
Gen-Z को गटर बोलोगे तो युवा सरकार गटर में डाल देगा
राज्यसभा में 'आप' सांसद संजय सिंह ने बीजेपी सांसद कंगना रनौत के 'गटर जनरेशन' वाले बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने बीजेपी को नसीहत देते हुए कहा कि देश के युवाओं और Gen-Z का अपमान भारी पड़ सकता है, नौजवान इस सरकार को उखाड़ फेंकने का माद्दा रखते हैं।
संक्षेप: राज्यसभा में 'आप' सांसद संजय सिंह ने बीजेपी सांसद कंगना रनौत के 'गटर जनरेशन' वाले बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने बीजेपी को नसीहत देते हुए कहा कि देश के युवाओं और Gen-Z का अपमान भारी पड़ सकता है, नौजवान इस सरकार को उखाड़ फेंकने का माद्दा रखते हैं।
संसद में गूंजा कंगना का विवादित बयान
संसद का सत्र हो और राजनीतिक वार-पलटवार न देखने को मिले, ऐसा होना मुश्किल है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। उनके निशाने पर थीं बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत। संजय सिंह ने कंगना द्वारा सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान Gen-Z और युवाओं के लिए इस्तेमाल की गई 'गटर जनरेशन' वाली टिप्पणी का मुद्दा सदन में जोर-शोर से उठाया।
"अपनी सांसद को समझाओ..."
संजय सिंह ने सत्ता पक्ष की तरफ इशारा करते हुए तीखे शब्दों में कहा कि अपनी सांसद को मर्यादा में रहने की सलाह दें। युवाओं का इस तरह अपमान करना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। उन्होंने साफ चेतावनी भरे लहजे में कहा, "अपनी सांसद को समझाओ... Gen-Z को गटर कहोगे तो तुम्हारी सरकार को इस देश का नौजवान और Gen-Z पकड़कर गटर में डाल देगा। नौजवानों को गटर Gen-Z बोलना तुरंत बंद करो।"
युवाओं के गुस्से से सावधान रहने की नसीहत
'आप' सांसद ने जोर देकर कहा कि किसी भी देश की असली ताकत उसका युवा वर्ग होता है। Gen-Z आज हर क्षेत्र में अपनी आवाज मुखर कर रहा है। जब युवा सड़कों पर उतरते हैं या अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराते हैं, तो उन्हें गटर या आपत्तिजनक शब्दों से संबोधित करना उनके स्वाभिमान पर चोट करने जैसा है। संजय सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का हक सबको है, लेकिन सत्ता के अहंकार में देश की युवा पीढ़ी का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बहस
कंगना रनौत के बयान और उस पर संजय सिंह के इस पलटवार के बाद राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। एक तरफ जहां बीजेपी अपने नेताओं के बयानों को लेकर लगातार बचाव की मुद्रा में नजर आती है, वहीं विपक्ष को संसद के पटल पर सरकार को घेरने का एक और बड़ा मुद्दा मिल गया है। Gen-Z और युवाओं से जुड़े इस मुद्दे पर अब सोशल मीडिया से लेकर देश के राजनीतिक गलियारों तक बहस छिड़ गई है।

धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब निशाने पर अमित शाह, CJP ने मांगी इस्तीफे की मांग
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद अब यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच गया है। CJP ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए संगठन ने इस कार्रवाई का सीधा जिम्मा अमित शाह पर फोड़ा है।
सार:
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद अब यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच गया है। CJP ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए संगठन ने इस कार्रवाई का सीधा जिम्मा अमित शाह पर फोड़ा है।
शिक्षा मंत्री के बाद गृह मंत्री की ओर घूमी विरोध की सुई
हालिया विरोध-प्रदर्शनों के बाद देश का राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र संगठन CJP ने अब अपना रुख और कड़ा कर लिया है। संगठन ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए उनसे पद छोड़ने की मांग की है।
शिक्षा मंत्रालय के बाहर हुए प्रदर्शनों में जिस तरह से पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई की, उसने इस पूरे विवाद में घी डालने का काम किया है। CJP का आरोप है कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे छात्रों पर जिस तरह का बल प्रयोग किया गया, वह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। संगठन का मानना है कि इस मामले की जवाबदेही सिर्फ स्थानीय पुलिस प्रशासन तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसकी सीधी जिम्मेदारी देश के गृह मंत्रालय की बनती है।
पुलिस कार्रवाई पर खड़े हुए गंभीर सवाल
प्रदर्शन के दौरान हुई इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। CJP ने आरोप लगाया है कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस ने अनुचित और अत्यधिक बल का प्रयोग किया।
संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पुलिस का यह रवैया बिना किसी उच्च स्तरीय निर्देश के संभव नहीं है। दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम में गृह मंत्री की भूमिका पर सवाल उठना लाजमी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब देश की राजधानी में छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व को लेनी ही होगी।
राहुल गांधी के बयान को मिला CJP का समर्थन
इस पूरे विवाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने मामले को और तूल दे दिया है। राहुल गांधी द्वारा उठाई गई मांग का CJP ने खुलकर समर्थन किया है।
संगठन का स्पष्ट रूप से मानना है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर इस तरह के कड़े कदम उठाने का आदेश किसी निचले स्तर के अधिकारी का नहीं हो सकता। CJP के अनुसार, दिल्ली में पुलिस की इस तरह की त्वरित और सख्त कार्रवाई का फैसला निश्चित तौर पर गृह मंत्री अमित शाह के स्तर से ही आया होगा। विपक्ष और छात्र संगठनों के एक साथ आने से अब सरकार पर दोहरा राजनीतिक दबाव बनता दिख रहा है।
गहराता जा रहा है छात्र आंदोलन का दायरा
शुरुआत में केवल शिक्षा नीति और मंत्रालय से जुड़ी मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अब गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग ने इस गतिरोध को काफी बढ़ा दिया है।
आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ उनका यह विरोध आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस नए घटनाक्रम और इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस पूरे विवाद ने संसद से लेकर सड़कों तक का माहौल पूरी तरह से गरमा दिया है।

पप्पू यादव और उनके परिवार को मिली जान से मारने की धमकी, दिल्ली पुलिस से मांगी सुरक्षा
पूर्णिया के सांसद और जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव को परिवार समेत जान से मारने की धमकी मिली है। इस गंभीर मामले को लेकर उन्होंने नई दिल्ली के DCP को पत्र लिखकर तुरंत एफआईआर दर्ज करने, आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और अपने परिवार के लिए कड़ी सुरक्षा की मांग की है।
खबर का निचोड़
पूर्णिया के सांसद और जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव को परिवार समेत जान से मारने की धमकी मिली है। इस गंभीर मामले को लेकर उन्होंने नई दिल्ली के DCP को पत्र लिखकर तुरंत एफआईआर दर्ज करने, आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और अपने परिवार के लिए कड़ी सुरक्षा की मांग की है।
जानलेवा धमकी से गरमाई राजनीति
बिहार की राजनीति के कद्दावर नेता और पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा पर मंडराता गंभीर खतरा है। बेबाक बयान शैली के लिए जाने जाने वाले पप्पू यादव और उनके पूरे परिवार को जान से मारने की सीधी धमकी दी गई है। इस अचानक मिली धमकी के बाद से उनके समर्थकों और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
सुरक्षा को लेकर DCP को लिखा पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद पप्पू यादव ने किसी भी तरह की ढिलाई न बरतते हुए तुरंत एक्शन लिया है। उन्होंने नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) को इस बाबत एक औपचारिक पत्र सौंपा है। अपने इस पत्र के माध्यम से उन्होंने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान अपनी और अपने परिवार की जान पर बने खतरे की ओर आकर्षित किया है।
पुलिस प्रशासन से की ये बड़ी मांगें
दिल्ली पुलिस को लिखे पत्र में पप्पू यादव ने प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी हैं:
तत्काल FIR दर्ज हो: धमकी देने वाले असामाजिक तत्वों और साजिशकर्ताओं के खिलाफ कानून की संबंधित धाराओं में तुरंत मामला दर्ज किया जाए।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी: धमकी देने वाले अज्ञात लोगों को जल्द से जल्द ट्रेस कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए।
परिवार की अभेद्य सुरक्षा: सांसद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाए जाएं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पप्पू यादव को इससे पहले भी कई बार धमकियां मिल चुकी हैं, लेकिन इस बार पूरे परिवार को निशाना बनाए जाने की बात से मामला बेहद संवेदनशील हो गया है। एक जनप्रतिनिधि और संसद सदस्य को इस तरह की धमकियां मिलना राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब सभी की नजरें दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस मामले में आरोपियों तक कितनी जल्दी पहुंच पाती है।

NEET धांधली पर राघव चड्ढा का तीखा हमला
