Delight News Logo
Latest सामान्य ख़बरें सरकारी नौकरी करेंट अफेयर्स परीक्षा ज्ञान
दिल्ली सीएम और केजरीवाल परिवार को चुनाव आयोग का SIR नोटिस

दिल्ली सीएम और केजरीवाल परिवार को चुनाव आयोग का SIR नोटिस

Delight News
📅 21 Sep2026

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत उनके परिवार के चार सदस्यों को चुनाव आयोग ने एसआईआर (SIR) नोटिस जारी किया है। आयोग ने सीएम गुप्ता को भेजे गए नोटिस को नियमित सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, वहीं केजरीवाल परिवार के सदस्यों के नामों को लेकर यह कार्रवाई की गई है।

दिल्ली सीएम और केजरीवाल परिवार को चुनाव आयोग का SIR नोटिस
खबर का निचोड़
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत उनके परिवार के चार सदस्यों को चुनाव आयोग ने एसआईआर (SIR) नोटिस जारी किया है। आयोग ने सीएम गुप्ता को भेजे गए नोटिस को नियमित सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, वहीं केजरीवाल परिवार के सदस्यों के नामों को लेकर यह कार्रवाई की गई है।
चुनाव आयोग का बड़ा कदम
दिल्ली की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को एसआईआर (SIR) नोटिस जारी किया है। इस कार्रवाई ने राजधानी के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
केजरीवाल परिवार के इन सदस्यों को नोटिस
यह नोटिस केवल अरविंद केजरीवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों को भी भेजा गया है। इनमें उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, बेटे पुलकित केजरीवाल और माता-पिता गोबिंद राम केजरीवाल व गीता देवी शामिल हैं। आयोग की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू होने के आसार हैं।
सत्यापन प्रक्रिया या कुछ और?
चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को दिया गया नोटिस एक सामान्य मतदाता सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग का कहना है कि यह एक routine प्रकिया है जिसके तहत मतदाता सूची के विवरणों का पुनः सत्यापन किया जाता है। हालांकि, चुनाव से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार को एक साथ नोटिस जारी होने से मामले ने तूल पकड़ लिया है।
दिल्ली की राजनीति में गरमाया माहौल
चुनावी रणनीतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच इस नोटिस के समय को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आम आदमी पार्टी और विपक्ष दोनों ही इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। मतदाता सूची की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर चुनाव आयोग सख्त रुख अपना रहा है, जिससे आने वाले दिनों में प्रशासनिक हलचल और बढ़ सकती है।
NPS Swasthya: एनपीएस सब्सक्राइबर्स को मिलेगा ₹30 लाख का हेल्थ कवर

NPS Swasthya: एनपीएस सब्सक्राइबर्स को मिलेगा ₹30 लाख का हेल्थ कवर

Delight News
📅 21 Sep2026

पेंशन फंड नियामक PFRDA ने 'NPS Swasthya' स्कीम के अंतिम दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत नेशनल पेंशन सिस्टम के सब्सक्राइबर्स को ₹30 लाख तक का हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलेगा। साथ ही, मेडिकल इमरजेंसी में एनपीएस फंड से 25% तक पार्शियल विड्रॉल की सुविधा भी दी जाएगी।

