
छात्रों का उत्पीड़न रुका नहीं तो देशव्यापी आंदोलन: सीजेपी
छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर 'सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (सीजेपी) ने सख्त रुख अपनाया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि बेवजह कार्रवाई बंद नहीं हुई तो बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी केवल आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
खबर का निचोड़
छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर 'सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (सीजेपी) ने सख्त रुख अपनाया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि बेवजह कार्रवाई बंद नहीं हुई तो बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी केवल आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
छात्रों के दमन पर सीजेपी का कड़ा रुख
देश में छात्रों के अधिकारों और उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिशों के खिलाफ अब विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। 'सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (सीजेपी) ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर प्रशासन और पुलिस के ज़रिए छात्रों को डराने-धमकाने का सिलसिला तुरंत नहीं थमा, तो एक व्यापक और शांतिपूर्ण आंदोलन की राह चुनी जाएगी।
संगठन का मानना है कि लोकतंत्र में संवाद और असहमति का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में छात्रों की आवाज़ को दबाने के लिए बल प्रयोग किया जा रहा है।
अभिजीत दीपके का सीधा अल्टीमेटम
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिसिया तंत्र का इस्तेमाल कर छात्रों को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
दीपके ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि सरकार अपनी इस नीयत को बदले और निर्दोष छात्रों पर हो रही दंडात्मक कार्रवाई तुरंत रोके। उन्होंने कहा, "यदि छात्रों का उत्पीड़न इसी तरह जारी रहा, तो सीजेपी चुप नहीं बैठेगी। हम जल्द ही सड़कों पर उतरकर एक बड़े और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के ज़रिए इसका निर्णायक जवाब देंगे।"
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी?
यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब देश की सर्वोच्च अदालत पहले ही इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया था कि प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए, जिनका पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड रहा हो।
अदालत का उद्देश्य साफ था—शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे निर्दोष युवाओं को किसी कानूनी अड़चन या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। इसके बावजूद, सीजेपी का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन अदालती निर्देशों की अनदेखी करते हुए आम छात्रों को भी निशाना बना रहे हैं।
आंदोलन की राह पर युवा?
छात्रों पर बढ़ती सख्ती ने शैक्षणिक संस्थानों और छात्र संगठनों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। सीजेपी की इस चेतावनी के बाद यह साफ हो गया है कि यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस चेतावनी के बाद क्या कदम उठाता है।

'रामायण' का ट्रेलर रिलीज: राम बने रणबीर और रावण बने यश
नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' का ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया है। रणबीर कपूर और यश का लुक दर्शकों को प्रभावित कर रहा है, वहीं शूर्पणखा के आधुनिक लुक और हनुमान की अनुपस्थिति ने बहस छेड़ दी है। फिल्म के विजुअल्स और वीएफएक्स में उल्लेखनीय सुधार साफ नजर आ रहा है।
खबर का निचोड़
नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' का ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया है। रणबीर कपूर और यश का लुक दर्शकों को प्रभावित कर रहा है, वहीं शूर्पणखा के आधुनिक लुक और हनुमान की अनुपस्थिति ने बहस छेड़ दी है। फिल्म के विजुअल्स और वीएफएक्स में उल्लेखनीय सुधार साफ नजर आ रहा है।
सितारों का दम और नई बहस
नितेश तिवारी की 'रामायण' का ट्रेलर आखिरकार 30 जुलाई 2026 को दुनिया के सामने आया और आते ही इसने सिनेमाई गलियारों में हलचल मचा दी है। ट्रेलर में भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर की शालीनता और रावण के रूप में यश का आक्रामक अवतार दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। फिल्म की भव्यता और दृश्यों की गुणवत्ता साफ संकेत देती है कि निर्माता इस महाकाव्य को पर्दे पर उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