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान NEET परीक्षा विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मीडिया बाइट्स से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। चड्ढा ने प्रभावित छात्रों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए व्यापक संस्थागत सुधारों की जोरदार मांग उठाई।
खबर का सार
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान NEET परीक्षा विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मीडिया बाइट्स से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। चड्ढा ने प्रभावित छात्रों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए व्यापक संस्थागत सुधारों की जोरदार मांग उठाई।
NEET धांधली पर संसद में गूंजी छात्रों की आवाज
NEET-UG परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर देशभर के परीक्षार्थियों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद के पटल से युवाओं के इस गुस्से और दर्द को सही ठहराया है। संसद में 'एंटी-पेपर लीक बिल' (लोक परीक्षा विधेयक) पर जारी चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश का युवा आज सड़कों पर उतरने को मजबूर है और उसकी मांगें पूरी तरह से तर्कसंगत हैं।
'कैंसर का इलाज क्रॉसिन से नहीं हो सकता'
राघव चड्ढा ने अपने संबोधन के दौरान एक बेहद तीखे और प्रभावी रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा, "जैसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज महज एक क्रॉसिन की गोली खिलाकर नहीं किया जा सकता, ठीक वैसे ही पेपर लीक जैसी विशाल और जड़ों तक फैली समस्या का समाधान केवल मीडिया साउंड बाइट्स देने से नहीं होगा।"
उनका इशारा साफ था कि केवल नए कानून बना देने या बयानों तक सीमित रहने से इस परीक्षा माफिया पर लगाम नहीं कसी जा सकती। इसके लिए व्यवस्था में बुनियादी और बड़े बदलावों की तुरंत आवश्यकता है।
संस्थागत सुधारों की सख्त जरूरत
चड्ढा ने ज़ोर देकर कहा कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। केवल सजा का प्रावधान कर देने से पेपर लीक गिरोह का खात्मा नहीं होगा, बल्कि जब तक परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं के ढांचे और संचालन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई जाएगी, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने कहा कि संस्थागत सुधार ही एकमात्र ऐसा रास्ता है, जिससे परीक्षाओं की शुचिता को दोबारा स्थापित किया जा सकता है।
छात्रों के दर्द से जुड़ा संसद का मंच
लाखों छात्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए चड्ढा ने सीधे युवाओं को संबोधित किया और कहा, "NEET छात्रों का गुस्सा जायज़ है, आपका दर्द सही है।" उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि जब तक देश की शीर्ष प्रतियोगी परीक्षाओं पर से धांधली का साया नहीं हटता, तब तक इस मुद्दे को हर स्तर पर उठाया जाता रहेगा। देश के भावी डॉक्टरों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

BJP में आओ या परिणाम भुगतो': CJP संस्थापक का बड़ा दावा
सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्हें और उनके परिवार को पार्टी में शामिल होने के लिए धमकियां दी जा रही हैं। दीपके ने शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि उनसे डरकर यह दबाव बनाया जा रहा है।
खबर का निचोड़
सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्हें और उनके परिवार को पार्टी में शामिल होने के लिए धमकियां दी जा रही हैं। दीपके ने शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि उनसे डरकर यह दबाव बनाया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में हड़कंप: दीपके का सीधा हमला
राजनीतिक हलकों में उस समय खलबली मच गई जब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सत्ताधारी दल पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए। दीपके का दावा है कि उन पर और उनके परिवार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें लगातार चेतावनी दी जा रही है कि यदि वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं होते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम उनके परिवार को भुगतने पड़ सकते हैं।
'बीजेपी में शामिल हो जाओ, वरना...': क्या है पूरा मामला?
अभिजीत दीपके के मुताबिक, यह कोई पहली बार नहीं है जब उन्हें इस तरह की चेतावनियां मिली हैं। उन्हें और उनके परिजनों को कई बार निशाना बनाया गया है। धमकी देने वालों का सीधा संदेश था—"बीजेपी में शामिल हो जाओ, नहीं तो परिवार के लिए अच्छा नहीं होगा।"
इस बयान के सामने आते ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। दीपके का आरोप है कि उन्हें डराने और उनकी राजनीतिक निष्ठा बदलने के लिए हरसंभव हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
'पीएम और गृहमंत्री के पोते की उम्र का हूं, फिर भी इतना डर?'