NPS Swasthya: एनपीएस सब्सक्राइबर्स को मिलेगा ₹30 लाख का हेल्थ कवर
खबर का निचोड़
पेंशन फंड नियामक PFRDA ने 'NPS Swasthya' स्कीम के अंतिम दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत नेशनल पेंशन सिस्टम के सब्सक्राइबर्स को ₹30 लाख तक का हेल्थ इंश्योरेंस कवर मिलेगा। साथ ही, मेडिकल इमरजेंसी में एनपीएस फंड से 25% तक पार्शियल विड्रॉल की सुविधा भी दी जाएगी।
रिटायरमेंट फंड के साथ अब हेल्थ कवरेज का दोहरा फायदा
भारत में रिटायरमेंट की प्लानिंग करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव आया है। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने 'NPS Swasthya' स्कीम के फाइनल नियमों को अधिसूचित कर दिया है। यह पहल खासतौर पर उन एनपीएस (NPS) सब्सक्राइबर्स के लिए डिजाइन की गई है जो बुढ़ापे की वित्तीय सुरक्षा के साथ-साथ गंभीर बीमारियों और अचानक आने वाले मेडिकल खर्चों से निपटना चाहते हैं।
इस नई व्यवस्था के तहत खाताधारकों को ₹30 लाख तक का व्यापक हेल्थ इंश्योरेंस कवर हासिल करने का अवसर मिलेगा। PFRDA का यह कदम पेंशन क्षेत्र में एक अभूतपूर्व सुधार माना जा रहा है, क्योंकि यह एक ही प्लेटफॉर्म के भीतर पेंशन और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों को जोड़ने का काम करता है।
आपात स्थिति में 25% तक फंड निकालने की छूट
अक्सर देखा गया है कि गंभीर बीमारियों के दौरान इलाज का भारी-भरकम खर्च लोगों की जीवनभर की बचत को खत्म कर देता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए PFRDA ने नियमों में ढील दी है। अब एनपीएस खाताधारक किसी भी गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी के वक्त अपने कुल जमा फंड (Corpus) में से 25% तक राशि का पार्शियल विड्रॉल (आंशिक निकासी) कर सकेंगे।
यह निकासी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और आसान रखी गई है, ताकि आपातकाल के समय सब्सक्राइबर्स को तुरंत वित्तीय मदद मिल सके।
स्वास्थ्य सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता का संतुलन
बढ़ती महंगाई और मेडिकल खर्चों के इस दौर में ₹30 लाख का इंश्योरेंस कवर हर वर्ग के निवेशक के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा। NPS Swasthya स्कीम का सीधा मकसद लोगों को अस्पताल के भारी खर्चों के कारण अपनी पेंशन बचत से समझौता करने से रोकना है।
अब तक एनपीएस केवल एक रिटायरमेंट सेविंग टूल के रूप में देखा जाता था, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस और पार्शियल विड्रॉल की सुविधा जुड़ने से यह अधिक व्यावहारिक और सुरक्षात्मक निवेश विकल्प बन गया है।
प्रक्रिया और क्रियान्वयन
PFRDA के अनुसार, इस योजना को लागू करने के लिए जल्द ही डिजिटल पोर्टल्स पर विशेष विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। सब्सक्राइबर्स अपने मौजूदा एनपीएस अकाउंट के जरिए ही इस इंश्योरेंस कवर को चुन सकेंगे और प्रीमियम भुगतान की प्रक्रिया को भी एनपीएस डैशबोर्ड के माध्यम से सुगम बनाया जाएगा।
पैपराज़ी के 'गंदे एंगल' पर भड़के सलमान खान, एक्ट्रेसेस को दी सीधी सलाह

पैपराज़ी के 'गंदे एंगल' पर भड़के सलमान खान, एक्ट्रेसेस को दी सीधी सलाह

Delight News
📅 21 Sep2026

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने महिलाओं और अभिनेत्रियों के आपत्तिजनक एंगल से फोटो-वीडियो क्लिक करने वाले पैपराज़ी पर कड़ा ऐतराज जताया है। सलमान ने इस ट्रेंड को बेहयाई करार देते हुए अभिनेत्रियों को ऐसे पैपराज़ी का कड़ा विरोध करने और मौके पर ही करारा जवाब देने की सलाह दी है।

