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दिल्ली में स्वाइन फ्लू का खतरा, दिल को हो सकता है भारी नुकसान

दिल्ली में स्वाइन फ्लू का खतरा, दिल को हो सकता है भारी नुकसान

Delight News
📅 25 Aug2026

दिल्ली में स्वाइन फ्लू (H1N1) तेजी से पैर पसार रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह वायरल इंफेक्शन सिर्फ सांस की नली ही नहीं, बल्कि दिल पर भी गहरा असर डालता है। हृदय रोगी और हाई बीपी के मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद घातक साबित हो सकती है।

दिल्ली में स्वाइन फ्लू का खतरा, दिल को हो सकता है भारी नुकसान
खबर का निचोड़:
दिल्ली में स्वाइन फ्लू (H1N1) तेजी से पैर पसार रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह वायरल इंफेक्शन सिर्फ सांस की नली ही नहीं, बल्कि दिल पर भी गहरा असर डालता है। हृदय रोगी और हाई बीपी के मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद घातक साबित हो सकती है।
स्वाइन फ्लू का नया पैटर्न और दिल पर बढ़ता दबाव
राजधानी दिल्ली में H1N1 संक्रमण यानी स्वाइन फ्लू का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ सांस, गले में खराश और तेज बुखार से जुड़ी बीमारी मानते हैं, लेकिन इस बार का पैटर्न अधिक चिंताजनक नजर आ रहा है। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर गौतम नाइक के अनुसार, स्वाइन फ्लू का वायरस केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। यह शरीर में प्रवेश कर सीधे दिल पर भी दबाव डालता है, जिससे गंभीर जटिलताएं पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।
मायोकार्डिटिस का खतरा: जब दिल की मांसपेशियां होती हैं संक्रमित
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि H1N1 वायरस की वजह से दिल की मांसपेशियों में सूजन आ सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में 'मायोकार्डिटिस' (Myocarditis) कहा जाता है। यह स्थिति दिल की धड़कन के संतुलन को बिगाड़ देती है और उसकी पंपिंग क्षमता को कमजोर कर देती है। जब शरीर संक्रमण से लड़ रहा होता है, तब दिल को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों में अचानक सीने में दर्द, सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं उभर सकती हैं।
हाई रिस्क ग्रुप: पहले से बीमार लोग रखें खास ध्यान
जिन लोगों को पहले से ही हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कमजोर इम्युनिटी जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए यह दौर बेहद संवेदनशील है। पहले से मौजूद बीमारियां वायरस के प्रभाव को और ज्यादा खतरनाक बना देती हैं। ऐसे मरीजों में स्वाइन फ्लू के मामूली लक्षण भी स्थिति को तेजी से बिगाड़ सकते हैं। अचानक ब्लड प्रेशर का असंतुलित होना या हार्ट फेलियर की ओर बढ़ना इस संक्रमण का गंभीर परिणाम हो सकता है।
समय पर पहचान और तत्काल इलाज ही बचाव का रास्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। यदि तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई के साथ-साथ सीने में भारीपन या असामान्य थकान महसूस हो, तो इसे आम फ्लू मानकर घर पर बैठने की गलती न करें। समय पर चिकित्सा सहायता और दिल की जांच ही मरीजों को किसी बड़े खतरे से सुरक्षित रख सकती है।
2026 में सोना बनाएगा नया रिकॉर्ड, ग्लोबल बैंकों ने दिए $6,000 के संकेत

2026 में सोना बनाएगा नया रिकॉर्ड, ग्लोबल बैंकों ने दिए $6,000 के संकेत

Delight News
📅 26 Aug2026

ग्लोबल वित्तीय बाज़ारों में सोने की चमक लगातार बढ़ती जा रही है। JPMorgan, Goldman Sachs और HSBC जैसे दुनिया के दिग्गज निवेश बैंकों ने 2026 के अंत तक सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल के अनुमान जताए हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सोना $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है।

