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गंभीर दिल के साफ़, लोग कड़वा सच पचा नहीं पाते: हरभजन सिंह

गंभीर दिल के साफ़, लोग कड़वा सच पचा नहीं पाते: हरभजन सिंह

Delight News
📅 14 Aug2026

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की कार्यशैली और कड़े स्वभाव को लेकर पूर्व दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने उनका पुरजोर समर्थन किया है। हरभजन ने कहा कि गंभीर बेहद पारदर्शी और साफ दिल इंसान हैं। उनकी बातें सच होती हैं, जिन्हें पचाना हर किसी के बस की बात नहीं होती।

शीर्षक:
गंभीर दिल के साफ़, लोग कड़वा सच पचा नहीं पाते: हरभजन सिंह
खबर का निचोड़:
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की कार्यशैली और कड़े स्वभाव को लेकर पूर्व दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने उनका पुरजोर समर्थन किया है। हरभजन ने कहा कि गंभीर बेहद पारदर्शी और साफ दिल इंसान हैं। उनकी बातें सच होती हैं, जिन्हें पचाना हर किसी के बस की बात नहीं होती।
मुख्य आर्टिकल:
गंभीर का सीधा अंदाज और सच कहने की हिम्मत
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर मैदान पर अपनी आक्रामकता और मैदान के बाहर अपनी बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने गंभीर के इसी व्यक्तित्व की जमकर सराहना की है। हरभजन का मानना है कि गंभीर उन गिने-चुने लोगों में से हैं जो बिना किसी लाग-लपेट के सच बोलने की हिम्मत रखते हैं।
कड़वी बातें और लोगों की मानसिकता
हरभजन सिंह ने गंभीर के आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि गौतम गंभीर एक बेहतरीन इंसान हैं। वे जब भी कोई बात कहते हैं, तो उसमें सच्चाई होती है। हालांकि, समाज में अक्सर सीधे और सच्चे जवाबों को लोग आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते। यही वजह है कि कई लोगों को उनकी बातें कड़वी लगती हैं और वे उन्हें पचा नहीं पाते।
सख्त लहजे के पीछे की असलियत
अक्सर गंभीर के चेहरे के हाव-भाव और बात करने के तरीके को देखकर उन्हें एक सख्त और कठोर इंसान मान लिया जाता है। इस पर बात करते हुए हरभजन ने स्पष्ट किया कि शायद उनके बोलने के लहजे की वजह से लोगों के मन में ऐसी धारणा बन जाती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि वे दिल के बेहद साफ हैं और उनके मन में जो होता है, वही उनकी ज़ुबान पर आता है।
ड्रेसिंग रूम में स्पष्टता और पारदर्शिता
भारतीय टीम के हेड कोच के रूप में गंभीर का रुख एकदम स्पष्ट रहा है। वे टीम में अनुशासन, कड़ी मेहनत और परिणाम को प्राथमिकता देते हैं। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि ड्रेसिंग रूम का माहौल बेहतर बनाने के लिए एक ऐसे कोच की जरूरत होती है जो खिलाड़ियों को उनकी वास्तविक स्थिति का आईना दिखा सके। हरभजन का यह बयान दर्शाता है कि गंभीर का यह कड़ा रवैया टीम के हित में ही काम कर रहा है।
भारतीय क्रिकेट में गंभीर की भूमिका
गौतम गंभीर का करियर हमेशा से चुनौतियों से भरा रहा है, चाहे वह एक खिलाड़ी के रूप में हो या फिर एक मेंटॉर और कोच के रूप में। हरभजन सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ी का उनके पक्ष में खुलकर सामने आना यह साबित करता है कि गंभीर की कार्यप्रणाली को क्रिकेट बिरादरी में बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता है।
LG का बड़ा झटका: 1 अक्टूबर से महंगे होंगे एयर कंडीशनर