पैपराज़ी के 'गंदे एंगल' पर भड़के सलमान खान, एक्ट्रेसेस को दी सीधी सलाह
खबर का निचोड़
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने महिलाओं और अभिनेत्रियों के आपत्तिजनक एंगल से फोटो-वीडियो क्लिक करने वाले पैपराज़ी पर कड़ा ऐतराज जताया है। सलमान ने इस ट्रेंड को बेहयाई करार देते हुए अभिनेत्रियों को ऐसे पैपराज़ी का कड़ा विरोध करने और मौके पर ही करारा जवाब देने की सलाह दी है।
जब जेंटलमैन कोड हुआ तार-तार
ग्लैमर वर्ल्ड में सेलिब्रिटीज़ और पैपराज़ी का रिश्ता हमेशा से चोली-दामन का रहा है। लेकिन बीते कुछ समय में कैमरे के एंगल्स ने शालीनता की सारी हदें पार कर दी हैं। किसी भी इवेंट या एयरपोर्ट पर जब कोई एक्ट्रेस गाड़ी से उतरती है या उसमें बैठती है, तब पैपराज़ी के कैमरों का फोकस उनके चेहरे के बजाय शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर टिक जाता है। इस अभद्र प्रैक्टिस पर अब बॉलीवुड के 'भाईजान' यानी सलमान खान का गुस्सा बुरी तरह फूटा है।
सलमान का तीखा हमला और सीधी चेतावनी
एक हालिया बातचीत के दौरान सलमान खान ने इस मुद्दे को उठाते हुए पैपराज़ी के घटिया एंगल्स की कड़े शब्दों में निंदा की। सलमान ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि यह कोई फोटोग्राफी नहीं बल्कि सरेआम किसी की निजता पर हमला है। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला या एक्ट्रेस गाड़ी में बैठती है तो कैमरा उनके हिप्स पर फोकस होता है और जब वो गाड़ी से उतरती हैं तो लेंस उनकी जांघों पर टिका दिया जाता है। यह एक बेहद शर्मनाक ट्रेंड बनता जा रहा है जिसे अब तुरंत रोका जाना चाहिए।
'पीछे मुड़ो और एक चमाट मारो'
आमतौर पर ऐसी घटनाओं पर चुप्पी साध लेने या असहज महसूस करने वाली अभिनेत्रियों को सलमान ने निडर होकर एक्शन लेने की बात कही है। उन्होंने एक्ट्रेसेस को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी कोई पैपराज़ी इस तरह का आपत्तिजनक शॉट लेने की कोशिश करे, तो बिना हिचकिचाए तुरंत घूमकर उसे एक 'चमाट' मारो। सलमान के इस सख्त रुख का मतलब साफ है कि अब ऐसे मामलों में सहने के बजाय पलटकर जवाब देना जरूरी हो गया है।
कंटेंट के नाम पर अश्लीलता का खेल
डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स की अंधी दौड़ ने पैपराज़ी कल्चर के स्तर को काफी गिरा दिया है। 'सेंसेशनल कंटेंट' बनाने के चक्कर में पैपराज़ी अक्सर सेलिब्रिटीज़ की पर्सनल स्पेस और डिग्निटी का ख्याल रखना भूल जाते हैं। खासकर महिला कलाकारों को आए दिन इस तरह के असहज पलों का सामना करना पड़ता है। सलमान खान का यह बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि पूरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बढ़ रही इस गंदी मानसिकता के खिलाफ एक जोरदार तमाचा है।
विदेशी फंड आउटफ्लो: सितंबर में FIIs ने बेचे ₹23,676 करोड़ के शेयर

विदेशी फंड आउटफ्लो: सितंबर में FIIs ने बेचे ₹23,676 करोड़ के शेयर

Delight News
📅 21 Sep2026

सितंबर के महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाज़ार से ₹23,676 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बिकवाली का रुख अपनाया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल के उछाल और वैश्विक तनावों ने निवेशकों को सतर्क किया है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की मजबूत खरीदारी ने बाज़ार की स्थिरता बनाए रखी।

विदेशी फंड आउटफ्लो: सितंबर में FIIs ने बेचे ₹23,676 करोड़ के शेयर
सितंबर के महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाज़ार से ₹23,676 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बिकवाली का रुख अपनाया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल के उछाल और वैश्विक तनावों ने निवेशकों को सतर्क किया है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की मजबूत खरीदारी ने बाज़ार की स्थिरता बनाए रखी।
बिकवाली की मुख्य वजहें
भारतीय शेयर बाज़ार में सितंबर के दौरान विदेशी निवेशकों का रुख रक्षात्मक दिखाई दिया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आए बदलावों ने FIIs को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण वैश्विक निवेशक सुरक्षित और बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका को बढ़ा दिया है। भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल का महंगा होना मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे को प्रभावित करता है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की घबराहट को बढ़ाया है, जिससे वे इमर्जिंग मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित बाज़ारों में लगा रहे हैं।
प्राइमरी मार्केट में अब भी भरोसा
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भले ही सेकेंडरी (द्वितीयक) बाज़ार से भारी मात्रा में फंड निकाला हो, लेकिन प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ (IPO) सेगमेंट में उनका विश्वास अब भी डगमगाया नहीं है। नए दौर की कंपनियों और मजबूत फंडामेंटल वाले आईपीओ में FIIs की ओर से लगातार निवेश देखा जा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों के दीर्घकालिक विकास को लेकर अब भी आशान्वित हैं और अल्पकालिक दबावों के बावजूद चुनिंदा अवसरों में पैसा लगाने से नहीं हिचक रहे।
DIIs बने बाज़ार के ढाल
जब विदेशी निवेशक भारी बिकवाली कर रहे थे, तब भारतीय शेयर बाज़ार को किसी बड़े क्रैश से बचाने का श्रेय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) को जाता है। DIIs और रिटेल निवेशकों ने म्यूचुअल फंड्स और एसआईपी (SIP) के ज़रिए बाज़ार में लगातार लिक्विडिटी बनाए रखी। FIIs द्वारा बेचे गए शेयरों को DIIs ने आक्रामक तरीके से खरीदा, जिससे बाज़ार में बड़ा असंतुलन पैदा नहीं हुआ।
घरेलू निवेशकों की इस मजबूत भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय बाज़ार अब केवल विदेशी पूंजी के भरोसे नहीं टिका है। भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती और घरेलू रिटेल निवेशकों का बढ़ता दायरा बाज़ार को वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
विदेशी फंड आउटफ्लो: सितंबर में FIIs ने बेचे ₹23,676 करोड़ के शेयर