2026 में सोना बनाएगा नया रिकॉर्ड, ग्लोबल बैंकों ने दिए $6,000 के संकेत
खबर का निचोड़
ग्लोबल वित्तीय बाज़ारों में सोने की चमक लगातार बढ़ती जा रही है। JPMorgan, Goldman Sachs और HSBC जैसे दुनिया के दिग्गज निवेश बैंकों ने 2026 के अंत तक सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल के अनुमान जताए हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सोना $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
सोना $6,000 के पार: ग्लोबल वित्तीय दिग्गजों की बड़ी भविष्यवाणी
वैश्विक आर्थिक सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ाने से सोने के बाज़ार में एक बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। दुनिया के शीर्ष निवेश बैंकों ने 2026 के अंत तक सोने की कीमतों को लेकर बेहद मजबूत अनुमान जारी किए हैं, जो निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
बाज़ार का दिग्गज JPMorgan सबसे ज्यादा बुलिश
बाज़ार पूंजीकरण के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े बैंक, JPMorgan का अनुमान सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला है। बैंक के विश्लेषकों के अनुसार, 2026 के अंत तक सोने की कीमतें $6,000 प्रति औंस का स्तर छू सकती हैं। बैंक का मानना है कि वैश्विक मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों द्वारा डॉलर पर निर्भरता कम करने के प्रयास सोने की मांग को नए उच्च स्तर पर ले जाएंगे।
Goldman Sachs और Deutsche Bank का बड़ा दांव
ग्लोबल फाइनेंस की दूसरी प्रमुख संस्था Goldman Sachs भी सोने पर बेहद सकारात्मक रुख अपनाए हुए है। बैंक ने अपना लक्ष्य $5,400 प्रति औंस तय किया है। इसके साथ ही, यूरोपीय बैंकिंग दिग्गज Deutsche Bank ने अनुमान जताया है कि 2026 तक कीमतें $4,800 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। इन बैंकों का मानना है कि दरों में कटौती और सेफ-हेवन एसेट्स की मांग में लगातार बढ़ोतरी सोने की तेजी को समर्थन दे रही है।
HSBC और ING के अनुमान भी सकारात्मक
वैश्विक वित्तीय बाज़ार की अन्य प्रमुख संस्थाओं ने भी सोने की तेजी पर मुहर लगाई है। HSBC ने 2026 के अंत तक सोने का लक्ष्य $4,750 प्रति औंस तय किया है, जबकि डच बैंकिंग समूह ING को उम्मीद है कि कीमतें $4,600 प्रति औंस के आसपास रहेंगी। दोनों संस्थानों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संस्थागत निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं।
चैटजीपीटी में आया नया 'AI स्टिकर' फीचर, ऐसे बनाएं कस्टम पैक

चैटजीपीटी में आया नया 'AI स्टिकर' फीचर, ऐसे बनाएं कस्टम पैक

Delight News
📅 26 Aug2026

ओपनएआई ने चैटजीपीटी में एक नया और इनोवेटिव एआई स्टिकर फीचर पेश किया है। अब यूज़र्स केवल एक टेक्स्ट प्रॉम्प्ट देकर अपनी पसंद के कस्टम स्टिकर पैक तैयार कर सकते हैं। लेटेस्ट चैटजीपीटी इमेजेज 2.0 मॉडल पर आधारित यह फीचर इन स्टिकर्स को वॉट्सऐप जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स पर शेयर करने की सुविधा देता है।