विजुअल्स में सुधार और नई चुनौतियां
टीजर के बाद जिस तरह से आलोचनाएं हुई थीं, उन्हें गंभीरता से लेते हुए मेकर्स ने इस बार प्रभावित करने का काम किया है। विशेष रूप से राक्षसों के लुक और फिल्म की कलर ग्रेडिंग पर काम किया गया है। अब ये दृश्य पहले की तुलना में अधिक यथार्थवादी और गहरे नजर आ रहे हैं। तकनीकी रूप से फिल्म एक बड़े कैनवास पर सजी हुई दिखती है, जिसे बड़े पर्दे पर देखना एक शानदार अनुभव हो सकता है।
हालांकि, ट्रेलर केवल तारीफें ही नहीं बटोर सका। शूर्पणखा के ग्लैमरस लुक ने दर्शकों के एक बड़े वर्ग को निराश किया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे पौराणिक कथाओं के अनुसार बहुत अधिक आधुनिक बता रहे हैं। इसके अलावा, ट्रेलर में हनुमान के रूप में सनी देओल की एक भी झलक न दिखना फैंस के लिए सबसे बड़ा सस्पेंस और निराशा का कारण बन गया है। दर्शक हनुमान के स्वरूप को देखने के लिए बेहद उत्साहित हैं और इस ट्रेलर में उनकी कमी खलती नजर आई।
भावनाओं की परीक्षा
तकनीकी चकाचौंध और बड़े सितारों के बीच, एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिसे इस ट्रेलर में कहानी की 'आत्मा' की कमी महसूस हुई। पौराणिक कथाएं अपनी भावनाओं और गहराई के लिए जानी जाती हैं, और दर्शकों का मानना है कि केवल वीएफएक्स से रामायण का सार नहीं पकड़ा जा सकता। ट्रेलर ने जहां उम्मीदें जगाई हैं, वहीं यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या फिल्म अपनी पटकथा और भावनात्मक जुड़ाव में उतनी ही प्रभावशाली होगी, जितनी अपने विजुअल्स में।
अब निगाहें फिल्म की रिलीज पर टिकी हैं। क्या यह 'रामायण' भारतीय सिनेमा का नया अध्याय लिखेगी या फिर दर्शकों की उम्मीदों के दबाव तले दब जाएगी? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन ट्रेलर ने फिल्म के प्रति उत्सुकता को चरम पर जरूर पहुंचा दिया है।

NEET-UG 2026: प्रदर्शन में पैलेट गन का इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट सख्त
NEET-UG 2026 परीक्षा के नतीजों को लेकर उपजा विवाद अब सड़कों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। एक तरफ घायलों का इलाज और सुरक्षा का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ परीक्षा प्रणाली पर उठते सवाल और छात्रों की जान की बाजी।
NEET-UG 2026 परीक्षा के नतीजों को लेकर उपजा विवाद अब सड़कों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। एक तरफ घायलों का इलाज और सुरक्षा का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ परीक्षा प्रणाली पर उठते सवाल और छात्रों की जान की बाजी।
प्रदर्शन और पैलेट गन का विवाद
जंतर-मंतर पर NEET-UG के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर देश भर में बहस छिड़ गई है। एक घायल प्रदर्शनकारी की मेडिकल रिपोर्ट में शरीर के अंदर धातु के टुकड़े पाए जाने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से तत्काल प्रभाव से 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) की मांग की है। हालांकि कोर्ट ने पैलेट गन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से फिलहाल इनकार किया है, लेकिन घायलों को समुचित चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं, दिल्ली सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से किनारा कर लिया है।
निराशा की पराकाष्ठा और कानूनी उलझनें
परीक्षा के नतीजों को लेकर व्याप्त असंतोष का असर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। इसी बीच, नतीजों से निराश एक छात्रा द्वारा आत्महत्या करने का हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने पूरे तंत्र की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र लगातार मुखर हो रहे हैं। कानूनी मोर्चे पर भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोपों वाली याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया और संबंधित चार छात्रों पर भारी जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला उन छात्रों के लिए एक बड़ा झटका है जो इस परीक्षा की विश्वसनीयता को कठघरे में खड़ा कर रहे थे।
संसद में गूंजी NEET की गूंज
यह विवाद अब केवल अदालतों और सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद की दहलीज तक पहुँच चुका है। राज्यसभा में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ, जहाँ विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए गृह मंत्री से इस पूरे घटनाक्रम और परीक्षा प्रणाली की खामियों पर जवाब मांगा है। जिस प्रकार से यह मामला एक के बाद एक संस्थानों में फैल रहा है, उससे स्पष्ट है कि NEET-UG 2026 केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर एक बड़ी चुनौती बन चुका है। केंद्र सरकार अब किन ठोस कदमों के साथ स्थिति को संभालती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद सोनम रघुवंशी ने किया सरेंडर
