
एशिया कप 2026: फाइनल में भारत का दबदबा, पाकिस्तान या श्रीलंका से होगा मुकाबला
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर अपने अजेय सफर को जारी रखते हुए महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में ऐतिहासिक प्रवेश कर लिया है। सेमीफाइनल मुकाबले में बांग्लादेश को 40 रनों से करारी शिकस्त देकर टीम ने रिकॉर्ड 10वीं बार खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की की है। इस शानदार जीत के पीछे बल्लेबाजों का आक्रामक प्रदर्शन और गेंदबाजों का अनुशासित खेल मुख्य वजह रहा।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर अपने अजेय सफर को जारी रखते हुए महिला एशिया कप 2026 के फाइनल में ऐतिहासिक प्रवेश कर लिया है। सेमीफाइनल मुकाबले में बांग्लादेश को 40 रनों से करारी शिकस्त देकर टीम ने रिकॉर्ड 10वीं बार खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की की है। इस शानदार जीत के पीछे बल्लेबाजों का आक्रामक प्रदर्शन और गेंदबाजों का अनुशासित खेल मुख्य वजह रहा।
खिताबी जंग की ओर कदम
बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही अपना दबदबा बनाए रखा। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने एक मजबूत स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में उतरी बांग्लादेशी टीम निर्धारित ओवरों में लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई। इस मुकाबले की सबसे बड़ी स्टार युवा ओपनर शेफाली वर्मा रहीं। शेफाली ने मैदान के चारों और बेहतरीन स्ट्रोक खेलते हुए 64 रनों की शानदार और मैच जिताऊ पारी खेली। उनकी इस आक्रामक पारी के दम पर भारत ने एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया, जिसने विपक्षी टीम पर शुरुआती ओवरों से ही दबाव बना दिया। उनकी इस बेहतरीन पारी के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' के खिताब से नवाजा गया।
टूर्नामेंट में छक्कों की बरसात
पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय बल्लेबाजों का प्रदर्शन विरोधियों के लिए सिरदर्द साबित हुआ है। पावरप्ले से लेकर डेथ ओवर्स तक, भारतीय बल्लेबाजों ने मैदान के हर कोने को निशाना बनाया है। इस आक्रामक रुख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय बल्लेबाजों ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक कुल 25 छक्के लगाए हैं। यह आंकड़े टीम की बदली हुई रणनीति और खुलकर खेलने के आत्मविश्वास को साफ दर्शाते हैं, जहां हर बल्लेबाज बड़े शॉट खेलने से पीछे नहीं हट रही है।
कप्तानी पारी और अनुभवी खिलाड़ियों का योगदान
सेमीफाइनल में जीत के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम के प्रदर्शन पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने विशेष रूप से शेफाली वर्मा की पारी की सराहना करने के साथ-साथ ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा और विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष के बहुमूल्य योगदान की भी जमकर तारीफ की। मुश्किल समय में इन खिलाड़ियों द्वारा निभाई गई जिम्मेदारियों ने टीम को कई बार संकट से उबारा है। कप्तान का यह विश्वास टीम के भीतर मजबूत तालमेल को दिखाता है।
पाकिस्तान या श्रीलंका से होगी फाइनल भिड़ंत
महिला एशिया कप 2026 का बहुप्रतीक्षित फाइनल मुकाबला आगामी 13 सितंबर को खेला जाएगा। खिताबी मुकाबले में भारत के सामने कौन सी टीम होगी, इसका फैसला पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के बाद होगा। भारतीय टीम जिस तरह के फॉर्म और आक्रामक अंदाज में खेल रही है, उसे देखते हुए फैंस को एक रोमांचक फाइनल मुकाबले की पूरी उम्मीद है।

नीम करोली बाबा की प्रेरणा से बनी 'हनुमान अंश' ने तोड़े कमाई के रिकॉर्ड
नीम करोली बाबा के जीवन दर्शन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। भारत में 163 करोड़ रुपये की नेट कमाई का आंकड़ा पार कर चुकी यह फिल्म अब वैश्विक स्तर पर रिलीज हो चुकी है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए निर्माताओं ने इसके सीक्वल पर भी काम शुरू कर दिया है।
