
चेपॉक में यशस्वी जायसवाल का धमाका: सबसे तेज दो शतक जड़कर तोड़ा दिग्गजों का रिकॉर्ड
यशस्वी जायसवाल ने अफगानिस्तान के खिलाफ चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में अपनी शानदार बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है। नाबाद 110 रनों की पारी खेलकर जायसवाल ने महज 6 पारियों में वनडे करियर के दो शतक पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने शिखर धवन, विराट कोहली और शुभमन गिल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर एक नया इतिहास रच दिया है।
सारांश
यशस्वी जायसवाल ने अफगानिस्तान के खिलाफ चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में अपनी शानदार बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है। नाबाद 110 रनों की पारी खेलकर जायसवाल ने महज 6 पारियों में वनडे करियर के दो शतक पूरे कर लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने शिखर धवन, विराट कोहली और शुभमन गिल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर एक नया इतिहास रच दिया है।
मैदान पर यशस्वी का जलवा
चेन्नई का चेपॉक स्टेडियम अक्सर स्पिनरों के लिए मददगार माना जाता है, लेकिन यशस्वी जायसवाल ने अफगानिस्तान के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए यहां अपने वनडे करियर का दूसरा शतक जड़ दिया। जायसवाल की यह नाबाद 110 रनों की पारी न केवल आक्रामक थी, बल्कि तकनीकी रूप से भी काफी परिपक्व नजर आई। इस शतक के साथ ही उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे भारतीय क्रिकेट के भविष्य के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बनने की ओर तेजी से अग्रसर हैं।
दिग्गजों को पीछे छोड़ रचा इतिहास
यशस्वी जायसवाल ने इस शतक के साथ एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसे हासिल करना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए सपना होता है। उन्होंने वनडे क्रिकेट में अपने शुरुआती दो शतक महज 6 पारियों में पूरे किए हैं। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले यह रिकॉर्ड शिखर धवन के नाम दर्ज था, जिन्होंने 7 पारियों में यह मुकाम हासिल किया था। जायसवाल ने न केवल धवन को पीछे छोड़ा, बल्कि विराट कोहली और शुभमन गिल जैसे खिलाड़ियों के रिकॉर्ड को भी कहीं पीछे छोड़ दिया है।
रोहित की खास लिस्ट में एंट्री
अफगानिस्तान के खिलाफ इस दमदार प्रदर्शन ने जायसवाल को रोहित शर्मा की उस खास फेहरिस्त में भी शामिल कर दिया है, जिसमें केवल चुनिंदा आक्रामक बल्लेबाज ही जगह बना पाते हैं। परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना और बड़े मंच पर शतक जड़ना उनकी काबिलियत को दर्शाता है। चेपॉक की पिच पर जिस तरह से उन्होंने अफगानी गेंदबाजों का सामना किया, वह उनकी बढ़ती परिपक्वता का सबूत है।
भविष्य की नई उम्मीद
यशस्वी जायसवाल का यह फॉर्म भारतीय टीम के लिए वर्ल्ड कप और आने वाली बड़ी सीरीज के लिहाज से बेहद सकारात्मक संकेत है। शुरुआती पारियों में ही इस तरह की निरंतरता दिखाना आसान नहीं होता, लेकिन जायसवाल ने जिस बेबाकी से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा है, उसने क्रिकेट विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। अपनी तकनीक और आक्रामक तेवरों के दम पर वे भारतीय टीम की बल्लेबाजी लाइनअप को मजबूती दे रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह युवा बल्लेबाज आने वाले मैचों में अपने इस प्रदर्शन को किस स्तर तक ले जाता है।

टीवी पर बाबरी मस्जिद का विध्वंस देखते हुए रो पड़ी थीं सोनिया गांधी
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक इंटरव्यू में कहा है कि दिसंबर 1992 में टीवी पर बाबरी मस्जिद का विध्वंस देखते हुए वह रो पड़ी थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस की कुछ नाकामियों ने बीजेपी और उसकी हिंदुत्व की राजनीति के उभार में भूमिका निभाई है।
बाबरी मस्जिद विध्वंस पर छलके आंसू
सोनिया गांधी ने एक इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया कि दिसंबर 1992 में जब वह टीवी पर बाबरी मस्जिद का विध्वंस देख रही थीं, तो उस दृश्य को देखकर वह रो पड़ी थीं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में पुरानी यादों और बहसों को एक बार फिर से ताजा कर दिया है।
कांग्रेस की नाकामियों और बीजेपी का उभार
इसके साथ ही सोनिया गांधी ने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस पार्टी की कुछ अपनी नाकामियां रहीं हैं। उन्होंने माना कि पार्टी की इन्हीं चूकों ने देश में बीजेपी और उसकी हिंदुत्व की राजनीति के उभार में एक बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि कई मामलों में उनकी पार्टी जरूरत से ज्यादा निश्चिंत रही थी।