विदेशी फंड आउटफ्लो: सितंबर में FIIs ने बेचे ₹23,676 करोड़ के शेयर

Delight News
📅 21 Sep2026

सितंबर के महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाज़ार से ₹23,676 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बिकवाली का रुख अपनाया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल के उछाल और वैश्विक तनावों ने निवेशकों को सतर्क किया है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की मजबूत खरीदारी ने बाज़ार की स्थिरता बनाए रखी।

विदेशी फंड आउटफ्लो: सितंबर में FIIs ने बेचे ₹23,676 करोड़ के शेयर
सितंबर के महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाज़ार से ₹23,676 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बिकवाली का रुख अपनाया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल के उछाल और वैश्विक तनावों ने निवेशकों को सतर्क किया है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की मजबूत खरीदारी ने बाज़ार की स्थिरता बनाए रखी।
बिकवाली की मुख्य वजहें
भारतीय शेयर बाज़ार में सितंबर के दौरान विदेशी निवेशकों का रुख रक्षात्मक दिखाई दिया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में आए बदलावों ने FIIs को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण वैश्विक निवेशक सुरक्षित और बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका को बढ़ा दिया है। भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल का महंगा होना मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे को प्रभावित करता है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की घबराहट को बढ़ाया है, जिससे वे इमर्जिंग मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित बाज़ारों में लगा रहे हैं।
प्राइमरी मार्केट में अब भी भरोसा
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भले ही सेकेंडरी (द्वितीयक) बाज़ार से भारी मात्रा में फंड निकाला हो, लेकिन प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ (IPO) सेगमेंट में उनका विश्वास अब भी डगमगाया नहीं है। नए दौर की कंपनियों और मजबूत फंडामेंटल वाले आईपीओ में FIIs की ओर से लगातार निवेश देखा जा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों के दीर्घकालिक विकास को लेकर अब भी आशान्वित हैं और अल्पकालिक दबावों के बावजूद चुनिंदा अवसरों में पैसा लगाने से नहीं हिचक रहे।
DIIs बने बाज़ार के ढाल
जब विदेशी निवेशक भारी बिकवाली कर रहे थे, तब भारतीय शेयर बाज़ार को किसी बड़े क्रैश से बचाने का श्रेय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) को जाता है। DIIs और रिटेल निवेशकों ने म्यूचुअल फंड्स और एसआईपी (SIP) के ज़रिए बाज़ार में लगातार लिक्विडिटी बनाए रखी। FIIs द्वारा बेचे गए शेयरों को DIIs ने आक्रामक तरीके से खरीदा, जिससे बाज़ार में बड़ा असंतुलन पैदा नहीं हुआ।
घरेलू निवेशकों की इस मजबूत भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय बाज़ार अब केवल विदेशी पूंजी के भरोसे नहीं टिका है। भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती और घरेलू रिटेल निवेशकों का बढ़ता दायरा बाज़ार को वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
UPI पर शुल्क का खौफ: दिल्ली-NCR के बाजारों में क्यों लौटे 'कैश ओनली' के पोस्टर?

UPI पर शुल्क का खौफ: दिल्ली-NCR के बाजारों में क्यों लौटे 'कैश ओनली' के पोस्टर?

