
दि सेव अमेरिका एक्ट: चुनावी शुचिता और मतदान पात्रता सुधार
दि सेव अमेरिका एक्ट अमेरिकी संसद में प्रस्तावित एक संघीय कानून है जिसका उद्देश्य चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता लाना है। यह कानून अमेरिकी संघीय चुनावों में मतदान के लिए पंजीकरण करते समय नागरिकों को अपनी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण और मतदान के वक्त फोटोयुक्त पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य बनाता है।
सारांश (Summary):
'सेव अमेरिका एक्ट' अमेरिकी संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण और पहचान के नियमों को कड़े करने से जुड़ा एक प्रस्तावित विधेयक है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदान प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाना है, जिसके तहत पंजीकरण के समय अमेरिकी नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण और मतदान के लिए फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण
विधेयक के प्रमुख प्रावधान और उद्देश्य
यह प्रस्तावित कानून अमेरिकी संघीय चुनावों के संचालन को विनियमित करने वाले मौजूदा कानूनों में संशोधन करता है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक के लिए मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान अपनी नागरिकता के पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त, मतदान केंद्रों पर वोट डालते समय फोटोयुक्त पहचान पत्र दिखाना आवश्यक बनाया गया है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य गैर-नागरिकों द्वारा मतदान की संभावनाओं को रोकना और मतदाता सूचियों को त्रुटिमुक्त बनाना है।
प्रशासनिक और संस्थागत तंत्र
इस अधिनियम के अंतर्गत राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे मतदाता सूचियों के सत्यापन के लिए संघीय एजेंसियों, जैसे गृह विभाग (Department of Homeland Security), के डेटाबेस का उपयोग कर सकें। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता सूची से अयोग्य व्यक्तियों के नाम हटाए जाएं। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों के लिए कड़े दंड और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी इस विधेयक में शामिल किया गया है।
प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण और चुनौतियाँ
समर्थकों का तर्क है कि यह कानून चुनावी शुचिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनविश्वास को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। इसके विपरीत, आलोचकों और नागरिक अधिकार संगठनों का मानना है कि कड़े दस्तावेजी प्रमाणों की अनिवार्यता से कई वैध मतदाताओं, विशेषकर जिनके पास पासपोर्ट या मूल जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं हैं, उनके मताधिकार प्रभावित हो सकते हैं। यह बहस लोकतांत्रिक देशों में सुरक्षा और सुगमता के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रशासनिक चुनौती को रेखांकित करती है।

बिहार में अंतरजातीय विवाह पर बड़ा फैसला, महिलाओं को मिलेंगे 2.5 लाख
बिहार सरकार ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) वर्ग की महिलाओं के अंतरजातीय विवाह करने पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से अंतरजातीय विवाहों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
खबर का निचोड़
बिहार सरकार ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC-ST) वर्ग की महिलाओं के अंतरजातीय विवाह करने पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से अंतरजातीय विवाहों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
सामाजिक भेदभाव मिटाने की दिशा में बड़ा कदम
बिहार में सामाजिक बदलाव और जातिगत असमानता को कम करने की दिशा में राज्य सरकार का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज में व्यापत रूढ़िवादी सोच को तोड़ना और अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को वित्तीय संबल प्रदान करना है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को केंद्रित कर उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा है। सहायता राशि में ढाई गुना की यह बढ़ोतरी न केवल नवविवाहित जोड़ों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी, बल्कि समाज में स्वीकार्यता बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी।
प्रोत्साहन राशि में ढाई गुना की भारी बढ़ोतरी