इमर्जेंसी पर सोनिया गांधी का बयान, संजय अकेले कसूरवार नहीं
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों के लिए दिवंगत संजय गांधी को अकेले जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि संजय के आसपास राजीव गांधी जैसे लोग भी थे जिनका नजरिया अलग था और इंदिरा गांधी के कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी उन पर काफी दबाव था।
संजय गांधी अकेले जिम्मेदार नहीं
सोनिया गांधी ने अपने बयान में कहा है कि इमरजेंसी के वक्त केवल दिवंगत संजय गांधी ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं थे। उनके मुताबिक, उस दौरान इंदिरा गांधी के कुछ वरिष्ठ सहयोगियों की ओर से उन पर काफी दबाव बनाया गया था, जिसके कारण कई फैसले लिए गए।
राजीव गांधी का अलग था नजरिया
इस दौरान उन्होंने यह भी साझा किया कि संजय गांधी के आसपास कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिनका नज़रिया उनसे बिल्कुल अलग था। सोनिया गांधी ने विशेष तौर पर उल्लेख किया कि राजीव गांधी की राय और सोच इस मामले में अलग थी, जो इस ऐतिहासिक दौर के भीतर के समीकरणों को दर्शाती है।

सिलीगुड़ी में सैनिकों के बीच पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दिवाली मिलन समारोह के दौरान वायुसेना के जवानों से मुलाकात की और उन्हें मिठाई खिलाई। उन्होंने सैनिकों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनका मनोबल ही सबसे बड़ा हथियार है।
जवानों को खिलाई मिठाई
इस खास मुलाकात के दौरान रक्षा मंत्री ने वायुसेना के जवानों से बातचीत की और उन्हें अपने हाथों से मिठाई खिलाकर दीवाली की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान सैनिकों के चेहरे पर एक अलग ही उत्साह देखने को मिला, जो त्योहार के मौके पर उनके अपनों से दूर रहने की कमी को थोड़ा कम करता है।
सैनिकों का मनोबल सबसे बड़ा हथियार
संबोधन और बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह ने सैनिकों के त्याग, साहस और देश के प्रति समर्पण की खुलकर सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे सैनिकों का उच्च मनोबल ही देश का सबसे बड़ा और मजबूत हथियार है। इसके साथ ही उन्होंने सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करने की बात पर जोर देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया।

पीएम मोदी इस बार भी जवानों के साथ मनाएंगे दिवाली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए घोषणा की है कि वह इस बार भी जवानों के बीच ही त्योहार मनाएंगे। उन्होंने इसे अपनी नियमित परंपरा बताया है, जिसे वह साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से लगातार निभा रहे हैं।
जवानों के साथ त्योहार मनाने की परंपरा
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल को अपनी एक नियमित परंपरा करार दिया है। उन्होंने साझा किया कि साल 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से ही वह हर साल दीपावली का पर्व सैनिकों के बीच जाकर मनाते आ रहे हैं।
सरहद पर जाकर बढ़ाते हैं हौसला
अपनी इस विशेष परंपरा के तहत प्रधानमंत्री हर साल किसी न किसी बॉर्डर या सैन्य ठिकाने पर पहुंचते हैं। वहां तैनात जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाना और उनके साथ खुशियां बांटना उनकी प्राथमिकता रही है।

iOS की सीक्रेट ब्लॉक लिस्ट में मोदी-राहुल के नाम
एक रिसर्चर ने एप्पल की 1 लाख शब्दों वाली गोपनीय बहुभाषी सूची का खुलासा किया है, जिन्हें iOS कीबोर्ड ऑटो-करेक्ट या स्वाइप टाइपिंग में नहीं सुझाता। इस सूची में हिंदी के 3,913 शब्द शामिल हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के नाम भी स्वाइप टाइपिंग से बाहर रखे गए हैं।
सीक्रेट लिस्ट में हिंदी के शब्द शामिल
शोधकर्ता के अनुसार, इस बहुभाषी सूची में शामिल शब्दों को iOS कीबोर्ड ऑटो-करेक्ट सुझावों या स्वाइप टाइपिंग में रिकमेंड नहीं करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सीक्रेट लिस्ट में हिंदी भाषा के भी 3,913 शब्द और वाक्य मौजूद हैं।
स्वाइप टाइपिंग से बाहर दिग्गज नेता
इस ब्लॉक लिस्ट में हिंदी के कई चर्चित शब्दों के साथ-साथ देश के बड़े राजनीतिक चेहरों के नाम भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नाम भी iOS की स्वाइप टाइपिंग में नहीं आते हैं। एप्पल द्वारा बनाए गए इन सख्त एल्गोरिदम का उद्देश्य कीबोर्ड स्वाइपिंग के दौरान कुछ खास और संवेदनशील शब्दों के अपने-आप टाइप होने से रोकना है।
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