अपने बयान में दीपके ने देश के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा, "मैं देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के पोते की उम्र का हूं। इसके बावजूद मुझसे इतना डर बना हुआ है कि खुलेआम धमकियां दी जाने लगी हैं।"
दीपके के इस तीखे प्रहार ने सत्ता पक्ष की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि युवा आवाजों को दबाने और अपनी ओर खींचने के लिए इस तरह के हथकंडों का सहारा लिया जा रहा है।
सत्ता पक्ष पर दबाव बनाने की राजनीति का आरोप
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध को स्वीकार करने के बजाय अब डराने और धमकाने का रास्ता चुना जा रहा है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत धमकी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात की ओर भी इशारा करता है कि किस तरह से विपक्षी नेताओं और विचारकों पर बीजेपी में शामिल होने का दबाव बनाया जाता है।
सीजेपी संस्थापक के इन दावों ने प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। अब देखना यह होगा कि इन संगीन आरोपों पर सामने वाली तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है और यह विवाद क्या रूप लेता है।

मोदी जी विष्णु के अवतार, पैर धोकर पीना चाहता हूँ': सुदेश बेरी
फिल्म 'बॉर्डर' फेम अभिनेता सुदेश बेरी ने एक पॉडकास्ट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने पीएम मोदी को भगवान विष्णु का अवतार बताते हुए उनके पैर धोकर पानी पीने की इच्छा जताई। इसके साथ ही सुदेश बेरी ने विपक्षी दल सीजेपी पर करारा हमला बोलते हुए उन्हें दिशाहीन करार दिया।
खबर का निचोड़
फिल्म 'बॉर्डर' फेम अभिनेता सुदेश बेरी ने एक पॉडकास्ट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने पीएम मोदी को भगवान विष्णु का अवतार बताते हुए उनके पैर धोकर पानी पीने की इच्छा जताई। इसके साथ ही सुदेश बेरी ने विपक्षी दल सीजेपी पर करारा हमला बोलते हुए उन्हें दिशाहीन करार दिया।
सुदेश बेरी का बड़ा बयान: 'मोदी जी विष्णु के अवतार'
बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता सुदेश बेरी अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने देश के राजनीतिक परिदृश्य और नेतृत्व पर खुलकर अपने विचार रखे। बातचीत के दौरान सुदेश बेरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने पीएम मोदी की तुलना भगवान विष्णु से करते हुए कहा कि भारत को ऐसा मजबूत और समर्पित नेतृत्व सदियों में मिलता है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता ने एक भावुक और बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके मन में प्रधानमंत्री के लिए इतना आदर है कि वे उनके पैर धोकर उस पानी को पीना चाहते हैं। सुदेश बेरी के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज कर दी है।
विपक्षी दलों पर साधा निशाना: 'देश के लिए कोई विजन नहीं'
प्रधानमंत्री की प्रशंसा करने के साथ-साथ सुदेश बेरी ने विपक्षी राजनीति पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कार्यशैली और नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया।
सुदेश बेरी ने साफ शब्दों में कहा कि इस पार्टी के पास देश के विकास या जनता के भले के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। उनके मुताबिक, विपक्षी नेता केवल बयानबाज़ी में उलझे हुए हैं और उनके पास देश को आगे ले जाने का कोई स्पष्ट विज़न नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग केवल राजनीति करने के लिए राजनीति कर रहे हैं, जबकि देश को इस समय मजबूत और निर्णायक नेतृत्व की जरूरत है।
पर्दे के दमदार अभिनेता की निजी राय
सुदेश बेरी भारतीय सिनेमा का एक परिचित नाम हैं। उन्होंने 'बॉर्डर' जैसी ऐतिहासिक और देशभक्ति से ओत-प्रोत फिल्म में यादगार भूमिका निभाई है। इसके अलावा भी वे कई बॉलीवुड फिल्मों और लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं।
पॉडकास्ट में दिया गया उनका यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। जहां उनके प्रशंसक इसे देश के शीर्ष नेतृत्व के प्रति उनकी अटूट निष्ठा के रूप में देख रहे हैं, वहीं राजनीतिक हलकों में उनके इस बयान को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सुदेश बेरी के इस बेबाक बयान ने एक बार फिर बॉलीवुड और राजनीति के रिश्तों को सुर्खियों में ला दिया है।
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