
धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब निशाने पर अमित शाह, CJP ने मांगी इस्तीफे की मांग
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद अब यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच गया है। CJP ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए संगठन ने इस कार्रवाई का सीधा जिम्मा अमित शाह पर फोड़ा है।
सार:
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद अब यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच गया है। CJP ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुर में सुर मिलाते हुए संगठन ने इस कार्रवाई का सीधा जिम्मा अमित शाह पर फोड़ा है।
शिक्षा मंत्री के बाद गृह मंत्री की ओर घूमी विरोध की सुई
हालिया विरोध-प्रदर्शनों के बाद देश का राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे छात्र संगठन CJP ने अब अपना रुख और कड़ा कर लिया है। संगठन ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए उनसे पद छोड़ने की मांग की है।
शिक्षा मंत्रालय के बाहर हुए प्रदर्शनों में जिस तरह से पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई की, उसने इस पूरे विवाद में घी डालने का काम किया है। CJP का आरोप है कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे छात्रों पर जिस तरह का बल प्रयोग किया गया, वह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। संगठन का मानना है कि इस मामले की जवाबदेही सिर्फ स्थानीय पुलिस प्रशासन तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसकी सीधी जिम्मेदारी देश के गृह मंत्रालय की बनती है।
पुलिस कार्रवाई पर खड़े हुए गंभीर सवाल
प्रदर्शन के दौरान हुई इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। CJP ने आरोप लगाया है कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए पुलिस ने अनुचित और अत्यधिक बल का प्रयोग किया।
संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पुलिस का यह रवैया बिना किसी उच्च स्तरीय निर्देश के संभव नहीं है। दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम में गृह मंत्री की भूमिका पर सवाल उठना लाजमी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब देश की राजधानी में छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व को लेनी ही होगी।
राहुल गांधी के बयान को मिला CJP का समर्थन
इस पूरे विवाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने मामले को और तूल दे दिया है। राहुल गांधी द्वारा उठाई गई मांग का CJP ने खुलकर समर्थन किया है।
संगठन का स्पष्ट रूप से मानना है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर इस तरह के कड़े कदम उठाने का आदेश किसी निचले स्तर के अधिकारी का नहीं हो सकता। CJP के अनुसार, दिल्ली में पुलिस की इस तरह की त्वरित और सख्त कार्रवाई का फैसला निश्चित तौर पर गृह मंत्री अमित शाह के स्तर से ही आया होगा। विपक्ष और छात्र संगठनों के एक साथ आने से अब सरकार पर दोहरा राजनीतिक दबाव बनता दिख रहा है।
गहराता जा रहा है छात्र आंदोलन का दायरा
शुरुआत में केवल शिक्षा नीति और मंत्रालय से जुड़ी मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अब गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग ने इस गतिरोध को काफी बढ़ा दिया है।
आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ उनका यह विरोध आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस नए घटनाक्रम और इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस पूरे विवाद ने संसद से लेकर सड़कों तक का माहौल पूरी तरह से गरमा दिया है।

फराह खान और कुक दिलीप की नोकझोंक का वीडियो वायरल
फिल्ममेकर और कोरियोग्राफर फराह खान का अपने कुक दिलीप के साथ बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इसके बाद दोनों के रिश्तों को लेकर तमाम अटकलें लगाई जाने लगीं। फराह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लोगों से निजता का सम्मान करने की अपील की है।
वायरल वीडियो और बढ़ती अटकलें
सामने आए इस वीडियो में फराह खान और उनके कुक दिलीप के बीच किसी बात को लेकर बहस होती हुई नजर आ रही है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं, जिससे मामला तूल पकड़ता गया। लोग उनके बीच की इस नोंकझोंक को लेकर अपनी अलग-अलग राय बनाने लगे और देखते ही देखते यह क्लिप चर्चा का विषय बन गई।
फराह खान की तीखी प्रतिक्रिया
बढ़ती अफवाहों और अटकलों पर विराम लगाते हुए फराह खान ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ तौर पर कहा कि लोगों को उनकी और दिलीप की निजता यानी प्राइवेसी का सम्मान करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने जनता से यह भी अपील की है कि वे किसी भी आधे-अधूरे वीडियो के आधार पर बिना पूरी सच्चाई जाने किसी भी तरह के निष्कर्ष पर न पहुंचें।

