
देर आए दुरुस्त आए': धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले मुरली मनोहर जोशी
बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे का स्वागत किया है। उन्होंने 'देर आए दुरुस्त आए' कहते हुए उम्मीद जताई कि इस फैसले से छात्रों को उज्ज्वल भविष्य और प्रगति के नए अवसर मिलेंगे। इस बयान से सियासी हलकों में नई चर्चा छिड़ गई है।
खबर का सार
बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे का स्वागत किया है। उन्होंने 'देर आए दुरुस्त आए' कहते हुए उम्मीद जताई कि इस फैसले से छात्रों को उज्ज्वल भविष्य और प्रगति के नए अवसर मिलेंगे। इस बयान से सियासी हलकों में नई चर्चा छिड़ गई है।
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा सियासी उलटफेर
भारतीय राजनीति और शिक्षा जगत से एक बेहद अहम और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से जारी तमाम तरह की अटकलों और विवादों के बीच इस बड़े घटनाक्रम ने देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
'देर आए दुरुस्त आए': जोशी का बड़ा हमला
धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। जोशी, जो स्वयं देश के शिक्षा मंत्री रह चुके हैं और शिक्षा नीति को लेकर काफी मुखर माने जाते हैं, ने इस कदम पर अपनी बेबाक राय रखी।
प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, "देर आए दुरुस्त आए। धर्मेंद्र प्रधान ने त्यागपत्र दे दिया है।" मुरली मनोहर जोशी का यह संक्षिप्त लेकिन बेहद धारदार बयान यह साफ संकेत देता है कि वे काफी समय से शिक्षा मंत्रालय के कामकाज और फैसलों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।
छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने केवल इस्तीफे पर संतोष जाहिर नहीं किया, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य को लेकर भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा, "मैं आशा करता हूं कि... छात्रों को अपने उज्ज्वल भविष्य तथा प्रगति के लिए व्यापक अवसर प्राप्त होंगे।"
जोशी का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि आगामी समय में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बड़े और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। छात्रों के हितों की रक्षा और उन्हें बेहतर अवसर मुहैया कराना ही इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
सियासत में नई हलचल और आगे की राह
बीजेपी के ही एक दिग्गज और मार्गदर्शक नेता द्वारा अपनी ही सरकार के पूर्व मंत्री के इस्तीफे पर ऐसी सीधी और बेबाक टिप्पणी करना राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद मायने रखता है। इस बयान के बाद से सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का दौर गरम है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा मंत्रालय की कमान किसके हाथों में सौंपी जाती है और नया नेतृत्व देश की शिक्षा प्रणाली को किस दिशा में आगे ले जाता है। क्या आने वाले दिनों में छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के लिए कुछ नए और कड़े नीतिगत फैसले लिए जाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर यूपी के गरीब युवा
कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में घाघरा नदी किनारे बसे गांवों के गरीब युवाओं को निशाना बना रहा है। गैंग मुंबई-महाराष्ट्र में मजदूरी करने वाले युवाओं को पैसे और अपराध की दुनिया में नाम कमाने का लालच देकर अपना स्लीपर सेल तैयार कर रहा है।
पैसों और नाम का दिया जा रहा लालच
पुलिस और सुरक्षा तंत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई गैंग मुख्य रूप से उन गरीब युवाओं को अपना शिकार बना रहा है जो काम की तलाश में मुंबई या महाराष्ट्र के अन्य शहरों में मजदूरी करने जाते हैं। गैंग के गुर्गे इन युवाओं को जल्दी पैसे कमाने और जरायम की दुनिया में दबदबा व नाम बनाने का लालच देते हैं। इसी प्रलोभन के जरिए वे युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने स्लीपर सेल के रूप में भर्ती कर रहे हैं।
जांच में जुटी खुफिया एजेंसियां
इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच के दौरान हुआ, जब बहराइच क्षेत्र से छह आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। इन गिरफ्तारियों के बाद से ही खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र में सक्रिय हो गई हैं और इस गिरोह के बाकी तारों को खंगालने में लगी हुई हैं।

AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी ₹10,000 के पर्सनल बॉन्ड और एक जमानत्दार वाले नोटिस को उन्होंने चुनौती दी थी। कोर्ट ने नोटिस रद्द करने से इनकार करते हुए केस सामग्री उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने नेहा बोरा को ₹10,000 का पर्सनल बॉन्ड भरने और साथ में एक जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए एक नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के खिलाफ नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और इसे रद्द करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, अदालत ने मामले की समीक्षा करने के बाद नोटिस को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट का अहम निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए राहत के तौर पर मजिस्ट्रेट को एक निर्देश जरूर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले से जुड़ी जितनी भी जरूरी और संबंधित सामग्री या दस्तावेज हैं, वे सभी नेहा बोरा को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अपना पक्ष सही तरीके से रख सकें। अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी प्रक्रियात्मक कार्रवाइयों पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई जाएगी।

यूपी टीजीटी के 17,735 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) के 17,735 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 24 अक्टूबर से शुरू होकर 26 नवंबर तक चलेगा। इसके लिए लिखित परीक्षा 23-24 दिसंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 24 अक्टूबर से शुरू हो रही है, जबकि आवेदन फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 26 नवंबर तय की गई है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए समय रहते अपना पंजीकरण पूरा कर लें।
परीक्षा तिथियों की घोषणा
आयोग ने नोटिफिकेशन के साथ ही परीक्षा की तिथियों का भी ऐलान कर दिया है। टीजीटी पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 23 और 24 दिसंबर 2026 को किया जाएगा। इस परीक्षा के माध्यम से हजारों योग्य शिक्षकों का चयन कर उन्हें राज्य के माध्यमिक स्कूलों में नियुक्त किया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार सभी आवश्यक विवरणों और आवेदन प्रक्रिया के लिए आधिकारिक पोर्टल upsessb.up.gov.in पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं।

हरियाणा: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम के उद्योगों को ₹10,000 करोड़ का नुकसान
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हालिया हड़ताल के कारण गुरुग्राम के उद्योगों को लगभग ₹10,000 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उद्योग संगठन PFTI के अनुसार, इस बिजली संकट से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ और जनरेटर का इस्तेमाल करने से लागत दोगुनी होकर 22 से 23 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई। हालांकि, अब यह हड़ताल खत्म हो चुकी है।
उत्पादन पर पड़ा गहरा असर
उद्योग संगठन PFTI (पीएफटीआई) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बिजली संकट गहराने की वजह से औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ग्रिड की बिजली न मिलने के कारण उद्योगों को अपने संयंत्र चलाने के लिए जनरेटर का भारी मात्रा में सहारा लेना पड़ा।
लागत में हुई भारी बढ़ोतरी
जनरेटर से बिजली का विकल्प अपनाने के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है। जनरेटर से बिजली प्राप्त करने पर लागत लगभग दोगुनी होकर 22 से 23 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई, जिससे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति पर काफी दबाव पड़ा। हालांकि, राहत की बात यह है कि बिजली कर्मचारियों की यह हड़ताल अब समाप्त हो चुकी है और स्थिति सामान्य होने की ओर बढ़ रही है।

रास्ते पर बैरिकेड लगा दिया, कहीं यमुना में नेवी न तैनात कर दें: अभिजीत दीपके
सीजेपी के अभिजीत दीपके ने नेताओं की हिरासत पर सरकार पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वे फ्लाइट और सड़क से हिरासत में लिए जा चुके हैं, अब बस नाव से गिरफ्तार होना बाकी है। दीपके ने तंज कसते हुए कहा कि रास्ते पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं, पता नहीं यमुना में कहीं नेवी न तैनात कर दें।
सरकार की कार्रवाई पर तीखा कटाक्ष
अभिजीत दीपके ने सरकार के रवैये पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे और उनके साथी नेताओं को फ्लाइट और सड़क के रास्ते से पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है। अब केवल नाव के जरिए गिरफ्तार होना ही बाकी रह गया है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की ओर से की गई भारी घेराबंदी को लेकर तंज कसा।
'यमुना में नेवी तैनात न कर दें'
दीपके ने आगे कहा कि सड़कों पर जिस तरह से बैरिकेड्स लगाकर आवाजाही को रोका गया है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि कहीं सरकार यमुना नदी में नेवी (नौसेना) की तैनाती न कर दे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एक विरोध प्रदर्शन (प्रोटेस्ट) को लेकर प्रशासन के भीतर इतना ज्यादा डर बना हुआ है, जिसके लिए इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है।
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