चैटजीपीटी में आया नया 'AI स्टिकर' फीचर, ऐसे बनाएं कस्टम पैक
खबर का निचोड़
ओपनएआई ने चैटजीपीटी में एक नया और इनोवेटिव एआई स्टिकर फीचर पेश किया है। अब यूज़र्स केवल एक टेक्स्ट प्रॉम्प्ट देकर अपनी पसंद के कस्टम स्टिकर पैक तैयार कर सकते हैं। लेटेस्ट चैटजीपीटी इमेजेज 2.0 मॉडल पर आधारित यह फीचर इन स्टिकर्स को वॉट्सऐप जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स पर शेयर करने की सुविधा देता है।
कैसे काम करता है नया AI स्टिकर फीचर
ओपनएआई का यह नया अपडेट डिजिटल बातचीत के तरीके को पूरी तरह बदलने वाला है। अब यूज़र्स को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किसी तीसरे ऐप या पहले से बने पुराने स्टिकर्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। चैटजीपीटी का यह फीचर पूरी तरह से यूज़र के निर्देशों यानी टेक्स्ट प्रॉम्प्ट पर काम करता है।
आपको बस अपनी सोच को शब्दों में ढालकर एआई को बताना होगा। उदाहरण के लिए, यदि आप 'एक चश्मा पहने हुए बिल्ली जो चाय पी रही है' लिखते हैं, तो चैटजीपीटी तुरंत उसी थीम पर आधारित स्टिकर जनरेट कर देगा। यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंडों में पूरी हो जाती है, जिससे आपकी चैट और अधिक मजेदार और जीवंत बन जाती है।
इमेजेज 2.0 मॉडल की शक्ति
इस नए फीचर के पीछे OpenAI का सबसे आधुनिक इमेज जनरेशन मॉडल 'ChatGPT इमेजेज़ 2.0' काम कर रहा है। यह मॉडल न केवल टेक्स्ट को बारीकी से समझता है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफिक्स और सटीक डिटेल्स के साथ स्टिकर तैयार करता है।
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्टिकर्स के बैकग्राउंड को अपने आप हटा देता है (पारदर्शी बना देता है), जिससे इन्हें मैसेजिंग ऐप्स पर इस्तेमाल करना बेहद आसान हो जाता है। स्टिकर की किनारों की कटिंग और रंगों का संयोजन इतना सटीक होता है कि यह पेशेवर डिजाइनरों द्वारा बनाए गए स्टिकर्स जैसा दिखता है।
वॉट्सऐप और अन्य प्लैटफॉर्म्स पर आसानी से करें शेयर
चैटजीपीटी द्वारा बनाए गए इन कस्टम स्टिकर्स को यूज़र्स सीधे डाउनलोड करके या एक्सपोर्ट करके वॉट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर आसानी से शेयर कर सकते हैं। ओपनएआई का यह कदम यूज़र्स को एक पर्सनल टच देने की सुविधा देता है, जहां वे अपने दोस्तों और ग्रुप्स के लिए खास 'इनसाइड जोक्स' या मीम्स वाले स्टिकर पैक तैयार कर सकते हैं।
मैसेजिंग की दुनिया में विजुअल कम्युनिकेशन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में चैटजीपीटी का यह नया टूल साधारण चैट को रचनात्मक और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का एक नया माध्यम प्रदान करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यूज़र्स इस टूल का इस्तेमाल किस हद तक और कितने अनोखे तरीकों से करते हैं।
$2000 की कीमत में लॉन्च होगा Apple का पहला फोल्डेबल iPhone

$2000 की कीमत में लॉन्च होगा Apple का पहला फोल्डेबल iPhone

Delight News
📅 26 Aug2026

Apple अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन 'iPhone Ultra' सितंबर में लॉन्च कर सकता है, जिसकी संभावित कीमत $2,000 से अधिक होगी। इस अल्ट्रा-थिन डिवाइस से MagSafe, एक्शन बटन और टेलीफोटो कैमरा गायब हो सकता है। पतले डिज़ाइन के कारण Face ID की जगह Touch ID दिए जाने की खबर है।