खबर का निचोड़
नीम करोली बाबा के जीवन दर्शन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। भारत में 163 करोड़ रुपये की नेट कमाई का आंकड़ा पार कर चुकी यह फिल्म अब वैश्विक स्तर पर रिलीज हो चुकी है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए निर्माताओं ने इसके सीक्वल पर भी काम शुरू कर दिया है।
बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता
सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद से ही 'हनुमान अंश' ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर बॉक्स ऑफिस के सभी समीकरणों को बदलते हुए 163 करोड़ रुपये से अधिक की नेट कमाई दर्ज कर ली है। यह फिल्म अब तेजी से 200 करोड़ रुपये के जादुई क्लब की ओर बढ़ रही है। फिल्म की यह ताबड़तोड़ कमाई इस बात का प्रमाण है कि दर्शक आज के समय में आध्यात्मिक और प्रेरणादायक सिनेमा को दिल से अपना रहे हैं।
वैश्विक मंच पर शानदार दस्तक
भारतीय सिनेमाघरों में तहलका मचाने के बाद अब 'हनुमान अंश' ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपने कदम रख दिए हैं। आज यानी 11 सितंबर को यह फिल्म यूके, यूएसए, यूएई और कनाडा समेत दुनिया के कई प्रमुख देशों में रिलीज कर दी गई है। वैश्विक वितरण की कमान प्रसिद्ध प्रोडक्शन हाउस होम्बले फिल्म्स के पास है, जिनकी मजबूत पकड़ के कारण फिल्म को विदेशों में भी एक भव्य शुरुआत मिलने की पूरी उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर दर्शकों का यह जुड़ाव भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक कहानियों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
राजनीतिक गलियारों में भी सराहना
फिल्म की लोकप्रियता केवल आम दर्शकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी इसकी खूब प्रशंसा हो रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'हनुमान अंश' की जमकर सराहना की है। उनका यह बयान फिल्म के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को और अधिक मजबूत करता है। इस तरह के समर्थन से फिल्म को और अधिक गति मिल रही है, जिससे सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ लगातार बनी हुई है।
सीक्वल को हरी झंडी और भविष्य की तैयारी
फिल्म को मिल रहे अभूतपूर्व रिस्पॉन्स को देखते हुए मेकर्स ने बड़ा फैसला लिया है। 'हनुमान अंश' की अभूतपूर्व सफलता के बाद इसके सीक्वल पर आधिकारिक रूप से काम शुरू हो चुका है। निर्माताओं का लक्ष्य इस आध्यात्मिक सफर को और आगे ले जाना है ताकि दर्शकों को और अधिक गहन और रोमांचक अनुभव प्रदान किया जा सके। सीक्वल की घोषणा ने फैंस के उत्साह को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

दिल्ली में वैश्विक कूटनीति का महाकुंभ: पुतिन और जिनपिंग का आगमन, सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच ब्रिक्स का आगाज
राजधानी दिल्ली आज दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक जमावड़े की गवाह बन चुकी है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए वैश्विक महाशक्तियों के शीर्ष नेता भारत की धरती पर कदम रख चुके हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन से न केवल भारत की कूटनीतिक ताकत का लोहा पूरी दुनिया मान रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
राजधानी दिल्ली आज दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक जमावड़े की गवाह बन चुकी है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए वैश्विक महाशक्तियों के शीर्ष नेता भारत की धरती पर कदम रख चुके हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन से न केवल भारत की कूटनीतिक ताकत का लोहा पूरी दुनिया मान रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