LG का बड़ा झटका: 1 अक्टूबर से महंगे होंगे एयर कंडीशनर

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📅 28 Sep2026

त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने भारतीय ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। कंपनी 1 अक्टूबर से अपने एयर कंडीशनर की कीमतों में 5 से 7 फीसदी तक की बढ़ोतरी करने जा रही है। कच्चे माल की बढ़ती लागत और लॉजिस्टिक्स खर्चों के चलते यह फैसला लिया गया है।

LG का बड़ा झटका: 1 अक्टूबर से महंगे होंगे एयर कंडीशनर
खबर का निचोड़
त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने भारतीय ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। कंपनी 1 अक्टूबर से अपने एयर कंडीशनर की कीमतों में 5 से 7 फीसदी तक की बढ़ोतरी करने जा रही है। कच्चे माल की बढ़ती लागत और लॉजिस्टिक्स खर्चों के चलते यह फैसला लिया गया है।
त्योहारों से ठीक पहले बढ़ा जेब पर बोझ
देश में फेस्टिव सीजन की दस्तखत के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक बाज़ार में रौनक लौटने लगी थी, लेकिन इसी बीच कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट से एक निराश करने वाली खबर आई है। होम अप्लायंसेज बनाने वाली दिग्गज कंपनी LG Electronics ने ऐलान किया है कि 1 अक्टूबर से उसके एयर कंडीशनर खरीदना महंगा हो जाएगा। अगर आप इस फेस्टिव सीजन में नया एसी घर लाने की योजना बना रहे थे, तो अब आपको अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी।
आखिर क्यों महंगे हो रहे हैं एयर कंडीशनर?
कंपनी की तरफ से इस मूल्य वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारणों को जिम्मेदार ठहराया गया है—कच्चे माल (Raw Material) की लगातार बढ़ती दरें और माल ढुलाई (Freight Charges) में इजाफा। कॉपर, एल्युमिनियम और प्लास्टिक जैसे मुख्य घटकों की वैश्विक कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को काफी बढ़ा दिया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिवहन खर्चों में वृद्धि के कारण कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हो रहा था, जिसकी भरपाई के लिए अब कीमतों को बढ़ाना अनिवार्य हो गया है।
अन्य ब्रांड्स भी जल्द कर सकते हैं ऐलान
एलजी के इस कदम के बाद अब कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में हलचल तेज हो गई है। बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एलजी ही नहीं, बल्कि ब्लू स्टार (Blue Star) और डाइकिन (Daikin) जैसे अन्य प्रमुख ब्रांड्स भी जल्द ही अपने एयर कंडीशनर और अन्य अप्लायंसेज के दाम बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं। इन कंपनियों पर भी इनपुट कॉस्ट का दबाव समान रूप से बना हुआ है, जिससे पूरे एसी मार्केट में 5 से 8 फीसदी तक का उछाल देखने को मिल सकता है।
फेस्टिव सीजन सेल और ग्राहकों की रणनीति
आमतौर पर अक्टूबर के महीने में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और रिटेल स्टोर्स पर भारी डिस्काउंट और फेस्टिव ऑफर्स देखने को मिलते हैं। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग स्तर पर कीमतों में हुई इस सीधी बढ़ोतरी का असर ऑफर्स पर भी पड़ना तय है। जो ग्राहक त्योहारी छूट के भरोसे खरीदारी टाल रहे थे, उनके लिए 1 अक्टूबर से पहले खरीदारी करना ही ज्यादा समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है। 30 सितंबर तक पुरानी दरों पर स्टॉक उपलब्ध रहने की संभावना है, जिसके बाद नई दरें प्रभावी कर दी जाएंगी।
दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार: सेंसेक्स 1100 अंक टूटा, ₹9 लाख करोड़ डूबे

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📅 28 Sep2026

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1124.02 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 360.25 अंक नीचे चला गया। इस भारी मंदी के कारण निवेशकों की संपत्ति में से करीब 8.77 लाख करोड़ रुपये पूरी तरह साफ हो गए।

दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार: सेंसेक्स 1100 अंक टूटा, ₹9 लाख करोड़ डूबे
खबर का निचोड़
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1124.02 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 360.25 अंक नीचे चला गया। इस भारी मंदी के कारण निवेशकों की संपत्ति में से करीब 8.77 लाख करोड़ रुपये पूरी तरह साफ हो गए।
मंदी का महातूफान, सेंसेक्स और निफ्टी ध्वस्त
हफ़्ते के पहले ही कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली ने निवेशकों के पसीने छुड़ा दिए। दिन की शुरुआत से ही बाजार पर दबाव देखने को मिल रहा था, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बिकवाली का दायरा और गहराता चला गया। सेंसेक्स में 1124.02 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, जिससे पूरा बाजार लाल निशान में चला गया। इसी तरह निफ्टी में भी 360.25 अंकों का बड़ा गोता देखने को मिला, जिससे तकनीकी स्तरों पर भी बाजार को भारी झटका लगा है।
निवेशकों के ₹8.77 लाख करोड़ स्वाहा
बाजार की इस चौतरफा गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की जेब पर पड़ा है। महज एक ही दिन के भीतर बीएसई (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) ₹8,77,685 करोड़ घट गया। इसे शेयर बाजार के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक माना जा रहा है। लार्जकैप से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणियों तक, हर वर्ग के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
29 शेयर लाल निशान में, लार्सन ऐंड टूब्रो बनी टॉप लूज़र
सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से 29 शेयर भारी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए। बिकवाली का सबसे ज्यादा शिकार बुनियादी ढांचा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन ऐंड टूब्रो (L&T) हुई, जो आज की सबसे बड़ी नुकसान उठाने वाली कंपनी (टॉप लूज़र) साबित हुई। इसके अलावा बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी और मेटल सेक्टर के दिग्गजों में भी जमकर बिकवाली हुई, जिससे बाजार का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया।
सिर्फ इन्फोसिस ने बचाई इज्जत
चौतरफा बिकवाली और निराशाजनक माहौल के बीच केवल एक शेयर ऐसा रहा जो गिरावट के इस तूफान को झेलने में कामयाब रहा। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इन्फोसिस एकमात्र ऐसा शेयर रहा जो हरे निशान में बंद होने में सफल रहा। इन्फोसिस की इस मामूली बढ़त ने सेंसेक्स को और अधिक निचले स्तर पर जाने से थोड़ा सहारा जरूर दिया, लेकिन वह कुल बाजार के रुख को बदलने के लिए नाकाफी साबित हुई।
CBSE कक्षा 6: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

CBSE कक्षा 6: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

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📅 28 Sep2026

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 6 के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए इस सत्र थ्री लैंग्वेज पॉलिसी से छूट दी है। इस साल तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा और 10वीं में इसकी बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। यह नई व्यवस्था सत्र 2027-28 से पूरी तरह लागू होगी।

CBSE कक्षा 6: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत
खबर का निचोड़ (Summary)
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 6 के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए इस सत्र थ्री लैंग्वेज पॉलिसी से छूट दी है। इस साल तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा और 10वीं में इसकी बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। यह नई व्यवस्था सत्र 2027-28 से पूरी तरह लागू होगी।
थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
देश के लाखों स्कूली छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 'थ्री लैंग्वेज पॉलिसी' को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत के इस फैसले के तहत कक्षा 6 के छात्रों को चालू शैक्षणिक सत्र में इस नीति के कड़े नियमों से तात्कालिक छूट दी गई है। इस निर्णय से उन परिवारों को बड़ी मानसिक राहत मिली है जो अचानक लागू होने वाले नए परीक्षा ढर्रे को लेकर चिंतित थे।
इस सत्र कैसा रहेगा परीक्षा का स्वरूप
अदालत के आदेश के अनुसार, इस शैक्षणिक वर्ष के दौरान छात्र तीसरी भाषा की पढ़ाई तो जारी रखेंगे, लेकिन इसके मूल्यांकन का पूरा ढांचा अलग होगा। अब इस विषय का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन छात्रों को भविष्य में 10वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान इस तीसरी भाषा का पर्चा नहीं देना होगा। इस कदम से छात्रों पर से अतिरिक्त पढ़ाई और परीक्षा का भारी तनाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
नए नियम लागू होने की समय-सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 'थ्री लैंग्वेज पॉलिसी' को पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है, बल्कि इसके क्रियान्वयन की समय-सीमा में बदलाव किया गया है। यह नई व्यवस्था आगामी सत्र 2027-28 (1 अप्रैल 2027) से औपचारिक रूप से लागू की जाएगी। इस विस्तृत समय-सीमा का मुख्य उद्देश्य स्कूलों, शिक्षकों और छात्रों को नई नीति के अनुरूप ढलने और इसकी बेहतर तैयारी करने का पर्याप्त अवसर देना है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत के मायने
CBSE के इस कदम और शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप से छात्रों को एक विषय के अतिरिक्त बोझ से सीधी मुक्ति मिली है। अचानक से नए सिलेबस और बोर्ड परीक्षा का दबाव झेल रहे कक्षा 6 के बच्चों के लिए यह फैसला एक संजीवनी की तरह है। अब स्कूल प्रशासन को भी नए भाषाई ढांचे को व्यवस्थित रूप से लागू करने के लिए पूरा समय मिल सकेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
तमिलनाडु में नवजात बच्चों को मिलेगी 1 ग्राम सोने की अंगूठी, CM विजय ने शुरू की योजना