$2000 की कीमत में लॉन्च होगा Apple का पहला फोल्डेबल iPhone
Apple अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन 'iPhone Ultra' सितंबर में लॉन्च कर सकता है, जिसकी संभावित कीमत $2,000 से अधिक होगी। इस अल्ट्रा-थिन डिवाइस से MagSafe, एक्शन बटन और टेलीफोटो कैमरा गायब हो सकता है। पतले डिज़ाइन के कारण Face ID की जगह Touch ID दिए जाने की खबर है।
लीक हुए फीचर्स और iPhone Ultra का डिज़ाइन
टेक दिग्गज Apple जल्द ही फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार में कदम रखने की तैयारी कर रहा है। सितंबर में संभावित रूप से लॉन्च होने वाले इस पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन को 'iPhone Ultra' नाम दिया जा सकता है। $2,000 (लगभग ₹1.65 लाख से अधिक) की भारी-भरकम शुरुआती कीमत के साथ आने वाला यह फोन अपने अनोखे और अल्ट्रा-थिन डिज़ाइन के कारण चर्चा में है।
हालांकि, प्रीमियम टैग और फोल्डेबल डिस्प्ले के साथ आने के बावजूद, इस डिवाइस में यूज़र्स को कुछ बड़े समझौते करने पड़ सकते हैं। लगातार आ रही रिपोर्ट्स संकेत देती हैं कि Apple का पूरा ध्यान इस हैंडसेट को जितना संभव हो सके उतना पतला और स्लीक बनाने पर है, जिसकी वजह से कंपनी को अपने कुछ सिग्नेचर फीचर्स हटाने पड़ रहे हैं।
Face ID की छुट्टी, Touch ID की वापसी
अल्ट्रा-थिन बॉडी के कारण इस फोन की स्क्रीन और बेज़ल्स इतने पतले होंगे कि मौजूदा Face ID सेंसर्स को उसमें फिट करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में Apple अपने इस प्रीमियम फोल्डेबल मॉडल में Face ID तकनीक को हटाकर साइड-माउंटेड या इन-डिस्प्ले Touch ID फीचर वापस ला सकता है। iPhone प्रेमियों के लिए बायोमेट्रिक सुरक्षा के मामले में यह एक बड़ा बदलाव साबित होगा।
कैमरों और चार्जिंग सेटअप में कटौती
फोटोग्राफी के मामले में भी यूज़र्स को थोड़ा समझौता करना होगा। पतली प्रोफाइल के चलते इसमें टेलीफोटो लेंस के लिए जगह नहीं बच पा रही है, जिससे इस फोन में टेलीफोटो कैमरा नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, चार्जिंग और यूटिलिटी के मामले में भी यह फोन पारंपरिक iPhones से अलग होगा।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसमें न तो कंपनी की लोकप्रिय MagSafe वायरलेस चार्जिंग तकनीक मिलेगी और न ही हाल ही में पेश किया गया एक्शन बटन। मैगसेफ कंपोनेंट्स और एक्शन बटन के हार्डवेयर को हटाने के पीछे भी मुख्य वजह फोन की मोटाई को न्यूनतम रखना ही है। Apple का पूरा ध्यान फिलहाल एक बेहद स्लिम, प्रीमियम और नई कैटेगरी के फोल्डेबल अनुभव को यूज़र्स के सामने पेश करने पर केंद्रित है।
बिहार में अंतरजातीय विवाह पर बड़ा फैसला, महिलाओं को मिलेंगे 2.5 लाख

बिहार में अंतरजातीय विवाह पर बड़ा फैसला, महिलाओं को मिलेंगे 2.5 लाख

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📅 26 Aug2026

बिहार सरकार ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) वर्ग की महिलाओं के अंतरजातीय विवाह करने पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से अंतरजातीय विवाहों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