अब तक बिहार में SC-ST वर्ग की महिलाओं द्वारा अंतरजातीय विवाह करने पर सरकार 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती थी। लेकिन वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने इसमें बड़ा बदलाव किया है। नई घोषणा के तहत सहायता राशि को सीधा 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है। राशि में की गई यह सीधी बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि सरकार राज्य में समावेशी समाज के निर्माण को लेकर कितनी गंभीर है। यह वित्तीय प्रोत्साहन नवदंपतियों को अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।
दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं का इंतजार
हालांकि सरकार ने सहायता राशि बढ़ाने की घोषणा करके एक बड़ा प्रशासनिक फैसला ले लिया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर अभी कई बिंदु स्पष्ट होने बाकी हैं। योजना के लिए आवश्यक पात्रता मापदंड, आवेदन करने का पूरा तरीका और किन विशेष शर्तों के अधीन यह राशि बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, इसकी विस्तृत गाइडलाइंस आना अभी बाकी हैं। प्रशासनिक स्तर पर नियमावली तैयार की जा रही है, और जल्द ही संबंधित विभाग द्वारा इस योजना का पूरा खाका सार्वजनिक किया जाएगा। विवाह के पंजीकरण और अन्य कानूनी दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें भी इन नए निर्देशों के साथ स्पष्ट होंगी।

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब स्कूलों के पास नहीं बिकेगा जंक फूड
राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों की सेहत के पक्ष में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए स्कूलों के भीतर और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत ने स्कूलों को चार हफ्ते में फूड सेफ्टी कमिटी बनाने और राज्य सरकार को 6 हफ्ते में अपनी रिपोर्ट पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।
खबर का निचोड़
राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों की सेहत के पक्ष में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए स्कूलों के भीतर और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत ने स्कूलों को चार हफ्ते में फूड सेफ्टी कमिटी बनाने और राज्य सरकार को 6 हफ्ते में अपनी रिपोर्ट पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।
जंक फूड पर कसता अदालती शिकंजा
राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे अनहेल्दी खान-पान पर करारा प्रहार किया है। अदालत के नए आदेश के मुताबिक, अब राज्य के किसी भी स्कूल परिसर के अंदर या उससे 50 मीटर के दायरे में जंक फूड नहीं बेचा जा सकेगा। बचपन को मोटापे, डायबिटीज और कुपोषण जैसी बीमारियों से बचाने की दिशा में यह फैसला एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट माना जा रहा है।
अदालत ने साफ किया है कि स्कूली उम्र में सही पोषण मिलना बच्चों का बुनियादी हक है, और चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स या तैलीय स्नैक्स जैसे खाद्य पदार्थ उनकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।
4 हफ्ते में बनानी होगी स्पेशल कमिटी
अदालत ने सिर्फ पाबंदी का फरमान जारी नहीं किया, बल्कि इसकी जमीनी निगरानी का पूरा रोडमैप भी तैयार किया है। आदेश के तहत सभी स्कूलों को 4 हफ्ते के भीतर 'स्कूल फूड सेफ्टी ऐंड न्यूट्रिशन कमिटी' का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कमिटी इस बात पर पैनी नजर रखेगी कि कैंटीन या आसपास के इलाकों में किसी भी तरह का जंक फूड न परोसा जाए।
स्कूलों को अपने मेन्यू में सिर्फ पौष्टिक और सुरक्षित आहार को ही शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। कमिटी की ढिलाई पर संबंधित स्कूल प्रशासन की जवाबदेही तय की जाएगी।
राज्य सरकार को मिली 6 हफ्ते की डेडलाइन
न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। सरकार को 6 हफ्ते के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि स्कूलों में सुरक्षित, स्वच्छ और संतुलित भोजन सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। प्रशासन को कोर्ट में अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
यह आदेश उन अभिभावकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो लंबे समय से स्कूलों के बाहर बिकने वाले अनहेल्दी खान-पान को लेकर चिंतित थे। कोर्ट की सख्त रुख के बाद अब राज्य भर के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और नियमों को लागू कराने की तैयारियां तेज हो गई हैं।

कृति सेनन के समर्थन में उतरे राहुल गांधी, बोले- 'ट्रोलिंग बंद करो'