चर्चित 'हनीमून मर्डर केस' की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज़मानत रद्द किए जाने के बाद आखिरकार सरेंडर कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने यह शर्त रखी है कि यदि 6 महीने में सुनवाई पूरी नहीं होती, तो वह पुनः ज़मानत याचिका दाखिल कर सकती है। इस फैसले से मृतक राजा के परिवार ने राहत की सांस ली है।
खबर का निचोड़
चर्चित 'हनीमून मर्डर केस' की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज़मानत रद्द किए जाने के बाद आखिरकार सरेंडर कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने यह शर्त रखी है कि यदि 6 महीने में सुनवाई पूरी नहीं होती, तो वह पुनः ज़मानत याचिका दाखिल कर सकती है। इस फैसले से मृतक राजा के परिवार ने राहत की सांस ली है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा कानूनी दबाव
देश को झकझोर देने वाले चर्चित हनीमून मर्डर केस में एक नया और बेहद अहम मोड़ आया है। लंबे समय से कानूनी दांव-पेचों के बीच घिरी मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने आखिरकार अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसकी ज़मानत रद्द किए जाने के तुरंत बाद उठाया गया। सर्वोच्च अदालत के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि इस गंभीर आपराधिक मामले में न्याय की प्रक्रिया अब किसी भी ढील की अनुमति नहीं देगी।
6 महीने की समय सीमा और ज़मानत की शर्त
मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि इस मुकदमे की सुनवाई को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में यह प्रावधान भी जोड़ा है कि यदि अगले 6 महीने के भीतर मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो आरोपी सोनम रघुवंशी दोबारा ज़मानत के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र होगी। अदालत का यह रुख जहां एक तरफ जल्द न्याय दिलाने की मंशा को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ निष्पक्ष सुनवाई का अवसर भी प्रदान करता है।
पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद
इस महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मृतक राजा के भाई ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आरोपी का सरेंडर होना न्याय की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम है। राजा का परिवार लंबे समय से इस मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त से सख्त सजा की मांग कर रहा था। आरोपी के वापस हिरासत में जाने से पीड़ित परिवार को उम्मीद जगी है कि जल्द ही मामले की सुनवाई पूरी होगी और दोषियों को कानून के तहत उचित सजा मिलेगी।
क्या था पूरा मामला?
हनीमून मर्डर केस की वजह से पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। रिश्तों की कड़ियों और विश्वास को तार-तार करने वाली इस वारदात में राजा की असमय मौत ने कई सवाल खड़े किए थे। जांच एजेंसियों द्वारा की गई छानबीन के बाद सोनम रघुवंशी को मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी के रूप में नामजद किया गया था। तब से यह मामला मीडिया और कानूनी गलियारों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सरेंडर के बाद, सभी की निगाहें निचली अदालत में शुरू होने वाली तेज सुनवाई पर टिकी हैं।

कंगना के 'गटर जेनरेशन' बयान पर बिड़के सोनू सूद, दी नसीहत
अभिनेत्री कंगना रनौत के विवादित 'गटर जेनरेशन' वाले बयान पर अभिनेता सोनू सूद ने कड़ा ऐतराज जताया है। सोनू सूद ने इस टिप्पणी को बेहद शर्मनाक बताते हुए स्टार्स को जिम्मेदारी से बोलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जनता भगवान का रूप है, और उनके समर्थन के बिना तरक्की मुमकिन नहीं है।
खबर का निचोड़:
अभिनेत्री कंगना रनौत के विवादित 'गटर जेनरेशन' वाले बयान पर अभिनेता सोनू सूद ने कड़ा ऐतराज जताया है। सोनू सूद ने इस टिप्पणी को बेहद शर्मनाक बताते हुए स्टार्स को जिम्मेदारी से बोलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जनता भगवान का रूप है, और उनके समर्थन के बिना तरक्की मुमकिन नहीं है।
जब बयानों की सीमा लांघी गई
बॉलीवुड में विवादित बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन कभी-कभी कुछ शब्द इतनी गहरी चोट कर जाते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगते हैं। हाल ही में अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत द्वारा इस्तेमाल किए गए 'गटर जेनरेशन' शब्द पर विवाद गहरा गया है। इस बयान पर जब अभिनेता सोनू सूद से सवाल किया गया, तो उन्होंने न केवल इसे गलत ठहराया, बल्कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों के चयन को लेकर एक जरूरी नसीहत भी दे डाली।
