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गुप्त साम्राज्य: प्राचीन भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इसके प्रमुख आयाम

गुप्त साम्राज्य: प्राचीन भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इसके प्रमुख आयाम

Delight News
📅 24 Jun2026

गुप्त साम्राज्य (चतुर्थ से छठी शताब्दी ईस्वी) को प्राचीन भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' माना जाता है। कला, वास्तुकला, विज्ञान, साहित्य और दर्शन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति के कारण यह काल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोगों (State PSCs) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गुप्त साम्राज्य: प्राचीन भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इसके प्रमुख आयाम
गुप्त साम्राज्य (चतुर्थ से छठी शताब्दी ईस्वी) को प्राचीन भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' माना जाता है। कला, वास्तुकला, विज्ञान, साहित्य और दर्शन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति के कारण यह काल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोगों (State PSCs) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्राचीन भारत का गुप्त साम्राज्य राजनीतिक एकीकरण, सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। महाराजा श्रीगुप्त द्वारा स्थापित इस साम्राज्य ने चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य' के नेतृत्व में अपनी चरम सीमा प्राप्त की। वर्तमान में राष्ट्रीय अभिलेखागार और पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के हालिया शोधों के माध्यम से इस काल के प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आयामों को परीक्षा के लिए नए संदर्भों में पुनर्गठित किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis)
राजनीतिक एकीकरण और प्रमुख शासक
गुप्त वंश की स्थापना लगभग 275 ईस्वी में श्रीगुप्त द्वारा की गई थी, लेकिन वास्तविक राजनीतिक सुदृढ़ीकरण चंद्रगुप्त प्रथम (319-334 ईस्वी) के राज्यारोहण और 'गुप्त संवत' की शुरुआत से माना जाता है। इतिहासकार वी. ए. स्मिथ द्वारा 'भारत का नेपोलियन' कहे गए समुद्रगुप्त ने अपनी 'दिग्विजय' नीति और प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण द्वारा रचित) के माध्यम से एक विशाल साम्राज्य की नींव रखी। इसके बाद, चंद्रगुप्त द्वितीय 'विक्रमादित्य' के शासनकाल में शकों पर विजय और उज्जैन को दूसरी राजधानी बनाना ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण मोड़ था। साम्राज्य का पतन स्कंदगुप्त के बाद हूणों के निरंतर आक्रमणों और आंतरिक सामंतवादी प्रवृत्तियों के कारण हुआ।
प्रशासनिक ढांचा और भू-राजस्व व्यवस्था
गुप्त काल की प्रशासनिक व्यवस्था केंद्रीकृत होने के साथ-साथ विकेंद्रीकृत तत्वों से युक्त थी। राजा दैवीय सिद्धांतों (जैसे परमभट्टारक, महाराजाधिराज) पर शासन करता था। साम्राज्य को प्रशासनिक सुविधा के लिए 'भुक्ति' (प्रांत), 'विषय' (जिला) और 'वीथि' में विभाजित किया गया था, जिनके प्रमुख क्रमशः उपरिक और विषयपति कहलाते थे। इस काल में 'अग्रहार' प्रथा (ब्राह्मणों को कर-मुक्त भूमि दान) की शुरुआत हुई, जिसने कालांतर में भारतीय सामंतवाद (Feudalism) को जन्म दिया। भू-राजस्व (भाग, भोग, कर) राज्य की आय का मुख्य स्रोत था, जो सामान्यतः उत्पादन का 1/6 भाग होता था।
कला, वास्तुकला और साहित्य का पुनर्जागरण
सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यह काल शिखर पर था। वास्तुकला में नागर शैली के मंदिरों का विकास इसी समय हुआ, जिसका सबसे जीवंत उदाहरण देवगढ़ का दशावतार मंदिर है। अजंता की गुफा संख्या 16, 17 और 19 के भित्तिचित्र गुप्तकालीन कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। साहित्य के क्षेत्र में चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार के 'नवरत्न' जिनमें कालिदास (अभिज्ञानशाकुंतलम्), अमरसिंह (अमरकोश), और वाराहमिहिर शामिल थे, ने अमूल्य योगदान दिया। इसके अतिरिक्त विशाखदत्त का 'मुद्राराक्षस' और शूद्रक का 'मृच्छकटिकम्' इसी काल की रचनाएं हैं।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विदेशी विवरण
गुप्त काल वैज्ञानिक प्रगति का भी गवाह रहा है। आर्यभट्ट ने 'आर्यभटीय' की रचना कर शून्य और दशमलव प्रणाली की व्याख्या की तथा यह सिद्ध किया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। धनवंतरी को इस काल का महान चिकित्सक माना जाता है, जबकि महरौली का लौह स्तंभ तत्कालीन धातुकर्म (Metallurgy) की तकनीकी श्रेष्ठता का सजीव प्रमाण है, जिसमें आज तक जंग नहीं लगा है। इसी काल में चीनी यात्री फाह्यान (399-412 ईस्वी) भारत आया, जिसने अपने विवरण 'फो-कुओ-की' में गुप्तकालीन समाज को शांतिप्रिय, शाकाहारी और आर्थिक रूप से समृद्ध बताया है।
बीएसआईपी में साइंटिस्ट बी के पदों पर बंपर भर्तियां शुरू