भू-राजनीतिक हलचल और नेताओं का आगमन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तय कार्यक्रम के तहत दिल्ली पहुंच चुके हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता का दौर शुरू हो चुका है। इस अहम बैठक में रक्षा समझौतों, ऊर्जा सुरक्षा, अत्याधुनिक तकनीक और आपसी व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने जैसे गंभीर मुद्दों पर मुहर लगने की पूरी संभावना है।
दूसरी ओर, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी आज दिल्ली पहुंच रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। खास बात यह है कि शी जिनपिंग की यह भारत यात्रा पूरे सात साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही है, जिस पर पूरी दुनिया की मीडिया और कूटनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर टिकी हुई है। द्विपक्षीय तनावों की पृष्ठभूमि में यह मुलाकात एशियाई कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
सुरक्षा के अभेद्य किले में तब्दील हुई राजधानी
विदेशी मेहमानों के आगमन और ब्रिक्स सम्मेलन की भव्यता को देखते हुए दिल्ली को सुरक्षा के अभेद्य किले में बदल दिया गया है। शहर की सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए 17 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया गया है। नई दिल्ली जिला पूरी तरह से सील कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक की गुंजाइश न बचे।
सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के पुख्ता इंतजामों के बीच रेल और सड़क मार्ग पर भी व्यापक असर देखा जा रहा है। सम्मेलन के चलते कुल 26 ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है ताकि राजधानी की सीमाओं पर वीवीआईपी मूवमेंट प्रभावित न हो।
जनजीवन पर असर और सार्वजनिक अवकाश
महाधिवेशन के कारण आम जनजीवन को सुगम बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। आज 11 सितंबर को दिल्ली में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है, जिसके चलते शहर के तमाम स्कूल, कॉलेज और सरकारी-गैरसरकारी दफ्तर पूरी तरह बंद रखे गए हैं। सड़कों पर आम दिनों की तुलना में वाहनों की आवाजाही बेहद कम है, जिससे राजधानी पूरी तरह से कूटनीतिक रंग में रंगी नजर आ रही है।

फुट-एंड-माउथ डिजीज: यूरोप और मध्य पूर्व में पुनरावृत्ति
लगभग साठ वर्षों के अंतराल के बाद यूरोप और मध्य पूर्व में फुट-एंड-माउथ डिजीज (FMD) के एक नए सीरोटाइप की पुष्टि हुई है। यह क्लोवन-हूफ़ेड (खुर वाले) पशुओं में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक वायरल संक्रमण है, जो पशुधन उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
फुट-एंड-माउथ डिजीज: यूरोप और मध्य पूर्व में पुनरावृत्ति
सारांश (Summary):
लगभग साठ वर्षों के अंतराल के बाद यूरोप और मध्य पूर्व में फुट-एंड-माउथ डिजीज (FMD) के एक नए सीरोटाइप की पुष्टि हुई है। यह क्लोवन-हूफ़ेड (खुर वाले) पशुओं में होने वाला एक अत्यधिक संक्रामक वायरल संक्रमण है, जो पशुधन उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय एवं पृष्ठभूमि
फुट-एंड-माउथ डिजीज (FMD) एक तीव्र संक्रामक रोग है जो गाय, भैंस, भेड़ और बकरी जैसे क्लोवन-हूफ़ेड (दो भागों में बंटे खुर वाले) पशुओं को प्रभावित करता है। हाल ही में इस बीमारी के एक विशेष सीरोटाइप की यूरोप और मध्य पूर्व के क्षेत्रों में लगभग छह दशकों के बाद पुनरावृत्ति दर्ज की गई है। यह स्थिति पशु स्वास्थ्य और क्षेत्रीय व्यापार सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
रोग कारक एवं संचरण
यह बीमारी 'पिकोर्नाविराइडे' परिवार के 'एफ़थोवाइरस' (Aphthovirus) के कारण फैलती है। इसका संचरण मुख्य रूप से संक्रमित पशुओं के संपर्क, दूषित बाड़ों, परिवहन वाहनों, चारे, पानी और दूषित उपकरणों के माध्यम से होता है। इसके अलावा, संक्रमित मांस या पशु उत्पादों का उपयोग करने से भी यह वायरस तेजी से फैलता है। पारंपरिक नस्लों की तुलना में गहन रूप से पाले जाने वाले (इंटेंसिवलीीयर्ड) पशु इस संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