Delight News
📅 21 Sep2026

₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI भुगतानों पर मर्चेंट चार्ज (PPI) की घोषणा के बाद दिल्ली-NCR के व्यापारी सड़कों पर उतर आए हैं। दिल्ली, गाज़ियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बाजारों व पेट्रोल पंपों पर 'कैश ओनली' के पोस्टर लग गए हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में व्यापारियों की यह वापसी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।

UPI पर शुल्क का खौफ: दिल्ली-NCR के बाजारों में क्यों लौटे 'कैश ओनली' के पोस्टर?
खबर का निचोड़
₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI भुगतानों पर मर्चेंट चार्ज (PPI) की घोषणा के बाद दिल्ली-NCR के व्यापारी सड़कों पर उतर आए हैं। दिल्ली, गाज़ियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बाजारों व पेट्रोल पंपों पर 'कैश ओनली' के पोस्टर लग गए हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में व्यापारियों की यह वापसी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।
UPI पर चार्ज का ऐलान और व्यापारियों का बढ़ता रोष
डिजिटल लेनदेन की रीढ़ बन चुके UPI को लेकर हाल ही में हुई एक घोषणा ने दिल्ली-NCR के बाजारों में हलचल मचा दी है। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा डिजिटल भुगतानों पर इंटरचेंज शुल्क लागू करने के फैसले से छोटे और बड़े व्यापारी सख्त नाराज हैं। गाज़ियाबाद, दिल्ली और ग्रेटर नोएडा के कई प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में दुकानों के बाहर 'UPI भुगतान स्वीकार नहीं है' और 'केवल कैश' लिखे पोस्टर चिपक गए हैं। जिस तकनीक ने देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर धकेला था, उसी के खिलाफ अब दुकानदारों का यह रुख एक नई बहस को जन्म दे रहा है।
डिजिटल इंडिया से फिर 'कैश ऑन डिलीवरी' की तरफ कदम
गाज़ियाबाद और ग्रेटर नोएडा के स्थानीय व्यापारी संघों ने इस फैसले का खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। व्यापारियों का तर्क है कि हर महीने उनका मुनाफा पहले ही महंगाई और प्रतिस्पर्धा के कारण कम हो रहा है, ऐसे में UPI लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क देना उनके लिए संभव नहीं है। दिल्ली के कई मुख्य बाजारों में राशन की दुकानों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर्स तक, व्यापारी ग्राहकों से सीधे नकद पैसों की मांग कर रहे हैं। कई पेट्रोल पंपों पर भी अब डिजिटल स्कैनर को ढंक दिया गया है या वहां केवल कैश स्वीकार करने के बोर्ड लगा दिए गए हैं।
ग्राहकों और दुकानदारों के बीच बढ़ता तनाव
इस फैसले का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में लोगों ने अपनी जेब में कैश रखना लगभग बंद कर दिया था। अब अचानक जब वे खरीदारी के बाद स्कैनर की तरफ फोन बढ़ाते हैं, तो उन्हें नकद भुगतान करने को कहा जाता है। इससे दुकानों पर रोज ग्राहकों और व्यापारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने आए वाहन चालकों को भी छुट्टे पैसों की वजह से खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
छोटे व्यवसायियों की घटती मार्जिन और व्यवस्था पर सवाल
व्यापारियों का कहना है कि ₹2,000 से ऊपर के भुगतानों पर लगने वाला यह शुल्क उनकी जेब पर सीधा डाका है। अगर वे इस चार्ज को खुद वहन करते हैं तो उनका मुनाफा खत्म हो जाता है, और यदि वे इसे ग्राहक पर डालते हैं तो ग्राहक छिटक जाता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान का बहिष्कार करना ही उन्हें सबसे सरल रास्ता नजर आ रहा है। NCR के व्यापारिक संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार और संबंधित बैंक इस शुल्क को वापस नहीं लेते या इसमें राहत नहीं देते, तब तक यह विरोध प्रदर्शन और 'कैश ओनली' का अभियान इसी तरह जारी रहेगा।

Delight News

निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण

Delight News एक प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और जनता तक बिल्कुल सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय हिंदी खबरें पहुंचाना है। हम बिना किसी पक्षपात के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, खेल, शिक्षा, सरकारी नौकरी और करंट अफेयर्स से जुड़ी हर छोटी-बड़ी ताजा खबरें आप तक सबसे पहले पहुंचाते हैं।
📬 हमसे संपर्क करें
delightnews.in@gmail.com Official YouTube Channel Official Instagram Profile

📍 अपनी लोकेशन Set करें



Privacy Policy & Terms

Delight News परिवार से जुड़ें

📱 और भी बेहतर अनुभव के लिए!

ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।

📥 Download Android App