बीएसआईपी में साइंटिस्ट बी के पदों पर बंपर भर्तियां शुरू

Delight News
📅 10 Aug2026

बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पालयोसाइंसेज (BSIP) ने साइंटिस्ट बी के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 10 अगस्त 2026 से 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह वैज्ञानिक क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा अवसर है।

बीएसआईपी में साइंटिस्ट बी के पदों पर बंपर भर्तियां शुरू
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पालयोसाइंसेज (BSIP) ने साइंटिस्ट बी के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 10 अगस्त 2026 से 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह वैज्ञानिक क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा अवसर है।
भर्ती प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पालयोसाइंसेज (BSIP) ने वैज्ञानिक बनने का सपना देख रहे योग्य युवाओं के लिए एक शानदार और सुनहरा अवसर पेश किया है। संस्थान द्वारा साइंटिस्ट बी के पदों पर सीधी भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज यानी 10 अगस्त 2026 से आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। जो उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करना चाहते हैं, वे 4 सितंबर 2026 तक अपना ऑनलाइन आवेदन सुरक्षित रूप से जमा कर सकते हैं। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है।
शैक्षणिक योग्यता और पात्रता के मानदंड
इस भर्ती अभियान के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में उच्च शिक्षा और विशेषज्ञता होनी चाहिए। बीएसआईपी के निर्धारित मानकों के अनुसार विभिन्न विभागों के अंतर्गत पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक और शोध योग्यताएं तय की गई हैं। उम्मीदवारों को पूरी तरह आश्वस्त हो जाना चाहिए कि वे सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता और अन्य श्रेणियों में दी जाने वाली छूट से जुड़ी तमाम जरूरी जानकारियां संस्थान द्वारा जारी विस्तृत विज्ञापन में उपलब्ध कराई गई हैं।
ऑनलाइन आवेदन करने की सरल प्रक्रिया
इच्छुक और योग्य उम्मीदवार बीएसआईपी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आसानी से अपना ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। अंतिम तिथि यानी 4 सितंबर 2026 के करीब आने पर वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक और सर्वर संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें। आवेदन फॉर्म भरते समय अपने सभी जरूरी दस्तावेज, प्रमाण पत्र और फोटोग्राफ एकदम सही तरीके से अपलोड करें।
चयन प्रक्रिया और मिलने वाला वेतनमान
बीएसआईपी साइंटिस्ट बी पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन पारदर्शी और उच्च स्तरीय मानदंडों के आधार पर किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक रिकॉर्ड की स्क्रीनिंग और साक्षात्कार प्रक्रिया मुख्य रूप से शामिल होगी। इस पद पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को शानदार वेतनमान के साथ-साथ सरकार द्वारा निर्धारित अन्य बेहतरीन भत्ते भी प्राप्त होंगे। पालयोसाइंसेज और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में करियर संवारने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए यह एक बेहतरीन और ऐतिहासिक अवसर है।
निजी क्षेत्र का पहला एफएफएससी 'ईवेरेस्ट' रॉकेट इंजन लॉन्च