रक्षाबंधन के विज्ञापन में परिधान (ड्रेस) को लेकर आलोचनाओं से घिरीं बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सामने आए हैं। कृति की इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर करते हुए राहुल गांधी ने दोटूक कहा कि महिलाओं के पहनावे और फैसलों पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने ट्रोलर्स को नसीहत देते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।
खबर का निचोड़
रक्षाबंधन के विज्ञापन में परिधान (ड्रेस) को लेकर आलोचनाओं से घिरीं बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी सामने आए हैं। कृति की इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर करते हुए राहुल गांधी ने दोटूक कहा कि महिलाओं के पहनावे और फैसलों पर सवाल उठाना गलत है। उन्होंने ट्रोलर्स को नसीहत देते हुए कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।
रक्षाबंधन ऐड विवाद: कृति सेनन की ड्रेस पर मचा हंगामा
त्योहारों के मौसम में जारी एक रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया। इस ऐड में अभिनेत्री कृति सेनन के पहनावे को लेकर कुछ यूज़र्स ने उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते ट्रोलर्स ने उनकी पसंद और संस्कृति की आड़ में आलोचनाओं की झड़ी लगा दी। कृति ने इस पूरी ट्रोलिंग पर अपनी बात रखते हुए सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद यह मुद्दा सिर्फ मनोरंजन जगत तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बन गया।
राहुल गांधी का तीखा हमला: 'महिला की पसंद पर पाबंदी मंजूर नहीं'
ट्रोलिंग के इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुलकर कृति सेनन का पक्ष लिया। राहुल गांधी ने कृति की इंस्टाग्राम स्टोरी को अपने आधिकारिक अकाउंट से साझा करते हुए ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि एक महिला क्या पहनती है, क्या काम करती है या वह कहां जाती है, यह पूरी तरह से उसका अपना व्यक्तिगत निर्णय है। किसी को भी उसके अधिकारों और पसंद पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।
स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकार की पैरवी
राहुल गांधी का यह बयान केवल एक अभिनेत्री के बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की आजादी और स्वायत्तता से जुड़ा एक बड़ा संदेश है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती असहिष्णुता और महिलाओं को निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने पर ट्रोल किया जाना तुरंत बंद होना चाहिए। समाज को महिलाओं के व्यक्तिगत निर्णयों को स्वीकार करना सीखना होगा।
सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया है। एक तरफ जहां उनके समर्थकों और कई बुद्धिजीवियों ने महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करने के लिए राहुल गांधी की सराहना की है, वहीं दूसरी तरफ ट्रोल्स और विरोधियों की बयानबाज़ी भी जारी है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल ज़रूर खड़ा कर दिया है कि डिजिटल युग में हस्तियों और आम महिलाओं की स्वतंत्रता की सीमाएं तय करने की कोशिश कितनी जायज है।

यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: बुजुर्ग महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई यूपी कैबिनेट बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। इनमें 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए आजीवन मुफ्त रोडवेज बस यात्रा और मेडिकल छात्रों का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹25,000 करना शामिल है। इसके अलावा ₹7,968.30 करोड़ का झांसी लिंक एक्सप्रेसवे भी मंजूर हुआ।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई यूपी कैबिनेट बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। इनमें 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए आजीवन मुफ्त रोडवेज बस यात्रा और मेडिकल छात्रों का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹25,000 करना शामिल है। इसके अलावा ₹7,968.30 करोड़ का झांसी लिंक एक्सप्रेसवे भी मंजूर हुआ।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के विकास, जन-कल्याण और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में कुल 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। यह फैसले सीधे तौर पर बुजुर्गों, चिकित्सा छात्रों और राज्य के बुनियादी ढांचे से जुड़े हैं।
बुजुर्ग महिलाओं को आजीवन मुफ्त बस यात्रा की सौगात
कैबिनेट का सबसे संवेदनशील और सराहनीय फैसला राज्य की बुजुर्ग महिलाओं से जुड़ा है। सरकार ने निर्णय लिया है कि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को अब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। इस कदम से राज्य की लाखों बुजुर्ग महिलाओं को धार्मिक, सामाजिक और व्यक्तिगत यात्राओं के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह निर्णय महिला सशक्तिकरण और उनके सम्मान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मेडिकल छात्रों की बल्ले-बल्ले, स्टाइपेंड बढ़कर हुआ ₹25,000
