
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: 'झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए'
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कदम को छात्र शक्ति की जीत बताया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। दीपके ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
खबर का निचोड़:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कदम को छात्र शक्ति की जीत बताया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। दीपके ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
सियासी गलियारों में हलचल, छात्र आंदोलन का दिखा असर
देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। लंबे समय से चल रहे विरोध और छात्रों के दबाव के बीच इस फैसले को एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय में जारी खींचतान और छात्रों के लगातार बढ़ते आक्रोश के बीच प्रधान के इस कदम ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ता के गलियारों में जहां इसे एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, वहीं विपक्षी और सामाजिक संगठन इसे अपनी मांगों पर सरकार का झुकना करार दे रहे हैं।
अभिजीत दीपके का तीखा तंज: "झुकती है दुनिया..."
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए तंज कसा और कहा, "क्या कहते थे ये - इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते? 'झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए'।"
दीपके के इस बयान ने साफ कर दिया कि यह इस्तीफा महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे जनता और छात्रों का बड़ा दबाव रहा है। उनका मानना है कि लगातार उठाए गए आवाज़ और विरोध प्रदर्शनों का ही नतीजा है कि सरकार को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।
इस्तीफा सिर्फ पहली जीत, लड़ाई अभी बाकी है
इस्तीफे को शुरुआती सफलता मानते हुए अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि मामला यहीं खत्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि मंत्री पद से त्यागपत्र मिलना महज एक पड़ाव है, असली न्याय अभी बाकी है।
दीपके ने अपनी बात को मजबूती से रखते हुए दो प्रमुख मांगें जनता और प्रशासन के सामने रखीं:
पीड़ित परिवारों को मुआवजा: हाल के घटनाक्रमों और तनाव के कारण जिन मासूम बच्चों ने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाया, उनके परिवारों को तुरंत उचित आर्थिक सहायता और न्याय मिले।
दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई: प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बर्बरता और असंवैधानिक बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों को चिन्हित कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
आगे क्या?
शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस विभाग की कमान किसे सौंपी जाएगी। साथ ही, क्या सरकार प्रदर्शनकारियों की बाकी दो मांगों पर विचार करेगी? जिस तरह से अभिजीत दीपके और अन्य संगठनों ने अपना रुख कड़ा रखा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। छात्रों का न्याय के लिए यह संघर्ष किस दिशा में जाता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में ऐतिहासिक समावेशन
उत्तर प्रदेश की बौद्ध स्थली सारनाथ को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया गया है। यह उपलब्धि भारत के बौद्ध सर्किट को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रतिष्ठित करने के साथ ही सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
सारांश
उत्तर प्रदेश की बौद्ध स्थली सारनाथ को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया गया है। यह उपलब्धि भारत के बौद्ध सर्किट को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रतिष्ठित करने के साथ ही सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
वाराणसी के निकट स्थित सारनाथ भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का प्रमुख केंद्र है। यहीं पर भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के पश्चात अपना प्रथम उपदेश 'धर्मचक्रप्रवर्तन' दिया था। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से, यह स्थान मौर्य सम्राट अशोक द्वारा निर्मित धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ और अनेक बौद्ध मठों के अवशेषों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। सारनाथ की वास्तुकला और शिलालेख भारतीय कला के प्राचीन वैभव को प्रदर्शित करते हैं।
यूनेस्को सूची का महत्व
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलना किसी स्थल की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है। सारनाथ के शामिल होने से उत्तर प्रदेश में विश्व धरोहर स्थलों की संख्या चार हो गई है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण, अनुसंधान और संवर्धन के लिए अतिरिक्त संसाधनों एवं तकनीकी विशेषज्ञता तक पहुंच सुनिश्चित करता है। इससे न केवल ऐतिहासिक संरचनाओं का बेहतर रखरखाव संभव होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग को भी गति मिलेगी।
बौद्ध सर्किट एवं पर्यटन पर प्रभाव
सारनाथ का विश्व धरोहर के रूप में चयन भारत सरकार की 'बौद्ध सर्किट' परियोजना के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह कुशीनगर, श्रावस्ती और लुंबिनी जैसे अन्य बौद्ध स्थलों के साथ संपर्क को सुदृढ़ करेगा। इस वैश्विक पहचान से विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने और सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती मिलने की प्रबल संभावना है। साथ ही, यह स्थल अब यूनेस्को के मानकों के अनुरूप वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
चयन प्रक्रिया एवं समिति की भूमिका
यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति प्रतिवर्ष विभिन्न देशों द्वारा प्रस्तावित स्थलों का मूल्यांकन करती है। सारनाथ के नामांकन के लिए पिछले 28 वर्षों से निरंतर प्रयास किए जा रहे थे। बुसान में आयोजित 48वें सत्र में समिति ने इसके उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य (Outstanding Universal Value), अखंडता और संरक्षण की स्थिति की गहन समीक्षा की, जिसके पश्चात इसे आधिकारिक रूप से सूची में अंकित किया गया।