निजी क्षेत्र का पहला एफएफएससी 'ईवेरेस्ट' रॉकेट इंजन लॉन्च

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📅 10 Aug2026

बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष स्टार्टअप एस्ट्रोब्रेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने भारत के पहले निजी रूप से निर्मित 800 किलोन्यूटन 'फुल-फ्लो स्टेज्ड कम्बशन' (FFSC) एलओएक्स-मीथेन रॉकेट इंजन 'ईवेरेस्ट' का अनावरण किया है। यह उन्नत इंजन देश के पुनर्चक्रण योग्य मध्यम-भार प्रक्षेपण वाहनों को सशक्त बनाने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

शीर्षक: निजी क्षेत्र का पहला एफएफएससी 'ईवेरेस्ट' रॉकेट इंजन लॉन्च
सारांश:
बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष स्टार्टअप एस्ट्रोब्रेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने भारत के पहले निजी रूप से निर्मित 800 किलोन्यूटन 'फुल-फ्लो स्टेज्ड कम्बशन' (FFSC) एलओएक्स-मीथेन रॉकेट इंजन 'ईवेरेस्ट' का अनावरण किया है। यह उन्नत इंजन देश के पुनर्चक्रण योग्य मध्यम-भार प्रक्षेपण वाहनों को सशक्त बनाने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण:
'ईवेरेस्ट' इंजन की तकनीकी विशेषताएँ और संरचना
एस्ट्रोब्रेस स्पेस टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित 'ईवेरेस्ट' एक 80-टन वर्ग का उच्च-थ्रस्ट (800 किलोन्यूटन) तरल-प्रोपेलेंट रॉकेट इंजन है। यह लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) और लिक्विड मीथेन के संयोजन (मेथालॉक्स) का उपयोग करता है। यह इंजन दुनिया की सबसे उन्नत और जटिल 'फुल-फ्लो स्टेज्ड कम्बशन' (FFSC) आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिसमें ईंधन और ऑक्सीडाइज़र दोनों को मुख्य दहन कक्ष में प्रवेश करने से पहले पूरी तरह से गैसीकृत किया जाता है। इससे इंजन की दक्षता, चेंबर का दबाव और विशिष्ट आवेग (लगभग 340 सेकंड) अत्यधिक बढ़ जाता है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत की स्थिति
एफएफएससी (FFSC) तकनीक अपनी अत्यधिक जटिल टर्बोमैचरी और थर्मल स्थितियों के कारण वैश्विक स्तर पर बेहद दुर्लभ है। इस तकनीक के विकास के साथ भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद इस विशिष्ट तकनीक को हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है, जबकि एस्ट्रोब्रेस वैश्विक स्तर पर ऐसी उच्च-थ्रस्ट इंजन विकसित करने वाली चुनिंदा वाणिज्यिक कंपनियों में शामिल हो गई है। यह उपलब्धि पारंपरिक अंतरिक्ष शक्तियों के समकक्ष भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तकनीकी परिपक्वता को दर्शाती है।
औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और भविष्य के अनुप्रयोग
यह इंजन विशेष रूप से अगली पीढ़ी के पुनर्चक्रण योग्य (reusable) मध्यम-भार वाले लॉन्च वाहनों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 30 टन तक के पेलोड को ले जाने में सक्षम हैं। कंपनी का उद्देश्य उन्नत धातु 3D-प्रिंटिंग तकनीकों का उपयोग करके वार्षिक आधार पर 50 इंजनों के निर्माण की क्षमता विकसित करना है। अंतरिक्ष मिशनों में तीव्र प्रतिक्रिया और लॉन्च-ऑन-डिमांड क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए यह पहल भारत के बढ़ते अंतरिक्ष उद्योग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भारत के समुद्री प्रशासन के डिजिटल आधुनिकीकरण हेतु ई-समुद्र पोर्टल