बिहार में अंतरजातीय विवाह पर बड़ा फैसला, महिलाओं को मिलेंगे 2.5 लाख
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बिहार सरकार ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) वर्ग की महिलाओं के अंतरजातीय विवाह करने पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से अंतरजातीय विवाहों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
सामाजिक भेदभाव मिटाने की दिशा में बड़ा कदम
बिहार में सामाजिक बदलाव और जातिगत असमानता को कम करने की दिशा में राज्य सरकार का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज में व्यापत रूढ़िवादी सोच को तोड़ना और अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को वित्तीय संबल प्रदान करना है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को केंद्रित कर उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा है। सहायता राशि में ढाई गुना की यह बढ़ोतरी न केवल नवविवाहित जोड़ों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी, बल्कि समाज में स्वीकार्यता बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी।
प्रोत्साहन राशि में ढाई गुना की भारी बढ़ोतरी
अब तक बिहार में SC-ST वर्ग की महिलाओं द्वारा अंतरजातीय विवाह करने पर सरकार 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती थी। लेकिन वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने इसमें बड़ा बदलाव किया है। नई घोषणा के तहत सहायता राशि को सीधा 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है। राशि में की गई यह सीधी बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि सरकार राज्य में समावेशी समाज के निर्माण को लेकर कितनी गंभीर है। यह वित्तीय प्रोत्साहन नवदंपतियों को अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।
दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं का इंतजार
हालांकि सरकार ने सहायता राशि बढ़ाने की घोषणा करके एक बड़ा प्रशासनिक फैसला ले लिया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर अभी कई बिंदु स्पष्ट होने बाकी हैं। योजना के लिए आवश्यक पात्रता मापदंड, आवेदन करने का पूरा तरीका और किन विशेष शर्तों के अधीन यह राशि बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, इसकी विस्तृत गाइडलाइंस आना अभी बाकी हैं। प्रशासनिक स्तर पर नियमावली तैयार की जा रही है, और जल्द ही संबंधित विभाग द्वारा इस योजना का पूरा खाका सार्वजनिक किया जाएगा। विवाह के पंजीकरण और अन्य कानूनी दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें भी इन नए निर्देशों के साथ स्पष्ट होंगी।
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब स्कूलों के पास नहीं बिकेगा जंक फूड

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब स्कूलों के पास नहीं बिकेगा जंक फूड

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📅 26 Aug2026

राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों की सेहत के पक्ष में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए स्कूलों के भीतर और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत ने स्कूलों को चार हफ्ते में फूड सेफ्टी कमिटी बनाने और राज्य सरकार को 6 हफ्ते में अपनी रिपोर्ट पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब स्कूलों के पास नहीं बिकेगा जंक फूड
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राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों की सेहत के पक्ष में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए स्कूलों के भीतर और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत ने स्कूलों को चार हफ्ते में फूड सेफ्टी कमिटी बनाने और राज्य सरकार को 6 हफ्ते में अपनी रिपोर्ट पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।
जंक फूड पर कसता अदालती शिकंजा
राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे अनहेल्दी खान-पान पर करारा प्रहार किया है। अदालत के नए आदेश के मुताबिक, अब राज्य के किसी भी स्कूल परिसर के अंदर या उससे 50 मीटर के दायरे में जंक फूड नहीं बेचा जा सकेगा। बचपन को मोटापे, डायबिटीज और कुपोषण जैसी बीमारियों से बचाने की दिशा में यह फैसला एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट माना जा रहा है।
अदालत ने साफ किया है कि स्कूली उम्र में सही पोषण मिलना बच्चों का बुनियादी हक है, और चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स या तैलीय स्नैक्स जैसे खाद्य पदार्थ उनकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।
4 हफ्ते में बनानी होगी स्पेशल कमिटी
अदालत ने सिर्फ पाबंदी का फरमान जारी नहीं किया, बल्कि इसकी जमीनी निगरानी का पूरा रोडमैप भी तैयार किया है। आदेश के तहत सभी स्कूलों को 4 हफ्ते के भीतर 'स्कूल फूड सेफ्टी ऐंड न्यूट्रिशन कमिटी' का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कमिटी इस बात पर पैनी नजर रखेगी कि कैंटीन या आसपास के इलाकों में किसी भी तरह का जंक फूड न परोसा जाए।
स्कूलों को अपने मेन्यू में सिर्फ पौष्टिक और सुरक्षित आहार को ही शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। कमिटी की ढिलाई पर संबंधित स्कूल प्रशासन की जवाबदेही तय की जाएगी।
राज्य सरकार को मिली 6 हफ्ते की डेडलाइन
न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। सरकार को 6 हफ्ते के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि स्कूलों में सुरक्षित, स्वच्छ और संतुलित भोजन सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। प्रशासन को कोर्ट में अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
यह आदेश उन अभिभावकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो लंबे समय से स्कूलों के बाहर बिकने वाले अनहेल्दी खान-पान को लेकर चिंतित थे। कोर्ट की सख्त रुख के बाद अब राज्य भर के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और नियमों को लागू कराने की तैयारियां तेज हो गई हैं।

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