प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूती देने और युवा डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे MBBS और BDS के इंटर्न छात्रों का मासिक स्टाइपेंड भारी बढ़ोतरी के साथ ₹25,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे चिकित्सा छात्रों के लिए यह खबर एक बड़ी राहत लेकर आई है। इससे युवाओं का रुझान सरकारी चिकित्सा सेवाओं की ओर बढ़ेगा।
बुंदेलखंड को रफ्तार: ₹7,968 करोड़ का झांसी लिंक एक्सप्रेसवे मंजूर
बुंदेलखंड क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए कैबिनेट ने ₹7,968.30 करोड़ की लागत वाले झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। यह लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे झांसी और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सीधे राजधानी लखनऊ और दिल्ली-एनसीआर से बेहतर हो जाएगी।
इस एक्सप्रेसवे के बनने से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि क्षेत्र में व्यापार, रोजगार और पर्यटन के नए अवसर भी पैदा होंगे। योगी सरकार के इन फैसलों को 2026 के विकास एजेंडे के तहत एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है, जो सीधे जनता से जुड़े क्षेत्रों को राहत पहुंचाएंगे।

IIT दिल्ली छात्र मौत मामला: प्रशासन का बयान जारी, जांच समिति गठित
IIT दिल्ली के छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के बाद संस्थान ने आधिकारिक बयान जारी किया है। प्रशासन के अनुसार, छात्र को मार्च 2026 से मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और डॉक्टरी सहायता दी जा रही थी। घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के लिए संस्थान ने एक बाहरी जांच समिति का गठन किया है।
खबर का निचोड़ (Summary)
IIT दिल्ली के छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के बाद संस्थान ने आधिकारिक बयान जारी किया है। प्रशासन के अनुसार, छात्र को मार्च 2026 से मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और डॉक्टरी सहायता दी जा रही थी। घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के लिए संस्थान ने एक बाहरी जांच समिति का गठन किया है।
IIT दिल्ली परिसर में पसरा सन्नाटा
देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में शामिल आईआईटी दिल्ली में एक मेधावी छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद से शोक का माहौल है। इस दुखद घटना के बाद संस्थान प्रशासन ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। परिसर में उठ रहे विभिन्न सवालों और चिंताओं के बीच आईआईटी प्रबंधन ने मामले से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की हैं और अपनी ओर से किए गए प्रयासों का ब्योरा दिया है।
काउंसलिंग और डॉक्टरी इलाज का दावा
संस्थान की ओर से जारी बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि ऋषिकेश मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे थे। प्रशासन का कहना है कि मार्च 2026 से ही छात्र को मेंटल हेल्थ सपोर्ट दिया जा रहा था। इसके तहत उन्हें पेशेवर काउंसलिंग और जरूरी मेडिकल ट्रीटमेंट मुहैया कराया जा रहा था, ताकि उनके मानसिक तनाव को कम किया जा सके।
निष्पक्ष पड़ताल के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित
घटना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए आईआईटी दिल्ली ने बड़ा कदम उठाया है। मामले की तह तक पहुंचने और पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक बाहरी जांच समिति का गठन किया गया है। यह कमेटी घटना के पीछे की तमाम परिस्थितियों, मानसिक सहायता की प्रक्रिया और अन्य सभी संभावित कारणों की बारीकी से जांच करेगी। संस्थान ने पूरी निष्पक्षता से जांच का आश्वासन दिया है।
मानसिक स्वास्थ्य पर गहराती चिंताएं
इस दुखद हादसे ने प्रीमियम शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के दबाव और छात्रों की मानसिक स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आईआईटी दिल्ली ने अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा है कि वे छात्रों के कल्याण और मानसिक संबल के लिए प्रतिबद्ध हैं। संस्थान का ध्यान फिलहाल छात्रों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने और जांच समिति को हर संभव सहयोग देने पर केंद्रित है।
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