भारत के समुद्री प्रशासन के डिजिटल आधुनिकीकरण हेतु ई-समुद्र पोर्टल

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📅 10 Aug2026

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया 'ई-समुद्र' पोर्टल भारत के समुद्री प्रशासन में डिजिटल क्रांति लाने की एक एकीकृत पहल है। यह मंच समुद्री क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, लाइसेंसिंग और विनियामक प्रक्रियाओं को सुगम, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

शीर्षक: भारत के समुद्री प्रशासन के डिजिटल आधुनिकीकरण हेतु ई-समुद्र पोर्टल
सारांश:
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया 'ई-समुद्र' पोर्टल भारत के समुद्री प्रशासन में डिजिटल क्रांति लाने की एक एकीकृत पहल है। यह मंच समुद्री क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, लाइसेंसिंग और विनियामक प्रक्रियाओं को सुगम, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण:
ई-समुद्र पोर्टल की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया ई-समुद्र पोर्टल भारत के समुद्री क्षेत्र (मैरिटाइम सेक्टर) में तकनीकी एकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के शिपिंग प्रशासन को पूरी तरह से डिजिटल बनाना और 'ई-गवर्नेंस' के दायरे को और अधिक व्यापक करना है। यह पोर्टल पारंपरिक कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है, जिससे प्रशासनिक जटिलताएं कम होती हैं।
पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं और कार्यप्रणाली
यह एकीकृत पोर्टल जहाजों के पंजीकरण, नाविकों (सीफेयरर्स) के प्रमाणन, और विभिन्न विनियामक सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से उद्योग से जुड़े हितधारक बिना किसी भौतिक हस्तक्षेप के ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अपनी फाइलों की वास्तविक समय (रियल-टाइम) ट्रैकिंग कर सकते हैं। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ती है और सेवाओं के वितरण में लगने वाले समय में भारी कमी आती है।
समुद्री क्षेत्र पर प्रभाव और प्रशासनिक लाभ
ई-समुद्र पोर्टल के लागू होने से भारत के समुद्री प्रशासन की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह पहल देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार सुगमता) को बढ़ावा देती है और वैश्विक मानकों के अनुरूप भारतीय शिपिंग सेक्टर को मजबूत करती है। इसके अलावा, सटीक और केंद्रीयकृत डेटा प्रबंधन से नीति निर्माण तथा रणनीतिक निर्णयों में तेजी आएगी, जिससे भारत को एक अग्रणी वैश्विक समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के विजन को बल मिलेगा।
नकली आईएएस और डोभाल का 'जासूस': खगड़िया में 100 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश

नकली आईएएस और डोभाल का 'जासूस': खगड़िया में 100 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश

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📅 10 Aug2026

बिहार के खगड़िया में पुलिस ने मनीष गुप्ता नामक एक बड़े ठग को गिरफ्तार किया है। खुद को आईएएस और एनएसए अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताकर उसने करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई। उसके पास से ड्राइवरलेस टेस्ला कार, लग्जरी गाड़ियां और बारहसिंगा के सींग बरामद हुए हैं।