लक्षण एवं प्रभाव
इस रोग की पहचान पशुओं में तेज बुखार और जीभ, होंठ, मुंह, थनों तथा खुरों के बीच छालेदार घावों के रूप में होती है। इससे पशुओं की उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट आती है। हालांकि वयस्क पशुओं में यह बीमारी शायद ही कभी घातक होती है, लेकिन युवा पशुओं में मायोकार्डिटिस के कारण उच्च मृत्यु दर देखी जाती है।
आर्थिक एवं सामरिक महत्व
यह एक सीमा-पार पशु रोग (TAD) है, जो पशुधन उत्पादन को गहरे रूप से प्रभावित करने के साथ-साथ पशुओं और पशु उत्पादों के क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बाधित करता है। वैश्विक स्तर पर कृषि अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए इसे नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।
निवारक उपाय
वर्तमान परिदृश्य में टीकाकरण ही फुट-एंड-माउथ डिजीज के खिलाफ एकमात्र सबसे प्रभावी निवारक उपाय है। इसके प्रसार को रोकने के लिए समय पर टीकाकरण अभियान, सीमा पार निगरानी और सख्त बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य माना जाता है।

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो: संगठन, कार्यप्रणाली और समसामयिक प्रासंगिकता
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) पर्यावरण मंत्रालय के तहत गठित एक सांविधिक निकाय है, जो देश में संगठित वन्यजीव अपराधों से निपटने का कार्य करता है। हाल ही में, इस बहु-विषयक एजेंसी को ओडिशा के बालासोर जिले में विदेशी ओरंगुटान के रहस्मय प्रकटीकरण की अंतरराष्ट्रीय जांच सौंपी गई है।
सारांश (Summary): वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) पर्यावरण मंत्रालय के तहत गठित एक सांविधिक निकाय है, जो देश में संगठित वन्यजीव अपराधों से निपटने का कार्य करता है। हाल ही में, इस बहु-विषयक एजेंसी को ओडिशा के बालासोर जिले में विदेशी ओरंगुटान के रहस्मय प्रकटीकरण की अंतरराष्ट्रीय जांच सौंपी गई है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय एवं स्थापना
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) भारत सरकार द्वारा देश में संगठित वन्यजीव अपराधों का मुकाबला करने के लिए स्थापित एक सांविधिक निकाय है। इसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38Y के प्रावधानों के तहत किया गया था और यह वर्ष 2008 में पूरी तरह से क्रियाशील हुआ। यह निकाय केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करता है। इसका मुख्य मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है, जबकि इसके पांच क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और भोपाल में कार्यरत हैं।
संरचना एवं कार्यप्रणाली
यह एक बहु-विषयक निकाय है, जिसमें भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा, सीमा शुल्क विभाग तथा अन्य खुफिया एवं प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं देते हैं। ब्यूरो का मुख्य उत्तरदायित्व संगठित वन्यजीव अपराधों से जुड़ी खुफिया जानकारी का संकलन और संप्रेषण करना है। यह राज्य सरकारों और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर अपराधियों को पकड़ने का कार्य करता है। इसके साथ ही, यह भारत में केंद्रीय वन्यजीव अपराध डेटा बैंक के रख-रखाव की जिम्मेदारी भी निभाता है।
अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और सीमा पार समन्वय
यह ब्यूरो भारत में साइट्स (CITES) के प्रावधानों के प्रभावी प्रवर्तन में सहायता प्रदान करता है, जिसका भारत वर्ष 1976 से एक पक्षकार देश रहा है। एजेंसी फ्रंटलाइन अधिकारियों और अभियोजकों के लिए क्षमता निर्माण तथा प्रजाति-पहचान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है। सीमा पार वन्यजीव तस्करी के मार्गों पर नज़र रखने के लिए यह इंटरपोल के पर्यावरण अपराध कार्यक्रम और विश्व सीमा शुल्क संगठन के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखती है।