तमिलनाडु में नवजात बच्चों को मिलेगी 1 ग्राम सोने की अंगूठी, CM विजय ने शुरू की योजना

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📅 28 Sep2026

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने चुनावी वादा पूरा करते हुए 'थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम' योजना का शुभारंभ किया। मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल से शुरू हुई इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्मे पात्र नवजात शिशुओं को 22 कैरेट की 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। इसके लिए ₹755.83 करोड़ बजट आवंटित हुआ है।

तमिलनाडु में नवजात बच्चों को मिलेगी 1 ग्राम सोने की अंगूठी, CM विजय ने शुरू की योजना
खबर का निचोड़
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने चुनावी वादा पूरा करते हुए 'थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम' योजना का शुभारंभ किया। मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल से शुरू हुई इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्मे पात्र नवजात शिशुओं को 22 कैरेट की 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। इसके लिए ₹755.83 करोड़ बजट आवंटित हुआ है।
चुनावी वादा पूरा: नवजात शिशुओं के लिए सोने का तोहफा
तमिलनाडु की राजनीति और जनकल्याणकारी योजनाओं का रिश्ता हमेशा से गहरा रहा है। इसी कड़ी में राज्य के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने जनता से किया अपना एक बड़ा चुनावी वादा धरातल पर उतार दिया है। मदुरै के प्रतिष्ठित सरकारी राजाजी अस्पताल में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 'थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम' (मामा का सोने की अंगूठी उपहार) योजना की आधिकारिक शुरुआत की। इस योजना के शुरू होते ही राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
क्या है 'थाईमामन थंगा मोथिरम थिट्टम' योजना?
तमिल संस्कृति में नवजात शिशु के जन्म पर मामा द्वारा सोने का उपहार देने की एक बेहद पुरानी और पवित्र परंपरा रही है। सरकार ने इसी सांस्कृतिक भावना को ध्यान में रखते हुए इस सामाजिक कल्याणकारी योजना का खाका तैयार किया है। इस पहल के तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले सभी पात्र नवजात बच्चों को 22 कैरेट शुद्धता वाली 1 ग्राम सोने की अंगूठी भेंट की जाएगी। यह कदम न केवल गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लाएगा, बल्कि जन्म के समय ही बच्चे के भविष्य के लिए एक प्रतीकात्मक वित्तीय सुरक्षा भी प्रदान करेगा।
₹755.83 करोड़ का भारी-भरकम बजट
राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए वित्तीय संसाधनों की कोई कमी नहीं छोड़ी है। योजना के क्रियान्वयन के लिए ₹755.83 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है। मदुरै में आयोजित उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने खुद कई माताओं को उनके नवजात बच्चों के लिए सोने की अंगूठियां सौंपी। इस दौरान अस्पताल परिसर का माहौल काफी भावुक और उत्साहजनक नजर आया।
सरकारी अस्पतालों में बढ़ेगा विश्वास
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना का दोहरा फायदा देखने को मिलेगा। पहला, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकार की तरफ से सीधा संबल मिलेगा। दूसरा, इस तरह के आकर्षक प्रोत्साहन से राज्य के लोग प्रसव (डिलीवरी) के लिए निजी अस्पतालों के भारी-भरकम खर्च से बचकर सरकारी अस्पतालों का रुख करेंगे। इससे राज्य में संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) की दर में और अधिक बढ़ोतरी होगी, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।
विधानसभा चुनाव के दौरान जोसेफ विजय ने जनता से यह वादा किया था। सरकार बनने के बाद इतने बड़े पैमाने पर इस योजना को लागू करके उन्होंने यह संदेश दे दिया है कि उनकी सरकार जन कल्याण और लोक-लुभावन वादों को धरातल पर भुनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मुंबई में संग्राम: पुलिस का झटका, दीपके की 'जेल भरो' चेतावनी