नकली आईएएस और डोभाल का 'जासूस': खगड़िया में 100 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश
> न्यूज़ समरी
> बिहार के खगड़िया में पुलिस ने मनीष गुप्ता नामक एक बड़े ठग को गिरफ्तार किया है। खुद को आईएएस और एनएसए अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताकर उसने करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई। उसके पास से ड्राइवरलेस टेस्ला कार, लग्जरी गाड़ियां और बारहसिंगा के सींग बरामद हुए हैं।
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शातिर ठग का मायाजाल
बिहार के खगड़िया जिले में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को दबोचा है, जिसके कारनामों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। मनीष गुप्ता नाम का यह शख्स खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी और देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का बेहद खास 'अंडरकवर एजेंट' बताता था। अपनी इस झूठी और हाई-प्रोफाइल पहचान की आड़ में वह भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाता और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद इस शातिर के कई चौंकाने वाले राज खुले हैं।
करोड़ों की संपत्ति और शाही ठाट-बाट
पड़ताल के दौरान पुलिस को मनीष गुप्ता के ठिकाने से अकूत संपत्ति का पता चला है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए उसने करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति खड़ी कर ली थी। उसके पास से एक ड्राइवरलेस टेस्ला कार और कई अन्य लग्जरी गाड़ियां बरामद हुई हैं, जो उसके शाही और रसूखदार जीवनशैली की गवाही देती हैं। इसके अलावा, उसके पास से 23 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड, भारी मात्रा में विदेशी शराब और वन्यजीव संरक्षण कानून के दायरे में आने वाले बारहसिंगा के सींग भी मिले हैं।
आर्थिक अपराध इकाई संभालेगी कमान
मामले की गंभीरता को देखते हुए खगड़िया पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और करोड़ों की अवैध संपत्ति अर्जित करने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाने के लिए अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष टीम को मैदान में उतारा जाएगा। पुलिस यह खंगालने में जुटी है कि इस ठग ने किन-किन विभागों और बड़े लोगों को अपने झांसे में लिया था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और ठगी के शिकार अन्य लोग भी अब खुलकर सामने आने लगे हैं।
संसद में संग्राम: FCRA और परिसीमन पर महासंग्राम, विपक्ष के बीच पास हुआ ट्रिब्यूनल बिल

संसद में संग्राम: FCRA और परिसीमन पर महासंग्राम, विपक्ष के बीच पास हुआ ट्रिब्यूनल बिल

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📅 10 Aug2026

संसद के मानसून सत्र में FCRA और परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। हंगामे के बीच न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पारित हो गया है। राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक पर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है, जबकि राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

संसद में संग्राम: FCRA और परिसीमन पर महासंग्राम, विपक्ष के बीच पास हुआ ट्रिब्यूनल बिल
खबर का निचोड़
संसद के मानसून सत्र में FCRA और परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। हंगामे के बीच न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पारित हो गया है। राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक पर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है, जबकि राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
संसद में उबाल और हंगामे के बीच विधेयक पास
संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों पर गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों के कड़े हंगामे और भारी विरोध के बीच सरकार ने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक को संसद से पारित कराने में सफलता हासिल की है। सदन के भीतर और बाहर जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और अधिक बढ़ने वाला है।
राहुल गांधी का हमला और अमित शाह का पलटवार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने नीट (NEET) पेपर लीक के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर डाली है। इस तीखे हमले ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से मोर्चा संभालते हुए अमित शाह ने छात्रों के विरोध और विपक्ष के हर सवाल का करारा जवाब देने की बात कही है। सरकार का यह रुख साफ संकेत देता है कि वह विपक्ष के दबाव के आगे झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
FCRA और परिसीमन पर सियासी पैंतरेबाजी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर समर्थन जुटाने के लिए FCRA के कुछ प्रावधानों पर नरमी बरतने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस रणनीति की राह आसान नहीं है। द्रमुक (DMK) और राकांपा (NCP-SP) जैसी पार्टियां इसका पुरजोर विरोध कर रही हैं, जिससे क्षेत्रीय समीकरण उलझते नजर आ रहे हैं।
संस्थाओं के नियंत्रण पर छिड़ी जुबानी जंग
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर किया जा रहा है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने FCRA संशोधन का पूरी ताकत से समर्थन किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए 'राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों' पर लगाम कसना बेहद जरूरी है, जिसके लिए यह कानून आवश्यक कदम है।

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