बिहार में सियासी उबाल: तेज प्रताप यादव 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में
नीट परीक्षा विवाद के खिलाफ बिहार बंद के दौरान हिंसक झड़पें हुईं। इस मामले में राजद नेता तेज प्रताप यादव को पटना के एक मॉल से गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए बेऊर जेल भेज दिया गया है। उन पर दंगा भड़काने का आरोप है, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
सारांश
नीट परीक्षा विवाद के खिलाफ बिहार बंद के दौरान हिंसक झड़पें हुईं। इस मामले में राजद नेता तेज प्रताप यादव को पटना के एक मॉल से गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए बेऊर जेल भेज दिया गया है। उन पर दंगा भड़काने का आरोप है, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
गिरफ्तारी और आरोप
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ राजद द्वारा बुलाए गए बिहार बंद के दौरान पटना की सड़कों पर भारी बवाल देखने को मिला। इसी सिलसिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजद के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को एक मॉल से गिरफ्तार कर लिया। प्रशासन ने उन पर दंगा फैलाने, कानून-व्यवस्था को चुनौती देने और अपने समर्थकों को हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया है।
कानूनी दांव-पेच
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनके कानूनी सलाहकारों ने मोर्चा संभाल लिया है। उनके वकीलों का दावा है कि पुलिस ने गिरफ्तारी की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है। वकीलों का तर्क है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से निराधार है और कानूनी खामियों से भरी हुई है। दूसरी ओर, प्रशासन अपने रुख पर अडिग है और उनके पास मौजूद वीडियो साक्ष्यों व खुफिया रिपोर्टों को अपनी कार्रवाई का मुख्य आधार मान रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर और जेडीयू नेता वीणा मानवी ने इस गिरफ्तारी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। इन नेताओं का मानना है कि नीट विवाद से ध्यान भटकाने और विपक्ष को कमजोर करने के लिए यह एक सोची-समझी चुनावी रणनीति है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में देखते हुए प्रशासनिक कार्रवाई को निष्पक्षता के दायरे से बाहर बताया है।
स्थिति और धर-पकड़
केवल तेज प्रताप यादव ही नहीं, बल्कि इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान कानून हाथ में लेने के आरोप में कुल 208 अन्य प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया गया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि दोबारा किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल, पूरे मामले पर प्रशासन की पैनी नजर है और राजधानी में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है। बेऊर जेल के बाहर भी सुरक्षा व्यवस्था को काफी बढ़ा दिया गया है।

AIIMS नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2026: आवेदन शुरू, जानें आवेदन प्रक्रिया
देश भर के सरकारी अस्पतालों में सेवा देने का सपना देख रहे नर्सिंग उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने NORCET 11वें चरण के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
देश भर के सरकारी अस्पतालों में सेवा देने का सपना देख रहे नर्सिंग उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने NORCET 11वें चरण के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
भर्ती की महत्वपूर्ण तिथियां
AIIMS द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, नर्सिंग ऑफिसर के पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 13 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवार इस दिन शाम 5:00 बजे तक अपना फॉर्म ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं। समय सीमा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है क्योंकि अंतिम समय में वेबसाइट पर लोड बढ़ने के कारण तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पात्रता और चयन प्रक्रिया
इस भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों का संबंधित क्षेत्र में नर्सिंग योग्यता होना अनिवार्य है। भर्ती प्रक्रिया NORCET (नर्सिंग ऑफिसर रिक्रूटमेंट कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट) के माध्यम से पूरी की जाएगी। चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों का शैक्षणिक रिकॉर्ड, आयु सीमा और निर्धारित योग्यता मानदंडों की गहन जांच की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें ताकि वे अपनी पात्रता सुनिश्चित कर सकें।
आवेदन कैसे करें
आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार AIIMS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 'Apply Online' लिंक पर क्लिक करें। वहां अपना पंजीकरण पूरा करने के बाद मांगी गई समस्त जानकारी दर्ज करें और आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। ध्यान रहे कि फॉर्म भरते समय कोई भी त्रुटि न हो, क्योंकि गलत जानकारी देने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है। अंतिम रूप से सबमिट करने के बाद आवेदन पत्र का एक प्रिंट आउट अपने पास भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें।
पद का विवरण और महत्व
AIIMS द्वारा आयोजित यह कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट नर्सिंग क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। यह परीक्षा केवल एक भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश के शीर्ष स्वास्थ्य संस्थानों में योगदान देने का एक माध्यम है। चयनित उम्मीदवारों को न केवल बेहतर वेतनमान मिलेगा, बल्कि उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के बीच काम करने का उत्कृष्ट अनुभव भी प्राप्त होगा। भर्ती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी समय-समय पर आधिकारिक पोर्टल पर अपडेट की जा रही है, इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार अपनी नजरें आधिकारिक वेबसाइट पर बनाए रखें।

धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को सौंपी इस्तीफे की पेशकश: रिपोर्ट
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर पद से इस्तीफे की पेशकश की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बीजेपी सूत्रों का दावा है कि उन्हें शुक्रवार को इस्तीफे की घोषणा करनी थी। हालांकि, जनभावनाओं का आकलन करने के लिए फिलहाल इस फैसले को टाल दिया गया है।
खबर का निचोड़
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर पद से इस्तीफे की पेशकश की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बीजेपी सूत्रों का दावा है कि उन्हें शुक्रवार को इस्तीफे की घोषणा करनी थी। हालांकि, जनभावनाओं का आकलन करने के लिए फिलहाल इस फैसले को टाल दिया गया है।
शिक्षा मंत्रालय में हलचल, धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे की पेशकश
देश के सियासी गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद फोन करके अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। भारतीय जनता पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से आई इस खबर ने राजनीतिक हलचलों को तेज कर दिया है।
शुक्रवार शाम को होनी थी आधिकारिक घोषणा
सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान की इस पेशकश के बाद शुरुआती रणनीति यही बनी थी कि शुक्रवार शाम तक इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा कर दी जाए। पूरा घटनाक्रम काफी तेजी से बदला और मंत्रालय से लेकर पार्टी संगठन तक इस फैसले को लेकर सरगर्मियां बढ़ गईं। हालांकि, अंतिम समय में इस योजना में थोड़ा बदलाव देखने को मिला।
जनभावना का आकलन करने के लिए टला फैसला
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस्तीफे की सार्वजनिक घोषणा को फिलहाल एक खास रणनीति के तहत रोक दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक इंस्टाग्राम पोस्ट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आ रही जनता की प्रतिक्रियाओं के जरिए माहौल को समझने की कोशिश की जा रही है। नेतृत्व यह देखना चाहता है कि इस कदम का आम जनता और शिक्षा क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा। जनभावना का सटीक अंदाजा लगाने के बाद ही इस मामले पर कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक किया जाएगा।
सियासी मायनों की तलाश
शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव की यह खबर राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। धर्मेंद्र प्रधान केंद्र सरकार के प्रमुख और प्रभावशाली मंत्रियों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके द्वारा पद छोड़ने की इच्छा जताने के पीछे क्या वजहें हैं, इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। फिलहाल हर किसी की नजरें प्रधानमंत्री कार्यालय और पार्टी के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हुई हैं।

इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया': धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी का बड़ा हमला
छात्रों के भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि लड़ाई अभी अधूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से माफी और हिंसक कार्रवाई के दोषियों पर सजा की मांग की है।
खबर का निचोड़
छात्रों के भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि लड़ाई अभी अधूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से माफी और हिंसक कार्रवाई के दोषियों पर सजा की मांग की है।
छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी सरकार, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
देश भर में छात्रों के उग्र प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। इस बड़े घटनाक्रम के तुरंत बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से सड़कों पर डटे छात्रों के लिए इसे एक बड़ी नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था में जारी अनियमितताओं और छात्रों के आक्रोश को देखते हुए यह फैसला सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
"शाबाश देश के युवाओं!" – राहुल गांधी ने थपथपाई छात्रों की पीठ
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर सामने आते ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने देश भर के युवाओं और आंदोलनकारी छात्रों को बधाई देते हुए कहा, "शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।" राहुल गांधी ने साफ किया कि युवाओं की एकजुटता और संघर्ष ने सत्ता को झुकने पर मजबूर कर दिया है, लेकिन यह लड़ाई केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है।
दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी: 'केवल एक इस्तीफा काफी नहीं'
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दल और छात्र सिर्फ एक इस्तीफे से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। उन्होंने आंदोलन को आगे ले जाते हुए दो मुख्य मांगें जनता के सामने रखीं:
प्रधानमंत्री की माफी: देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने के लिए प्रधानमंत्री को खुद देश के सामने आकर माफी मांगनी चाहिए।
हिंसा के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई: विरोध-प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर हुई बर्बरता और हिंसा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।
"अब इस सरकार को उखाड़ फेंकने का समय है"
अपने कड़े रुख को दोहराते हुए नेता विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का युवा अब जाग चुका है और नीतियों में सुधार की आड़ में हो रही अनदेखी को बर्दाश्त नहीं करेगा। राहुल गांधी के अनुसार, वर्तमान सरकार युवाओं का विश्वास पूरी तरह खो चुकी है और अब इस शासन को बदलने का समय आ गया है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार राहुल गांधी की इन दो नई मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आंदोलित छात्रों को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।
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