'भारत आपके अब्बू जान का नहीं': संबित पात्रा का राहुल पर हमला
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने राहुल गांधी के 2024 चुनाव को अवैध बताने वाले बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी विपक्षी पार्टी ने अदालत में याचिका दायर की है? साथ ही उन्होंने कहा कि यह देश भारत के लोगों का है।
राहुल गांधी के बयान पर तीखा पलटवार
हाल ही में राहुल गांधी द्वारा 2024 के चुनाव को अवैध बताए जाने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संबित पात्रा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मीडिया के सामने सवाल किया कि यदि चुनाव अवैध थे, तो क्या कांग्रेस या INDIA ब्लॉक की किसी भी पार्टी ने चुनाव को चुनौती देने के लिए अदालत में कोई याचिका दायर की है? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल बयानों से संवैधानिक प्रक्रियाओं की वैधता पर सवाल खड़े करना पूरी तरह से अनुचित है।
यह देश भारत के लोगों का है
अपने संबोधन को और धार देते हुए संबित पात्रा ने कड़े शब्दों में कहा कि "राहुल गांधीजी, यह भारत आपके अब्बू जान का नहीं है, यह भारत देश के लोगों का है।" बीजेपी सांसद का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर दोनों तरफ से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ेगी जेडीयू, निशांत कुमार का ऐलान
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने वाराणसी में आयोजित जेडीयू कार्यकर्ता सम्मेलन में घोषणा की है कि पार्टी 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में एनडीए के घटक दल के रूप में मैदान में उतरेगी। सीटों और रणनीति पर अंतिम फैसला जल्द होने की उम्मीद है।
एनडीए के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी जेडीयू
कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए निशांत कुमार ने साफ कर दिया है कि पार्टी आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एनडीए के एक मजबूत घटक दल के रूप में उतरेगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को धार देने में लगे हुए हैं। हालांकि, सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर अंतिम फैसला बहुत जल्द किए जाने की बात कही गई है।
पुराना इतिहास और नए राजनीतिक समीकरण
उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में जेडीयू का उतरना कोई नया अनुभव नहीं है, बल्कि पार्टी का पुराना इतिहास भी इससे जुड़ा रहा है। पार्टी के इतिहास पर नजर डालें तो साल 2002 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के 2 विधायक उत्तर प्रदेश से जीतकर आए थे। इसके बाद साल 2007 के चुनाव में भी पार्टी का 1 विधायक यहां से विजयी हुआ था। अब एक बार फिर पार्टी एनडीए के साथ मिलकर अपनी पुरानी सियासी जमीन को दोबारा हासिल करने की पुरजोर कोशिश में जुट गई है।

आजम खान की गिरफ्तारी सपा की साजिश: प्रमोद कृष्णम
कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि सपा नेता आजम खान की गिरफ्तारी एक राजनीतिक साजिश है। उनके अनुसार, सपा नहीं चाहती थी कि आजम खान जेल से बाहर आकर कांग्रेस को मजबूत करें। उन्होंने इसे सोची-समझी राजनीति करार दिया।
सपा पर लगाया बड़ा राजनीतिक आरोप
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दावा किया है कि आजम खान को जेल भिजवाने और उनकी गिरफ्तारी के पीछे किसी और का नहीं, बल्कि खुद समाजवादी पार्टी का ही हाथ है। उनके मुताबिक, सपा अंदरूनी तौर पर यह कतई नहीं चाहती थी कि आजम खान जेल से बाहर आएं और देश या प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के आधार को मजबूत करने का काम करें। इसी डर के कारण उनके खिलाफ यह पूरा चक्रव्यूह रचा गया।
साजिश की कड़ियों को आपस में जोड़ा
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने राजनीति में घटित कई अन्य घटनाक्रमों को भी इसी साजिश का हिस्सा बताया। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्वामी प्रसाद मौर्य और राहुल गांधी की मुलाकात तथा इसके साथ ही कांग्रेस द्वारा 200 सीटों की मांग किए जाने का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने इन सभी कड़ियों को इस पूरी राजनीतिक पटकथा और साजिश का ही एक बड़ा हिस्सा करार दिया है।

वैनिश कुमार जी आप कब वैनिश होंगे: ममता बनर्जी
INDIA गठबंधन की रैली में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने 'वैनिश कुमार' कहकर सवाल उठाया कि वह कब वैनिश होंगे। साथ ही, बंगाल को एसआईआर का पीड़ित बताते हुए बीजेपी पर मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा कटाक्ष
रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए उन पर तंज कसा। उन्होंने मजाकिया और तीखे लहजे में कहा कि "वैनिश कुमार जी आप कब वैनिश होंगे?" उनके इस बयान ने वहां मौजूद लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का तुरंत ध्यान खींच लिया। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी से सियासी तापमान काफी बढ़ गया है।
पश्चिम बंगाल की पीड़ा और बीजेपी पर आरोप
ममता बनर्जी यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल को 'एसआईआर' का पीड़ित करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर यह गंभीर आरोप भी लगाया कि बीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का प्रयास कर रही है। इस रैली के सिलसिले में विपक्षी नेताओं ने कनॉट प्लेस से लेकर रामलीला मैदान तक एक मार्च भी निकाला था, जिसमें विपक्षी एकजुटता का प्रदर्शन किया गया।
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