तकनीकी नवाचार और डेटा प्रबंधन
वन्यजीव अपराधों के रुझानों का विश्लेषण करने और साक्ष्य-आधारित रोकथाम के उपाय तैयार करने के लिए ब्यूरो ने एक ऑनलाइन वन्यजीव अपराध डेटा प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। इस उन्नत तकनीक का उपयोग करके कई सफल राष्ट्रव्यापी और अंतर्राष्ट्रीय अभियानों का संचालन किया गया है, जिनमें ऑपरेशन सेव कूर्मा, थंडरबर्ड, वाइल्डनेट, लेस्नो और थंडरस्टॉर्म जैसे प्रमुख प्रवर्तन अभियान शामिल हैं।

पश्चिमी घाट का दुर्लभ रेप्लेंडेंट श्रब फ्रॉग और इराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान
केरल के इराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान के उच्च तुंगता वाले शोला-घास के मैदानों में पाया जाने वाला रेप्लेंडेंट श्रब फ्रॉग (Resplendent Shrub Frog) अपनी अनूठी शारीरिक बनावट और संकटग्रस्त स्थिति के कारण चर्चा में है। यह उभयचर प्रजाति बिना किसी टेडपोल चरण के सीधे विकास प्रक्रिया से गुजरती है और वर्तमान में आईयूसीएन (IUCN) द्वारा गंभीर रूप से संकटग्रस्त घोषित की गई है।
पश्चिमी घाट की रेप्लेंडेंट श्रब फ्रॉग और इravikulam राष्ट्रीय उद्यान
सारांश (Summary):
केरल के एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाने वाली रेप्लेंडेंट श्रब फ्रॉग प्रजाति अपने विशिष्ट क्रॉलिंग व्यवहार और अद्वितीय आवास के लिए जानी जाती है। उच्च-तुंगता वाले शोला-घास के मैदानों में निवास करने वाली यह प्रजाति गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और पश्चिमी घाट की नाज़ुक पारिस्थितिकी का प्रतिनिधित्व करती है।
विस्तृत विश्लेषण:
भौगोलिक वितरण और आवास
यह प्रजाति केरल के इराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले अनामुडी क्षेत्र के उच्च-तुंगता वाले शोला-घास के मैदानों की स्थानिक है। यह क्षेत्र दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी अनामुडी (2695 मीटर) का घर है। यहाँ की जलवायु ठंडे मौसम के अनुकूल है, जहाँ घास के मैदान, श्रबलैंड और शोला वनों का अनूठा पारिस्थितिकी तंत्र पाया जाता है।
शारीरिक विशेषताएं और व्यवहार
रेप्लेंडेंट श्रब फ्रॉग राकोफोरीडे परिवार से संबंधित एक अत्यंत लघु आकार का उभयचर है, जिसकी लंबाई 2 से 3 सेंटीमीटर के बीच होती है। इसके अंगों और किनारों पर विशिष्ट और स्पष्ट पैटर्न पाए जाते हैं। अन्य संबंधित प्रजातियों की तुलना में इसके अंग काफी छोटे होते हैं। यह एक थल-वासी जीव है जो स्पष्ट रूप से रेंगने (क्रॉलिंग) की प्रवृत्ति प्रदर्शित करता है। यह निशाचर स्वभाव का होता है और कृत्रिम प्रकाश स्रोतों से दूर छिपकर रहता है।
प्रजनन और जीवन चक्र
इस उभयचर की प्रजनन प्रक्रिया अत्यंत विशिष्ट है क्योंकि इसमें प्रत्यक्ष विकास (direct development) होता है। इस प्रक्रिया में पारंपरिक मुक्त-तैरने वाले टेडपोल चरण का पूर्ण अभाव होता है, जो इसे अन्य मेंढक प्रजातियों से अलग बनाता है।
संरक्षण स्थिति
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची के अनुसार, इस प्रजाति को 'गंभीर रूप से संकटग्रस्त' (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है। इसके सीमित भौगोलिक विस्तार और मानवीय गतिविधियों के प्रभाव के कारण इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान का महत्व
पश्चिमी घाट में स्थित यह संरक्षित क्षेत्र नीलगिरी तहर का सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास है। इसे प्रसिद्ध फूल 'नीलाकुरिंजी' की भूमि भी कहा जाता है, जो हर बारह वर्ष में एक बार खिलता है। यह राष्ट्रीय उद्यान चिनार वन्यजीव अभयारण्य, पंपदुम शोला राष्ट्रीय उद्यान और अनामुडी शोला राष्ट्रीय उद्यान से घिरा हुआ है, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को और अधिक समृद्ध बनाता है।
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