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मुंबई में संग्राम: पुलिस का झटका, दीपके की 'जेल भरो' चेतावनी

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📅 28 Sep2026

मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन को बॉम्बे हाईकोर्ट के 2013 के आदेश का हवाला देकर रोका गया, जिसके तहत पार्क को 'साइलेंस जोन' घोषित किया गया था। इस फैसले के बाद दीपके ने 'जेल भरो आंदोलन' की चेतावनी दी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मुंबई में संग्राम: पुलिस का झटका, दीपके की 'जेल भरो' चेतावनी
खबर का निचोड़
मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन को बॉम्बे हाईकोर्ट के 2013 के आदेश का हवाला देकर रोका गया, जिसके तहत पार्क को 'साइलेंस जोन' घोषित किया गया था। इस फैसले के बाद दीपके ने 'जेल भरो आंदोलन' की चेतावनी दी है।
शिवाजी पार्क में प्रदर्शन पर ब्रेक
गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को मुंबई का ऐतिहासिक शिवाजी पार्क एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शन का गवाह बनने वाला था। सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इस पार्क में एक विशाल प्रोटेस्ट का आह्वान किया था। हालांकि, मुंबई पुलिस ने अंतिम समय में इस आयोजन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले ने आयोजकों की तैयारियों पर पानी फेर दिया है और राज्य में सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है।
हाईकोर्ट के पुराने आदेश का हवाला
मुंबई पुलिस ने अनुमति न देने के पीछे बॉम्बे हाईकोर्ट के 2013 के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अदालत ने शिवाजी पार्क और उसके आसपास के इलाके को 'साइलेंस जोन' (शांत क्षेत्र) घोषित किया हुआ है। नियमों के मुताबिक, इस क्षेत्र में भारी भीड़ जुटाने, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने और किसी भी प्रकार के सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती। कानून-व्यवस्था और ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस ने यह कदम उठाना अनिवार्य बताया है।
आर-पार के मूड में अभिजीत दीपके
पुलिस के इस इनकार के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके का रुख और भी आक्रामक हो गया है। उन्होंने प्रशासन के इस रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए साफ कर दिया है कि वह अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे। दीपके ने बयान जारी कर कहा कि जनता की आवाज को इस तरह कानूनी पचड़ों में दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने घोषणा की है कि यदि पुलिस उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने की अनुमति नहीं देती, तो वे और उनके समर्थक पीछे नहीं हटेंगे बल्कि 'जेल भरो आंदोलन' की शुरुआत करेंगे।
बढ़ता राजनीतिक तनाव
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह के तीखे प्रदर्शन और अब पुलिस के बैन के बाद मुंबई का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। 2 अक्टूबर की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, शिवाजी पार्क और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने की संभावना है। एक तरफ जहां पुलिस मुस्तैद है, वहीं दूसरी तरफ दीपके की 'जेल भरो' की चेतावनी ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अब देखना यह होगा कि 2 अक्टूबर को मुंबई की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन होता है या पुलिस आंदोलनकारियों को रोकने में कामयाब रहती है।

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