीय आवंटन
विशेष रूप से दिन के समय उच्च सौर उत्पादन के दौरान ट्रांसमिशन बाधाएँ और ग्रिड की भीड़भाड़ के कारण नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी बाधित होती है। इस समस्या से निपटने के लिए स्वीकृत 1.86 लाख करोड़ रुपये में से 1.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) के लिए, 50,000 करोड़ रुपये 50 GWh BESS के लिए और 54,082 करोड़ रुपये केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFS) के रूप में आवंटित किए गए हैं। केंद्रीय वित्तीय सहायता का उद्देश्य अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्कों को ऑफसेट करना और उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत को कम रखना है।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल संवर्ग बनाम आईपीएस प्रतिनियुक्ति विवाद और विधायी टकराव
उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिकाओं की सुनवाई से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के वरिष्ठ कमांड पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की प्रतिनियुक्ति को लेकर पुराना संस्थागत विवाद फिर से गहरा गया है। यह विवाद संवर्ग प्रबंधन, पदोन्नति में ठहराव और न्यायिक निर्देशों बनाम विधायी कार्रवाइयों के बीच संतुलन से जुड़ा है।
सारांश (Summary):
उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिकाओं की सुनवाई से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के वरिष्ठ कमांड पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की प्रतिनियुक्ति को लेकर पुराना संस्थागत विवाद फिर से गहरा गया है। यह विवाद संवर्ग प्रबंधन, पदोन्नति में ठहराव और न्यायिक निर्देशों बनाम विधायी कार्रवाइयों के बीच संतुलन से जुड़ा है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
हालिया विवाद और न्यायिक पृष्ठभूमि
शीर्ष अदालत ने 23 मई 2025 के अपने ऐतिहासिक फैसले (संजय प्रकाश बनाम भारत संघ) के अनुपालन न होने पर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की है। इस फैसले में न्यायालय ने सीएपीएफ के ग्रुप-ए कार्यपालिका संवर्गों को 'संगठित ग्रुप-ए सेवा' (OGAS) के रूप में मान्यता दी थी और वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) तक आईपीएस प्रतिनियुक्ति को दो साल की समय सीमा के भीतर क्रमिक रूप से कम करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद सरकार द्वारा 46 आईपीएस अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाए जाने के बाद यह कानूनी और प्रशासनिक टकराव उत्पन्न हुआ है।
अंतर्निहित विवाद और संवर्ग ठहराव की समस्या
सीएपीएफ (सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी) के अपने स्वयं के ग्रुप-ए अधिकारी होते हैं जो सहायक कमांडेंट के रूप में शामिल होते हैं। पारंपरिक रूप से डीआईजी के 20% और आईजी के 50% पद आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित रहे हैं। संवर्ग अधिकारियों का तर्क है कि उच्च पदों पर बाहरी प्रतिनियुक्ति से गंभीर पदोन्नति अवरोध (स्टैग्नेशन) उत्पन्न होता है, जिससे वर्षों की उत्कृष्ट सेवा के बाद भी उन्हें उच्च कमान पद नहीं मिल पाते और उनका मनोबल प्रभावित होता है।
नया सीएपीएफ अधिनियम और संवैधानिक प्रश्न
न्यायालय के 2025 के आदेश के प्रभाव को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम पारित किया है। नए कानून में 50 प्रतिशत आईजी पद, कम से कम 67 प्रतिशत एडीजी पद और सभी स्पेशल डीजी तथा डीजी पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, इसमें यह भी प्रावधान है कि इसके तहत बनाए गए नियम न्यायालयों के किसी भी असंगत आदेश या निर्णय के बावजूद प्रभावी होंगे। वर्तमान में यह मामला इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह विधायी ढांचा न्यायिक समीक्षा और शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप है।

G7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडारों से क्रूड ऑयल और डीजल जारी करने का निर्णय
ग्रुप ऑफ सेवन (G7) देशों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने आपातकालीन भंडारों से 100 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल और डीजल को चार महीने के भीतर चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमति व्यक्त की है। यह समन्वित कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के माध्यम से उठाया जा रहा है।
सारांश (Summary):
ग्रुप ऑफ सेवन (G7) देशों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने आपातकालीन भंडारों से 100 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल और डीजल को चार महीने के भीतर चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमति व्यक्त की है। यह समन्वित कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के माध्यम से उठाया जा रहा है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
G7 संगठन का परिचय और विकास
जी-7 (Group of Seven) दुनिया की सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक समूह है, जिसके सदस्य देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इसकी स्थापना वर्ष 1975 में तेल संकट के दौर में वैश्विक आर्थिक मुद्दों के समाधान के लिए की गई थी। वर्ष 1998 में रूस के जुड़ने से यह समूह कुछ समय के लिए 'जी-8' बन गया था, किंतु 2014 में रूस के निष्कासन के बाद यह पुनः 'जी-7' के स्वरूप में आ गया। वर्तमान में यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था के अलावा विदेश नीति, सुरक्षा, व्यापार, जलवायु और विकास जैसे व्यापक वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है।
शासन प्रणाली और कार्यप्रणाली
जी-7 समूह का कोई स्थायी सचिवालय, प्रशासनिक ढांचा या निश्चित प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देश नहीं होते हैं। इस समूह की अध्यक्षता सदस्य देशों के बीच प्रतिवर्ष कैलेण्डर वर्ष के आधार पर चक्रानुक्रम (रोटेशन) में बदलती रहती है। यूरोपीय संघ (EU) इस समूह का सदस्य तो है, लेकिन वह इसकी घूर्णन अध्यक्षता नहीं संभालता है। अध्यक्षता करने वाला देश ही उस वर्ष के एजेंडे और मुख्य प्राथमिकताओं को तय करता है। इस समूह के तमाम महत्वपूर्ण निर्णय आम सहमति (Consensus) के आधार पर लिए जाते हैं।
हालिया आपातकालीन निर्णय और ऊर्जा संकट
हाल ही में G7 देशों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के साथ मिलकर भू-राजनीतिक संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 100 मिलियन बैरल डीजल और कच्चे तेल को आपातकालीन भंडारों से मुक्त करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत शुरुआती 20 दिनों में ही भारी मात्रा में डीजल की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वैश्विक बाजारों पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके और सदस्य देश एक-दूसरे पर ऊर्जा निर्यात प्रतिबंध न लगाने के लिए प्रतिबद्ध रहें।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App