'तोल-मोल के बोल' की दी सीख
सोनू सूद ने कंगना के बयान पर अपनी नाराजगी और असहमति साफ शब्दों में जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल पूरी तरह से अनुचित है।
> "मुझे लगता है कि यह काफी शर्मनाक है... यह नहीं कहा जाना चाहिए था। हमारी संस्कृति में एक पुरानी और बहुत मशहूर कहावत है—'तोल-मोल के बोल'। हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि हम क्या कह रहे हैं और इसका दूसरों पर क्या असर पड़ेगा।"
>
सोनू सूद का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर बैठे लोगों को अपनी जुबान पर नियंत्रण रखना चाहिए, क्योंकि उनके शब्द लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं।
'जनता ही भगवान का रूप है'
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सोनू सूद ने कलाकारों और जनता के बीच के रिश्ते को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कोई भी स्टार जनता के प्यार और समर्थन के बिना अधूरा है। जब आप अपनी ही ऑडियंस या नई पीढ़ी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आपकी जड़ों पर ही चोट करने जैसा है।
सोनू सूद ने कहा कि यह समझना बहुत जरूरी है कि सोच-समझकर ही बोलना चाहिए, क्योंकि पब्लिक भगवान का ही एक रूप होती है। जब तक वे लोग आपके साथ खड़े हैं, तभी आप तरक्की कर पाएंगे। जिस दिन जनता का साथ छूट गया, उस दिन स्टारडम का कोई वजूद नहीं रह जाएगा।
विवादों के बीच संयम का संदेश
कोविड महामारी के दौरान जनता के मसीहा बनकर उभरे सोनू सूद हमेशा से अपनी सौम्य और जमीनी छवि के लिए जाने जाते हैं। कंगना रनौत के तीखे और आक्रामक रवैये के विपरीत, सोनू सूद का यह बयान संयम और समझदारी का परिचय देता है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे एक जिम्मेदार नागरिक की सोच बता रहे हैं।

राहुल गांधी का बड़ा हमला: शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को बताया 'बलात्कारियों का मददगार'
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'बलात्कारियों का बचाव करने वाला' करार दिया है। राहुल गांधी ने उनके बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे व्यक्ति से ज्यादा घटिया कोई नहीं हो सकता।
खबर का निचोड़
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'बलात्कारियों का बचाव करने वाला' करार दिया है। राहुल गांधी ने उनके बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे व्यक्ति से ज्यादा घटिया कोई नहीं हो सकता।
राहुल गांधी का तीखा हमला: 'ऐसे व्यक्ति को कैबिनेट में जगह कैसे?'
देश की सियासत में बयानों के तीर एक बार फिर तेज हो गए हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। राहुल गांधी ने जोशी के एक बयान को लेकर उन पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें 'बलात्कारियों का बचाव करने वाला' इंसान करार दिया।
राहुल गांधी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति यह मानता हो कि बलात्कार के आरोपियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, उससे ज्यादा घटिया इंसान कोई नहीं हो सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के चुनाव पर भी सवाल खड़े किए।
'पीएम मोदी के पास थे कई विकल्प'
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि कैबिनेट में कई अन्य नेता मौजूद हैं, फिर भी ऐसे विवादित विचार रखने वाले व्यक्ति को इतना महत्वपूर्ण पद सौंपा गया।
> "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में इतने सारे लोग हैं... उनमें से किसी को चुन सकते थे।"
> — राहुल गांधी
>
उन्होंने साफ किया कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति से समाज और देश को संवेदनशील और जिम्मेदार आचरण की उम्मीद होती है, न कि इस प्रकार के बयानों की।
सियासी हलकों में मचा बवाल
राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आने की संभावना बढ़ गई है। महिलाओं की सुरक्षा और संवेदनशील मुद्दों पर नेताओं के बयान हमेशा से ही बहस का केंद्र रहे हैं, और राहुल गांधी के इस हमले ने इस बहस को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।
संसदीय राजनीति में इस प्रकार के कड़े शब्दों का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के खिलाफ राहुल गांधी की यह आक्रामक टिप्पणी सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक चर्चा का विषय बनी हुई है।
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